Connect with us

देश

6 महीने बाद खुला ताजमहल, अनलॉक 4 में भी मिली ये रियायतें

Published

on

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच देश तेजी से अनलॉक मोड में जा रहा है. फिलहाल अनलॉक- 4 चल रहा है. जिसके तहत तमाम तरह की गतिविधियों की छूट दे दी गई है. अनलॉक- 4 भी कई चरणों का रहा. एक सितंबर से लागू हुए अनलॉक- 4 में 7 सितंबर से जहां मेट्रो सेवा शुरू होने की छूट मिली थी तो वहीं अब आज से कुछ और रियायतें मिलने जा रही हैं.

देश के कुछ राज्यों में जहां आज से स्कुल-कॉलेज खुलने जा रहे हैं तो वहीं 20 जोड़ी क्लोन ट्रेनें भी रेल यात्रियों की सुविधा के लिए पटरियों पर दौड़ना शुरू करने जा रही हैं. इसी के साथ ही सबसे बड़ी राहत उन लोगों को मिलने वाली है जिसके यहां कोई कार्यक्रम आयोजित होने वाला होगा क्योंकि आज से तमाम तरह के कार्यक्रमों में लोगों के शामिल होने की सीमा बढ़ाकर 100 कर दी गई है.

केंद्र सरकार की तरफ से जारी की गई गाइडलाइन में कहा गया था कि सामाजिक/शैक्षणिक/खेल/मनोरंजन/सांस्कृतिक/धार्मिक/राजनीतिक समारोह और अन्य मंडली को 100 व्यक्तियों की अधिकतम क्षमता के साथ 21 सितंबर से अनुमति दी जाएगी. यानी अब किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ज्यादा लोगों को अनुमति होगी. अभी तक यह अनुमति महज 50 लोगों की थी जिस वजह से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा था.

इंडियन रेलवे आज से कुछ खास रूट्स पर 20 जोड़ी क्लोन ट्रेनें चलाने जा रही है. रेल मंत्रालय के मुताबिक ये ट्रेनें श्रमिक स्पेशल और स्पेशल ट्रेनों के अतिरिक्त होंगी. क्लोन ट्रेनें यूपी, बिहार, दिल्ली, पंजाब समेत कई राज्यों के बीच चलेंगी. जिन स्टेशनों के लिए ज्यादा यात्री हैं, वहां ट्रेनों के फेरे बढ़ाने के लिए ये क्लोन ट्रेनें चलेंगी.

21 सितंबर से देश के कई राज्यों में स्कूल-कॉलेज खुलने जा रहे हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्कूलों में बच्चों की हेल्थ को लेकर गाइडलाइंस की घोषणा कर दी है. केंद्र सरकार ने 9वीं से 12वीं क्लास तक के बच्चों के लिए 21 सितंबर से स्कूल-कॉलेज खोलने की अनुमति दी थी, लेकिन यूपी में कोरोना के हालात को देखते हुए फिलहाल ऐसा करने से रोक लगा दी गई है. लेकिन कुछ राज्यों में स्कूलों को खोलने की अनुमति शासन की तरफ से दी जा चुकी है.

बता दें कि केंद्र सरकार ने अनलॉक- 4 की गाइडलाइंस में कहा था कि कंटेनमेंट जोन को छोड़कर 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों को स्कूल विजिट की अनुमति होगी. राज्य चाहें तो 50 प्रतिशत टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को स्कूल आने के लिए कह सकते हैं. अनलॉक- 4 की गाइडलाइन में यह भी कहा गया था कि अभिभावकों से लिखित अनुमति के बाद ही नौवीं से लेकर बारहवीं कक्षा तक के छात्र स्कूल जा सकेंगे.

आगरा का किला और ताजमहल सोमवार से पर्यटकों के लिए फिर से खुल जाएंगे. हालांकि एंट्री के दौरान पर्यटकों को मास्क के साथ सोशल डिस्टेंसिंग सहित अन्य नियमों का पालन करना होगा. बता दें कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने ताजमहल को 17 मार्च से बंद कर दिया था. अब 21 सितंबर, सोमवार से ताजमहल को खोलने का निर्णय लिया गया है. यानी कुल 188 दिन बाद ताजमहल फिर से खोला जा रहा है.

छत्तीसगढ़ में लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है. सबसे अधिक मामले रायपुर से आ रहे हैं. इसी वजह से वहां एक बार फिर लॉकडाउन लगाने का फैसला लिया गया है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत कई प्रमुख शहरों में एक बार फिर 21 सितंबर की रात 9:00 बजे से 28 सितंबर की रात 12:00 बजे तक पूर्ण लॉकडाउन रहेगा.

जानकारी के मुताबिक जिला प्रशासन ने रायपुर को पूर्ण कंटेंटमेंट जोन घोषित कर दिया है. लॉकडाउन के दौरान सिर्फ दूध, मेडिकल और पेट्रोल पंप को निर्धारित समय तक खोलने की अनुमति होगी.

यहां आपको बता दें कि सरकार द्वारा अनलॉक- 4 को लेकर जो आदेश जारी हुआ था उसमें कहा गया था कि कंटेनमेंट जोने के बाहर सभी गतिविधियों की अनुमति होगी, लेकिन अभी सिनेमा हॉल, स्वीमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, थेयटर, इंटरनेशनल हवाई यात्रा पर पाबंदी रहेगी. आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि व्यक्तियों और वस्तुओं के इंटर स्टेट और इंट्रा स्टेट मूवमेंट पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा. इस तरह के मूवमेंट के लिए कोई अलग से अनुमति/अनुमोदन/ई-परमिट की आवश्यकता नहीं होगी.

देश

बिहार चुनाव के बीच शाहनवाज़ हुसैन और राजीव प्रताप रूडी कोरोना संक्रमित पाए गए

Published

on

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जहां सभी दलों की तरफ से प्रचार अभियान जारी है. इसी बीच बिहार बीजेपी के दो बड़े नाम राजीव प्रताप रुडी (Rajiv Pratap Rudy) और शाहनवाज़ हुसैन (Shahnawaz Hussain) कोरोना संक्रमित हो गए हैं. साथ ही उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय की तबियत भी ठीक नहीं है . हालांकि सुशील मोदी की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है लेकिन ये दोनों नेताओं ने भी फ़िलहाल अपने आपको आइसोलेट कर लिया है.

 

बताते चले कि कोरोना संकट के बीच बिहार विधानसभा का चुनाव तीन चरणों में हो रहा है. पहले चरण के लिए  28 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे. वहीं नतीजों का ऐलान 10 नवंबर 2020 को किया जाएगा.  आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जहां पहले चरण में जहां 16 जिलों की 71 सीटों पर मतदान होगा तो वहीं दूसरे चरण में 17 जिलों की 94 सीटों पर मतदान किया जाएगा. इसके अलावा तीसरे और अंतिम चरण में 15 जिलों की 78 सीटों पर मतदाता अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे.

Continue Reading

देश

रिया के बेल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी NCB, बढ़ सकती है मुश्किलें

Published

on

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की अत्महत्या के मामले में ड्रग कनेक्शन को लेकर गिरफ्तार अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को ज़मानत दी। रिया को कोर्ट ने 28 दिन बाद एक लाख रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत दी है। वहीं रिया के भाई शोविक चक्रवर्ती की ज़मानत याचिका खारिज कर दी है।

जमानत मिलने के बाद भी रिया की मुश्किलें अभी खत्म नहीं ही है। जांच एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने जमानत का विरोध दिया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल सिंह ने जमानत के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिया के अलावा सुशांत के स्टाफ दीपेश सावंत और सैमुअल मिरांडा को भी जमानत दी है। वहीं अब्दुल बासित की ज़मानत याचिका खारिज कर दी गई है।

न्यायमूर्ति एस.वी. कोतवाल, जिन्होंने पिछले सप्ताह जमानत अर्जी संबंधी सुनवाई पूरी की थी, उन्होंने बुधवार सुबह फैसला सुनाया। एनसीबी द्वारा 9 सितंबर को ड्रग से संबंधित मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद, रिया ने 28 दिन हिरासत में बिताए हैं। उन्हें मंगलवार को एक विशेष एनडीपीएस अदालत ने 20 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए, मानशिंदे ने कहा, “सच्चाई और न्याय की जीत हुई है।”उन्होंने कहा, रिया की गिरफ्तारी और हिरासत पूरी तरह से अनुचित थी। तीन केंद्रीय एजेंसियों – सीबीआई, ईडी और एनसीबी – रिया के पीछे पड़ गई थी और अब यह सब खत्म होना चाहिए। हम सच्चाई के लिए प्रतिबद्ध हैं। सत्य मेव जयते।

बता दें अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच के दौरान सामने आए ड्रग्स एंगल के मामले में एनसीबी द्वारा रिया, शोविक सहित 19 को अगस्त-सितंबर के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उन लोगों में चक्रवर्ती भाई-बहन, सुशांत के कर्मचारी दीपेश सावंत, सैमुएल मिरांडा, कई ड्रग पेडलर, सप्लायर और फिल्म उद्योग से जुड़े व्यक्ति शामिल हैं।

सितंबर के अंत तक गिरफ्तार किए गए अन्य लोग हैं–अब्बास लखानी, करण अरोरा, जैद विलात्रा, अब्दुल बासित परिहार, कैजान इब्राहिम, अनुज केसवानी, अंकुश अरनेजा, कमरजीत सिंह आनंद, संकेत पटेल, संदीप गुप्ता, आफताब अंसारी, दिव्या फर्नांडिस, सूर्यदीप मल्होत्रा, क्रिस कोस्टा, राहिल विश्राम और क्षितिज आर. प्रसाद। अभियुक्तों में से कुछ को जमानत मिल गई है, अन्य अलग-अलग अवधि के लिए हिरासत में हैं क्योंकि एनसीबी की जांच कई अन्य अभिनेत्रियों से पूछताछ के साथ जारी है।

Continue Reading

देश

बिहार: एक पैराग्राफ की कहानी का राज्य:- रवीश कुमार

Published

on

नोट- यह लेख एक पैराग्राफ का है। लंबा है। कृपया इसे अपनी साइट पर छापें तो इसमें पैराग्राफ चेंज न करें। मेरा फिर भी अनुरोध है कि चुनाव आए तो अखबार पढ़ना ही नहीं लेना भी बंद कर दें। चैनलों के कनेक्शन कटवा दें। इस एक महीने के कवरेज से कुछ होता नहीं है। ज़्यादातर कवरेज़ में फिक्सिंग होगी। क्या फायदा। लोगों से बात करें। आपस में बात करें। फिर वोट दें। पांच साल में जो देखा है उस पर भरोसा रखें। न्यूज़ वेबसाइट, चैनल और अखबार के पास कुछ भी नया नहीं है। कुछ भी खोज कर लाई गई सामग्री नहीं है। बस वाक्य को आकर्षक बनाया जाएगा, हेडलाइन कैची होगी और आपके निगाहों को लूट लिया जाएगा। जिसे आई बॉल्स या टी आर पी कहते हैं। पढ़ भी रहे हैं तो ग़ौर से पढ़िए कि इस लेख में है क्या। केवल पंचिंग लाइन का खेला है या कुछ ठोस भी है।
पाठक हैं तो बदल जाइये। दर्शक हैं तो चैनलों को घर से निकाल दीजिए।

बिहार: एक पैराग्राफ की कहानी का राज्य

साधारण कथाओं का यह असाधारण दौर है। बिहार उन्हीं साधारण कथाओं के फ्रेम में फंसा एक जहाज़ है। बिहार की राजनीति में जाति के कई टापू हैं। बिहार की राजनीति में गठबंधनों के सात महासागर हैं। कभी जहाज़ टापू पर होता है। कभी जहाज़ महासागर में तैर रहा होता है। चुनाव दर चुनाव बिहार उन्हीं धारणाओं की दीवारों पर सीलन की तरह नज़र आता है जो दिखता तो है मगर जाता नहीं है। सीलन की परतें उतरती हैं तो नईं परतें आ जाती हैं। बिहार को पुरानी धारणाओं से निकालने के लिए एक महीना कम समय है। सर्वे और समीकरण के नाम पर न्यूज़ चैनलों से बाकी देश ग़ायब हो जाएगा। पर्दे पर दिखेगा बिहार मगर बिहार भी ग़ायब रहेगा। बिहार में कुछ लोग अनैतिकता खोज रहे हैं और कुछ लोग नैतिकता। बिहार में जहां नैतिकता मिलती है वहीं अनैतिकता भी पाई जाती है। जहां अनैतिकता नहीं पाई जाती है वहां नैतिकता नहीं होती है। बिहार में दोनों को अकेले चलने में डर लगता है इसलिए आपस में गठबंधन कर लेती हैं। अनैतिक होना अनिवार्य है। अनैतिकता ही अमृत है। नैतिकता चरणामृत है। पी लेने के बाद सर में पोंछ लेने के लिए होती है। नेता और विश्लेषक पहले चुनाव में जाति खोजते थे। जाति से बोर हो गए तो जाति का समीकरण बनाने लगे। समीकरण से बोर हो गए तो गठबंधन बनाने लगे। गठबंधन से बोर हो गए तो महागठबंधन बनाने लगे। नेता जानता है इसके अलावा हर जात के ठेकेदार को पैसे देने पड़ते हैं। दरवाज़े पर बैठे लोग पैसे मांगते हैं। चीज़ सामान मांगते हैं। यह स्वीकार्य अनैतिकता है। पहले जनता नहीं बताती थी कि किसने दिया है। अब राजनीतिक दल नहीं बताते हैं कि करोड़ों का फंड किसने दिया है। इल्केटोरल फंड पर कई महीनों से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हुई है। बहरहाल, जाति, समीकरण, गठबंधन और महागठबंधन के बाद फैक्टर का चलन आया है। किसमें ज़ेड फैक्टर है और किसमें एक्स फैक्टर है। स्विंग का भी फैक्टर है। सब कुछ खोजेंगे ताकि जीतने वाले की भविष्यवाणी कर सकें। कोशिश होगी कि जल्दी से महीना गुज़र जाए। वास्तविक अनैतिक शक्तियों तक न पहुंचा जाए वर्ना विज्ञापन बंद हो जाएगा और जोखिम बढ़ जाएगा। आम जनता जिसने पांच साल में घटिया अख़बारों और चैनलों के अलावा न कुछ देखा और पढ़ा है उस पर दबाव होगा कि उसके बनाए ढांचे से निकल कर ज़मीनी अनुभव को सुना दे। अब तो वह जनता भी उसी फ्रेम में कैद है। वह ज़मीनी अनुभवों में तड़प रही है मगर आसमानी अनुभवों में ख़ुश है। सूचनाएं जब गईं नहीं तो जनता के मुखमंडल से लौट कर कैसे आएंगी। जनता समझदार है। यह बात जनता के लिए नहीं कही जाती बल्कि राजनीतिक दलों की अनैतिकताओं को सही ठहराने के लिए कही जाती है। जनता की मांग खारिज होगी। नेता जो मांग देंगे वही जनता को अपनी मांग बनानी होगी। नेता जनता को खोजते हैं और जनता नेता को खोजते हैं। चैनल वाले दोनों को मिला देंगे। ज़्यादा मिलन न हो जाए उससे पहले महासंग्राम जैसे कार्यक्रम में खेला-भंडोल हो जाएगा। खोजा-खोजी बिहार के चुनाव का अभिन्न अंग है। आँखों के सामने रखी हुई चीज़ भी खोजी जाती है। कोई नेता गठबंधन के पीछे लुकाया होगा तो कोई नेता उचित गठबंधन पाकर दहाड़ने लगा होगा। बिहार 15 साल आगे जाता है या फिर 15 साल पीछे जाता है। अभी 15 साल पीछे है मगर खुश है कि उसके 15 साल में जितना पीछे था उससे आगे है। उसके बगल से दौड़ कर कितने धावक निकल गए उसकी परवाह नहीं। इसकी होड़ है कि जिससे वह आगे निकला था उसी को देखते हुए बाकियों से पीछे रहे। बिहार की राजधानी पटना भारत का सबसे गंदा शहर है। जिस राज्य की राजधानी भारत का सबसे गंदा शहर हो वह राज्य 15 साल आगे गया है या 15 साल पीछे गया है, बहस का भी विषय नहीं है। सबको पता है किसे कहां वोट देना है। जब पता ही है तो पता क्या करना कि कहां वोट पड़ेगा। नीतीश कहते हैं वो सबके हैं। चिराग़ कहते हैं कि मेरे नहीं हैं। चिराग कहते हैं कि मेरे तो मोदी हैं, दूजा न कोए। मोदी की बीजेपी कहती है मेरे तो नीतीश हैं,दूजा न कोए। गठबंधन से एक बंधन खोल कर विरोधी तैयार किया जाता है ताकि मैच का मैदान कहीं और शिफ्ट हो जाए। मुकाबला महागठबंधन बनाम राजग का न ले। चिराग और नीतीश का लगे। चिराग कहते हैं नीतीश भ्रष्ट हैं। बीजेपी कहती है नीतीश ही विकल्प हैं। नीतीश से नाराज़ मतदाता नोटा में न जाएँ, महागठबंधन में न जाए इसलिए चिराग़ को नोटा बैंक बना कर उतारा गया है। चिराग का काम है महागठबंधन की तरफ आती गेंद को दौड़कर लोक लेना है। राजग को आउट होने से बचाना है। बाद में तीनों कहेंगे कि हम तीनों में एक कॉमन हैं। भले नीतीश मेरे नहीं हैं मगर मोदी तो सबके हैं। मोदी नाम केवलम। हम उनकी खातिर नीतीश को समर्थन देंगे। ज़रूरत नहीं पड़ी तो मस्त रहेंगे। दिल्ली में मंत्री बन जाएंगे। ज़रूरत पड़ गई तो हरियाणा की तरह दुष्यंत चौटाला बन जाएंगे। बस इतनी सी बात है। एक पैराग्राफ की बात है। बिहार की कहानी दूसरे पैराग्राफ तक पहुंच ही नहीं पाती है।

Continue Reading

Trending