Connect with us

मनोरंजन

बॉलीवुड में भी ‘ट्रिपल तलाक’ जैसे मुद्दे रहे हैं सुपरहिट

Published

on

चौदहवीं का चांद हो या आफ़ताब हो, जो भी हो तुम खुद की कसम लाजवाब हो…
1964 में बनी गुरुदत्त, जॉनी वाकर और वहीदा रहमान अभिनीत फिल्म चौदहवीं का चांद का यह मशहूर गीत अब अनायास ही याद आता है ।
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद एक के बाद एक फिल्मी दुनिया के कई गीत जेहन में उभरने लगते है ।

यूं तो किसी खास मुद्दे पर फिल्म बनाने या दर्शकों का नब्ज टटोलकर सुर्खियां बटोरने का अंदाज बॉलीवुड का पुराना रहा है, लेकिन कोई ऐसे मुद्दे जो धर्म संस्कृति और जनता की जागरूकता से जुड़ा हो इन मुद्दों पर फिल्म बनाने में बॉलीवुड गुरेज भी करता रहा है । क्योंकि यहाँ मार्केट नहीं है । दौर बदला है और बाजारवाद की संस्कृति ने फ़िल्म को पूरी तरह अपनी आगोश में समा लिया है । यहाँ सामाजिक और जन मुद्दे कम और स्टारडम अधिक परोसा जाने लगा है ।

खैर.! इसके बावजूद ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दे पर भी अपने जमाने मे बॉलीवुड पीछे नहीं रहा और बॉलीवुड ने तीन तलाक पर कई सुपरहिट फिल्में भी दी । इन फिल्में ने सिर्फ तलाक जैसे अमानवीय मुद्दों को न सिर्फ उठाया बल्कि आम जनमानस को जागरुक भी किया । ऐसे ही कुछ फिल्मों का जिक्र किया जाना जरूरी है, जिसे आप बार-बार देख सकते हैं ।

बॉलीवुड में इस मुद्दे पर कई फिल्म बनी या इससे छूती हुई भी इक्का दुक्का फिल्में देखने को मिलेंगे।

*फ़िल्म। निकाह*
साल 1982 में आई निर्देशक बी आर चोपड़ा की फिल्म निकाह को कई लोग बॉलीवुड में तीन तलाक पर बनी पहली फिल्म मानते हैं । तीन तलाक के मुद्दे को गंभीरता से उठाती इस फ़िल्म को ऐसा मानने के कई कारण हो सकते है । मसलन तीन तलाक का पूरा प्रोसेस इस मे नजर आता है । लेकिन तीन तलाक इससे पहले अमिताभ बच्चन की फिल्म सौदागर में भी दिखाया जा चुका है ।

*सौदागर 1973*
एक बंगला कहानी ‘रस’ पर आधारित निर्देशक सुधेन्दु राय ने अमिताभ बच्चन के साथ इस फिल्म को बनाया था । फिल्म में अमिताभ एक गुड बेचने वाले मोती के किरदार में थे और लाजवाब गुड़ बनाने वाली नूतन जो मेहजुबी के किरदार में थी उससे शादी कर लेते हैं । ताकि वह गुड़ सिर्फ उसी के लिए बनाए । बाद के दिनों में जब सिनेमा और समाज की समझ परिपक्व हुई और 40 में ऑस्कर पुरस्कारों के लिए इस भारतीय फ़िल्म की ऑफिशियल एंट्री हुई तो फिल्म के दृश्य को देखकर लोगों को तीन तलाक की गंभीरता समझ में आई । फ़िल्म में अमिताभ का दूसरी शादी की चाह में अपनी पहली बीवी को बिना कुछ बताए अचानक काजी के सामने तलाक दे देना, दर्शकों को ना तो सही लगता है और ना ही अच्छा । लेकिन तलाक कितना गंभीर हो सकता है इसका अंदाजा आपको सौदागर देख कर जरूर लग सकता है । जहां एक दिन अचानक मोती (अमिताभ) अपने घर काजी को लेकर आता है और इन सब बातों से अनजान गुड बनाने में व्यस्त मेहजुबी (नूतन) को अपने घर से बेदखल कर देता है। इस मौके पर नूतन के कहे डायलॉग किसी को परेशान कर देने के लिए काफी है । और तलाक की इस पद्धति की वीभत्सता को भी सामने लाती है । अगर तलाक ही देना था तो मुझसे शादी क्यों की ? सिर्फ गुड बनाने के लिए ? गुड़ तो मैं ऐसे ही बना देती, क्योंकि वह मेरा काम है । लेकिन शादी के बाद रिश्ता बना लेना और फिर उसे नहीं निभाना, क्या यही तुम्हारा काम है..? नूतन का यह डायलॉग अंदर तक चोट करने वाला था ।

*तलाक 1958*
फिल्म तलाक में राजेंद्र कुमार ने अपने शानदार अभिनय से लोगों का दिल जीत लिया था । इस फिल्म के लिए निर्देशक महेश कौल को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए फिल्म फेयर अवार्ड भी दिया जा चुका है। साथ फिल्म को सर्वश्रेष्ठ मूवी अवार्ड के लिए भी नामित किया जा चुका है । यह फिल्म भी तलाक पर बेस्ड थी, जिसमें तलाक से जुड़े कई महत्वपूर्ण मसलों को उठाया गया था और दर्शकों को जागरुक करते हुए तलाक जैसे मुद्दे को समाज से समाप्त करने की अपील की गई थी ।

*निकाह1982*
जब निकाह औरतों की मर्जी के बगैर नहीं हो सकता तो तलाक कैसे हो सकता है ?यही वह सवाल था जिसने तीन तलाक जैसे मुद्दे पर भारत की सबसे सुपरहिट फिल्म निकाह की कहानी लिखने के लिए लेखिका अचला नागर को मजबूर कर दिया था । फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे तीन तलाक एक औरत की जिंदगी में तूफान ला सकता है । यह फिल्म बॉलीवुड में सुपरहिट रही थी ।

*चौदहवीं का चांद 1964*
गुरुदत्त जॉनी वाकर और वहीदा रहमान की फिल्म चौदहवीं का चांद भी तलाक जैसे मुद्दे पर आधारित थी। इस फिल्म को भी लोगों द्वारा काफी सराही गई । इस फिल्म का एक गाना चौदहवीं का चांद हो… काफी मशहूर हुआ था ।

*ट्रिपल तलाक*
ट्रिपल तलाक जैसे प्रथा को समाज से दूर करने के लिए निर्देशक विपुल शाह भी एक कोशिश में जुट गए हैं । जल्दी उनकी एक शॉर्ट फिल्म दर्शकों के सामने होगी । यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है । जिसमें तलाक से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है । फिल्म के माध्यम से बखूबी दर्शाया गया है कि ट्रिपल तलाक की अमानवीयता और इससे जुड़े मानवीय संवेदना कैसे टूट कर बिखर जाती है । इसी वजह से शार्ट फिल्म का नाम ट्रिपल तलाक कर रखा गया है ।

*हलाल*
तलाक से जुड़ी फिल्म हलाल अगले महीने 19 सितंबर को रिलीज होने वाली है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक शिवाजी लोटन पटेल की फिल्म रिलीज होने से पहले ही कई पुरस्कार अपने नाम कर चुकी है। एक मिनट की अवधि का टीजर में दो मुस्लिम जोड़ों को दर्शाया गया है, जिसमें एक पति अपनी पत्नी को लोगों के सामने जबकि दूसरा अपनी पत्नी को घर में तलाक देते हुए दिखाया गया है । उम्मीद है यह फिल्म भी दर्शकों के जीवन में उतरेगी और लोग ट्रिपल तलाक के गंभीरता को समझ सकेंगे ।

-रविशंकर

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

मनोरंजन

रंजीत आंबेडकरवादी हैं और अपनी पहचान छिपाते नहीं , उनकी नयी फिल्म “काला” देख आइये

Published

on

Pa Ranjith की फिल्म “काला” आज रिलीज हो रही है.

तमिल, तेलुगु और हिंदी में. रंजीत दक्षिण के सबसे सफल फिल्मकार हैं. इनकी फिल्म कबाली ने 700 करोड़ का कारोबार किया था. रंजीत आंबेडकरवादी हैं और अपनी यह पहचान वे छिपाते नहीं है. फिल्म बनाने में उनके साथ की टीम भी आम तौर पर बहुजन समुदाय की होती है. हालांकि वे मौका हर किसी को देते हैं.

उनकी फिल्मों में बाबा साहेब कई जगह, कई रूपों में नजर आते हैं.

मिसाल के तौर पर इस जीप को देखिए, जिस पर रजनीकांत बैठे हैं. इसमें BR है और बाबा साहब के परिनिर्वाण का साल 1956 भी. महाराष्ट्र तो है ही. फिल्म कबाली में भी आप बाबा साहेब के पोस्टर देख सकते हैं. जन्म के आधार पर भेदभाव का कबाली में निषेध है.

कबाली का वह डायलॉग तो आपको याद ही होगा. – मेरी यह शानदार ड्रेस मेरी राजनीति है.

कबाली फिल्म के पहले ही दृश्य में रजनीकांत जेल में एक दलित आत्मकथा पढ़ते दिखाए गए हैं. किताब का नाम है – माई फादर बालैया.

कबाली से पहले अपनी फिल्म “मद्रास” में भी रंजीत जाति का सवाल उठाते हैं. उसमें उनके पात्र बाबा साहेब को पढ़ते दिखाए गए हैं.

रंजीत का असर इतना है कि लोग उनके नाम से फिल्म देखने जाते हैं. वे भारत के पहले फिल्म डायरेक्टर हैं, जिनकी फोटो के पोस्टर लगते हैं. यह और भी बड़ी बात है, जब फिल्म के हीरो रजनीकांत हों.

ये पीए रंजीत के ये पोस्टर मुंबई समेत कई शहरों में देखे जा सकते है.

ब्रदर रंजीत को ऑल द बेस्ट.

देख आइए रंजीत की फिल्म काला.

(श्रोत-दिलीप मंडल की फेसबुक वाल)

Continue Reading

मनोरंजन

बॉलीवुड की हवा हवाई श्रीदेवी का दुबई में निधन

Published

on

फाइल फोटो

जी हां बॉलीवुड का एक और बेशकीमती नगीना इस दुनिया को अलविदा कह के चली गयी जिसका नाम है श्रीदेवी|  एक ऐसा नाम जिससे हर कोई वाकिफ होगा, बेहतरीन अदाकारी के जानी जाने वाली श्रीदेवी का आज रात दुबई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया|

श्री देवी एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए दुबई गयी थी और वहीँ उन्हें दिल का दौरा पर गया, दौरा इतना ज्यादा खतरनाक था की उन्हें बचाया भी नहीं जा सका|

फ़िल्मी सफ़र:

13 अगस्त 1963 को शिवकाशी(तमिलनाडू) में पैदा हुई श्रीदेवी 1990 के दशक की सबसे बेहतरीन अदाकारा रही हैं| श्रीदेवी के फ़िल्मी सफ़र की शुरुवात महज 4 साल की उम्र से ही हो गयी थी, उसके बाद उन्होंने बाल कलाकार के रूप में कई तमिल, तेलगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में काम किया|

बॉलीवुड में इन्होने सबसे पहले बाल कलाकार के रूप में फिल्म जूली में काम किया| श्रीदेवी की मुख्य अदाकारा के रूप में पहली फिल्म सोलवा सावन था जिसमे इनके काम को खूब सराहा गया|

इसके बाद इन्होने कभी पीछे पलट कर नहीं देखा औए फिल्म जगत के लिए मवाली,तोहफा,मिस्टर इंडिया,चांदनी,चालबाज जैसी कई हिट फ़िल्में दी|

श्रीदेवी के पिता का नाम अय्यपन था और माता का नाम राजेश्वरी था, उनके पिताजी पेशे से एक वकील थे| श्रीदेवी की शादी सन 1996 में अभिनेता अनिल कपूर के बड़े भाई और मशहूर निर्माता बोनी कपूर से हुई, इनकी दो बेटियां जाह्नवी और खुसी हैं|

5 से भी ज्यादा भाषाओँ में फिल्म करने वाली अदाकारा श्रीदेवी यूँ तो विवादों से बहुत दूर रही लेकिन एक विवाद जो बहुत सुर्ख़ियों में रहा वो है उनके और अभिनेता मिथुन चक्रबर्ती के रिश्ते का| कहा जाता है की राकेश रोशन की फिल्म जाग उठा इंसान के सेट पर मिथुन और श्रीदेवी को एक दुसरे से प्यार हो गया था|

मिथुन चक्रबर्ती की मानें तो उनकी और श्रीदेवी की गुपचुप तरीके से शादी भी हो चुकी थी ये बाद खुद मिथुन चक्रबर्ती ने खुद प्रेस को बताया|

बोनी कपूर से शादी के बाद श्रीदेवी फिल्मों से दूर चली गयी, बॉलीवुड में उन्होंने 15 साल बाद दोबारा तब धमाल मचा दिया जब उनकी फिल्म इंग्लिश विग्लिश ने लोगों का दिल जीत लिया|

श्रीदेवी के निधन से भारतीय फिल्म जगत ने बहुत बड़ा नगीना खो दिया जिसकी भरपाई कभी नहीं हो पायेगी|

बॉलीवुड की इस बेहतरीन अदाकारा को पीपल्स बीट भावभीनी श्रधांजलि देता है|

Continue Reading

मनोरंजन

पहाड़ी क्षेत्रों में भी नही है प्रतिभा की कमी, रास्क क्रू निकालने वाला है अपनी एलबम सीरीज

Published

on

उत्तराखंड चमोली:- जहां एक ओर हर क्षेत्र में देश तरक्की कर रहा है वहीं हमारे पहाड़ों की प्रतिभा कहीं खोती सी जा रही है। चाहे यहां की पारम्पतिक संस्कृति ढोल दमाऊ हो या फिर जागर। जहां एक ओर इन सब की कुछ सीमायें है और इन सीमाओं से बाहर इन का महत्व खत्म सा हो गया है। लेकिन डांस एक ऐसी विधा है जिस का ना कोई आदि है एयर ना ही कोई अंत है। डांस को आप किसी भी तरीके से कर लो वह मनमोहक ही लगता है।

हमारे खूबसूरत पहाड़ों की गोद मे बसा एक छोटा सा शहर है गोपेश्वर और इस गोपेश्वर में इतने प्रकार की प्रतिभाएं छुपी हुई है कि अगर कोई प्रतिभाखोजी इन प्रतिभाओं को खोजने निकले तो वह यहीं का हो कर रह जाए और हमारे गोपेश्वर को एक नई पहचान मिल जाये।

गोपेश्वर किबेक नाट्य संस्था जो कि प्रतिभाओं को निखारने का वक्त दे रही है उस का नाम है अक्षत नाट्य संस्था और इस संस्था के अध्यक्ष श्री विजय वशिष्ठ जी हर संभव कोशिश में लगे है कि गोपेश्वर की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।

वशिष्ठ जी की मेहनत का एक खूबसूरत सा नमूना है रास्क क्रू डांस ग्रुप। या डांस ग्रुप अपनी एक एलबम सीरीज लांच करने जा रहा है बहुत जल्दी आप सब के सामने रास्क क्रू के बहुत सारे बहुत खूबसूरत से डांस स्टेप होंगे जिन्हें आप चाह कर भी बिना देखे नही रह पाएंगे।

डांस कर रहे ये लड़के कॉलेज में पढ़ने वाले है और डांस में ही अपना भविष्य तलाश रहे है। सुदूर पहाड़ों के इन छात्रों के लिए जरूरत है तो बस एक मौके की। बाकी तो अपनी प्रतिभा की बदौलत ये अपना भविष्य खुद ही तय कर लेंगे।

Continue Reading

Like us on Facebook

Recent Posts

Trending