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खूंखार एवं खौफनाक भाजपा के पंजों को तोड़ने पर गंभीर नहीं महागठबंधन!

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2019_लोकसभा_चुनाव के दहलीज पर खड़े देश और अपने सूबे बिहार में चुनावी गहमागहमी के बीच आज नेताओं के महागठबंधन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. बिहार दिवस,22 मार्च को हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस से जाहिर नेताओं का फैसला अपरिपक्व, अगंभीर एवं अप्रत्याशित बताते हुए एक बहस चल पड़ी है. कारण कि राज्य का मुख्य विपक्षी दल राजद ने महागठबंधन को व्यापक रूप देने में गंभीरता नहीं बरती है.

सूबे के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अभी हाल हीं में संविधान बचाने के लिए चिंता करते हुए ट्वीट किया था की देश के मौजूदा हालात में यह कहना वाजिब होगा कि 2019 के लोकसभा का चुनाव कोई आम चुनाव नहीं है  सचमुच में संविधान पर खतरे मंडरा रहे हैं.

तेजस्वी जी से पूर्व देश के बुद्धिजीवी तबके ने भी कई मौके पर इसे कहा था  खुद भाजपा  नेता साक्षी महाराज ने भी कहा कि शायद यह अंतिम चुनाव होगा.अगर इस मसले पर वाकई RJD गठबंधन गंभीर होता तो इस बात को सुनिश्चित करना था कि हर हाल में गैर BJP गठबंधन के वोटों का बिखराव नहीं हो.

   एक बड़ा समुदाय इस बात को मानने को तैयार ही नहीं है कि अभी के समय में कोई बड़ी लड़ाई वामपंथ और लाल झंडे को दरकिनार कर लड़ी जा सकती है. दरअसल इसके पर्याप्त आधार हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई मोदी सरकार के क्रूरतम एवं खूंखार कारनामों से तबाह देश की जनता के महागठबंधन ने सड़कों पर लोहा लिया है. किसान,मजदूर,छात्र,नौजवान एवं महिलाओं की लड़ाई जब जारी थी तब लाल झंडे ने तमाम झंडों की एकता बना लड़ाई को निर्णायक बनाया था.

  मोदी सरकार ने सत्ता में आते हीं शैक्षणिक संस्थानों को युद्ध के मैदान में तब्दील कर दिया था. शिक्षा बजट में भारी कटौती के खिलाफ  2015  के उत्तरार्द्ध में देश के छात्र समुदाय ने सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आक्यूपाई यूजीसी आंदोलन के माध्यम से अपने गुस्से का इजहार किया.

2016 की जनवरी में हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय में रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या की गई. जिसमें BJP के कई नेता, खुद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री मैडम मनु स्मृति ईरानी की सहभागिता थी. दोनों हीं आंदोलन में JNU ने हर बार की तरह अपनी निर्णायक भूमिका निभाई. माननीय सूट-बूट एवं कड़ी निंदा जी की आंखों का किरकिरी JNU को बनना हीं था, JNU की स्टूडेंट कम्यूनिटी ने मोदी सरकार से लोहा लिया.

उस  समय JNU छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार थे जिन्होंने 2015 के सितंबर में JNU छात्र संघ के चुनाव के प्रेसिडेंसियल डिबेट में हीं कन्हैया ने एक व्यापक एकता बना सरकार के फासीवादी फन को कुचलने की जरूरत बताया था.

     राजद्रोह जैसे गंभीर आरोप लगा मीडिया ट्रायल में घेरने की नाकाम कोशिश की गई. कन्हैया ने इस बात को साबित किया कि विचारधारा का ठोस परवरिश में क्या मायने हैं. AISF जिसने छात्र समुदाय को संगठित कर अंग्रेजों को खदेड़ने का काम किया. कन्हैया उसी देश के पहले छात्र संगठन AISF से जुड़े हैं.

जब आज़ादी का आंदोलन चल रहा था उसी वक़्त RSS और उसके अनुषंगी संगठन के लोग अंग्रेजों की चाकरी, सजा से बचने के लिये क्रांतिकारियों की मुखाबिरी और अंग्रेजों को माफीनामा लिख रहे थे. AISF के साधारण कार्यकर्ता के सामने अंग्रेजों के दलाल टिक पाएं, इसकी थोड़ी भी गुंजाइश नहीं.

 जब  देश के अंदर शोषित,वंचित,दलित,अल्पसंख्यक,महिला एवं हाशिये पर खड़ा हर व्यक्ति मोदी सरकार में त्रस्त है ऐसे में  निर्विवाद तौर पर कन्हैया को विपक्ष का उम्मीदवार घोषित करना था. भाजपा हराओ अभियान को मुख्य लक्ष्य बना CPI ने कन्हैया को उम्मीदवार घोषित किया था. क्योंकि RSS और मोदी सरकार के खिलाफ पूरे देश में घूम-घूम कर उसके कारनामों की पोल-पट्टी खोलने का काम जिस सहज भाषा में कन्हैया के द्वारा किया गया. उससे मोदी सरकार के विरुद्ध कन्हैया यूथ आईकान के रूप में उभर कर सामने आए और जनता का महागठबंधन कन्हैया के साथ बनना तय था.

 वर्तमान लोकसभा चुनाव कोई आम एवं साधारण चुनाव नहीं है. मौजूदा हालात में एक परिपक्व फैसले की जरूरत थी. जिसे नेताओं के महागठबंधन ने गंभीरता से नहीं लिया है.

   वामपंथ (कम्युनिस्ट पार्टियों) की मजबूत भागीदारी के कोई मजबूत मोर्चेबन्दी भाजपा का मुखौटा लिए RSS से किया जा सके यह तर्कसंगत नहीं लगता है. नेताओं के गठबंधन वाले मोर्चे में कई ऐसे नेता हैं जो कि कल भाजपा के साथ जाकर सरकार बना लें. इस बात में कोई संदेह नहीं, वैसे भी कुछ तो वहीं से आए हीं है.

      “सबसे हास्यास्पद तो तब रहा जब RJD के बिहार के अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे ने कहा कि RJD 20 सीट लड़ेगी. जिसमें से RJD कोटे की एक सीट माले को दी जाएगी”. लाल झंडे को अपमानित करना हीं कहा जाएगा. जिस मोर्चे में CPI, CPI(ML) और CPM नहीं हों और सम्मान जनक स्थान नहीं मिले. कैसे आप भाजपा और RSS के खिलाफ लड़ाई लड़ पाएंगे.

       सवाल कुछ सीटों का नहीं है. वाम पंथ ने इस बार देश की मौजूदा परिस्थिति में खुद हीं गैर भाजपा वोटों को बिखरने से रोकने के लिए निर्णायक भूमिका अदा करने की कोशिश की थी.लेकिन नेताओं के गठबंधन ने अगर सबकुछ तय कर लिया है. तब अब जनता का महागठबंधन देश और बिहार के धरातल पर तय करेगा. बेगूसराय में CPI के चुनावी अभियान एवं कन्हैया के पक्ष में जनता के महागठबंधन ने बहुत कुछ जता दिया है. जो विगत दिनों बेगूसराय में दिखाई पड़ा. आगाज जब ऐसा तो अंजाम का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है.

(लेखक पेशे से वकील हैं और ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के सक्रीय सदस्य भी हैं)

कन्हैया,बेगूसराय और लोकसभा चुनाव-2019. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और विपक्षी पार्टियों की भूमिका।

बिहार में कन्हैया कुमार नहीं होंगे महागठबंधन के उम्मीदवार

फासीवादी ताकतों से लड़ने के बजाय बिहार में स्वार्थसिद्धि करने वालों को पीढियां माफ़ नहीं करेगी

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बिहार चुनाव:- बीजेपी ने बनाई नई टीम, अमित शाह के करीबी नेताओं को नही किया शामिल

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बिहार चुनाव की तारीखों का एलान होते ही बीजेपी ने नई टीम बनाई है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने  कार्यभार संभालने के आठ महीने बाद नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की है। नई टीम में जहां महिलाओं और युवाओं को मौके दिए गए हैं तो वहीं अमित शाह के कई करीबी नेताओं को टीम में शामिल नहीं किया गया है।

लंबी मशक्कत के बाद तैयार की गई राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम से राम माधव, मुरलीधर राव, सरोज पांडे और अनिल जैन की महासचिव पद से छुट्टी कर दी गई है। इसी प्रकार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से उमा भारती, विनय सहस्रबुद्धे, प्रभात झा, ओम माथुर, श्याम जाजू, अविनाश राय खन्ना और रेणू देवी जैसे दिग्गजों की छुट्टी कर उनके स्थान पर नए चेहरों को मौका दिया गया है।

नड्डा ने पार्टी के विभिन्न मोर्चों में भी व्यापक बदलाव करते हुए लगभग सभी पुराने अध्यक्षों को हटाकर नए चेहरों को अवसर दिया है। संगठन की दृष्टि से महत्पवूर्ण महासचिव के पद पर पांच नए चेहरों को नियुक्त किया गया है जबकि भूपेंद्र यादव, कैलाश विजयवर्गीय और अरूण सिंह को उनके पदों पर बरकरार रखा गया है। नए महासचिवों की सूची में हाल ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए दुष्यंत गौतम भी शामिल हैं। पुरानी टीम में वे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर थे। उनके अलावा नए महासचिवों में भाजपा महिला मोर्चा की प्रभारी डी पुरंदेश्वरी, कर्नाटक सरकार में मंत्री सी टी रवि, राष्ट्रीय सचिव तरूण चुग और असम से पार्टी के सांसद दिलीप सैकिया शामिल हैं। चुग पिछली टीम में राष्ट्रीय सचिव थे।

उपाध्यक्ष के पद पर भी नड्डा ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को छोड़कर लगभग सभी पुराने चेहरों को हटा दिया है और नए चेहरों को नियुक्त किया है। नए चेहरों में पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, रेखा वर्मा, अन्नपूर्णा देवी, भारती बेन शियाल, (तीनों सांसद), तेलंगाना भाजपा की नेता डी के अरुणा, नागालैंड भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एम चुबा एओ और केरल के पूर्व सांसद अब्दुल्ला कुट्टी को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के विभिन्न मोर्चों में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए तेजतर्रार सांसद व युवा सांसद तेजस्वी सूर्या को पार्टी के युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। वह पूनम महाजन की जगह लेंगे।

इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर को वीरेंद्र सिंह मस्त की जगह किसान मोर्चा का अध्यक्ष, तेलंगाना भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डा. के. लक्ष्मणडा को दारा सिंह चौहान की जगह ओबीसी मोर्चा का अध्यक्ष, लाल सिंह आर्य को विनोद सोनकर की जगह अनुसूचित जाति मोर्चा का अध्यक्ष, समीर ओरांव को रामविचार नेताम की जगह अनुसूचित जनजाति मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। लंबे अरसे तक पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अब्दुल रशीद अंसारी की जगह जमाल सिद्दिकी को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रवक्ताओं की सूची का विस्तार करते हुए 23 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अनिल बलूनी को पार्टी का मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया है। साथ ही वे पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख के पद पर भी बने रहेंगे।

 

प्रवक्ताओं की सूची से मीनाक्षी लेखी को बाहर कर दिया गया है। नए प्रवक्ताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर, सांसदों में अपराजिता सारंगी, हिना गावित, राजू बिष्ट और राजीव चंद्रशेखर शामिल हैं। पहले से प्रवक्ता पद की जिम्मेदारी निभा रहे सैयद शाहनवाज हुसैन, सुधांशु त्रिवेदी, संबित पात्रा, राजीव प्रताप रूडी, नलिन कोहली, ऑम वडक्कन और गोपाल कृष्ण अग्रवाल को बरकरार रखा गया है। नड्डा ने कुछ एक पुराने चेहरों को बरकरार रखते हुए सचिवों की पूरी टीम में भी व्यापक बदलाव किया है।

हसन राजा, रमन डेका, सुधा यादव, आर पी सिंह, ज्योति धुर्वे, रजनीश कुमार, महेश गिरी, राहुल सिन्हा और तीरथ सिंह रावत की छुट्टी हो गई है। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले सुनील देवधर और सत्या कुमार ही सचिव पद पर अपनी जगह बचाए रखने में कामयाब हुए हैं। नए सचिवों में विनो तावड़े,विनोद सोनकर, विश्वेश्वर टूडू, अरविंद मेनन, हरीश द्विवेदी, पंकजा मुंडे, ओमप्रकाश ध्रुवे, अनुपम हाजरा,

बिहार चुनाव की तारीखों का एलान होते ही बीजेपी ने नई टीम बनाई है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने  कार्यभार संभालने के आठ महीने बाद नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की है। नई टीम में जहां महिलाओं और युवाओं को मौके दिए गए हैं तो वहीं अमित शाह के कई करीबी नेताओं को टीम में शामिल नहीं किया गया है।

लंबी मशक्कत के बाद तैयार की गई राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम से राम माधव, मुरलीधर राव, सरोज पांडे और अनिल जैन की महासचिव पद से छुट्टी कर दी गई है। इसी प्रकार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से उमा भारती, विनय सहस्रबुद्धे, प्रभात झा, ओम माथुर, श्याम जाजू, अविनाश राय खन्ना और रेणू देवी जैसे दिग्गजों की छुट्टी कर उनके स्थान पर नए चेहरों को मौका दिया गया है।

नड्डा ने पार्टी के विभिन्न मोर्चों में भी व्यापक बदलाव करते हुए लगभग सभी पुराने अध्यक्षों को हटाकर नए चेहरों को अवसर दिया है। संगठन की दृष्टि से महत्पवूर्ण महासचिव के पद पर पांच नए चेहरों को नियुक्त किया गया है जबकि भूपेंद्र यादव, कैलाश विजयवर्गीय और अरूण सिंह को उनके पदों पर बरकरार रखा गया है। नए महासचिवों की सूची में हाल ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए दुष्यंत गौतम भी शामिल हैं। पुरानी टीम में वे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर थे। उनके अलावा नए महासचिवों में भाजपा महिला मोर्चा की प्रभारी डी पुरंदेश्वरी, कर्नाटक सरकार में मंत्री सी टी रवि, राष्ट्रीय सचिव तरूण चुग और असम से पार्टी के सांसद दिलीप सैकिया शामिल हैं। चुग पिछली टीम में राष्ट्रीय सचिव थे।

उपाध्यक्ष के पद पर भी नड्डा ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को छोड़कर लगभग सभी पुराने चेहरों को हटा दिया है और नए चेहरों को नियुक्त किया है। नए चेहरों में पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, रेखा वर्मा, अन्नपूर्णा देवी, भारती बेन शियाल, (तीनों सांसद), तेलंगाना भाजपा की नेता डी के अरुणा, नागालैंड भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एम चुबा एओ और केरल के पूर्व सांसद अब्दुल्ला कुट्टी को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के विभिन्न मोर्चों में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए तेजतर्रार सांसद व युवा सांसद तेजस्वी सूर्या को पार्टी के युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। वह पूनम महाजन की जगह लेंगे।

इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर को वीरेंद्र सिंह मस्त की जगह किसान मोर्चा का अध्यक्ष, तेलंगाना भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डा. के. लक्ष्मणडा को दारा सिंह चौहान की जगह ओबीसी मोर्चा का अध्यक्ष, लाल सिंह आर्य को विनोद सोनकर की जगह अनुसूचित जाति मोर्चा का अध्यक्ष, समीर ओरांव को रामविचार नेताम की जगह अनुसूचित जनजाति मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। लंबे अरसे तक पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अब्दुल रशीद अंसारी की जगह जमाल सिद्दिकी को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रवक्ताओं की सूची का विस्तार करते हुए 23 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अनिल बलूनी को पार्टी का मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया है। साथ ही वे पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख के पद पर भी बने रहेंगे।

 

प्रवक्ताओं की सूची से मीनाक्षी लेखी को बाहर कर दिया गया है। नए प्रवक्ताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर, सांसदों में अपराजिता सारंगी, हिना गावित, राजू बिष्ट और राजीव चंद्रशेखर शामिल हैं। पहले से प्रवक्ता पद की जिम्मेदारी निभा रहे सैयद शाहनवाज हुसैन, सुधांशु त्रिवेदी, संबित पात्रा, राजीव प्रताप रूडी, नलिन कोहली, ऑम वडक्कन और गोपाल कृष्ण अग्रवाल को बरकरार रखा गया है। नड्डा ने कुछ एक पुराने चेहरों को बरकरार रखते हुए सचिवों की पूरी टीम में भी व्यापक बदलाव किया है।

हसन राजा, रमन डेका, सुधा यादव, आर पी सिंह, ज्योति धुर्वे, रजनीश कुमार, महेश गिरी, राहुल सिन्हा और तीरथ सिंह रावत की छुट्टी हो गई है। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले सुनील देवधर और सत्या कुमार ही सचिव पद पर अपनी जगह बचाए रखने में कामयाब हुए हैं। नए सचिवों में विनो तावड़े,विनोद सोनकर, विश्वेश्वर टूडू, अरविंद मेनन, हरीश द्विवेदी, पंकजा मुंडे, ओमप्रकाश ध्रुवे, अनुपम हाजरा, नरेंद्र सिंह ,विजया रहाटकर, अलका गुज्जर शामिल है

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बंगाल में बीजेपी को सत्ता में लाना मेरी जिम्मेदारी:- मुकुल रॉय

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बीजेपी के नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय ने शनिवार को कहा कि वह पार्टी नेतृत्व द्वारा पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले उन पर जताए गए भरोसे के साथ न्याय करने की कोशिश करेंगे। प्रदेश में अगले साल अप्रैल-मई में चुनाव होने की उम्मीद है। उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद रॉय ने मीडिया से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि राज्य में अगले साल मार्च, अप्रैल या मई में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और अन्य नेताओं के साथ यह मेरी जिम्मेदारी है कि बीजेपी को पश्चिम बंगाल में सत्ता में लेकर आएं। बीते कुछ महीनों के दौरान रॉय और घोष के बीच मतभेद की खबरें मीडिया में आती रही हैं। हालांकि, दोनों नेताओं ने इससे इनकार किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मतभेद के बाद तृणमूल कांग्रेस छोड़कर साल 2017 में बीजेपी में शामिल होने वाले रॉय का पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

पार्टी के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए बीजेपी नेतृत्व ने मार्च 2019 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए पूर्व सांसद अनुपम हाजरा को भी राष्ट्रीय सचिव बनाया है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा घोषित नए पदाधिकारियों में दार्जिलिंग से सांसद राजू बिस्ता का नाम भी शामिल है। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है।

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पूर्व प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के जन्मदिन पर राहुल गाँधी ने यूँ ट्वीट कर दी शुभकामना

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह (Dr Manmohan Singh) का आज (शनिवार) जन्मदिन है. आज वह अपना 88वां जन्मदिन मना रहे हैं. देश की दिग्गज हस्तियां डॉक्टर सिंह को शुभकामनाएं दे रही हैं. उन्हें बधाई देते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ट्वीट किया ‘भारत प्रधानमंत्री में डॉक्टर मनमोहन सिंह की तरह गहराई की अनुपस्थिति को महसूस कर रहा है. उनकी (डॉक्टर मनमोहन सिंह) ईमानदारी, शालीनता और समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है. उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. आने वाला उनका साल बेहतर हो. #HappyBirthdayDrMMSingh.’

कांग्रेस सांसद शशि थरूर, जयवीर शेरगिल, रोहन गुप्ता समेत कई हस्तियों ने डॉक्टर मनमोहन सिंह को सोशल मीडिया के माध्यम से जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. मनमोहन सिंह साल 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे. उनका जन्म भारत के विभाजन से पहले पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 26 सितंबर, 1932 को हुआ था.

डॉक्टर मनमोहन सिंह ने पंजाब और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की. मनमोहन सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अलावा दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाया भी है. वह भारत में योजना आयोग के प्रमुख रह चुके हैं.

मनमोहन सिंह देश के विद्वान अर्थशास्त्रियों की फेहरिस्त में शामिल हैं. वह पीवी नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री रहे थे. भारत के आर्थिक सुधारों की दिशा में मनमोहन सिंह का नाम हमेशा लिया जाता है लेकिन उन्होंने कभी इसका क्रेडिट नहीं लिया. वह वर्तमान में राजस्थान से राज्यसभा सदस्य हैं.

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