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RSS चीफ ने इमरजेंसी में इंदिरा से मांगी थी माफी: स्वामी

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्‍यम स्वामी ने इमरजेंसी के मामले में अपनी ही पार्टी और संघ के खिलाफ चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं.

द हिंदू में कुछ दिनों पहले लिखे एक लेख स्वामी ने कहा है कि बीजेपी और संघ के ज्यादातर नेताओं ने इमरजेंसी के खिलाफ संघर्ष के साथ विश्वासघात किया था. ऐसे में बीजेपी नेताओं का इमरजेंसी के 25 साल पूरे होने पर देशभर में विरोध दिवस मनाने की अपील हास्यास्पद है

स्वामी ने लिखा है महाराष्ट्र असेंबली की कार्यवाही में दर्ज है कि उस दौर में आरएसएस के चीफ बालासाहेब देवरस ने पुणे की यरवदा जेल से माफी मांगते हुए इंदिरा गांधी को कई चिट्ठियां लिखी थीं. उन्होंने कहा था कि संघ जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चलाए जा रहे आंदोलन से खुद को अलग कर लेगा और इंदिरा गांधी की ओर से लाए गए 20 सूत्रीय कार्यक्रम के लिए काम करेगा. लेकिन इंदिरा गांधी ने इन चिट्ठियों का कोई जवाब नहीं दिया था.

स्वामी ने लिखा:

अटल बिहारी वाजपेयी ने भी माफी मांगते हुए इंदरा गांधी को चिट्ठी लिखी थी और इंदिरा ने उन्हें माफ कर दिया था. वास्तव में जिन 20 महीनों के दौरान देश में इमरजेंसी रही, तब तक वाजपेयी परोल पर जेल से बाहर रहे. उन्होंने लिखित आश्वासन दिया था कि वह सरकार के खिलाफ किसी कार्यक्रम में शिरकत नहीं करेंगे. अकाली दल के नेता सुरजीत सिंह बरनाला ने अपनी किताब में संघ के उन नेताओं का ब्योरा दिया है, जो अच्छे व्यवहार का वादा कर जेल से बाहर आए थे.

सुब्रह्मण्‍यम स्वामी ने लिखा है कि जहां संघ के कुछ नेताओं ने इंदिरा के सामने झुक कर माफी मांग ली. वहीं इंदिरा के खिलाफ कुछ नेता डटे रहे. इनमें मोरारजी देसाई और जयप्रकाश नारायण अहम थे.

जेल से बाहर आकर जयप्रकाश नारायण यह देख कर निराश थे कि लोकतंत्र की हत्या पर भारत की जनता उदासीन थी. जेपी के आगे-पीछे लगे रहने वाले आरएसएस के नेताओं ने उनसे किनारा कर लिया था और इंदिरा के लिए काम करने की पेशकश करने लगे थे. हालांकि सुब्रह्मण्‍यम स्वामी ने आरएसएस के उन नेताओं का जिक्र किया है, जो इंदिरा के खिलाफ डटे हुए थे. इनमें माधवराव मूले, दत्तोपंत ठेंगड़ी और मोरोपंत पिंगले प्रमुख थे.

सुब्रह्मण्‍यम स्वामी ने लिखा है:

सुब्रह्मण्‍यम स्वामी ने लिखा है कि जहां संघ के कुछ नेताओं ने इंदिरा के सामने झुक कर माफी मांग ली. वहीं इंदिरा के खिलाफ कुछ नेता डटे रहे. इनमें मोरारजी देसाई और जयप्रकाश नारायण अहम थे.

जेल से बाहर आकर जयप्रकाश नारायण यह देख कर निराश थे कि लोकतंत्र की हत्या पर भारत की जनता उदासीन थी. जेपी के आगे-पीछे लगे रहने वाले आरएसएस के नेताओं ने उनसे किनारा कर लिया था और इंदिरा के लिए काम करने की पेशकश करने लगे थे. हालांकि सुब्रह्मण्‍यम स्वामी ने आरएसएस के उन नेताओं का जिक्र किया है, जो इंदिरा के खिलाफ डटे हुए थे. इनमें माधवराव मूले, दत्तोपंत ठेंगड़ी और मोरोपंत पिंगले प्रमुख थे.

सुब्रह्मण्‍यम स्वामी ने लिखा है:

1975 से 1977 तक यानी इमजरेंसी के दौर की तुलना में आज भारतीय लोकतंत्र ज्यादा खतरे में हैं. इसकी एक वजह तो यह है कि जात-पांत न मानने वाले स्वतंत्रता आंदोलन के बड़े नेता आज नहीं हैं. दूसरी वजह है कि एक कैडर आधारित फासिस्ट पार्टी सत्ता पर कब्जा किए हुए है. यह संगठन आज एक लुम्पेन संगठन में तब्दील हो गया है. असहाय धर्म प्रचारकों का भी कत्ल करने से नहीं हिचक रहा है. साफ है कि आज धीरे-धीरे इमरजेंसी संस्थानों को निगल रही है. इसलिए बीजेपी का इमरजेंसी के खिलाफ काला दिवस मनाने की अपील हास्यास्पद है.

‘बीजेपी पूरे संविधान को बदल देना चाहती है’

स्वामी ने लिखा, ”बीजेपी संविधान में सिर्फ एक संशोधन नहीं करना चाहती. वह पूरे संविधान को बदलना चाहती है. इसने इतिहास को फिर से लिखने की शुरुआत कर दी है. वीएचपी और बजरंग दल जैसे इसके सहयोगी संगठनों ने समाज में आतंक और डर फैलाना शुरू कर दिया है. ऐसे में बीजेपी लोकतंत्र की रक्षा की बात कैसे कर सकती है.”

साभार- the quint

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दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या 1 लाख के पार, केजरीवाल की अपील घबराने की कोई बात नहीं

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि हालांकि राष्ट्रीय राजधानी में कोरोनावायरस रोग के मामलों की संख्या एक लाख को पार कर गई है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है।

केजरीवाल ने एक डिजिटल प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “दिल्ली में 1 लाख का आंकड़ा पार कर चुके हैं लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि करीब 72000 लोग भी ठीक भी हुए हैं ।

कोरोनावायरस बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए उनकी सरकार द्वारा किए गए कार्यों को सूचीबद्ध करते हुए केजरीवाल ने कहा, ‘25,000 सक्रिय मरीजों में से 15,000 का इलाज घर पर किया जा रहा है और मृत्यु दर में भी कमी आई है। हमने देश का पहला कोरोना प्लाज्मा बैंक भी शुरू किया है । हमारे परीक्षणों से पता चला है कि प्लाज्मा थेरेपी मध्यम रोगियों को काफी सुधार करने में मदद कर सकते हैं । “

उन्होंने शहर के लोगों से भी आग्रह किया कि वे इस बीमारी को ठीक करने में मदद के लिए प्लाज्मा दान करें । जो लोग इसे दान करने के लिए आगे आ रहे हैं उससे अधिक प्लाज्मा की जरूरत है । मैं उन सभी लोगों से आग्रह करता हूं जो पात्र हैं कि वे आगे आएं और प्लाज्मा दान करें । इससे किसी तरह का दर्द या कमजोरी नहीं आएगी। प्लाज्मा दान करने वाले समाज के लिए निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने रविवार को कहा था कि दिल्ली में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत वाले लोगों की संख्या में कमी आ रही है।

केजरीवाल ने कल ट्वीट किया, “दिल्ली में कम और कम लोगों को अब अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है, ज्यादा से ज्यादा लोग घर पर ठीक हो रहे हैं । “जबकि पिछले हफ्ते लगभग 2300 नए मरीज थे, अस्पताल में मरीजों की कोई भी 6200 से घटकर 5300 हो गई है । उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, आज 9900 कोरोना बेड मुफ्त हैं ।

इस बीच दिल्ली सरकार ने घोषणा की कि दिल्ली सरकार के तीन अस्पतालों में इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) बेड की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है । रविवार को दिल्ली सरकार के एक बयान के अनुसार, शहर के तीन प्रमुख कोविद समर्पित अस्पतालों-लोक नायक (एलएनजेपी), गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में आईसीयू बेड में 169% की वृद्धि देखी गई है ।

दिल्ली रोजाना हजारों नए कॉविड-19 केस दर्ज कर रही है। रविवार तक शहर में 3067 मौत की खबरें आ चुकी थीं ।

लेकिन जिस दर पर राज्य की आबादी सकारात्मक हो रही है, उसमें लगातार गिरावट आ रही है, जिससे अधिकारियों को उम्मीद है कि यह बीमारी राष्ट्रीय राजधानी में इसके फैलाव के करीब है

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पेट्रोल और डीजल की बढती कीमतों का आम जनता पर कोई असर नहीं: पेट्रोलियम मंत्री प्रधान

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देश में लगातार बढती पेट्रोल और डीजल की कीमतों का बचाव करते हुए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा की राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था अभी बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रही है जिसके कारण तेल के डिमांड और सप्लाई पर वैश्विक असर पड़ा है.

उन्होंने आगे कहा की लॉकडाउन के कारण अप्रैल और मई में पेट्रोल और डीजल के मांग में 70 फीसदी की कमी आई थी और अब धीरे धीरे सभी आर्थिक गतिविधि सामान्य हो रही है, इसलिए इसका किसी आम जनता के जीवन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा की जब किसी परिवार में कोई चुनौती आती है तो लोग पैसों को ध्यान से सम्हाल कर रखते हैं ताकि भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना कर सके इस बढे हुए दाम को इसी तरह देखना चाहिए.

उन्होंने कहा की इस पढ़े हुए टैक्स के पैसों को देश की स्वास्थ्य व्यवस्था सही रोजगार पर खर्च किया जाएगा जिससे देश की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके, उन्होंने आगे कहा की हमने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना सहित कई योजनाओं के अंतर्गत 1,70,000 करोड़ की मदद गरीबों तक पहुचाई है.

बता दें की अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में काछे तेल की कम कीमतों के बावजूद देश में लगातार तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है जिसके कारन सोनिया गाँधी सहित विपक्ष के नेता अचानक ही सरकार पर हमलावर हो गए.

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चीन के 59 एप्स पर भारत में प्रतिबन्ध के बाद TikTok का आया बयान, किसी ने साझा नहीं करता जानकारी.

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नई दिल्ली : भारत सरकार की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद TikTok की ओर से बयान आया है कि वह आदेश के पालन करने की प्रक्रिया में है. वहीं गूगल प्ले स्टोर और आईफोन से टिकटॉक को हटा दिया गया है. देशभर में मशहूर शॉर्ट वीडियो सर्विस ने यह भी कहा है कि ”भारतीय कानून के तहत डेटा को गोपनीय रखना और सुरक्षा आवश्यकताओं का पालन करना जारी रखा जाएगा.”

इसके साथ ही उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा है कि ”हमने किसी भी भारतीय टिकटॉक यूजर की कोई भी जानकारी विदेशी सरकार या फिर चीन की सरकार को नहीं दी है”. टिकटॉक इंडिया के हेड निखिल गांधी ने एक बयान में कहा कि, ”हमें स्पष्टीकरण और जवाब देने के लिए संबंधित सरकारी हितधारकों से मिलने के लिए आमंत्रित किया गया है”

उन्होंने कहा, ”टिकटॉक ने अपने प्लेटफॉर्म को भारत में 14 भाषाओं में उपलब्ध करा कर इंटरनेट का लोकतांत्रिकरण किया है. इस एप का इस्तेमाल लाखों लोग करते हैं. इनमें से कुछ कलाकार, कहानीकार और शिक्षक हैं और अपनी जिंदगी के अनुसार वीडियो बनाते हैं. वहीं कई यूजर्स ऐसे भी हैं, जिन्होंने पहली बार टिकटॉक के जरिए इंटरनेट की दुनिया को देखा है”.

टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, वीचैट, शेयरइट और कैम स्केनर उन 59 चीन की ऐप्स में शामिल हैं, जिन्हें सरकार द्वारा देशभर में बैन किया गया है.

सरकार की तरफ से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि ‘उपलब्ध सूचना के अनुसार, ये ऐप्स उन गतिविधियों में लगे हुए हैं जो भारत की संप्रभुता और अखंडता,सुरक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरनाक हैं.’

दरअसल, कहा जा रहा है की सरकार द्वारा यह कदम लद्दाख के गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प के बाद उठाया गया है. बता दें, 15 और 16 जून को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में कर्नल समेत भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे. इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच सीमा पर तनातनी बनी हुई है.

 

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