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राजनीति

पीएम मोदी ने पूछा-आखिर मुझसे इतनी नफरत क्यों? इस शख्स ने गिना दिए 22 कारण

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नई दिल्ली। गुजरात चुनाव में मुद्दे भटकाने का चांस देख रही भाजपा के पास एक मुद्दा उस वक्त हाथ लगा जब कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने उऩ्हें ‘नीच आदमी’ कह दिया। अय्यर के इस बयान से भाजपा को संजीवनी हाथ लगती नजर आई और पीएम मोदी ने इसे जाति से जोड़ लिया। कांग्रेस ने भले ही अय्यर से इस बयान पर मांफी मंगवाई और पार्टी से निष्काषित कर दिया लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लोगों से जुड़ने का मुद्दा बना दिया।

रैलियों में खुद की उपेक्षा झेलते आ रहे पीएम ने कहा कि आखिर मुझसे इतनी नफरत क्यों है? लोगों का मुझपर भरोसा करना गलत है क्या? ”मैं ‘नीच’ क्यों हूं? क्योंकि मैं एक गरीब परिवार में पैदा हुआ हूं, क्योंकि मैं निचली जाति से आता हूं? क्योंकि मैं एक गुजराती हूं? क्या सिर्फ यही वजह है कि वो लोग मुझसे नफरत करते हैं।” प्रधानमंत्री के इन सवालों का एक फेसबुक यूजर देवदन चौधरी ने सिलसिलेवार प्वाइंट्स में जवाब दिया है।

देवदन चौधरी ने 22 कारण बताते हुए लिखा है कि इस वजह से लोगों को आप पर विश्वास नहीं है। देवदन चौधरी का ये फेसबुक पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। ये प्वाइंट्स इस प्रकार हैं…..

Here is a brief list to answer your question Mister Prime Minister: 1. For destroying India's economy via…

Posted by Devdan Chaudhuri on Friday, 8 December 2017

1. डिमोनेटाइज़ेशन के माध्यम से भारत की अर्थव्यवस्था को नष्ट करने और क्षति के लिए जिम्मेदारी नहीं लेने के लिए।

2. संगठित ध्रुवीकरण के माध्यम से संस्कृति को नष्ट करने के लिए- न सिर्फ धार्मिक, बल्कि क्षेत्रीय, भाषाई और सांस्कृतिक भी।

3. हिंदू धर्म/सनातन धर्म की गहन शिक्षाओं को नष्ट करने के लिए।

4. नकली राष्ट्रवाद की जड़ें जारी रखने के लिए। आपका काम और नीतियां केवल भारत को नुकसान पहुंचा रही हैं।

5. सिर्फ सरकार, पर भारत की नहीं, बल्कि हिंदुओं और विदेशी निहित हितों के लिए- खासकर जियोनिस्ट वैश्विक बैंकिंग कार्टेल के लिए।

6. झूठे वादे जो हर रोज कई चैनलों के माध्यम से फैलाए जा रहे हैं।

7. भारतीय संविधान के सिद्धांतों का उल्लंघन करने के लिए।

8. डेम-फेनिंग मीडिया और संस्थानों द्वारा लोकतंत्र के खंभे को नष्ट करने के लिए- जो सत्य और न्याय के किसी भी प्रकार की पेशकश करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

9. लोगों की आवाज सुनने के बजाए जबरन धमका कर निर्देश लागू करने के लिए।

10. नफरत को बढ़ावा देने के लिए।

11. स्वतंत्रता को रोकने के लिए हर तरीके की चाल चली गई।

12. 2014 से सभी मानव विकास सूचकांकों को डुबाने के लिए।

13. नकली नैतिकता का खेल खेलने के लिए।

14. जो लोग आपसे सवाल पूछना चाहते हैं, उनसे बचने के लिए। सरकार में आने के बाद अब तक आपने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की।

15. राष्ट्र के वास्तविक मुद्दों के बजाय अपना प्रचार, प्रोपोगेंडा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए।

16. भारत की पारंपरिक विदेश नीति को ‘गैर-गठबंधन’ तरीके से बर्बाद करने के लिए।

17. भाषण के माध्यम से- नफरत और लालच फैलाने के लिए।

18. अपने आस-पास चापलूस रखने के लिए, जिन्हें गवर्नेंस करने का बिलकुल भी ज्ञान नहीं।

19. महान विचारों/गलत प्राथमिकताओं के बारे में जुनूनी होने के लिए और वितरित करने में असफल रहने के लिए।

20. सामाजिक न्याय को नजरअंदाज करके ‘विकास’ के अर्थ को गलत तरीके से पेश करने के लिए।

21. अमीरों के लिए गरीब और मध्य वर्ग के लोगों पर भार डालने के लिए।

22. लोगों का भरोसा तोड़ने के लिए।

इसके बाद देवदन चौधरी फेसबुक पोस्ट में आगे लिखते हैं कि- आप पूछ रह हैं- ‘लोग आपसे नफरत क्यों कर रहे हैं?’

देश

लोकसभा चुनाव 2019:- बेगूसराय में वामदल कितना मजबूत?

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हम सब यह जानते हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल फूंका जा चुका है, जिसके लिए हर दल ने अलग-अलग सीटों पर अपनी दाबेदरी पेश करना शुरू कर दिया है! इसी क्रम में बेगूसराय से लोकसभा प्रत्याशी के लिए CPI ने अपनी दाबेदरी कन्हैया कुमार के नाम से पेश किया है! डॉ. कन्हैया कुमार JNU छात्रसंघ के भूतपूर्व अध्यक्ष और देश के सबसे युवा चर्चित चेहरा हैं! वहीं दूसरी ओर अन्य दल ने भी अपनी दाबेदारी पेश की है! अब सवाल उठ रहा है कि CPI की दाबेदारी कितनी मजबूत है?

सबसे पहले यह बताता चलूँ कि वर्तमान बेगूसराय लोकसभा सीट पूर्व के बेगूसराय और बलिया को मिला के बना है जिसका क्षेत्र पूरा बेगूसराय ज़िला है, जिसमे सात विधानसभा आता है! ऐतिहासिक रूप से बेगूसराय को लेनिनग्राद के नाम से जाना जाता है जहाँ वामपंथ ने हमेशा के अपनी मजबूत उपस्थित दर्ज की है!

सातों विधानसभा सभा का अवलोकन जब करते हैं तो यह पाते हैं कि बेगूसराय विधानसभा सभा को कांग्रेस ने 10, भाजपा ने 5, राजद ने 0 तथा वामपंथ ने 3 बार जीता है! वहीं दूसरी ओर अगर उप विजेता को देखा जाय तो कांग्रेस 4, भाजपा 1, राजद 0 और वामदल 9 वार दूसरे नंबर पर रही हैं!

बखरी विधानसभा में कांग्रेस 2, भाजपा 1, राजद 2, तथा वामदलों ने 10 बार जीत हासिल की हैं और कांग्रेस 5, भाजपा 1, वामदलों ने 3 बार द्वितीय स्थान प्राप्त किया है!

तेघरा को कांग्रेस ने 2, भाजपा ने 0, राजद ने 1 तथा वामदलों ने 2 बार जीता है तथा कांग्रेस ने 2, भाजपा ने 0, राजद ने 1, तथा वामदलों ने 2 बार द्वितीय स्थान प्राप्त किया है!

मटिहानी को कांग्रेस ने 2, भाजपा ने 0, राजद ने 0, तथा वामदलों ने 3 बार जीता है जबकि कांग्रेस को 5, भाजपा को 1, राजद को 0 तथा वामदलों को 3 बार पराजय का सामना करना पड़ा है!

साहेबपुर कमाल जब से बना है एक बार राजद जीती और एक बार हारी है! जबकि पहले के बलिया विधानसभा में राजद, जदयू तथा लोजपा का दबदबा रहा है! तनवीर हसन साहब ख़ुद अपने यहाँ से दो बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं!

चेरिया बरियारपुर को कांग्रेस ने 2 बार, भाजपा ने 0, राजद ने 1 और वामदलों ने 1 बार जीता है वही दूसरी ओर कांग्रेस को 2, भाजपा को 0, राजद को 2 तथा वामदलों को 1 बार पराजय का सामना करना पड़ा है!

वही अगर पूर्व के बरौनी विधानसभा की बात करें तो सन 1977 से 2005 तक लगातार 8 बार सीपीआई ने चुनाव जीता है! सब मिलकर अगर देखा जाय तो हर दल से ज़्यादा वामदलों ने विधानसभा चुनाव जीतें हैं!
अब रही लोकसभा चुनाव की बात तो पहले बेगूसराय और बलिया दो अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र रहा है जिसमें से बेगूसराय में 1967 में सीपीआई ने कांग्रेस को हराकर चुनाव जीता था एवं पिछले चुनाव 2014 में भी सीपीआई ने 1,92,639 वोट लाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया था जबकि 1967 में 1, 80, 883 वोट लाकर सीपीआई ने चुनाव जीत लिया था! कहने का तात्यापर्य यह है कि सीपीआई का कैडर वोट अभी भी उसके साथ है क्योंकि 2009 के चुनाव में भी सीपीआई को 1,64,843 वोट आए थे!

बलिया लोकसभा जो पहले बेगूसराय से अलग था वहाँ सीपीआई तीन बार 1980, 1991 तथा 1996 में लोकसभा चुनाव जीत चुकी है! 1998 में भी जब राजद चुनाव जीती थी उस वक़्त भी 1,87,635 वोट पाकर सीपीआई 52,484 वोट से पिछड़कर दूसरे पायदान पर थी!

अभी तक के लोकसभा चुनाव को देखा जाय तो कुल 16 लोकसभा चुनाव में से सीपीआई ने 1962 से छः चुनाव लड़ी है जिसमें से 1962 हासिम अख़्तर (51, 163),1977 इंद्रदेव सिंह (72, 096), 1998 रमेन्द्र कुमार (विजयी 1,44,540), 2009 शत्रुघ्न प्रसाद सिंह (164843) एवं 2014 राजेंद्र प्रसाद सिंह (1,92,639) चुनाव लड़े हैं! वाकी 1962 से पहले सीपीआई ने चुनाव नहीं लड़ा है और बाद में कई बार गठबंधन के कारण दूसरे दल को समर्थन किया है! इस बार जब सीपीआई के पास भारत का सबसे चर्चित क्रांतिकारी चेहरा ख़ुद है तो फिर यह सवाल कहाँ से आता है कि वामदल का बेगूसराय में आधार नहीं है!

लोकसभा और विधानसभा दोनों को मिलाकर अवलोकन करने पर हम यह पाते हैं कि वामदल पूरे बेगूसराय के 7 विधानसभा क्षेत्रों में से मटिहानी एवं साहेबपुर कमाल को छोड़कर किसी भी विधानसभा में महागठबंधन के सारे घटकदल में से सबसे ज़्यादा मजबूत है! और अगर संभावित उम्मीदवारों को देखें तो कन्हैया कुमार से ज़्यादा लोकप्रिय उम्मीदवार कोई नहीं है! जहाँ तक क्षेत्र में लोगों के बीच मिलना-जुलना और मेहनत की बात करें तो कन्हैया कुमार 2014 के लोकसभा चुनाव से ही अपने क्षेत्र के लोगों के बीच काम कर रहे हैं अन्य किसी भी दल का कोई व्यक्ति उनके मुक़ाबके कहीं नहीं टिकता! जब भी बेगूसराय में किसी भी प्रकार का कोई भी सामाजिक वैमनस्यता फैलाने की कोशिश हुई वामपंथियों ने हर समाज के लोगों से कंधा से कंधा मिलाकर साम्प्रदायिक शक्तियों का डट कर मुक़ाबला किया है तब और नेतागण कहाँ थे!

वर्तमान सरकार में जनता पर हुए हर अत्याचार के विरुद्ध यहाँ से लेकर दिल्ली तक कन्हैया कुमार एवं उनका संगठन (AISF) और दल (CPI) ने हर मोर्चे पर आंदोलन कर साम्प्रदायिक शक्तियों को परास्त किया है, तो आज जब समाज को इनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है तब यह कहना कि इनका कोई आधार नही यह कहाँ तक उचित है! हाँ यह सच है कि राजद में तनवीर हसन ने बेगूसराय से पहली बार 2014 में कांग्रेस के समर्थन से चुनाव लड़ा और 3,69,892 वोट पाए लेकिन उनकी भी हार ही हुई, जबकि 2009 में जदयू से मुनाजिर हसन मात्र 2,05,680 वोट लाकर जीत हासिल की थी! तनवीर जी कई बार चुनाव लड़ चुके हैं पर अभी तक एक बार भी जीत नहीं पाएं हैं, हां एक बार MLC बने हैं जिसमें भी बेगूसराय सीपीआई के दो विधायकों ने ही उनकी मदद की थी!

अगर हम बेगूसराय लोकसभा की बात करें तो यहाँ का समीकरण हर बार अलग ही होता है! वर्तमान में सारे समीकरण, मेहनत, युवा जोश, ईमानदारी तथा लोकप्रियता को देखते हुए यह माना जा रहा है कि अगर सीपीआई/कन्हैया कुमार अकेले भी चुनाव लड़ेंगे तो उनकी जीत की संभावना को नकारा नहीं जा सकता!

जानत के विश्वास में भी कन्हैया कुमार सबसे ऊपर हैं! यह बात तो तय है कि कन्हैया कुमार जितनी प्रमुखता से अपने क्षेत्र के बारे में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय पटल पर बात रख सकते हैं कोई अन्य उम्मीदवार नहीं रख सकता! एक और बात जो कन्हैया कुमार को दूसरों से अलग करती है वो है उनकी विचारधारा जो किसी अन्य संभावित उम्मीदवार के पास नहीं है!

एक बात तो तय है कि कन्हैया कुमार दल बदलू नहीं हैं और ना ही उन्हें यह चिंता है कि हर बात कहने से पहले यह सोचना है कि कहीं कोई आका नाराज़ ना हो जाय! दूसरी बात कि कन्हैया कुमार जब अपने क्षेत्र का मुद्दा रखेंगे तो पूरा देश सुनेगा क्योंकि उनकी लोकप्रियता सिर्फ़ बेगूसराय तक ही सीमित नहीं है! तीसरी बात वो बेगूसराय की भौगोलिक परिस्थितियों से पूरी तरह वाकिफ़ हैं और जानते हैं कि अगर युवाओं ने इस बार उनका साथ दिया तो बेगूसराय में व्यवसाय तथा लघुउद्योगों की अपार संभावनाएं हैं; बस धर्म, जाति, सम्प्रदाय इत्यादि से ऊपर उठकर एक बार पूरे समाज की भलाई के मद्देनजर सही दिशानिर्देशन में चलने की आवश्यकता है!

~शाहनवाज़ भारतीय

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राजनीति

जेएनयू फरवरी 2016:- इन नारों की वजह से फंसाया गया है कन्हैया कुमार को।

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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में फरवरी 2016 में लगे नारों के मामले में दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, छात्र नेता उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को मुख्य आरोपी बनाया गया है. इन तीनों को इस मामले में जेल भी जाना पड़ा था.

दिल्ली पुलिस की 1200 पन्नों की चार्जशीट पर क्या संज्ञान लेना है, इसपर अदालत मंगलवार को फैसला करेगी. इस चार्जशीट में सात कश्मीरी छात्रों को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है. इनके अलावा 36 अन्य को कॉलम नंबर 12 में आरोपी बनाया गया है, जो कि कथित तौर पर घटनास्थल पर मौजूद थे.

चार्जशीट में मुख्य आरोपी कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य हैं. इनके अलावा सात अन्य मुख्य आरोपियों में सात कश्मीरी छात्र हैं, जिनमें- मुजीर (जेएनयू), मुनीर (एएमयू), उमर गुल (जामिया), बशरत अली (जामिया), रईस रसूल (बाहरी), आकिब (बाहरी) और खालिद भट (जेएनयू) का नाम है.

इनके अलावा, नारेबाजी वाली जगह पर मौजूद 36 आरोपियों में शेहला राशिद, अपराजिता राजा, रामा नागा, बनज्योत्सना, आशुतोष, ईशान आदि हैं. केस के सबूत के तौर पर वीडियो फुटेज और 100 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही है.

चार्जशीट के मुताबिक ये नारे लगे थे जेएनयू में

हम क्या चाहते आजादी

हम लेके रहेंगे आजादी

गो इंडिया, गो बैक

संगबाजी वाली आजादी (पत्थर फेंकने के लिए आजादी)

भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह

कश्मीर की आजादी तक जंग रहेगी

भारत की बर्बादी तक आजादी

भारत के मुल्क को एक झटका और दो

भारत को एक रगड़ा और दो

हम छीन के लेंगे आजादी, लड़के लेंगे आजादी

तुम कितने मकबूल मारोगे, हर घर से मकबूल निकलेगा

इंडियान आर्मी को दो रगड़ा

इंडियन आर्मी पे हल्ला बोल

उमर और अनिर्बान ने कहा- झूठी सरकार के झूठे आरोप

उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य ने कहा है कि ये सारे आरोप झूठे हैं और वे इनका कानूनी तौर पर मुकाबला करेंगे. दोनों ने संयुक्त बयान में कहा है कि सरकार झूठ बोलने और जुमलेबाजी में माहिर है और चुनाव नजदीक आते ही मंदिर, मूर्ति, 10 फीसदी आरक्षण और एंटी-नेशनल जैसे मुद्दे सामने आ रहे हैं.

इनके अलावा कन्हैया कुमार ने भी इस मामले पर ट्वीट कर अपनी बात रखी है

“मोदी जी से हमने 15 लाख, रोज़गार और अच्छे दिन माँगे थे, देश के अच्छे दिन आए न आए कम से कम चुनाव से पहले हमारे ख़िलाफ़ चार्जशीट तो आई है। अगर यह ख़बर सही है तो मोदी जी और उनकी पुलिस को बहुत-बहुत धन्यवाद”।

जेएनयूएसयू ने कहा है कि मौजूदा केंद्र सरकार अपने काम में असफल रही है, इसलिए लोक सभा चुनावों से ठीक पहले तीन साल पुराने केस में चार्जशीट दाखिल की है. छात्र संघ ने कहा है कि वह इन बोगस चार्जों के अलावा अपने हर विद्यार्थी के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा.

इस मामले में शिकायत करने वाले छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कहा है कि यह निर्णय एबीवीपी की जीत है. यह उन तथ्यों की जीत है जो एबीवीपी ने उसी समय सबके सामने रखे थे. यह कांग्रेस और उन सभी राजनीतिक लोगों पर तमाचा है जो उनका समर्थन कर रहे थे. राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल अब शांत क्यों हैं? उनको देश से माफी मागनी चाहिए.

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देश

वाराणसी में किया गया हनुमान जी के जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन

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अब इस से बड़ा उदाहरण क्या होगा इस बात का की राजनीति में सब कुछ जायज है. अपने फ़ायदे के लिये किसी भी चीज को मुद्दा बनाकर राजनीति की जाती है, फिर चाहे भगवान ही क्यों न हों. ताज़ा मामला भगवान राम के बाद हनुमान को दलित बताने के बाद मचे सियासी घमासान का है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों एक चुनावी रैली में हनुमान को दलित समुदाय का बताया था, जिस पर राजनीति शुरू हो गई है. उत्तर प्रदेश के ही एक जिले में जहां दलित समुदाय द्वारा बजरंगबली के एक मंदिर पर कब्जे की खबर सामने आई, तो अब पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हनुमान जी का जाति प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है. इसके लिए बाकायदा आवेदन किया गया है.

जिला मुख्यालय पर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के युवजन सभा के लोग इकट्ठा हुए और उन्होंनेबजरंगबली के जाति प्रमाण पत्र की मांग की. इसके लिये कार्यकर्ताओं ने बाकायदा जाति प्रमाण पत्र प्राप्त का आवेदन फॉर्म भरा. रोचक बात यह है कि कार्यकर्ताओं ने आवेदन फॉर्म में वांछित जानकारी भी भरी है. जैसे, बजरंगबली के पिता का नाम महाराज केशरी, जाति में वनवासी आदि भरा हुआ है. कार्यकर्ता फॉर्म लेकर कार्यालय में गए और जाति प्रमाणपत्र की मांग की. प्रगतिशील युवजन सभा के लोग हनुमान जी के दलित होने पर उनके आरक्षण की भी मांग कर रहे है. सभा के जिला अध्यक्ष हरीश मिश्रा कहते हैं कि पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ ने हनुमान जी को दलित बताया था. उसी क्रम में आज यहां उनके जाती प्रमाण के लिए आवेदन दिया गया.

हरीश मिश्रा ने कहा कि जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगातार भगवान को राजनीति में घसीटा जा रहा है, उसके विरोधस्वरूप हमने ये कदम उठाया. पहले राम जी को घसीटा, अब हनुमान को. अगर वह दलित हैं तो जाति प्रमाण पत्र दें और हम उनके आरक्षण की भी मांग करेंगे. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों राजस्थान के अलवर में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि ‘बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं, जो स्वयं वनवासी हैं, निर्वासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं. भारतीय समुदाय को उत्तर से लेकर दक्षिण तक पुरब से पश्चिम तक सबको जोड़ने का काम बजरंगबली करते हैं.’

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