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चौकीदार की यह कैसी चौकसी कि चौकी लेकर भागा चौकसी एंटीगुअन हो गया

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चौकसी अपनी चौकी लेकर भारत से भागा था, भाग रहा था मगर अब थक कर उसने अपनी चौकी एंटिगुआ में टिका दी है। हीरा व्यापारी मेहुल चौकसी ग़ज़ब का हीरा निकला। उसके चौकीदार भी हीरा निकले। चौकीदार चौकीदारी करते रह गए और चौकसी की टैक्सी उस एंटीगुआ में पार्क हो गई है जहां के कर्टली एम्ब्रोस की घातक गेंदबाज़ी से भारतीय बल्लेबाज़ डरते थे।

जिस तेज़ी से मेहुल और नीरव पंजाब नेशनल बैंक के 13,500 करोड़ लेकर भागे हैं, कर्टली एम्ब्रोस उतनी तेज़ी से भाग ही नहीं सकते हैं।

मेहुल चौकसी ने एंटीगुआ का पासपोर्ट बनवा लिया है। कुछ पैसे देकर उसकी नागरिकता ले ली है। भारत की नागरिकता और पासपोर्ट छोड़ दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी कहते रहते हैं कि भारत के पासपोर्ट का भाव बढ़ गया है। नीरव मोदी को भी खूब घूमने का शौक है। भारत से भागने के बाद उसने कई देशों की यात्राएं की हैं। तब जब भारत ने उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया था। अब चूंकि प्रधानमंत्री के हिसाब से भारत के पासपोर्ट का भाव बढ़ गया है इसलिए तमाम मुल्कों के इमिग्रेशन विभाग ने रद्द किए हुए पासपोर्ट पर भी नीरव को घूमने दिया है। चौकसी ने भारत का पासपोर्ट त्याग कर प्रधानमंत्री का अपमान किया है। एंटीगुआ अगर भारत को ऐसे आंख दिखाएगा तो हमारे मोदी जी उसे निकारागुआ भेज देंगे!

आने दीजिए रवांडा से मोदी जी को, 200 गायों की इंटरनेशनल डिलिवरी में ज़्यादा वक्त नहीं लगता है। ये काम तो आमेज़ॉन कर सकता था मगर गाय का मामला है तो मोदी जी ख़ुद लेकर गए हैं। वहां से लौटते ही वे ख़ुद ही वहां के
राष्ट्रपति को फोन करेंगे और कहेंगे कि मैं अपने नागरिक को भारत नहीं ला सका, कम से कम तुम अपने नागरिक को भारत भेज दो। तब तक सुष्मा जी एंटीगुआ के राजदूत को बुलाकर उन्हें इस्लामाबाद भेज दें। एंटीगुआ ने मेहुल चौकसी को पासपोर्ट देकर भारत को चुनौती दी है। उसकी हिम्मत देखिए, इंटरपोल के ज़रिए भारत को नहीं बताया, बल्कि सीधे बताया है। ऐसा इंडियन एक्सप्रेस में सूत्रों के हवाले से छपा है।

अच्छी बात है कि एंटीगुआ जाकर भी मेहुल चौकसी भारत में भीड़ द्वारा की जा रही हत्या की ख़बरों को ग़ौर से पढ़ रहा है। एक बैंक की हत्या करते वक्त उसे डर नहीं लगा मगर अलवर, दादरी और धुले की घटना पढ़कर डर गया है। उसने भारत की अदालत को बता दिया है कि इसी कारण वह भारत नहीं आ रहा है। अब तो सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक व्यवस्था भी दे दी है कि भीड़ की हत्या को कैसे रोकना है, इसके बाद भी चौकसी ने अपनी चौकी यहां से उठाकर एंटीगुआ में टिका दी है।

कांग्रेस के नेता एंटीगुआ के राष्ट्रपति के साथ भारत के चौकीदार की बातचीत की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। तस्वीर देखकर लगता है कि कल ही मोदी जी कह रहे हों कि एंटीगुआ में चौकसी को एडजस्ट कर लीजिए। लेकिन वो तस्वीर पुरानी है। इस घटना से उसका कोई संबंध नहीं है। बड़े नेता फोटो खींचाते रहते हैं।

मेहुल चौकसी को भीड़ से डर लग रहा है या उन लोगों से जो अपना नाम बाहर आने के डर से उसे डरा रहे हैं। मेरी राय में मेहुल चौकसी को एंटीगुआ के संविधान की शपथ लेते हुए सबके नाम बता देने चाहिए। आपको याद होगा नीरव मोदी के पीछे लगी जांच एजेंसी रेवाड़ी पहुंच गई, योगेंद्र यादव के रिश्तेदारों के घर। क्योंकि उन्होंने नीरव मोदी के यहां से ख़रीदारी की थी। वैसे उसकी दुकान से औरों ने भी की होगी तो क्या वहां छापे पड़े होंगे। हिसाब मांगे गए। ज़ाहिर है योगेंद्र यादव को किस लिए सज़ा दी जा रही थी।

अब संसद में फिर से चौकीदार बनाम कामदार चलेगा। राहुल गांधी बोलेंगे कि चौकीदार भागीदार हो गया है। ये कैसी चौकसी की चौकसी ही भाग गया, भागा ही नहीं ,भारतीय से एंटीगुअन हो गया। राहुल गांधी कहेंगे कि चौकसी के चौकीदार हाज़िर हों। मोदी जी कहेंगे कि हम कामदार हैं, नामदार नहीं हैं। मेरा काम दिल्ली में तिजोरी की रक्षा करना था। किसी भागते हुए को पकड़ना नहीं। मैं तब से इसीलिए तो देश देश घूम रहा हूं कि कहीं तो माल्या मेहुल मिलेंगे। अब तो मैं गौशाला तक जाने लगा कि वहां भी छिपे होंगे तो मिल जाएंगे। नहीं मिल रहे हैं तो ये राहुल गांधी राजनीति कर रहे हैं। जो चौकीदारी मैं नहीं कर सकता, वो चौकीदारी करने के ख़्वाब देख रहे हैं।

इन सबके बीच जो मालदार है वो फ़रार हैं। वो समझ गए हैं कि चुनाव आ रहे हैं। अभी सबको हमारी ज़रूरत है। रैलियां होनी हैं। सोशल मीडिया पर अभियान चलने हैं। वैसे एक भागे हुए मालदार ने संकेत दिया है कि वह भारत आ सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड में ख़बर छपी है कि विजय माल्या भारत आ सकता है। वो जांच एंजेसिंयो का सामना करने के लिए तैयार हो गया है।

अगर चैनलों पर हिन्दू मुस्लिम मसले पर डिबेट बढ़ा दें तो देश को इन सब मुद्दों से बचाया जा सकता है। टीवी पर ये सब डिस्कस करना ठीक नहीं लगता कि कोई 13,500 करोड़ लेकर भाग गया है। वैसे भी चुनाव आ रहे हैं तो पैसे की ज़रूरत पड़ती है। सबको पड़ती है।

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‘हम महज कश्मीर चाहते हैं, कश्मीरी तो हमारे लिए आतंकवादी हैं?’

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बीते दिनों हमारे जवानों पर आतंकवादियों द्वारा किये गए कायराना हमले से पूरा देश स्तब्ध है, गुस्सा इतना की देश में हर जगह पाकिस्तान और आतंकवादियों के खिलाफ जुलूस निकला जा रहा है और अपने आक्रोश को लोग प्रदर्शित कर रहे हैं, जवानों को श्रधांजलि देने के लिए गली कुचों में भी आम आदमी द्वारा कैंडल मार्च निकला गया. ये दृश्य बताता है की हमारे देश में मानवता अभी मारा नहीं है भावनाएं आहात हुई हैं पर लोगों को अपने सरकार, संविधान और सेना पर पूरा भरोसा है उन्हें ये भी भरोसा है की इसका बदला जरूर लिया जायेगा.

वही दूसरी तरफ हमारे देश में कुछ चरमपंथी लोग भी हैं जो ऐसे मौकों के तलाश में रहते है जिससे वो अपनी राजनैतिक भूख को शांत कर सके चाहे उसमे उन्हें अपने लोगों को ही नुक्सान पहुचना पड़े. आतंकवादी हमलों के बाद देश के अलग अलग हिस्सों में देश का अभिन्न अंग कश्मीर के लोगों पर कुछ लोगों द्वारा हमले की खबर आम हो चली है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताविक देहरादून में कुछ चरमपंथियों ने कश्मीरी युवाओं पर हमला किया और उन्हें बुरी तरह मारा और पीटा गया, वही दूसरी तरफ बिहार के पटना में कश्मीरी दुकानदारों पर हमला कर उनके दुकानों को तोडा गया और उन्हें बिहार छोड़ने की धमकी भी दी गयी और सोशल मीडिया पर कश्मीरी युवाओं के खिलाफ जहर उगलते पोस्ट अचानक ही वायरल होते नज़र आने लगे.

इन्हें देख कर मन में सहसा एक विचार आया की इन्हीं चरमपंथियों द्वारा कश्मीर हमारा है का नारा लगाया जाता है और इनके द्वारा ही उनके वाशिंदों को पीट कर उन्हें वापस कश्मीर भेजा जाता है या भेजने के लिए वाध्य किया जाता है, तो क्या गलत है अगर कश्मीरी युवा देश के उन तमाम लोगों को अपने कश्मीर में आने न देना चाहे जो उन्हें देश का हिस्सा नहीं मानते, फिर हमें कोई हक़ नहीं है की उन्हें गुनाहगार माने अगर वो खुद को देश से अलग थलग समझने लगे.

कश्मीर में हुए हमले के लिए अगर कश्मीरी जिम्मेदार है और उन्हें मारा पीटा जाता है तो क्या गाँधी की हत्या एक ब्राहमण द्वारा किये जाने पर तमाम ब्राहमण समुदाय को गुनाहगार मनन जाये, गुजरात में हुए नरसंघार के कारन तमाम गुजरातियों को देश से वापस गुजरात भेज दिया जाए.

हमारी ये घृणित सोच हमारे देश के लिए ज्यादा खतरनाक है जो आये दिन अलगाववादी सोच और लोग पैदा कर रहे हैं.

जहाँ सोशल मीडिया पर एक तबका कश्मीरियों के विरोध में खड़ा हुआ वही कई ऐसे लोग भी है जो उनके मदद को सामने आये और देश के युवाओं से ऐसा न करने की अपील की. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा की अगर किसी भी कश्मीरी छात्र को किसी भी तरीके से परेशां किया जा रहा है तो वो मुझे कभी भी कॉल कर सकते हैं, मेरे घर और दिल के दरवाजे हमेशा आपके लिए खुले हैं.

उन्होंने कश्मीरी छात्रों पर हो रहे हमले को भी शर्मनाक बताया.

देखते ही देखते कश्मीरी युवाओं के समर्थन में एक बड़ा तबका खड़ा हो गया और ट्विटर पर   #KashmiriStudent ट्रेंड करने लगा. कई नामचीन लोग इसके समर्थन में आये.

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बिहार रेल हादसा:- जोगबनी से दिल्ली जा रही सीमांचल एक्सप्रेस पटरी से उतरी अब तक 8 लोगों के मरने की खबर।

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बिहार के वैशाली जिले में रविवार तड़के बड़ा रेल हादसा हो गया। जोगबनी से दिल्ली के आनंद विहार जा रही सीमांचल एक्सप्रेस सहदेई बुजुर्ग के पास पटरी से उतर गई। हादसे में अब तक आठ लोगों के मरने की सूचना मिली है, हालांकि रेल प्रशासन ने सात की मौत की पुष्टि की है। करीब दो दर्जन यात्री घायल बताए जा रहे हैं। दुर्घटना टूटी पटरी पर ट्रेन के गुजरने के कारण हुई। ऐसे में तोड़फोड़ की आशंका से इनकार नहीं किया सकता। ट्रेन में कुंभ स्नान के लिए जा रहे यात्रियों की भीड़ ज्‍यादा थी। दुर्घटना को लेकर रेलवे ने हेल्‍पलाइन नंबर जारी किए हैं।
दुर्घटना के बाद राहत व बचाव कार्यों को लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल लगातार रेलवे बोर्ड के संपर्क में हैं। उन्‍होंने रेल यात्रियों की मौत पर संवेदना प्रकट की है। साथ ही घायलों के शीघ स्‍वस्‍थ होने की कामना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस दुखद घटना को लेकर शोक प्रकट किया है।

मिली जानकारी के अनुसार ट्रेन तड़के 3.52 बजे मेहनर रोड से गुजरी थी। इसके बाद करीब 3.58 बजे सहदेई बुजुर्ग के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। रेलवे के अनुसार दुर्घटना का कारण पटरी का टूटा होना था।
ट्रेन के 11 डिब्बों के पटरी से उतरने की खबर है। इनमें से तीन स्लीपर (एस-8, एस-9 और एस-10) हैं। एक जनरल कोच और एक एसी कोच (बी-3) भी पटरी से उतरे हैं। हादसे में एक डिब्बा पूरी तरह से पलट गया।

हादसे के बाद सहदेई बुजुर्ग स्टेशन पर एनडीआरएफ टीम पहुंची गई। क्रेन की मदद से ट्रेन के डिब्बों को काटकर यात्रियों को निकाला गया। सूचना मिलने पर वैशाली डीएम राजीव रौशन और एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों भी पहुंचे। हालांकि, राहत व बचाव में विलंब के कारण भड़के लोगों ने पथराव भी किया। सुरक्षा बलों ने मुश्किल से स्थिति को नियंत्रित किया। ,
मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख मुआवजा की घोषणा
रेल मंत्रालय ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा कर दी गई है। गंभीर घायलों को एक लाख तथा अन्‍य घायलों को 50 हजार रुपये के मुआवजे का ऐलान कर दिया गया है।

मरने वालों के बिहार व पश्चिम बंगाल के तीन-तीन की पहचान
मरने वालों में खगड़िया के तीन तथा पश्चिम बंगाल के तीन यात्रियों की पहचान कर ली गई है। मृतक सुदर्शन दास (60), इलचा देवी (66) और इंदिरा देवी (60) बिहार के खगड़िया के रहने वाले थे, जबकि शायदा खातून (40), अंसार आलम (19) और शमशुद्दीन आलम (26) पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। एक अन्‍य शव की पहचान अभी तक नहीं की जा सकी है।

इस बीच रेलवे ने हेल्‍पलाइन नंबर जारी कर दिए हैं। राहत बचाव कार्य के लिए सोनपुर और बरौनी से ART टीम को रवाना कर दिया गया है। हादसे के बाद बछवाड़ा-हाजीपुर सिंगल लाइन पर परिचालन रद कर दिया गया है।
दुर्घटना के संबंध में जानकारी लेने के लिए पूर्व मध्य रेल ने हेल्पलाईन नंबर जारी किए हैं। इन नंबरों पर फोन कर पीड़ितों के बारे जानकारी ली जा सकती है।
पटना- 06122202290, 06122202291, 06122202292, 06122213234
सोनपुर- 06158-221645
हाजीपुर- 06224-272230
बरौनी- 06279-23222
कटिहार- 9473198026

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आगरा में रेंगती नागरिकता, पुणे मे तेलतुम्बडे को लेकर चुप नागरिकता

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अब आपको याद भी नहीं होगा कि प्रधानमंत्री की हत्या की कथित साज़िश में गिरफ्तार सुधा भारद्वाज जैसों के साथ क्या हो रहा होगा? मीडिया और राजनीति आपके सामने आतंकवाद के ख़तरे परोसते रहे। पहले बताया कि आतंकवाद के लिए एक खास धर्म के लोग ज़िम्मेदार हैं। एक दुश्मन का चेहरा दिखाया गया। फिर अचानक आपके ही बीच के लोगों को उसके नाम पर उठाया जाने लगा।

आनंद तेलतुम्बडे पुणे से मुंबई जा रहे थे ताकि अगली सुबह हाईकोर्ट में अपनी अग्रिम ज़मानत की याचिका दायर कर सके। पुणे की पुलिस भोर बेला में 3 बज कर 30 मिनट पर एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लेती है। सुबह होती है और उसी कोर्ट में बहस होती है जिसने एक दिन पहले आनंद की अग्रिम ज़मानत याचिका रद्द कर दी थी। आनंद के वकील कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 जनवरी को आदेश दिया था कि 11 फरवरी तक आनंद की गिरफ्तारी नहीं हो सकती है। इसके बाद भी पुणे की पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। आनंद के वकील कहते हैं कि यह गिरफ्तारी अवैध है। कोर्ट ज़मानत दे देती है। आनंद तेलतुम्बडे बाहर आ जाते हैं।

आख़िर एक पुलिस अवैध तरीके से काम करने के लिए क्यों उतावली है? प्रोफेसर अपूर्वानंद ने ठीक लिखा है कि क्या यह उद्वेलित करने वाली बात नहीं है। क्या आनंद आतंकवादी हैं? हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस की खबर याद कीजिए। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस एस मुरलीधर ने गौतम नवलखा के मामले में संरक्षण देने का फैसला दिया तो सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम में उनके तबादले की दो-दो बार कोशिश हुई मगर कुछ जजों के एतराज़ से टल गया। क्या आप वाकई ऐसा भारत चाहते हैं जहां इस तरह की ख़बरों से आप सामान्य होने लग जाएं?

आनंद तेलतुम्बडे पर भीमा कोरेगांव की रैली के बाद हुई हिंसा और प्रधानमंत्री मोदी की कथित हत्या की साज़िश का आरोप है। इसी आरोप में सुधा भारद्वाज गिरफ्तार हैं।गौतम नवलखा आरोपी हैं।आनंद तेलतुम्बडे तो भीमा कोरेगांव की सभा में गए भी नहीं थे। बल्कि दि वायर में लिखा था कि ऐसे आयोजनों की वैचारिक दिक्कतें क्या हैं। दक्षिणपंथी नेता संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे पर भी इसी मामले में हिंसा भड़काने के कथित आरोप लगे थे मगर इन दोनों को बिना पूछताछ के बरी कर दिया गया।

प्रोफेसर आनन्द तेलतुम्बडे आई आई एम अहमदाबाद के छात्र रहे हैं। आई आई टी खड़गपुर में प्रोफेसर रहे हैं। पेट्रोनेट इंडिया के सीईओ रहे हैं। गोवा इन्स्टिट्यूट आफ मैनेजमेण्ट में ‘बिग डाटा एनालिटिक्स’ के विभाग प्रमुख हैं। आनंद ने 26 किताबें लिखी हैं। उनके पक्ष में आई आई टी खड़गपुर के 120 से अधिक छात्रों और प्रोफेसरों ने पत्र लिखा है। आई आई एम अहमदाबाद और आई आई एम बंगलुरू के प्रोफेसरों और छात्रों ने लिखा है।

कानून अपना काम करेगा की आड़ में फर्ज़ी केस में फंसाना कौन सी बड़ी बात है। मगर यह खेल इतना बढ़ जाए कि जहां नागरिक मात्र प्यादा बन कर रह जाए तो ऐसी स्थिति को मंज़ूरी देने से पहले क्या आपने ठीक से सोच लिया है?

गांधी के पोस्टर पर बंदूक चला कर फिर से मारने का अभ्यास करने और उनकी हत्या के बाद जश्न का सुख प्राप्त करने वालों को पुलिस पकड़ नहीं पाई। मगर राज्य की नीतियों की आलोचना करना, समीक्षा करना, अलग राजनीतिक राय रखना अब आपको आतंकवादी, भारत विरोधी बनाने के लिए काफी है। दि प्रिंट की उस ख़बर को भी आपने अनदेखा कर दिया होगा कि खुफिया विभाग ने रिपोर्ट तैयार की है कि अशोका यूनिवर्सिटी, जिन्दल यूनिवर्सिटी और अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में मोदी विरोधी बातें होती हैं।

क्या आपने ऐसी ही भारत चाहा था? क्या आप वाकई चाहते थे कि क्लास रूप में खुफिया विभाग के कैमरे लगे हों? मैं समझ सकता हूं कि आपमें विरोध करने की शक्ति नहीं होगी। आपको डर लगता होगा। कहीं आपको पुलिस न उठा ले। ट्रोल सेना आप पर हमला न कर दे। मैं समझ सकता हूं कि आप इन बातों के विरोध और अपने प्रिय नेता के प्रति आंख बंद कर समर्थन में फर्क नहीं कर पा रहे हैं।

मैं अब भी यकीन करना चाहूं कि भारत के लोगों को अपने नागरिक होने के अधिकार से बहुत प्यार होगा। यह नागरिकता किसी देवी देवता से नहीं मिलती है। संविधान से मिलती है। फिर भी जब नागरिकों को इस तरह दुर्बलतम स्थिति में देखता हूं तो दुख होता है। आपका चुप रहना एक एक कर आपको उन अधिकारों से अलग करता जाता है जिसे संविधान ने दिया है। आप ख़ुद को संविधानविहीन बनाते जा रहे हैं।

आगरा के आलू किसानों ने अपनी एक तस्वीर भेजी है। वे अपनी हालत पर जनता और सरकार की नज़र चाहते हैं। यह दृश्य हम सभी की नागरिकता की हार है। क्या राज्य की क्रूरता के प्रति आपका समर्थन इस कदर बढ़ चुका है कि आप अपनी नागरिकता ही दांव पर लगा देना चाहते हैं? क्या आप रेंगना चाहते हैं?

साभार रविश कुमार के फेसबुक पेज से

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