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बीट विशेष

व्यंग्य मूर्ति संवाद: लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने पर हंस पड़ी और पूछा मेरा पूरा नाम जानते हो?

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  1. लेनिन की मूर्ति तोड़ी तो दी गई लेकिन फिर सवाल पैदा हुआ कि उसे कहां फेंका जाए।काफी बहस होती रही। हील – हुज्जत होती रही। जब कुछ तय न पा सका तो लेनिन की टूटी हुई मूर्ति ने कहा, मुझे वहीं फेंक दो जहां हज़ारों साल से टूटी हुई मूर्तियां फेंकी जाती रही हैं।
  2. लेनिन की मूर्ति तोड़ तो दी गई लेकिन फिर बहस होने लगी की मूर्ति किसने तोड़ी है। सब लोग अपना अपना दावा पेश करने लगे । किसी ने कहा, मैंने तोड़ी है। किसी ने कहा, मैंने तोड़ी है। बड़ी बहस शुरू हो गई जो लात – जूते में बदल गई। क्योंकि लेनिन की मूर्ति तोड़ने वाले का शानदार ‘कैरियर’ सामने था। जब यह तय न हो पाया कि लेनिन की मूर्ति किसने तोड़ी है तो लेनिन की टूटी हुई मूर्ति ने कहा, तुम लोगों ने नहीं, मेरे लोगों ही ने मेरी मूर्ति तोड़ी है।
  3. लेनिन की मूर्ति जब तोड़ी जा रही थी तो मूर्ति के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई ।कुछ देर बाद मूर्ति हंसने लगी। तोड़ने वालों को बड़ी हैरानी हुई । उन्होंने पूछा, आप क्यों हंस रहे हैं? आपको तो तोड़ा जा रहा है। मूर्ति ने कहा, तुम लोग मेरी पसंद का काम कर रहे हो। तोड़ने वालों ने कहा, कैसे? लेनिन बोले , मैं जीवन भर यही करता रहा हूं।
  4. लेनिन की मूर्ति ने अपने तोड़ने वालों से सवाल किया। मूर्ति ने कहा, तुम लोग किसकी मूर्ति तोड़ रहे हो? लोगों ने कहा, लेनिन की । मूर्ति ने कहा, मेरा पूरा नाम क्या है जानते हो? तोड़ने वालों ने कहा, अरे हमें अपने-अपने नाम नहीं मालूम, आपका नाम क्या जानेंगे।
  5. लेनिन की टूटी हुई मूर्ति ने तोड़ने वालों से पूछा तुम लोग सिर्फ तोड़ते हो या या कुछ जोड़ भी सकते हो ? उन लोगों ने कहा, जोड़ने का काम हमारा नहीं है । मूर्ति ने पूछा, जोड़ने वाले कहां हैं? तोड़ने वालों ने जवाब दिया, वे उधर बैठे हैं। – क्यों उधर क्यों बैठे हैं ? मूर्ति ने पूछा तोड़ने वालों ने कहा, हमने इतना तोड़ दिया है कि अब उनकी समझ में नहीं आ रहा कि क्या क्या जोड़ें।
  6. मूर्ति ने तोड़ने वालों से पूछा, तुम मूर्ति के अलावा और क्या-क्या तोड़ सकते हो ? तोड़ने वालों ने कहा, बहुत कुछ तोड़ सकते हैं। जिसे भी ना पसंद करते हैं, जो हमें पसंद नहीं है उसे हम तोड़ देते हैं। बड़ी-बड़ी इमारतें तोड़ देते हैं। जिंदा लोगों को तोड़ देते हैं। और तो और हम मुर्दा लोगों को तोड़ देते हैं। हमसे अच्छा यह काम और कोई नहीं कर सकता। मूर्ति ने पूछा, क्या तुम जोड़ना भी जानते हो? तोड़ने वालों ने कहा, ये क्या होता है?
  7. मूर्ति ने अपने गिराने वालों से पूछा, यह बताओ क्या संसार के दूसरे देशों में भी मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं? मूर्ति गिराने वाले प्रसन्न हो गए । उन्होंने कहा, यह पवित्र काम तो सारे संसार में हो रहा है । मूर्ति ने पूछा, कौन कौन कर रहा है? मूर्ति गिराने वालों ने कहा, जो जो कर रहे हैं, सब हमारे भाई हैं।
  8. मूर्ति तोड़ने वालों ने मूर्ति से पहला सवाल किया, तुम्हें कोई बचाने क्यों नहीं आ रहा ? मूर्ति ने जवाब दिया, अगर वे अपने आपको बचा पाएंगे तो मुझे बचाने आएंगे।
  9. मूर्ति ने अपने तोड़ने वालों से पूछा, आप लोगों को मुझ से इतनी घृणा थी तो आपने मुझे पहले क्यों नहीं तोड़ा? मूर्ति तोड़ने वालों ने कहा, विरोध का डर था। मूर्ति ने पूछा, आप विरोध को पसंद नहीं करते? तोड़ने वालों ने कहा, बिल्कुल नहीं हम विरोध और विरोधियों को पसंद नहीं करते। हम वीर हैं। हम अपनी शक्ति वहीं दिखाते हैं जहां कोई विरोध नहीं होता।
  10. लेनिन की मूर्ति ने पूछा, तुम लोग मूर्तियों के अलावा और क्या-क्या तोड़ोगे? उन्होंने कहा, हम तोड़ने में एक्सपर्ट हैं । जो चाहेंगे तोड़ देंगे। लेनिन की मूर्ति ने कहा, तुम सब कुछ तोड़ सकते हो लेकिन लोगों का हौसला नहीं तोड़ सकते।

बीट विशेष

जो ऊपर हैं वो मग़रूर हैं, जो नीचे हैं वो मजबूर हैं

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Pic Credit: Cartoonstock.com
 हमारी पस्ती का सिर्फ़ एक ही कारण है कि, “जो ऊपर हैं वो मग़रूर हैं, जो नीचे वो मजबूर! ऊपर के लोग अपने से नीचे के लोगों की राय लेना आपनी तौहीन समझते हैं! कोई व्यक्ति अपनी ख़ूबी दिखा ही नहीं सकता अगर आप उसकी अवहेलना ही करते रहेंगे!
उसूल और पाबन्दी, पाबन्दी और सख़्ती, सख्ती और ज़ुल्म के बीच की लाईन बड़ी महीन है जिसकी पहचान होना हुक्मरानों के लिए बहुत ज़रूरी है! एक अच्छे हुक्मरान के लिए यह ज़रूरी है कि उठाए गए सवालों की गहराई में जाएं, ना कि सवाल करने वालों को ही बदनाम करने की कोशिश में लग जाएं!
सीधे पहाड़ की चोटी पर उतरने से पहाड़ पर चढ़ने का तज़र्बा नहीं मिलता! ज़िन्दगी की सीख पहाड़ की चढ़ानो पर मिलती है चोटी पर नहीं! चढानों पर ही तज़ुर्बे मिलते हैं और ज़िन्दगी मँझती है! आप किसी भी सख्स को चोटी पर तो चढ़ा सकते हैं लेकिन अगर उसे चढ़ाई का तज़र्बा नहीं तो यह उसके और आपके मिशन, दोनों के लिए ख़तरनाक होगा!
कोई भी शख़्स अपनी ज़िम्मेवारी में तभी क़ामयाब हो सकता है, अगर वो विश्वासी तथा उत्तरदायी हो और अपने फ़ैसलों के लिए उसे सही हद तक आज़ादी हो! आज़ादी हासिल करने के लिए भी उसी हद तक शिक्षित हो! शिक्षा एक बहुत ही महत्वपूर्ण हथियार है, शिक्षा जितनी ज़्यादा होगा उतनी ही आज़ादी मिल पाना संभव होगा!
लोकतंत्र में आज़ादी पाने के लिए सच्चे रहनुमाओं की ज़रूरत है!और सच्चे रहनुमा वही हो सकते हैं जिनकी जानकारी मुक़म्मल हो! जानकारी तभी मुक़म्मल होगी जब आप शिक्षण तथा प्रशिक्षण को बढ़ावा देंगे! अपने काम को अपना फ़ख्र समझेंगे, जिस काम में यक़ीन हो वही करें वरना दूसरों के विश्वासघात का शिकार बनते रहेंगे!
लेकिन, हमारी सच्चाई यही है कि हम अपने प्रशिक्षित, ईमानदार तथा उपयोगी लोगों को हद दर्जे तक निचोड़ कर छोड़ देते हैं, जिससे वो नाकाम और निकम्मे लोगों से चिढ़ने लगते हैं! अलग-अलग हुक्मरानों से वफ़ा करते-करते हमने अपनी हैसियत खो दी है! मौजूदा हालात ऐसे हो गए हैं कि हमे अपने ही समाज से चिढ़ होने लगी है और हम तकलीफ़ में रहने लगे हैं, लेकिन फिरसे उठ खड़े होने को जी चाहता है जब बेंजामिन फ्रेंक्लिन की यह बात नज़र पे आती है!
“जिन बातों से तकलीफ़ होती है, उनसे ही तालीम भी मिलती है”!
लेखक:शाहनवाज़ भारतीय, शोधकर्ता, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली!
नोट:ऊपर लिखी गई बातों में अधिकांश बातें डॉ. ए. पी. जे अबुल कलाम की हैं जो आज के नेताओं को भी आईना दिखाती हैं अगर वो देखना चाहें तो!
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कॉमरेड ज्ञानेद्र खंतवाल के नेतृत्व में उत्तराखंड के सीमान्त जिले चमोली में सी पी एम् ने किया केरल आपदा पीड़ितों के लिए चन्दा

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केरल में आई भीषण आपदा ने केरल को तहस नहस कर दिया है. पूरा भारत केरल के लिए आपदा रहत कोष जुटाने में लगा हुआ है. इसी दौरान भारतीय कमुनिस्ट पार्टी माक्सवादी, भारत ज्ञान विज्ञानं समिति और तमाम सामाजिक संगठनो द्वारा भारत के तमाम कोनो से राहत कार्य के लिए चन्दा एकत्र कर मानवता के हित में अपना योगदान देने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में उतराखंड के सुदूर पिछड़े एवं सीमांत इलाके में स्थित चमोली जिले के घाट ब्लाक में भी सी पी आई एम् के कार्यकर्ताओं ने केरल राहत कोष के लिए चन्दा इकठ्ठा किया.

घाट में किये जा रहे चंदा कार्यक्रम का नेतृत्व ज्ञानेंद्र खंतवाल द्वारा किया गया. ज्ञानेंद्र खंतवाल से हुई बातचीत में उन्होंने कहा की केरल में आई आपदा कोई छोटी आपदा नहीं है इस आपदा के लिए पुरे देश को एक जुट होकर के सामने आना होगा. केरल प्रगतिशील राज्य है और भारत सरकार को भी चाहिए की केरल की खूबसूरती को एक बार फिर से वापस लाने में केंद्र सरकार को भी अहम् भूमिका निभानी चाहिए.

उन्होंने आगे कहा सन 2013 में आई केदारनाथ आपदा में केरल से आई भारत ज्ञान विज्ञान समिति की डाक्टरों की टीम ने कई महीनो तक दवाइयों के साथ केदारनाथ में ही  डेरा डाल कर रखा हुआ था और उन्होंने आपदा पीड़ितों के लिए मुफ्त चिकित्सीय सहायता प्रदान किया था.

जब केरल आपदा के वक्त हमारे काम आ सकता है तो हमारा भी यह फर्ज बनता है कि जब केरल आपदा से जूझ रहा है तो हमें केरल के साथ तन मन और धन के साथ जुटना चाहिए.

घाट में हुए चन्दा कार्यक्रम में कामरेड मदन मिश्रा, कमलेश गौड़, मोहन सिंह रावत, नरेंद्र रावत, कुंवर राम, कान्ति, प्रताप सिंह, विक्रम, सोहन लाल आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

(प्रेस रिलीज द्वारा प्राप्त )

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RSS संचालित स्कूल में मासूम बच्चों से पूछा जा रही उसकी जाति, पिता ने किया फेसबुक पोस्ट

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कागज़ के फूलों से पूछी जा रही उसकी खुशबू की जाति !

गुरूजी, आखिर क्यों पूछते हो बच्चो से उनकी जाति ?

मासूम बच्चो के कोमल मनमस्तिष्क में भरी जा रही जाति का जहर

आनंदराम ढांढनिया सरस्वती विद्या मंदिर भागलपुर में अनोखा कारनामा

भागलपुर के आनंदराम ढांढनिया सरस्वती विद्या मंदिर में छोटे छोटे बच्चो से उसकी जाति पूछी जा रही है . यह कारनामा और कोई नहीं खुद स्कूल के क्लास टीचर कर रहे है… जिसे स्कूल में बच्चे आचार्य जी कह कर सम्बोधित करते है, शनिवार को अंतिम पीरियड में क्लास में बच्चो से क्रमवार तरीके से उसकी जाति पूछी गयी …कई बच्चो ने ठीक से जबाब से दे दिया लेकिन जब पांचवी में पढ़ने वाली मेरी बिटिया तनिष्का सिंह से जब यह सवाल पूछा गया तो वह सही जबाब नहीं दे सकी ,,उसने अपना नाम बताया तनिष्का सिंह तो क्लास टीचर ने कहा भूमिहार हो ? मेरी बेटी ने कहा ये क्या होता है ,, मैं नहीं जानती , क्लास टीचर ने कहा ,,, स्कूल आईडी दिखाओ-जहा नाम लिखा था – तनिष्का सिंह गहलौत . क्लास टीचर ने कहा – बाबू साहब हो ,,,मेरी बिटिया ने कहा – नहीं जानते सर.. राजपूत हो … बिटिया ने कहा नहीं जानते सर,, मेरे पापा को pata होगा,? क्लास टीचर ने आईडी कार्ड पर मेरा नाम लिखा देखा, कहा – सोमनाथ आर्य,, जाति समझ में नहीं आया ,,, तो बोले क्या करते है पापा ? बिटिया बोली – जौर्नालिस्ट है? क्लास टीचर ने कहा सोमवार को जाति पता कर आना,…
बिटिया जब घर आयी तो बोली – पापा मैं कौन सा कास्ट हूँ .मैंने कहा क्यों ? उसने कहा क्लास टीचर ने पूछा है… मैंने सिलसिलेवार तरीके से पूरी जानकारी ली. फिर स्कूल फ़ोन लगाया ,,,मैंने सवाल किया – छोटे बच्चो से उनकी जाति क्यों पूछी जा रही है, जबाब मिला,पटना से एक फॉर्म आया है,उसके लिए जाति पूछना अनिवार्य है … मैं अपने बच्चो को उसकी जाति बता दू या स्कूल जाकर उसके क्लास टीचर से मिलू ? मार्गदर्शन करे ? …… बच्चों से उसकी जाति पूछने वाले क्लास टीचर का नाम है ,,गोपाल आचार्य जो गणित पढाते है.

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