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बैंकों के भीतर ग़ुलामी की कालकोठरी सीरीज़ 3,”आप बुज़दिल इंडिया चाहते हैं या बहादुर इंडिया ?”

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तीन चार दिन पहले की बात है। एक बैंक का सीनियर अफसर बाज़ार से चूड़ियां ख़रीद लाया अपने नीचे के अफसर को पहनाने के लिए। जुर्म क्या था? अटल पेंशन योजना बेचने का जो दैनिक टारगेट दिया गया था, उसे पूरा नहीं कर पाया था। पूरे बैंक में खड़े उस बैंक कर्मचारी की हालत सोचिए। जो मैनेजर चूड़ियां ख़रीद लाया था उस नालायक के बारे में भी सोचिए कि वह अपनी पत्नी के साथ कैसे बर्ताव करता होगा। पहनाने की नौबत नहीं आई क्योंकि कुछ अफसरों ने दोस्ताना एतराज़ किया।

पिछले दस दिनों में हर राज्य के हर बैंक के सैंकड़ों बैंक कर्मचारियों और अफसरों से बात कर गया हूं। उनकी बातचीत से जो सरकारी बैंकों के भीतर का जो सच जाना है, वो भयावह है। झूठ और फ्राड की बुनियाद पर टिकी आपकी राजनीतिक निष्ठाएं तार तार हो जाएंगी। मुझे सिर्फ एक ही मंज़र नज़र आता है। कोई खदान हैं जहां लाखों कोयला मज़दूरों के होंठ सिल दिए गए हैं। उनकी एक आंख फोड़ दी गई है। लाइन में लगाकर उनसे ग़ुलामी कराई जा रही है।

क्या आप जानते हैं कि मुद्रा योजना के तहत 100, 500 और 1000 रुपये तक के भी लोन दिए गए हैं? क्या सरकार बताएगी कि मुद्रा योजना का ब्रेक अप क्या है? इंफोसिस ने एक सिस्टम बनाकर बैंकों को दिया है। आपको पता भी नहीं होगा कि आप भी मुद्रा लोन के ग्राहकों में गिने जा चुके हैं। होता यह है कि इंफोसिस के दिए सिस्टम में आपका नाम और खाता नंबर एंटर किया जाता है। उसके सामने एक राशि लिख दी जाती है और फिर एक कोड डाल दिया जाता है। कोड डालते ही मुख्य कमांड में रजिस्टर हो जाता है कि किसी ने मुद्रा के तहत लोन लिया है। बाद में उस लिस्ट से आपका नाम हटा दिया जाता है। बैंक को सिर्फ आंकड़ा दिखाने से मतलब है कि कितने लोगों को मुद्रा दिया गया।

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मुद्रा के तहत किसी भी राशि का लोन दिया जाता है और वो भी बिना कुछ बंधक रखे। बैंकरों और वित्त को समझने वाले अधिकारियों से बात करते हुए बहुत पहले से पता लग गया था कि मुद्रा के तहत NPA की तादाद बढ़ती जा रही है। इसकी रिपोर्टिंग नहीं होने दी जा रही है। मैनेजरों को टारगेट दिया जा रहा है कि आपको हर हाल में मुद्रा देना है। बैंक अधिकारी किसी को भी लोन देने से डरते हैं इसलिए भी जानबूझ कर देरी करते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि लोन लेने वाला डुबा देगा। तब उन पर टारगेट की तलवार चलाई जाती है।

सरकार बताएगी नहीं कि कितने लोन ऐसे हैं जो 10,000 रुपये से कम के हैं, बताएगी भी तो कई तरह के झोल होंगे। किसी भी बैंकर से पूछ लीजिए मुद्रा लोन की क्या हक़ीकत है, वो ऑफ रिकार्ड बता देगा कि कितना बड़ा फ्राड चल रहा है। उन्हें पता है कि जल्द ही ये लोन एन पी ए होंगे और उन सभी को विजिलेंस से लेकर सीबीआई का सामना करना पड़ेगा क्योंकि बिना पात्रता के लोन बांटने का कोई नतीजा भी नहीं आ रहा है। नगण्य प्रतिशत में लोगों ने इसे लेकर बिजनेस खड़ा किया है। अधिकांश पैसा चपत कर गए हैं।

अब आते हैं अटल पेंशन योजना पर। मैं हैरान हूं कि अटल जी के नाम पर बनी योजना को भी झूठ के हवाले किया जा सकता है। राजनीति कितनी क्रूर हो सकती है। बैंकर को ही इस योजना में विश्वास नहीं हैं। वे कहते हैं कि इसका रिटर्न बेकार है। इतना ही पैसा अगर आप फिक्स डिपॉज़िट में रख दें तो ज़्यादा मिल सकता है। मगर बैंकरों को अटल पेंशन योजना बेचने का टारगेट दिया जाता है। उनका रीजनल हेड दिन में पांच बार फोन कर टार्चर करता है कि जब तक पांच या दस अटल पेंशन योजना की पॉलिसी नहीं बिकेगी, ब्रांच बंद नहीं होगा।

ग्राहक जब बैंक आता है तो उसे भरमा कर ज़बरन अटल पेंशन योजना बेची जाती है। ग्राहक और बैंकर के बीच भरोसे का रिश्ता होता है। वो इस भरोसे को दांव पर लगा कर एक बेकार स्कीम ख़रीद लेता है। जिसकी बैंक से कोई सर्विस नहीं मिलती है। बैंकर नई पालिसी बेचने के दबाव में है। अगर दस अटल पेंशन योजना नहीं बिकेगी तो शादी के लिए छुट्टी नहीं मिलेगी। एक मैनेजर को मुश्किल से छुट्टी मिली तो फोन आया कि आपका पचास हज़ार का टारगेट कम हुआ है, वो बेचारा अपनी शादी की ख़रीदारी को छोड़ बैंक गया और काम किया। यह कोई अपवाद नहीं है बल्कि ऐसे लाखों किस्से हैं।

आपने भरोसे से अटल पेंशन योजना ले ली। बहुतों को यह योजना धोखे से भी बेची जा रही है। कई तरह के फार्म के नीचे लिखकर साइन करा लिया जाता है। खाते से प्रीमियम कट जाता है। जिसने अटल पेंशन योजना ली है, उससे बस एक सवाल कीजिए। क्या आपने ख़ुद से ली है या आपको मजबूर किया गया है? अटल बिहार वाजपेयी आज बोलने की स्थिति में होते तो दहाड़ मारते हुए बाहर आते और कहते कि बस करो, मेरे नाम पर मेरे देशवासियों की गर्दन मत दबोचो।

बड़ी संख्या में ग्राहक अटल पेंशन योजना का दूसरा प्रीमियम नहीं भर रहे हैं। बैंकर के पास वक्त नहीं है उन्हें फिर से समझाने के लिए क्योंकि उन्हें नया बेचने के लिए दबाव बनाना है। अगर आप यही आंकड़ा देखेंगे कि कितने लोगों ने अटल पेंशन योजना का दूसरा प्रीमियम भरा है तो पता चलेगा कि बड़ी संख्या में लोगों ने स्कीम को बीच रास्ते में ही छोड़ दिया। इससे बीमा कंपनियों को बड़ा लाभ होता है। आपने अपनी जेब से 300 से 500 रुपये बीमा कंपनी को दे दिए। ये पैसा कंपनी के खाते में गया।

वैसे बीमा पालिसी बेचने का काम बैंक का नहीं है, भारतीय रिज़र्व बैंक इस काम के लिए मना करता है। जब रिज़र्व बैंक के अधिकारी बैंकों के सर्वे पर जाते हैं तो कहते भी हैं मगर उनके जाते ही रीजनल हेड फोन कर धमकाता है कि चुपचाप बीमा बेचो। टारगेट पूरा होने के डर से बैंक कर्मचारी ख़ुद अपने और अपने परिवार के नाम से अटल पेंशन योजना ले रहे हैं। यह तो घोटाला है। दो प्रतिशत की संख्या में बैंकों के ये बड़े अफसर अपने छोटे अफसरों से ग़ुलामी करा रहे हैं। वो यह काम इसलिए कर रहे हैं कि उन्हें कमीशन मिल रहा है। सौ दो ब्रांच पर एक रीजनल हेड होता है। वहां से ऊपर के अफसरों को इस लूट का हिस्सा मिल रहा है। आप यह भी चेक कर सकते हैं।

वे किस चीज़ के दबाव में ब्रांच पर दबाव डाल रहे हैं कि ये पालिसी बेचो। कमीशन या है किसी बादशाह को अपनी बुनियाद में झूठ की ईंटे रखनी हैं।
वे ऐसी पालिसी क्यों बेच रहे हैं जिसमें उनका ही यक़ीन नहीं है। एक बैंकर की बात ठीक लगी। अगर यह पालिसी इतनी दमदार होती तो ग्राहक खुद मांगने आता। मगर उनके अनुभव में एक भी ग्राहक ने ख़ुद से इसकी मांग नहीं की।

बैंकों को भीतर से बर्बाद कर दिया गया है। एक शानदार नौकरी का काडर तहस नहस कर दिया गया है। आप नौजवान अब किस नौकरी का ख़्वाब देखेंगे। यह बैंकों पर हमला नहीं है, आपके भावी सपनों पर हमला हैं। प्रोबेशनर अफसर और बैंक क्लर्क का इम्तहान पास करने वाले मेधावी छात्र होते हैं। एक अच् नौकरी का सपना लेकर वहां जाते हैं तो क्या देखते हैं? पहले ही दिन से यातनाएं की कतार में लगा दिए जाते हैं।

इन बैंकों के लाखों लोगों ने बीजेपी को वोट किया है। यहां भी बीजेपी और संघ के कट्टर समर्थक की ख़ूब तादाद है। वे भी इस यातना से गुज़र रहे हैं। ऐसे कई लोगों ने भी मुझे लिखा है। मुझे गाली देने के लिए माफी मांगी है। मैं उनकी इस ईमानदारी के आगे अपना सर झुकाता हूं। मेरे खजाने में इनकी लिखी चिट्ठियां सोने की तरह रखी हुई हैं। आपको इन बातों पर यकीन न हो तो इस लेख का प्रिंट आउट ले लीजिए। उन समर्थकों के पास ले जाइये। पूछिए कि क्या रवीश कुमार ने इस लेख में झूठ लिखा है? बस उनका चेहरा देखते रहिएगा। ज़ुबान ख़ामोश नज़र आएगी और आंखों से आंसू निकल रहे होंगे।

बीजेपी का कोई भी असली समर्थक होगा, वो अटल जी को बहुत प्यार करता है। उनके नाम पर उसी पर एक दिन ये यातना थोपी जाएगी, सोचा नहीं होगा। मैं ऐसे लाखों भगवा समर्थकों की पीड़ा समझता हूं। उन्होंने किसी राजनीतिक दल का समर्थन कर कोई गुनाह नहीं किया है। लोग राजनीतिक दल का हाथ थामते हैं इसलिए नहीं कि डूब जाएंगे, इसलिए कि इसके सहारे उनके सपने बड़े हो जाएंगे। आज उनके सपनों पर किसी ने जूता रख दिया है।

टारगेट और ट्रासफर की तलवार से बैंकरों की गर्दन काटी जा रही है। आप हैं कि फ़र्ज़ी आंकड़ों के जश्न में डूबे हैं। स्लोगन में स्वर्ग नहीं होता है। कामयाबी के इन स्लोगनों में नरक छिपा है। क्या आप झूठ पर आधारित अपनी जीवन यात्रा पूरी करना चाहते हैं? फिर गीता की सौगंध क्यों खाते हैं, गीता क्यों पढ़ते हैं ?

कभी किसी सरकारी बैंक में ज़रूर जाइये। मैनेजरों क्लर्कों के कंधे पर हाथ रखकर उनका हाल पूछिए। वे नहीं बोलकर भी सब बोल देंगे। एक दिन इन बैंकों को बेच दिया जाएगा, उससे पहले इन्हें निचोड़ा जा रहा है। आपको बताया जाएगा कि ये सरकारी बैंकर नकारे हैं। चोर हैं। आप चोर-चोर कहने लगेंगे और तभी इसका लाभ उठाकर बड़ा डकैत घोड़े पर माल लाद कर गंगा पार कर चुका होगा। आप इन बैंकरों को दासता से निकालिए। इनकी आवाज़ बनिए।

मेरी एक-एक बात सही है। फिर भी अगर आप मुझे गाली देना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। मैं कब डरा गालियों से। आई टी सेल की ताकत लगा दीजिए मगर एक मिनट के लिए यह भी सोचिए। जब तेरह चौदह लाख बैंकरों की हालत ग़ुलाम जैसी की जा सकती है तो आपका नंबर भी एक दिन आएगा। क्या आप ऐसा हिन्दुस्तान चाहते हैं? आप बुज़दिल इंडिया चाहते हैं या बहादुर इंडिया चाहते हैं?

नोट- अगर आपकी जानकारी या सहमति के बिना आपसे बैंक ने अटल पेंशन योजना या कोई और योजना बेची है तो अपना संपर्क दें। अगर आप चाहते हैं कि अपना बयान वीडियो रिकार्ड कर भेजें। हम चैनल पर दिखाना चाहते हैं। जय हिन्द। डरिए मत बोलते रहिए। मैं हूं न।

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार के फेसबुक वाल पर प्रकाशित हुआ था)

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झारखंड,बीफ की अफवाह पर हुआ बवाल, मुस्लिम घरों पर हुई पत्थरबाजी

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गौ रक्षा और बीफ के नाम पर होने वाली जात्याओं की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। जबकि देखा जाय तो भारत का एक हिस्सा ऐसा है जहां पर बीफ उन का मुख्य भोजन है और उसे लोगों से छीना नही जा सकता है। बावजूद इस के देश के अलग अलग हिस्सों में बीफ के नाम पर लोगों की हत्याएं भीड़ द्वारा की जा रही है।

झारखंड में बीफ की अफवाह पर बवाल हो गया है। उन्मादी भीड़ शादी में घुस गई और मुस्लिमों के घर पर पत्थरबाजी भी की गई। जानकारी के मुताबिक यह घटना राज्य के कोडरमा जिले की है। बताया जाता है शादी में मेहमानों को बीफ परोसने की अफवाह के बाद बड़ी तादाद में लोग जुट गए थे। पुलिस ने बताया कि हालात को नियंत्रित करने के लिए डोमचांच ब्लॉक के नवाडीह गांव और आसपास के इलाकों में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगानी पड़ी।

भीड़ ने एक व्यक्ति की बुरी तरह पिटाई कर डाली और गांव के कई घरों में तोड़फोड़ की गई। कोडरमा की पुलिस अधीक्षक शिवानी तिवारी ने बताया कि इस मामले में सात लोगों को हिरासत में लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है। उनके मुताबिक, किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है।

मांस के नमूने की होगी फोरेंसिक जांच: एसपी शिवानी तिवारी ने बताया कि शादी समारोह में पड़ोसे गए मांस के नमूने की जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह बीफ था की नहीं। बताया जाता है कि ग्रामीणों ने एक व्यक्ति के घर के पीछे स्थित खेत में खुर और हड्डियां देखी थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि शादी के बाद रिसेप्शन में सोमवार (16 अप्रैल) रात को बीफ परोसा गया था।

पुलिस ने बताया कि इसके बाद ग्रामीणों ने एक व्यक्ति की पिटाई कर डाली थी, जिसमें उसे गंभीर चोटें आई थीं। इसके अलावा कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। घायल व्यक्ति को इलाज के लिए राज्य की राजधानी रांची भेजा गया है। बता दें कि बीफ के शक में पिछले साल भीड़ ने झारखंड के रामगढ़ में मांस व्यवसायी अलीमुद्दीन अंसारी की सरेआम हत्या कर दी थी। फोरेंसिक जांच में वह बीफ ही निकला था। इस मामले में स्थानीय अदालत ने गौरक्षक दल के 11 सदस्यों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में बीफ के संदेह में उन्मादी भीड़ कई बार हमले कर चुकी है।

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Breaking News: जज लोया की मौत की SIT जाँच नहीं होगी: सुप्रीम कोर्ट

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नयी दिल्ली: जज लोया की मौत पिछले कुछ दिनों से मीडिया और राजनैतिक अखाड़े में जोर शोर से चलाया जा रहा था जिसके ऊपर आज सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण विराम लगा दिया है|

 बता दें की जज लोया की मौत को संदिग्ध बताते हुए उनकी मौत की SIT जाँच करवाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पांच पीआईएल डाला गया था, पीआईएल डालने वालों में मुंबई लायर्स एसोसिएशन भी था  जिसकी सुनवाई करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ पीआईएल को ख़ारिज किया बल्कि पीआईएल दाखिल करने वालों को कड़े शब्दों में फटकार भी लगाई.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा की जज लोया की मौत प्राकृतिक थी जिसकी कोई स्वतंत्र जांच नहीं होगी , उन्होंने आगे सुनवाई करते हुए कहा की अर्जी में कोई दम नहीं है, पीआईएल का इस्तेमाल एजेंडा चलने के लिए किया गया है.

इसका इस्तेमाल जजों के छवि को ख़राब करने के लिए किया गया है| सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ तौर पर तो नहीं लेकिन इशारों में कहा की यह पीआईएल राजनीती ने प्रेरित है.

गौरतलब हो की जज लोया की मौत इसीलिए भी मायने रखती है की वो जिस केस की सुनवाई कर रहे थे उसमे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जैसे बड़े राजनैतिक दिगाज्जो का नाम शामिल है|

जज लोया की मौत के काफी सालों बाद एक पत्रिका “द कारवां” ने कुछ तथ्यों को इकठा करने के बाद दावा किया था की उनकी मौत प्राकृतिक नहीं थी| उन्होंने ये भी कहा था की उनके मौत के बाद कई बातें संदिग्ध थे जिसे न्यायपालिका को समझना चाहिए लेकिन उसके उलट सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा की जजों के फैसले पर सवाल खड़ा करना न्यायपालिका की तौहीन होगी|

इस फैसले को याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण न्यायपालिका में काला दिन बता रहे है, उनका कहना है की हम कोर्ट ने ज्यादा कुछ नहीं मांग रहे थे हम बस इनकी स्वतंत्र जांच ही चाहते है, उनका कहना है की जज लोया के परिवार में कुछ लोग सहित उनके गाँव के लोगों का भी मानना है की उनकी मौत संदिग्ध है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश देने चाहिए थे.

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भाजपा नेता की अर्णव गोस्वामी को चुनौती:- वो अरनब गोस्वामी, अपने आप को क्या समझता है, मेरे पास भी पूरी एक सेना है, अगर वो लड़ना चाहते हो तो आ जाओ

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बलात्कार की घटनाओं के खिलाफ जहां देश को एक जुट होने की जरूरत है वहीं कुछ ऐसे न्यूज़ चैनल भी है जो देश को जाती और धर्म के नाम पर अलग अलग तोड़ना चाहते है। एयर इस तरह के चैनलों को जब तक आम जनता मुहतोड़ जवाब नही देगी तब तक यह सरकार के इशारोंपर ही काम करते रहेंगे।

कठुआ गैंगरेप मामले में पद से बर्खास्त हुए जम्मू-कश्मीर के बीजेपी मंत्री लाल सिंह ने मंगलवार को जम्मू से कठुआ तक रैली निकाली। इस रैली में वह बार-बार यही कहते हुए देख गए कि कठुआ गैंगरेप मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए और इसमें सभी आरोपियों का नार्को टेस्ट करवाया जाए।

इस रैली में वह अंग्रेजी न्यूज चैनल रिपब्लिक टीवी के संपादक अरनब गोस्वामी को निशाना साधते भी देखे गए। रैली में लाल सिंह ने अरनब पर हमला बोलते हुए कहा कि, ‘हम लोग पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन वहीं कुछ लोग हमारे खिलाफ माहौल बनाने में लगे हुए हैं। ऐसे सभी लोग बकवास कर रहे हैं। वो अरनब गोस्वामी, मुझे नहीं पता वो अपने आप को क्या समझता है। उसे लगता है कि वह मीडिया का चैम्पियन है। मेरे पास भी पूरी एक सेना है, अगर तुम लड़ना चाहते हो तो आ जाओ।’

जम्मू से कठुआ तक निकाली गई अपनी इस रैली में लाल सिंह ने ये भी कहा कि, ‘हमारा मकसद देश में शांति बनाए रखना है। हम दूसरों से लड़ने के लिए नहीं बैठे हैं। हम नहीं चाहते कि लोगों को किसी भी तरह की दिक्कत हो। हम बिना गलती के किसी की कोई भी बात बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन हम इस देश के टुकड़े नहीं होने देंगे। ये हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम देश को बचाने के लिए अपना बलिदान दें।’

बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने कठुआ गैंगरेप मामले में सोमवार को पीड़ित परिवार और उनकी वकील दीपिका रजावत व अन्य को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करवाने का आदेश दिया है। साथ ही, शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई चंडीगढ़ स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर जम्मू एवं कश्मीर सरकार से जवाब देने को कहा। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को करने का निर्देश दिया है।

इससे पहले, सोमवार को सुनवाई शुरू होने पर कठुआ दुष्कर्म और हत्याकांड मामले में सभी आठ आरोपियों को जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के सामने पेश किया गया। जघन्य अपराध के मामले में कथित सरगना सांझी राम समेत सभी आठ आरोपियों को सख्त सुरक्षा के बीच कठुआ में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ए. एस. लांगेह के समक्ष पेश किया गया। निचली अदालत में मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।

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