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45 साल में सबसे ज़्यादा बेरोज़गारी की रिपोर्ट से डर गई सरकार

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2017-18 के लिए नेशनल सैंपल सर्वे आफिस की तरफ से कराये जाने वाले श्रम शक्ति सर्वे के नतीजों को सरकार दबा रही है। इस साल पिछले 45 साल में बेरोज़गारी की दर सबसे अधिक रही है। दिसंबर 2018 के पहले हफ्ते में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग( NSC) ने सर्वे को मंज़ूर कर सरकार के पास भेज दिया लेकिन सरकार उस पर बैठ गई। यही आरोप लगाते हुए आयोग के प्रभारी प्रमुख मोहनन और एक सदस्य जे वी मीमांसा ने इस्तीफ़ा दे दिया है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के सोमेश झा ने इस रिपोर्ट की बातें सामने ला दी है। एक रिपोर्टर का यही काम होता है। जो सरकार छिपाए उसे बाहर ला दे। अब सोचिए अगर सरकार खुद यह रिपोर्ट जारी करे कि 2017-18 में बेरोज़गारी की दर 6.1 हो गई थी जो 45 साल में सबसे अधिक है तो उसकी नाकामियों का ढोल फट जाएगा। इतनी बेरोज़गारी तो 1972-73 में थी। शहरों में तो बेरोज़गारी की दर 7.8 प्रतिशत हो गई थी और काम न मिलने के कारण लोग घरों में बैठने लगे थे।

सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इंकॉनमी(CMIE) के महेश व्यास तो पिछले तीन साल से बेरोज़गारी के आँकड़े सामने ला रहे हैं। उनके कारण जब बेरोज़गारी के आँकड़ों पर बात होने लगी तो सरकार ने लेबर रिपोर्ट जारी करनी बंद कर दी। उन्होंने पिछले महीने के प्राइम टाइम में बताया था कि बेरोज़गारी की दर नौ प्रतिशत से भी ज़्यादा है जो कि अति है।

आप इंटरनेट पर रोज़गार और रोज़गार के आँकड़ों से संबंधित ख़बरों को सर्च करें। आपको पता चलेगा कि लोगों में उम्मीद पैदा करते रहने के लिए ख़बरें पैदा की जाती रही हैं। बाद में उन ख़बरों का कोई अता-पता नहीं मिलता है। जैसे फ़रवरी 2018 में सरकार अपने मंत्रालयों से कहती है कि अपने सेक्टर में पैदा हुए रोज़गार की सूची बनाएँ। एक साल बाद वो सूची कहाँ हैं।

पिछले साल टी सी ए अनंत की अध्यक्षता में एक नया पैनल बना था। उसे बताना था कि रोज़गार के विश्वसनीय आँकड़े जमा करने के लिए क्या किया जाए। इसके नाम पहले जो लेबर रिपोर्ट जारी होती थी, वह बंद कर दी गई। जुलाई 2018 इस पैनल को अपनी रिपोर्ट देनी थी मगर उसने छह महीने का विस्तार माँग लिया।

इसीलिए बेहतर आँकड़े की व्यवस्था के नाम पर उन्होंने पुरानी रिपोर्ट बंद कर दी क्योंकि उसके कारण सवाल उठने लगते थे। अब जब राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की रिपोर्ट आई है तो उसे दबाया जा रहा है। सोचिए सरकार चाहती है कि आप उसका मूल्याँकन सिर्फ झूठ, धार्मिक और भावुक बातों पर करें।

सरकार की आर्थिक नीतियाँ फ़ेल हो चुकी हैं। इसलिए
भाषण को आकर्षक बनाए रखने के लिए अमरीकी मॉडल की तरह स्टेडियम को सजाया जा रहा है। अच्छी लाइटिंग के ज़रिए प्रधानमंत्री को फिर से महान उपदेशक की तरह पेश किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा और रोज़गार को अपने एजेंडे और भाषणों से ग़ायब कर दिया है। उन्हें पता है कि अब काम करने का मौक़ा भी चला गया।

इसलिए उन्होंने एक तरह प्रधानमंत्री कार्यालय छोड़ सा दिया है। भारत के प्रधानमंत्री सौ सौ रैलियाँ कर रहा हैं लेकिन एक में भी शिक्षा और रोज़गार पर बात नहीं कर रहे हैं। मैंने इतना नौजवान विरोधी प्रधानमंत्री नहीं देखा। सरकारी ख़र्चे पर होने वाली इन सौ रैलियों के कारण प्रधानमंत्री बीस दिन के बराबर काम नहीं करेंगे। इसे अगर बारह-बारह घंटे में बाँटे तो चालीस दिन के बराबर काम नहीं करेंगे। वे दिन रात कैमरे की नज़र में रहते हैं। आप ही सोचिए वे काम कब करते हैं ?

न्यूज़ चैनलों के ज़रिए धार्मिक मसलों का बवंडर पैदा किया जा रहा है ताकि लोगों के सवाल बदल जाएँ। वे नौकरी छोड़ कर सेना की बहादुरी और मंदिर की बात करने लग जाएँ। हमारी सेना तो हमेशा से ही बहादुर रही है। सारी दुनिया लोहा मानती है। प्रधानमंत्री क्यों बार बार सेना-सेना कर रहे हैं? क्या सैनिक के बच्चे को शिक्षा और रोज़गार नहीं चाहिए? उन्हें पता है कि धार्मिक कट्टरता ही बचा सकती है। इसलिए एक तरफ अर्ध कुंभ को कुंभ बताकर माहौल बनवाया जा रहा है तो दूसरी तरह रोज़गार के सवाल ग़ायब करने के लिए अनाप-शनाप मुद्दे पैदा किए जा रहे हैं।

हे भारत के बेरोज़गार नौजवानों ईश्वर तुम्हारा भला करे ! मगर वो भी नहीं करेगा क्योंकि उसका भी इस्तमाल चुनाव में होने लगा है। तुम्हारी नियति पर किसी ने कील ठीक दी है। हर बार नाम बताने की ज़रूरत नहीं है।

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BPCL कर्मचारियों को सरकार का आदेश, नही पसंद निजीकरण तो ले सकते हैं VRS

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निजीकरण से पहले सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपारेशन लिमिटेड (BPCL) अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) लेकर आई है. इसके तहत कंपनी की ओर से कर्मचारियों को कई तरफ के ऑफर दिए हैं.

दरअसल, सरकार देश की तीसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी और दूसरी सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी BPCL का निजीकरण करने जा रही है. निजीकरण से पहले कंपनी ने अपने कर्मचारियों को वीआरएस देने की पेशकश की है.

File Photo

पीटीआई के मुताबिक बीपीसीएल ने अपने कर्मचारियों को भेजे आंतरिक नोट में कहा कि कंपनी ने वीआरएस की पेशकश करने का फैसला किया है. यह योजना उन कर्मचारियों के लिए है जो किसी भी निजी कारणों से कंपनी में सेवाएं जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं, वे कर्मचारी वीआरएस के लिए आवेदन कर सकते हैं.

भारत पेट्रोलियम वीआरएस योजना-2020 (बीपीवीआरएस-2020) 23 जुलाई को खुली है और 13 अगस्त को बंद होगी. कंपनी के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक वीआरएस उन कर्मचारियों को बाहर निकलने का विकल्प देने लिए लाया गया है, जो निजी प्रबंधन के तहत काम नहीं करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि कुछ कर्मचारियों को लगता है कि बीपीसीएल के निजीकरण के बाद उनकी भूमिका, स्थिति या स्थान में बदलाव हो सकता है. यह योजना उन्हें बाहर निकलने का विकल्प देती है.

गौरतलब है कि बीपीसीएल में सरकार अपनी समूची 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है. कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 20,000 है. रिपोर्ट के मुताबिक पांच से 10 फीसदी कर्मचारी वीआरएस का विकल्प चुन सकते हैं.

योजना का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों को प्रत्येक पूरे हुए सेवा वर्ष के लिए दो माह का वेतन या वीआरएस के समय तक का मासिक वेतन मिलेगा. सेवाकाल के शेष बचे महीनों को इसमें गुणा किया जाएगा. इसके अलावा उन्हें सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाला कंपनी छोड़ने का खर्च भी मिलेगा.

वीआरएस लेने वाले कर्मचारियों को रिटायर्ड बाद भी चिकित्सा लाभ योजना के तहत चिकित्सा लाभ मिलेगा. इसके अलावा कर्मचारी अपने बचे अवकाश सीएल, ईएल और पीएल के बदले नकदी में भुगतान भी ले सकेंगे. नोटिस में कहा गया है कि जिस कर्मचारी के खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है, वह इस योजना का लाभ नहीं ले सकेगा.

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एक दिन में 3 डॉक्टर की कोरोना से मौत बिहार में कोरोना की भयावह तस्वीर दर्शाती है

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बिहार में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस बड़ी तेजी से अपने पांव पसार रही है। शुक्रवार को सूबे में 1820 नए संक्रमितों की पहचान की गई। राज्य में अब कुल संक्रमितों का आंकड़ा 33, 511 तक पहुंच गया। वहीं शुक्रवार को बिहार के तीन डॉक्टरों की कोरोना से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार कोरोना संक्रमित मरने वाले तीन डाक्टरों में मसौढ़ी के डॉ अवधेश कुमार सिंह, सुपौल के डॉ महेंद्र चौधरी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के पूर्व विभागध्यक्ष डॉ मिथिलेश कुमार सिंह शामिल हैं।

पटना में सबसे अधिक 561 नए संक्रमित मिले
पिछले दो दिनों में पटना में सबसे अधिक 561 नए संक्रमित मिले। वहीं, गया में 147, सारण में 121, रोहतास में 101, मुजफ्फरपुर में 99, भागलपुर में 81 नए संक्रमितों की पहचान की गई।

पटना में 439 और नालंदा में 189 लोग एक दिन में स्वस्थ
पटना प्रमंडल में कोरोना संक्रमितों के ठीक होने की संख्या में इजाफा हुआ है। एक दिन में 763 लोग स्वस्थ हुए हैं। इनमें से कुछ लोग अस्पताल में भर्ती थे, जबकि कुछ होम आइसोलेशन में थे। प्रमंडलीय आयुक्त  संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि इससे सावधानी बरतने और सचेत रहने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति काफी संख्या में ठीक हो रहे हैं। पटना प्रमंडल के जिलों में 24 जुलाई को कुल 763 कोरोना संक्रमित ठीक हुए हैं। इनमें पटना के 439, बक्सर के 45, भोजपुर के 24, कैमूर के 7, नालन्दा के 189 और रोहतास जिले के 59 मरीज हैं। बताया कि मरीजों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। साथ ही उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग के पालन की अपील की है।

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कोरोना वायरस को रोकने में N-95 मास्क फेल, सरकार ने ज़ारी की गाइडलाइन

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नई दिल्ली:  केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर लोगों के एन-95 मास्क पहनने के खिलाफ चेतावनी जारी कर कहा है कि इससे वायरस का प्रसार नहीं रुकता और यह कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के ‘‘विपरीत” है.

स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक राजीव गर्ग ने राज्यों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मामलों के प्रधान सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि सामने आया है कि प्राधिकृत स्वास्थ्य कर्मियों की जगह लोग एन-95 मास्क का ‘‘अनुचित इस्तेमाल” कर रहे हैं, खासकर उनका जिनमें छिद्रयुक्त श्वसनयंत्र लगा है.

उन्होंने कहा, ‘‘आपके संज्ञान में लाया जाता है कि एन-95 मास्क कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अपनाए गए कदमों के विपरीत है क्योंकि यह वायरस को मास्क के बाहर आने से नहीं रोकता। इसके मद्देनजर मैं आपसे आग्रह करता हूं कि सभी संबंधित लोगों को निर्देश दें कि वे फेस/माउथ कवर के इस्तेमाल का पालन करें और एन-95 मास्क के अनुचित इस्तेमाल को रोकें.”

बता दें की WHO ने भी तीन लेयर वाले मास्क को कोरोना वायरस की खिलाफ सबसे असरदार माना है, इतना ही नहीं हिदायत दी जाती रही है की घर में बने मास्क का प्रयोग सबसे उचित है जिसे उपयोग के बाद ससून से धोया जा सके.

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