Connect with us

राजनीति

त्रिपुरा में जारी है भगवा आतंकवाद, रोज तोड़ी जा रही है लेलिन की मूर्तियां

Published

on

 

त्रिपुरा का चुनाव समाप्त होते ही जैसे ही भाजपा सत्ता पर काबिज हुई त्रिपुरा में भगवा आतंकवाद ने अपना असली चेहरा दिखाना शुरू कर दिया। 3 मार्च के बाद से ही त्रिपुरा आतंकवाद की हद से गुजर रहा है वहां पर रोज लेलिन की मूर्तियां गिराई का रही है और पूरे त्रिपुरा में खौफ का माहौल बना हुआ है।

त्रिपुरा के बेलोनिया शहर में बुलडोजर की मदद से रूसी क्रांति के नायक व्लादिमिर लेनिन की मूर्ति को गिरा दिया गया। मूर्ति गिराने के दौरान लोग भारत माता की जय के नारे भी लगा रहे थे। त्रिपुरा के एसपी कमल चक्रवर्ती के मुताबिक सोमवार को दोपहर 3.30 बजे के करीब बीजेपी समर्थकों ने इसे अंजाम दिया। वहीं त्रिपुरा में बीजेपी की जीत के बाद से राज्य के कई इलाकों से तोड़फोड़ और हिंसा की खबरें भी आ रही हैं।

अब बेलोनिया में लेनिन की विशाल मूर्ति पर बुलडोजर चलाने के बाद ऐसी ही एक और घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार को दक्षिण त्रिपुरा के सबरूम मोटर स्टैंड इलाके में लेनिन की एक और मूर्ति तोड़े जाने की घटना सामने आई है। हालांकि, ये किसने किया, अभी इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन शनिवार को राज्य में बीजेपी की सरकार आने के बाद से ही वामपंथी नेताओं और उनके प्रतीकों पर हमले किए जा रहे हैं।

बता दें कि लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने को लेकर मंगलवार को मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक में दिन भर हंगामा हुआ। जहां राजनीतिक दलों ने एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप लगाए वहीं सोशल मीडिया में भी इस मामले में लोगों की तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आईं।

त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति तोड़ने के बाद बीजेपी के कुछ नेताओं ने ये भी कहा कि अब लेनिन के बाद तमिलनाडु में पेरियार की मूर्तियां तोड़ी जाएंगी। बीजेपी नेताओं के इस बयान पर भी जमकर हंगामा हुआ। वहीं बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ये तक कह दिया कि लेनिन एक आतंकी था, उस विदेशी शख्स की मूर्ति भारत में क्यों लगेगी?

बीट विशेष

मैं अभिनंदन,चमार…आरक्षण छोड़ना चाहता हूं, सीएम को लिखी चिट्ठी वायरल

Published

on

“सेवा में, नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार.

मैं अभिनंदन कुमार, मैं चमार जाति से हूं। मैं आरक्षण छोड़ना चाहता हूं, क्योंकि हमसे ‘बड़े-बड़े’ जाति के लोग अब आरक्षण पाने को दलित बनने के लिए तैयार हैं तो मैं सवर्ण बनने के लिए तैयार हूं। क्योंकि मैं सदियों से हरिजन, चमरवा का प्रताड़ना झेलते आ रहा हूं। इन सभी से निजात पाने के लिए मैं सवर्ण बनना चाहता हूं। जब आप किसी भी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने में सक्षम हैं तो मुझे ब्राह्मण जाति बनाइए, ताकि मैं भी ब्राह्मणों की तरह शान से लोगों पर राज कर सकूं।”

ये अभिनंदन कुमार की ओर से जारी पत्र का सारांश है।

अंदाजा लगा सकिए तो लगाइए कि ब्राह्मणवाद के खिलाफ दलित प्रतिरोध की इमारत की बुनियाद कितनी ठोस बन रही है। दो-चार नेताओं के बिकने का हवाला नहीं दीजिए। अभिनंदन कुमार की चिट्ठी एक प्रतिनिधि उदाहरण है। जमीन पर उतर कर देखिए कि कैसे एक साधारण दिखने वाला दलित भी अब अपनी सामाजिक त्रासदी की सबसे मुख्य वजह को कैसे पहचान रहा है और कैसे उसके खिलाफ एक चुनौती बन कर खड़ा है।

अभिनंदन कुमार की चुनौती केवल नीतीश कुमार या मोदी के लिए नहीं है। यह इस ब्राह्मणवादी समाज और सत्ता-तंत्र के हर पहरुए के लिए है। इस चिट्ठी से जिस शानदार जमीन और ताकत का अहसास होता है, आरएसएस-भाजपा और इस देश की सारी पंडावादी ताकतें उसी से डरी हुई है। इसीलिए सबसे ज्यादा तोड़ने की कोशिश इसी तबके की हो रही है। आर्थिक तौर पर और फिर सामाजिक तौर पर!

(अरविंद शेष की फेसबुक वाल से)

Continue Reading

देश

दलित की तुलना सूअर से करने वाले विधायक के नाम एक दलित हीरा डोम का ख़त

Published

on

प्रस्तुति – डॉ ओम सुधा

पिछले दिनों महाराष्ट्र से बीजेपी विधायक रविंद्र चव्हाण ने दलितों की तुलना सूअर से की थी . बिहार के भागलपुर जिले में बरारी घाट पर रहता है हीरा डोम..हीरा सूअर पालता है , बरारी घाट पर लाश जलाता है .हीरा अपने बच्चों को सरकारी स्कुल में भेजता है , कभी जाता है, कभी नहीं जाता . हीरा के बच्चों के साथ स्कुल में सब भेदभाव करते हैं, मास्टर साहब भी और दूसरे विद्यार्थी भी . हीरा का आठ साल का बेटा बहुत छोटा है इस भेदभाव को समझने के लिए . पर इतना समझने लगा है की सब उससे दूर भागते हैं, सब उसके छुए जाने से बचते हैं. हालांकि उसको स्कुल में मुफ्त का खाना मिलता है , पर हीरा डोम के बेटे को मुफ्त की खिचड़ी के साथ अपमान का घूंट बर्दाश्त नहीं होता . इसलिए अब वह घर पर ही रहता है और सुप बीनने में माँ की मदद करता है.हीरा हर सुबह चौक पर जाकर चाय पीता है . उसके लिए दुकानदार ने अलग कप रखा हुआ है. दूकान में अखबार भी आता है . अखबार में दलित की तुलना सूअर से किये जाने की खबर भी छपी है.
हीरा डोम अखबार में इस खबर को पढ़कर खुश है . उसे यह जानकार ख़ुशी हो रही है की अब उसके पालतू सूअर भी राष्ट्रिय बहस के केंद्र में हैं. वो इस सोच सोचकर रोमांचित हो रहा है की जिन सूअरों की वजह से सदियों से उसके परिवार का पेट भरता रहा है , उसे अब जाकर यथोचित सम्मान मिला है..
दलित और सूअर को बहस के केंद्र में लाने के लिए वह हाराष्ट्र से बीजेपी विधायक रविंद्र चव्हाण को धन्यवाद करना चाहता है. वो खत लिखता है रविंद्र चौहान को..

इस चिट्ठी में शब्द तो मेरे हैं पर भावनाएं हीरा डोम की है…

आदरणीय रविन्द्र चौहान जी …

जबसे मैंने चाय की दूकान पर यह खबर पढ़ी है की आपने दलितों की तुलना सूअर से की है, हमारा मन बाग़ बाग़ हुआ जाता है . आपने कहा है की “अब्राहम लिंकन ने एक सूअर को नाले से निकालकर उसे साफ किया था. उसी तरह पीएम नरेंद्र मोदी और राज्य के सीएम देवेंद्र फड़नवीस दलितों के उत्थान के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं.’

बहुत लोग इस बात के लिए आपकी आलोचना भी करेंगे की आपने दलितों की तुलना सूअर से कर दी है. पर, आपने अनजाने में बहुत महान कर्म कर दिया है मैं और मेरे सूअर आपका ये एहसान कभी नहीं भूलेंगे. वैसे भी आपने गलत क्या कह दिया है ? सूअर ही तो हैं हमलोग. क्या ये सच नहीं की आज भी इस देश में मेरे जैसे करोड़ों दलित सूअर की तरह जीने को मज़बूर हैं. सूअर सी ज़िंदगी जी रहे हैं. कभी आइएगा हमारे यहाँ तो देखिये की जहाँ पर हम रहते हैं वही पर सूअरबाड़ा भी है . कभी वो हमारे बैडरूम में आकर सो जाते हैं कभी हमारे बच्चे उनके बाड़े में जाकर खेलते-खाते हैं. आपको घिन आ रही होगी . पर हमारी ज़िंदगी का सच यही है. अब देखिये हमारे और सूअर की ज़िंदगी में कितनी समानता है . हम भी स्कुल नहीं गए , हमारे सूअर भी स्कुल नहीं जाते . हम अपना इलाज बढ़िया अस्पताल में नहीं करा पाते और हमारे सूअर भी. बदबू हमारे शारीर से भी आती है और हमारे सूअर की शरीर से भी. हम भी बाड़े में रहते हैं और हमारे सूअर भी.. आपको हमारे सूअर से भी घिन आती है और हमसे भी . जिनको हमारी तुलना सूअर से किये जाने पर आपत्ति है वो घोर दलित विरोधी हैं. उनको बताना होगा की दलित और सूअर एक दूसरे से अलग कैसे हुए. खाली चिल पोँ करने से काम नहीं चलेगा .
मैं आपकी इस बात से भी इत्तेफाक रखता हूँ रविंद्र चौहान जी की नरेंद्र मोदी हमारे लिए मसीहा बनकर आये . बिलकुल सही कह रहे हैं आप जिनको लागता है की मोदी जी दलित विरोधी है उनको याद रखना चाहिए की मोदी जी ने आंबेडकर जयंती के दिन नीले रंग का कुरता पहना था और जय भीम भी बोला था . फिर नरेंद्र मोदी दलित विरोधी कैसे हुए? ये सब विपक्ष की चाल है. कुछ लोग कहते हैं की आपकी सरकार ने दलितों के कल्याण बजट में बड़ी कटौती की है. पर इनके कहने पर मत जाइएगा ये सब विकास विरोधी हैं. राष्ट्र विरोधी है. अब इनको कौन समझाए की आप पैसे कटौती करके अडानी अम्बानी को दे रहे हैं. ये मूर्ख नहीं समझते की अडानी -अम्बानी का विकास ही तो राष्ट्र का विकास है. देशद्रोही कहीं के.
जो लोग भाजपा को दलित विरोधी पार्टी कहते हैं उनको मैं डंके की चोट पर याद दिलाना चाहता हूँ की पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह जी ने एक दलित के यहां कहना खाया खाया था. दलित के यहां कैमरे के सामने खाना खाने वाला और जय भीम का नारा लगाने वाला कहीं दलित विरोधी होता है क्या? मैं तो कहता हूँ रविंद्र चौहान जी आप गिरिराज सिंह जी से कहकर इन सब को पाकिस्तान भेज दीजिये.

मुझे तो यह भी याद नहीं पड़ता की आपकी भाजपा के सत्ता में आने से पहले दलित कभी राष्ट्रीय बहस के केंद्र में थे या नहीं. भले ही आपके विरोधी इसकी वजह रोहित वेमुला को आत्महत्या के लिए उकसाना , भाजपा शासित राज्यों में दलित उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं , फेलोशिप पर रोक , दलित कल्याण के बजट में बड़ी कटौती , मनरेगा राशि में कटौती {इस योजना के अधिकाँश लाभार्थी दलित पिछड़े हैं} या समय समय पर आपके नेताओं द्वारा दलित विरोशि बयानों को मानते हों. पर , मैं आपके विरोधियों से इत्तेफाक नहीं रखता . मेरा तो यह मानना है रविंद्र चौहान जी की पहली बार देश में दलित हितैषी सरकार बानी है . क्या इसके लिए हम एक रोहित वेमुला कुर्बान नहीं कर सकते ?

हमारे लिए तो यही बहुत है की आपने हमें बहस के केंद्र में ला दिया. इस बार मेरे सूअर भी बहुत खुश है. पिछली बार बार आपकी सरकार के मंत्री आदरणीय वी के सिंह ने हम दलितों की तुलना कुत्ते से की थी तो ये नाराज़ हो गए थे. पर देखिये आपकी वजह से इनका नंबर भी आ ही गया.

खैर, थोड़ा लिखा है , ज्यादा समझिएगा…

मेरे और मेरे सूअरों की तरफ से आपको एक बार फिर से सादर प्रणाम …

सिर्फ आपका …मने सिर्फ भाजपा का ..

हीरा डोम ..

प्रस्तुति – डॉ ओम सुधा

Continue Reading

बीट विशेष

EXCLUSIVE : मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन का इस्तीफा, लोग बोले-डूब रही नैया

Published

on

देश के मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफा देने के लिए निजी वजहों का हवाला दिया गया है. इस्तीफे के बाद वह अमेरिका जाने वाले हैं. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसकी जानकारी दी.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फेसबुक पर लिखे अपने ब्लॉग में इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अरविंद सुब्रमण्यन अमेरिका जा रहे हैं. वह यहां से अक्टूबर में वापस लौटेंगे.

जेटली ने अपने ब्लॉग में लिखा, ” कुछ दिन पहले मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार मुझे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मिले. उन्होंने मुझे जानकारी दी कि वह अपनी पार‍िवारिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वापस अमेरिका जाना चाहते हैं.”

जेटली ने लिखा कि उनके इस्तीफा देने की वजहें निजी हैं, जो उनके लिए काफी अहम हैं. उन्होंने मेरे पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा और मुझे उनके इस्तीफे को स्वीकार करना ही पड़ा.”

अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग में लिखा कि अरविंद ने 16 अक्टूबर, 2014 को यह पद संभाला था. उनका कार्यकाल खत्म होने पर मैं चाहता था कि वह आगे भी इस पद पर बने रहें. उन्होंने लिखा कि इस दौरान उन्होंने बताया कि मैं पारिवारिक जिम्मेदारियों और मौजूदा पद को लेकर पसोपेश में हूं.

जेटली ने अपने ब्लॉग में अरविंद की तारीफ करते हुए बताया कि वित्त मंत्रालय, पीएमओ और सरकार के अन्य विभागों के साथ उनका संवाद काफी अहम था. यह औपचारिक होने के साथ ही अनौपचारिक स्तर पर भी होता था.

अरविंद सुब्रमण्यन ने अक्टूबर, 2014 में मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार का पद संभाला था. उन्होंने रघुराम राजन की जगह ली थी. इस दौरान रघुराम राजन आरबीआई गवर्नर बने थे.

Continue Reading

Trending