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यक्ष गुरुवर संवाद

एपीसोड 1: यक्ष गुरुवर संवाद में “करणी सेना का आतंक”

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यक्ष दौङता दौङता गुरूजी के पास पहुंचा तो गुरूजी आंखें बंद किये ध्यानावस्था में थे। यक्ष ने गुरूजी को डिस्टर्ब ना करने के ख्याल से पास में खङा होना बेहतर समझा।

यक्ष खुद को शांत करने की कोशिश में था पर उसकी सांसें बुलेट ट्रेन की तरह बहुत तेज चल रही थी। गुरूजी ने बिना आंखें खोले यक्ष को बैठने का इशारा किया। यक्ष धीरे से बैठ गया उसकी सांसों की गति भी सामान्य हो गयी थी।

 कहो वत्स, इतने बेचैन क्यों हो? और ये कहां से दौङते हुए आ रहे हो? सब ठीक तो है ?

 गुरूवर ने आंखें खोलते खोलते एक साथ इतने सवाल दाग दिये।

अनर्थ हो गया गुरुवर। हर तरफ त्राहिमाम मचा हुआ है।

सिनेमा हाल, माल, सङक , बाजार हर जगह कोहराम मचा हुआ है।

यहां तक कि दो सांसदों ने संसद उङाने की धमकी दी है।

गुरूवर हौले से मुस्कुराये, फिर बोले – एक क्षत्राणी के अपमान का हिसाब तो चुकाना ही पङेगा बालक। तुम बेचैन ना हो।

अच्छा गुरूवर, एक रासुका नामक कानून हुआ करता था। वो क्या केवल दलितों और मुसलमानों के लिए है।

 गुरूवर थोङा गम्भीर होकर बोले – वत्स, मुझे ऐसा प्रतीत होता है, जैसे कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को अबतक ठीक से नहीं समझे।

पर गुरूजी….

गुरूजी ने यक्ष की बात को बीच में ही काटते हुए कहा – “सवर्ण अपराध अपराध ना भवति वत्स “

गुरूजी का यह जवाब सुनकर देवताओं ने देवलोक से पुष्पवर्षा की और अप्सरायें मदमस्त होकर क्लासिकल डांस करने लगी।

डॉ ओम सुधा

यक्ष गुरुवर संवाद

बेरोजगारी, हिंसा और महंगाई वाला ये कैसा रामराज्य है गुरूवर ?

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Cartoon: Rahul

गुरुदेव ने यक्ष को कभी इतना बेचैन नहीं देखा था। दैनिक कर्म से निबटकर गुरूवर कुटिया के बाहर पीपल पेङ के नीचे बने आसन पर बैठकर ध्यान के लिये बैठे ही थे। पर, यक्ष की बेचैनी गुरूजी से देखी नहीं जा रही थी।

 यक्ष की हालत देखकर कोई साधारण मानव भी कह सकता था कि वो सारी रात ठीक से नहीं सोया था।

गुरुवर तो गुरूवर ठहरे। साक्षात विष्णु के अवतार। अंतर्यामी!

गुरूवर ने एक शिष्य से कहकर यक्ष को अपने पास बुलवाया। अजीब सी बेचैनी यक्ष के चेहरे पर पसरी हुई थी, जब यक्ष ने गुरूजी का पैर छुआ।

बैठो वत्स। – गुरूजी की आवाज आश्रम में शोर कर रहे पक्षियों की चहचहाहट में घुलमिल गयी थी।

 यक्ष ने गुरुवर के पैरों के पास अपना आसन ग्रहण कर लिया।

 इस बेचैनी का सबब क्या है वत्स?

गुरूवर के मुखारबिंद से यह सवाल सुनते ही लगभग फट पङने को बेताब यक्ष बोल पङा – आप तो अंतर्यामी हैं प्रभु। सब समझते हैं। कुछ सवालों ने मुझे बेचैन कर दिया है गुरूवर।

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तुम्हारे हर शंका का समाधान होगा वत्स। एक एक कर अपने सभी प्रश्न मेरे समक्ष प्रस्तुत करो यक्ष।

यक्ष ने तोप के गोले की तरह अपना पहला सवाल दागा। यक्ष- रामराज्य आये 4 साल हो गये। अबतक युवाओं को रोजगार नहीं मिला। बेरोजगारी हर दिन बढती जा रही है। ये कैसा रामराज्य है गुरूवर ?

गुरूवर (मुस्कुराते हुए) – नेहरु ने कश्मीर समस्या पैदा की है वत्स।

यक्ष ने अगला सवाल दागा – गुरूजी, अमीर आदमी और अमीर होता जा रहा है, गरीब आदमी और गरीब। यह खाई कब मिटेगी गुरूवर?

 गुरूवर- इंदिरा गांधी ने देश पर इमरजेंसी थोपी थी वत्स ।

यक्ष- आपने कहा था महंगाई घटेगी, पर वह तो हर दिन बढती जा रही है। पेट्रोल की कीमत आसमान…

यक्ष की बात को बीच में काटकर गुरूवर बोल पङे – राजीव गांधी बोफोर्स घोटाले में शामिल थे।

प्रभु किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

आमतौर पर शांत रहने वाले गुरूवर लगभग चीख पङे – हिंदू धर्म खतरे में है।

 त्राहिमाम – त्राहिमाम

अचानक गुरूजी ने अपनी आंखें बंद कर ली। गुरूजी की सांसें बहुत तेज चल रही थी।

गुरूजी का यह जवाब सुनकर देवताओं ने देवलोक से पुष्पवर्षा की और अप्सरायें मदमस्त होकर क्लासिकल डांस करने लगी।

डा. ओम सुधा

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