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गोल गोल गोयल बजट- डेडलाइन का पता नहीं, केवल हेडलाइन है

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फरवरी 2019 में 29 साल का एक मज़दूर असंगठित क्षेत्र में प्रवेश करता है। 31 साल तक हर महीने 100 रुपये जमा कराता है। सरकार भी 100 रुपये जमा कराती है। 2050 में वह साठ साल का हो जाता है। तब उसे पीयूष गोयल की स्कीम के अनुसार हर महीने 3000 की पेंशन मिलेगी।

उस समय रुपये की कीमत के हिसाब से ये चवन्नी के बराबर है या चवन्नी से कम, आप अपने फोन में मौजूद कैलकुलेटर का इस्तमाल करें।

इसकी जगह सरकार को बताना चाहिए था कि अटल पेंशन योजना से कितने मज़दूरों को कितनी पेंशन दी जा रही है। ताकि स्थिति का अंदाज़ा हो जाता।

असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को साठ साल के होने पर 3000 की पेंशन देने की योजना और घोषणा हेडलाइन की लूट से अधिक नहीं हैं। जो कल हिन्दी अख़बारों में छप कर लहर पैदा करने लगेगी।

सरकार यही बता देती कि उसके राज में कितने मज़दूरों को न्यूतनम मज़दूरी सुनिश्चित कराई गई है। असंगठित क्षेत्र में 40 करोड़ मज़दूर या लोग काम करते हैं। 10 करोड़ के लिए यह योजना बनी है।

गंगा मैय्या ने प्रधानमंत्री को बुलाया था। 5 साल के लिए गद्दी पर बिठाया था। उन्हें फिर से गंगा मैय्या के पास जाना है। बनारस में आरती के फुटेज लाइव दिखाने हैं। कम से कम इस साल नमामि गंगे का बजट बढ़ाया जा सकता था।

मगर अफसोस। इस बजट में नमामि गंगे का बजट 2250 करोड़ से घटाकर 700 करोड़ कम कर दिया। अब गंगा मैय्या तो सवाल नहीं करेंगी कि 1500 करोड़ किसके कहने पर घटाए।

2015 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी योजना लांच हुई थी। देश के 96 ज़िलों में जहां 30 प्रतिशत से कम सिंचित भूमि थी। 2018-19 के बजट में इस योजना के लिए 2600 करोड़ दिया गया मगर खर्च हुआ 2181 करोड़।

एक ही साल में हर खेत को पानी योजना का बजट 1700 करोड़ कम कर दिया गया। 2019-20 के लिए मात्र 903 करोड़ दिए गए हैं। क्या इस योजना के लक्ष्य पूरे हो गए।

गर्भवती महिला और बच्चे के लिए प्रधानमंत्री मातृत्व योजना लांच हुई थी। 2018-19 में 2400 करोड़ दिया गया मगर खर्च हुआ 1200 करोड़ ही। क्यों सरकार ने इस योजना पर खर्च नहीं किए?

प्रधानमंत्री कौशल योजना का बजट भी 400 करोड़ कम हो गया है। इसके तहत बनाए जाने वाले या चलाए जाने वाले मल्टी स्किल ट्रेनिंग संस्थानों के लिए कोई प्रावधान नहीं है। 2018-19 में 3400 करोड़ था। 2019-20 के लिए 400 करोड़ कम है।

साइंस एंड टेक्नालजी मंत्रालय में रिसर्च का बजट 609 करोड़ से कम हो कर 493 करोड़ हो गया है।

आंगनवाड़ी और आशा वर्कर को 3000 का मानदेय मिलता है। 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। यानी 4500 मिलेगा। न्यूनतम मज़दूरी से काफी कम।

अब आते हैं 2 हेक्टेयर से कम जोत के मालिक किसानों पर। उन्हें हर महीने 500 रुपये मिलेंगे। वही बता सकते हैं कि सरकार से 500 रुपया पा कर उन्होंने कौन सा धन पा लिया और इतिहास बना लिया।

सालाना 5 लाख तक आमदनी वालों को हर महीने 1000 से अधिक की बचत हो गई है। उन्हें न तो टैक्स देना होगा और न फार्म भरना होगा। ऐसे 3 करोड़ अब छुट्टी मनाएं और होली भी।

बाकी 4 करोड़ पर टैक्स देने की जवाबदेही होगी। उन्हें भी कुछ कुछ लाभ मिला है लेकिन वो अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से पूछें कि कितना लाभ हुआ है और कितना नहीं। इंकम टैक्स पर सरचार्ज 3 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गया है मगर दो फ्लैट वालों को बड़ी राहत मिली है। बल्कि ऐसे लोगों को इस बजट में सबसे अधिक फायदा हुआ है।

नौकरी देने वाला सेक्टर है टेक्सटाइल। कभी 6000 करोड़ के पैकेज का खूब हंगामा हुआ। हेडलाइन बनी थी। इसके बजट में 1300 करोड़ की कमी हो गई है। लगता है कि 6000 करोड़ के पैकेज से 10 लाख रोज़गार पैदा करने का दावा फुस्स हो गया। आप इस बारे में इंटरनेट सर्च कर लें।

बेरोज़गारों को कुछ नहीं मिला। उन्हें प्रदर्शन करने की छूट है। टीवी देखने की जिस पर उनकी लड़ाई का कवरेज कभी नहीं आएगा।

भारत सरकार के पास नौकरी का अपना डेटा नहीं है। जो अपना है उस पर शक है। मेकैंजी के डेटा पर भरोसा है। ओला और उबर ने कितनी नौकरी दी ये पता है मगर उनके विभागों से जुड़ी परियोजनाओं ने कितनी नौकरी दी ये पता नहीं है।

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“तिहाड़ के सुपरिटेंडेंट पर अरबपति कैदी से जबरन एक करोड़ रुपए रिश्वत मांगने का आरोप, उच्च न्यायालय मे याचिका दर्ज…

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By – Haidar Baaghi

पॉलीटिकल फिक्सर और अरबपति कैदी के नाम से मशहूर सुकेश चंद्रशेखर ने तिहाड़ जेल नंबर (8-9) के (अधीक्षक) पवन कुमार अहलावत एवं मनोज गोगिया (जेल कैदी) के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दर्ज कराई! याचिका कर्ता को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने अप्रैल 2017 में गिरफ़्तार किया था, तब ही से वह तिहाड़ की जेल नंबर 4 में बंद था!

कुछ दिन पहले सुकेश चंद्रशेखर के मोबाइल फोन का इस्तेमाल किए जाने के शक के चलते हैदराबाद से सीबीआई की टीम ने तिहाड़ जेल में छापा मारा था! उस वक़्त सीबीआई की टीम को सुकेश के पास से किसी तरह का कोई मोबाइल फोन नहीं मिला था!

इसके बावजूद उन्हें जेल नंबर 04 से जेल नंबर 08 और जेल नंबर 09 में स्थानांतरित कर दिया। याचिकाकर्ता, पॉलिटिकल फिक्सर, सुकेश चंद्रशेखर को जेल नंबर 4 से 8-9 मे जिस वक़्त ट्रांसफर किया गया, पवन कुमार अहलावत (जेल अधीक्षक) ने याचिकाकर्ता को धमकी देना शुरू कर दिया था!

याचिकाकर्ता को दंडित किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने जेल अधीक्षक श्री पवन कुमार अहलावत को तिहाड़ जेल में 1 करोड़ रुपये का भुगतान करने से इनकार कर दिया और उच्च जोखिम (एकांत कारावास) में जेल काट दिया। याचिकाकर्ता ने जेल अधीक्षक द्वारा मांगे गए रिश्वत के खिलाफ जांच शुरू करने का अनुरोध किया और याचिकाकर्ता को सजा दी गई। यह न केवल याचिकाकर्ता है, बल्कि अन्य कैदियों को राशि का भुगतान करने के लिए परेशान किया जा रहा है।

To Be Continue…!!!

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भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं पर लगे आजीवन प्रतिबंध: अखिलेश यादव

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Story By/- Haidar Baaghi

समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा नेताओं के बयानों की भाषा को लेकर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें जमकर निशाने पर लिया है! उनकी मांग है कि ऐसे नेताओं पर कार्रवाई करके उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया जाना चाहिए! यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि ‘भाजपा के जनप्रतिनिधियों का हिंसक वाचन एक भयावह स्थिति है! निम्नस्तरीय भाषा का इस्तेमाल न केवल छुटभइये नेता कर रहे हैं, बल्कि भाजपा के मंत्री भी वही भाषा बोल रहे हैं! ‘डंके की चोट पर’… ‘बोली के बदले गोली’ और ‘गोली मारो……..’ के साथ ही अब भाजपाई धुरंधर आजादी की लड़ाई के इतिहास को भी बिगाड़ने में लग गए हैं!


अखिलेश यादव ने भाजपा नेता अनंत हेगड़े के महात्मा गांधी पर दिए बयान पर क्षोभ जताते हुए कहा कि ‘गांधी जी के नेतृत्व में जिस आजादी के लिए लाखों लोगों ने कुर्बानी दी उसे भाजपा के एक सांसद को अंग्रेजों की सहमति से नाटक बताते शर्म नहीं आई, अखिलेश ने भाजपा पर यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं की नफरत भरी बयानबाजी के चलते कुछ युवा गुमराह होकर उन्मादी हो रहे हैं! अखिलेश यादव ने कहा, आज के सत्ताधारी जिस प्रकार समाज को नफरत से भर रहे हैं उसी का ये दुष्परिणाम है कि कुछ नौजवान असलहों के साथ साम्प्रदायिक उन्माद का प्रदर्शन करने लग गए हैं! राजनीति द्वारा पोषित इस घृणा से युवाओं में जो भटकाव आ रहा है, वह समाज और राष्ट्र की चिंता का विषय है! भाजपा-आरएसएस को इसके दुष्परिणामों से अभी से सबक लेना चाहिए!

अखिलेश यादव ने दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जिस तरह से सियासी पार्टियों ने अलग-अलग तरीके से बयान जारी किए हैं उस पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि, दिल्ली के चुनावों में भाजपाई बदजुबानी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है! इससे साबित होता है कि भाजपा अपनी साख और जमीन दोनों खोती जा रही है! भाषा के स्तर में गिरावट राजनीति में घटिया सोच और संकीर्ण मानसिकता को उजागर करती है! माननीय उच्च न्यायालय और चुनाव आयोग को बिगड़े बोलों का संज्ञान लेकर तुरन्त दंण्डात्मक कार्यवाही करनी चाहिए!

अखिलेश यादव ने मांग की है कि जरूरी तो यह है कि जानबूझकर भड़काऊ बयान देने वाले ऐसे असामाजिक तत्वों की संसद या विधानमंडल की सदस्यता रद्द करके इन पर सदैव के लिए प्रतिबंध लगाना चाहिए! साथ ही आगामी चुनावों में उन विषयों की सूची चुनाव आयोग को पहले से ही जारी करनी चाहिए जिन पर बोलने से दोषी की उम्मीदवारी रद्द हो जाए!

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भारत के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को लेकर शाहीनबाग के प्रदर्शनकारी दो गुटो में बटे।

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Story By/- Haidar Baaghi

भारत के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को लेकर शाहीनबाग के प्रदर्शनकारी दो गुटो में बंट गए हैं! याद रहे गृहमंत्री अमित शाह ने प्रदर्शनकारियों को एक चैनल के माध्यम से मुलाकात का न्योता दिया था। शाहीनबाग के कुछ प्रदर्शनकारी गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के पक्ष में आगे आए हैं, इन प्रदर्शनकारियो का कहना है कि वे आज दोपहर दो बजे मार्च करते हुए गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर उनसे मिलने के लिए जाएंगे!

दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार अमित शाह से मुलाकात और मार्च को लेकर अब तक किसी ने पुलिस से संपर्क नहीं किया है, मार्च की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि प्रदर्शनकारी मिलना चाहते हैं, तो वे गृह मंत्रालय से प्रतिनिधिमंडल मंडल की मुलाकात के लिए संपर्क करें! लेकिन शाहीनबाग से मार्च करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी!

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