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आगरा में रेंगती नागरिकता, पुणे मे तेलतुम्बडे को लेकर चुप नागरिकता

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अब आपको याद भी नहीं होगा कि प्रधानमंत्री की हत्या की कथित साज़िश में गिरफ्तार सुधा भारद्वाज जैसों के साथ क्या हो रहा होगा? मीडिया और राजनीति आपके सामने आतंकवाद के ख़तरे परोसते रहे। पहले बताया कि आतंकवाद के लिए एक खास धर्म के लोग ज़िम्मेदार हैं। एक दुश्मन का चेहरा दिखाया गया। फिर अचानक आपके ही बीच के लोगों को उसके नाम पर उठाया जाने लगा।

आनंद तेलतुम्बडे पुणे से मुंबई जा रहे थे ताकि अगली सुबह हाईकोर्ट में अपनी अग्रिम ज़मानत की याचिका दायर कर सके। पुणे की पुलिस भोर बेला में 3 बज कर 30 मिनट पर एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लेती है। सुबह होती है और उसी कोर्ट में बहस होती है जिसने एक दिन पहले आनंद की अग्रिम ज़मानत याचिका रद्द कर दी थी। आनंद के वकील कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 जनवरी को आदेश दिया था कि 11 फरवरी तक आनंद की गिरफ्तारी नहीं हो सकती है। इसके बाद भी पुणे की पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। आनंद के वकील कहते हैं कि यह गिरफ्तारी अवैध है। कोर्ट ज़मानत दे देती है। आनंद तेलतुम्बडे बाहर आ जाते हैं।

आख़िर एक पुलिस अवैध तरीके से काम करने के लिए क्यों उतावली है? प्रोफेसर अपूर्वानंद ने ठीक लिखा है कि क्या यह उद्वेलित करने वाली बात नहीं है। क्या आनंद आतंकवादी हैं? हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस की खबर याद कीजिए। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस एस मुरलीधर ने गौतम नवलखा के मामले में संरक्षण देने का फैसला दिया तो सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम में उनके तबादले की दो-दो बार कोशिश हुई मगर कुछ जजों के एतराज़ से टल गया। क्या आप वाकई ऐसा भारत चाहते हैं जहां इस तरह की ख़बरों से आप सामान्य होने लग जाएं?

आनंद तेलतुम्बडे पर भीमा कोरेगांव की रैली के बाद हुई हिंसा और प्रधानमंत्री मोदी की कथित हत्या की साज़िश का आरोप है। इसी आरोप में सुधा भारद्वाज गिरफ्तार हैं।गौतम नवलखा आरोपी हैं।आनंद तेलतुम्बडे तो भीमा कोरेगांव की सभा में गए भी नहीं थे। बल्कि दि वायर में लिखा था कि ऐसे आयोजनों की वैचारिक दिक्कतें क्या हैं। दक्षिणपंथी नेता संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे पर भी इसी मामले में हिंसा भड़काने के कथित आरोप लगे थे मगर इन दोनों को बिना पूछताछ के बरी कर दिया गया।

प्रोफेसर आनन्द तेलतुम्बडे आई आई एम अहमदाबाद के छात्र रहे हैं। आई आई टी खड़गपुर में प्रोफेसर रहे हैं। पेट्रोनेट इंडिया के सीईओ रहे हैं। गोवा इन्स्टिट्यूट आफ मैनेजमेण्ट में ‘बिग डाटा एनालिटिक्स’ के विभाग प्रमुख हैं। आनंद ने 26 किताबें लिखी हैं। उनके पक्ष में आई आई टी खड़गपुर के 120 से अधिक छात्रों और प्रोफेसरों ने पत्र लिखा है। आई आई एम अहमदाबाद और आई आई एम बंगलुरू के प्रोफेसरों और छात्रों ने लिखा है।

कानून अपना काम करेगा की आड़ में फर्ज़ी केस में फंसाना कौन सी बड़ी बात है। मगर यह खेल इतना बढ़ जाए कि जहां नागरिक मात्र प्यादा बन कर रह जाए तो ऐसी स्थिति को मंज़ूरी देने से पहले क्या आपने ठीक से सोच लिया है?

गांधी के पोस्टर पर बंदूक चला कर फिर से मारने का अभ्यास करने और उनकी हत्या के बाद जश्न का सुख प्राप्त करने वालों को पुलिस पकड़ नहीं पाई। मगर राज्य की नीतियों की आलोचना करना, समीक्षा करना, अलग राजनीतिक राय रखना अब आपको आतंकवादी, भारत विरोधी बनाने के लिए काफी है। दि प्रिंट की उस ख़बर को भी आपने अनदेखा कर दिया होगा कि खुफिया विभाग ने रिपोर्ट तैयार की है कि अशोका यूनिवर्सिटी, जिन्दल यूनिवर्सिटी और अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में मोदी विरोधी बातें होती हैं।

क्या आपने ऐसी ही भारत चाहा था? क्या आप वाकई चाहते थे कि क्लास रूप में खुफिया विभाग के कैमरे लगे हों? मैं समझ सकता हूं कि आपमें विरोध करने की शक्ति नहीं होगी। आपको डर लगता होगा। कहीं आपको पुलिस न उठा ले। ट्रोल सेना आप पर हमला न कर दे। मैं समझ सकता हूं कि आप इन बातों के विरोध और अपने प्रिय नेता के प्रति आंख बंद कर समर्थन में फर्क नहीं कर पा रहे हैं।

मैं अब भी यकीन करना चाहूं कि भारत के लोगों को अपने नागरिक होने के अधिकार से बहुत प्यार होगा। यह नागरिकता किसी देवी देवता से नहीं मिलती है। संविधान से मिलती है। फिर भी जब नागरिकों को इस तरह दुर्बलतम स्थिति में देखता हूं तो दुख होता है। आपका चुप रहना एक एक कर आपको उन अधिकारों से अलग करता जाता है जिसे संविधान ने दिया है। आप ख़ुद को संविधानविहीन बनाते जा रहे हैं।

आगरा के आलू किसानों ने अपनी एक तस्वीर भेजी है। वे अपनी हालत पर जनता और सरकार की नज़र चाहते हैं। यह दृश्य हम सभी की नागरिकता की हार है। क्या राज्य की क्रूरता के प्रति आपका समर्थन इस कदर बढ़ चुका है कि आप अपनी नागरिकता ही दांव पर लगा देना चाहते हैं? क्या आप रेंगना चाहते हैं?

साभार रविश कुमार के फेसबुक पेज से

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BPCL कर्मचारियों को सरकार का आदेश, नही पसंद निजीकरण तो ले सकते हैं VRS

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निजीकरण से पहले सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपारेशन लिमिटेड (BPCL) अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) लेकर आई है. इसके तहत कंपनी की ओर से कर्मचारियों को कई तरफ के ऑफर दिए हैं.

दरअसल, सरकार देश की तीसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी और दूसरी सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी BPCL का निजीकरण करने जा रही है. निजीकरण से पहले कंपनी ने अपने कर्मचारियों को वीआरएस देने की पेशकश की है.

File Photo

पीटीआई के मुताबिक बीपीसीएल ने अपने कर्मचारियों को भेजे आंतरिक नोट में कहा कि कंपनी ने वीआरएस की पेशकश करने का फैसला किया है. यह योजना उन कर्मचारियों के लिए है जो किसी भी निजी कारणों से कंपनी में सेवाएं जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं, वे कर्मचारी वीआरएस के लिए आवेदन कर सकते हैं.

भारत पेट्रोलियम वीआरएस योजना-2020 (बीपीवीआरएस-2020) 23 जुलाई को खुली है और 13 अगस्त को बंद होगी. कंपनी के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक वीआरएस उन कर्मचारियों को बाहर निकलने का विकल्प देने लिए लाया गया है, जो निजी प्रबंधन के तहत काम नहीं करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि कुछ कर्मचारियों को लगता है कि बीपीसीएल के निजीकरण के बाद उनकी भूमिका, स्थिति या स्थान में बदलाव हो सकता है. यह योजना उन्हें बाहर निकलने का विकल्प देती है.

गौरतलब है कि बीपीसीएल में सरकार अपनी समूची 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है. कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 20,000 है. रिपोर्ट के मुताबिक पांच से 10 फीसदी कर्मचारी वीआरएस का विकल्प चुन सकते हैं.

योजना का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों को प्रत्येक पूरे हुए सेवा वर्ष के लिए दो माह का वेतन या वीआरएस के समय तक का मासिक वेतन मिलेगा. सेवाकाल के शेष बचे महीनों को इसमें गुणा किया जाएगा. इसके अलावा उन्हें सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाला कंपनी छोड़ने का खर्च भी मिलेगा.

वीआरएस लेने वाले कर्मचारियों को रिटायर्ड बाद भी चिकित्सा लाभ योजना के तहत चिकित्सा लाभ मिलेगा. इसके अलावा कर्मचारी अपने बचे अवकाश सीएल, ईएल और पीएल के बदले नकदी में भुगतान भी ले सकेंगे. नोटिस में कहा गया है कि जिस कर्मचारी के खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है, वह इस योजना का लाभ नहीं ले सकेगा.

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एक दिन में 3 डॉक्टर की कोरोना से मौत बिहार में कोरोना की भयावह तस्वीर दर्शाती है

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बिहार में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस बड़ी तेजी से अपने पांव पसार रही है। शुक्रवार को सूबे में 1820 नए संक्रमितों की पहचान की गई। राज्य में अब कुल संक्रमितों का आंकड़ा 33, 511 तक पहुंच गया। वहीं शुक्रवार को बिहार के तीन डॉक्टरों की कोरोना से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार कोरोना संक्रमित मरने वाले तीन डाक्टरों में मसौढ़ी के डॉ अवधेश कुमार सिंह, सुपौल के डॉ महेंद्र चौधरी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के पूर्व विभागध्यक्ष डॉ मिथिलेश कुमार सिंह शामिल हैं।

पटना में सबसे अधिक 561 नए संक्रमित मिले
पिछले दो दिनों में पटना में सबसे अधिक 561 नए संक्रमित मिले। वहीं, गया में 147, सारण में 121, रोहतास में 101, मुजफ्फरपुर में 99, भागलपुर में 81 नए संक्रमितों की पहचान की गई।

पटना में 439 और नालंदा में 189 लोग एक दिन में स्वस्थ
पटना प्रमंडल में कोरोना संक्रमितों के ठीक होने की संख्या में इजाफा हुआ है। एक दिन में 763 लोग स्वस्थ हुए हैं। इनमें से कुछ लोग अस्पताल में भर्ती थे, जबकि कुछ होम आइसोलेशन में थे। प्रमंडलीय आयुक्त  संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि इससे सावधानी बरतने और सचेत रहने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति काफी संख्या में ठीक हो रहे हैं। पटना प्रमंडल के जिलों में 24 जुलाई को कुल 763 कोरोना संक्रमित ठीक हुए हैं। इनमें पटना के 439, बक्सर के 45, भोजपुर के 24, कैमूर के 7, नालन्दा के 189 और रोहतास जिले के 59 मरीज हैं। बताया कि मरीजों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। साथ ही उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग के पालन की अपील की है।

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कोरोना वायरस को रोकने में N-95 मास्क फेल, सरकार ने ज़ारी की गाइडलाइन

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नई दिल्ली:  केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर लोगों के एन-95 मास्क पहनने के खिलाफ चेतावनी जारी कर कहा है कि इससे वायरस का प्रसार नहीं रुकता और यह कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के ‘‘विपरीत” है.

स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक राजीव गर्ग ने राज्यों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मामलों के प्रधान सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि सामने आया है कि प्राधिकृत स्वास्थ्य कर्मियों की जगह लोग एन-95 मास्क का ‘‘अनुचित इस्तेमाल” कर रहे हैं, खासकर उनका जिनमें छिद्रयुक्त श्वसनयंत्र लगा है.

उन्होंने कहा, ‘‘आपके संज्ञान में लाया जाता है कि एन-95 मास्क कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अपनाए गए कदमों के विपरीत है क्योंकि यह वायरस को मास्क के बाहर आने से नहीं रोकता। इसके मद्देनजर मैं आपसे आग्रह करता हूं कि सभी संबंधित लोगों को निर्देश दें कि वे फेस/माउथ कवर के इस्तेमाल का पालन करें और एन-95 मास्क के अनुचित इस्तेमाल को रोकें.”

बता दें की WHO ने भी तीन लेयर वाले मास्क को कोरोना वायरस की खिलाफ सबसे असरदार माना है, इतना ही नहीं हिदायत दी जाती रही है की घर में बने मास्क का प्रयोग सबसे उचित है जिसे उपयोग के बाद ससून से धोया जा सके.

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