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राजनीति

महाभारत काल मे मात्र इंटरनेट ही नही टीवी और जहाज भी थे:- भाजपा नेता राम प्रसाद शर्मा

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भाजपा के नेता आज कल अनोखे बयान देते और उन बयानों का समर्थन करते हुए नजर आ रहे है। अभी महाभारत काल के इंटरनेट का मामला संभला भी नही था कि भाजपा के एक और नेता ने बयान दे डाला कि उस काल मे मात्र इंटरनेट ही नही था बल्कि टीवी और जहाज भी थे। अब समझने की बात यह है कि यह किस तरह से भारत की आम जनता को बरगलाने और भड़काने की कोशिश की जा रही है।

भारत में लाखों साल पहले इण्टरनेट और सैटेलाइट होने का बयान देकर त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देब खासी चर्चा में हैं। उनका ये भी मानना है कि महाभारत युद्ध के दौरान इनका प्रयोग भी किया गया था। बिप्लब देब के इस बयान पर विरोधी उन्हें आड़े हाथों ले रहे हैं। इसी बीच भाजपा नेताओं ने बिप्लब देब के इस बयान का समर्थन भी किया है। जबकि बिप्लब देब अभी तक अपने बयान पर कायम हैं।

बुधवार को अगरतला में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने अपने विरोधियों को आड़े हाथों लिया। देब जन वितरण प्रणाली के कंप्यूटरीकरण पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करने आए थे। बिप्लब देब ने कहा कि,’ मैं मानता हूं कि इण्टरनेट और सैटेलाइट महाभारत काल में भी मौजूद थे। संकीर्ण मानसिकता वाले लोगों के लिए इस पर यकीन करना मुश्किल है। वह अपने ही देश की उपलब्धियों को छोटा जबकि दूसरे देशों की उपलब्धियों को बड़ा मानते हैं। सच पर यकीन कीजिए। न तो खुद भ्रमित हों और न ही दूसरों को करें।’

जैसे इतना ही पर्याप्त नहीं था, इस मामले पर त्रिपुरा के गर्वनर तथागत रॉय ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि,’ त्रिपुरा के मुख्यमंत्री का पौराणिक काल होने पर यकीन काल्पनिक जान पड़ता है। दिव्य दृष्टि, पुष्पक रथ जैसी चीजें बिना किसी साक्ष्य और अध्ययन के पूरी तरह से बकवास लगती हैं।’

लेकिन इस मामले पर त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देब के बयान को भाजपा के नेताओं ने अपना समर्थन दिया है। असम के भाजपा सांसद राम प्रसाद शर्मा ने बिप्लब देब का धन्यवाद दिया। रामप्रसाद शर्मा ने बिप्लब देब की न सिर्फ तारीफ की बल्कि उन्होंने नासा द्वारा भारत से जानकारी लेने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि,’ सत्य को प्रकाश में लाने के लिए मैं बिप्लब देब जी को धन्यवाद देता हूं। उनका नाम बिप्लब है और इसीलिए उन्होंने क्रान्तिकारी बातें की हैं। महाभारत में संजय ने टीवी का किरदार निभाया था। धृतराष्ट्र अंधे थे इसलिए महाभारत युद्ध में क्या हो रहा था, वह उसे देखकर धृतराष्ट्र को बता दिया करते थे। ये सिर्फ महाभारत और रामायण काल की बातें नहीं हैं। वेदों में वर्णित विज्ञान अब इस दुनिया में नहीं है। नासा ने वेदों से भी विज्ञान की जानकारियां ली हैं।’

इससे पहले बिप्लब देब ने अपने बयान में कहा था कि,’यही वह देश है जहां संजय बैठकर धृतराष्ट्र को महाभारत युद्ध का आंखों देखा हाल सुना रहा था। इसका मतलब है कि वहां तकनीकी थी। वहां इण्टरनेट था, वहां सैटेलाइट थे। वह संजय की आंखों से कैसे देख सकते थे? इसका अर्थ है कि उस दौर में वहां पर टेक्नोलॉजी थी। मध्य काल में क्या हुआ ये हम नहीं जानते। लेकिन इस समय टेक्नोलॉजी वहीं है, जहां उस वक्त हुआ करती थी। मैं आप लोगों को बधाई देना चाहता हूं कि आपने ये बड़ा काम किया है। लेकिन ये करने वाले आप पहले इंसान नहीं हैं। ये अविष्कार देश में लाखों साल पहले ही हो चुका था। मुझे गर्व है कि मैं इस देश में पैदा हुआ हूं। आज यूरोप और अमेरिका जैसे मुल्क हमसे कहते हैं कि ये टेक्नोलॉजी हमारी है, लेकिन ये टेक्नोलॉजी उनकी नहीं, हमारी है।

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बारिश के लिए सरकारी यज्ञ, संविधान की मूल भावना “वैज्ञानिक चेतना का विकास” का उल्लंघन

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गांधीनगर: गुजरात में इन दिनों पानी का संकट है. राज्य के जल संसाधन सूख रहे हैं. लेकिन सरकार इससे निपटने के लिए जरूरी इंतजाम करने के बजाय दैवीय उम्मीद का सहारा ले रही है. जल संकट से निपटने के लिए हुई कैबिनेट की बैठक में यज्ञ कराने का निर्णय लिया गया है.

टाइम्स आॅफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई से 33 जिलों में 41 पर्जन्य यज्ञ करवाए जाएंगे. इसके अलावा 8 प्रमुख शहरों में वर्षा के देवता इंद्र देव और पानी के देवता वरुणदेव को खुश करने के लिए भी यज्ञ का आयोजन होगा.

यह यज्ञ गुजरात सरकार के एक महीने से चल रही ‘सुजलाम सुफलाम जल अभियान’ का समापन करेगा. इस अभियान के जरिए सिल्ट हटाने और नदियों, झीलों, तालाबों, कैनल और जल निकायों को आने वाले मानसून सीजन में गहरा किया जाने का काम होगा.

यज्ञ करने का निर्णय बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया.

उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा, ‘सरकार ने अच्छी बारिश के लिए 31 मई को यज्ञ का आयोजन करने का निर्णय लिया है. यह यज्ञ पूरे गुजरात में 41 जगहों पर होंगे और यज्ञ समाप्त होने के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा. मैं और मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, राज्य के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी यज्ञों में शामिल होंगे. जिसके बाद जनसभा होगी. ‘

गुजरात इस समय गर्मियों में पानी संकट से जूझ रहा है. राज्य के 204 बांधों में अपनी क्षमता 25,227 मिलियन क्यूबिक मीटर का केवल 29 प्रतिशत पानी बचा हुआ है. 2019 में लोकसभा चुनाव नजदीक है और ऐसे में रुपाणी सरकार को डर है कि मॉनसून में देरी या पानी की कमी से लोगों में असंतोष फैल सकता है, जिसका असर चुनाव पर पड़ेगा.

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भाजपा के लिये 2019 की डगर हुई मुश्किल, लोकसभा में अल्पमत में पहुंचा

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की अगुवाईवाली भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत हासिल करते हुए 282 सीटें जीतनेवाली यह पार्टी अब चार साल बाद अकेले बहुमत से दूर हो चुकी है?

जी हां, बहुमत के लिए जरूरी 272 सीटों के आंकड़े से भाजपा पीछे खिसक गयी है. लोकसभा में स्पीकर को छोड़कर भाजपा के पास लोकसभा में केवल 270 सीटें बची हैं.

कर्नाटक चुनाव का असर?

मालूम हो कि भाजपा की यह स्थिति कर्नाटक चुनाव के बाद हुई, जब स्पीकर ने कर्नाटक के दो सांसद- बीएस येदियुरप्पा और बी श्रीरामुलु के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया. गौरतलब है कि दोनों नेता कर्नाटक विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बने और जीत हासिल की. दोनों नेताओं ने विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ ली और अपनी संसदीय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसद कीर्ति झा आजाद को निलंबित कर दिया है. यही नहीं, पार्टी के एक सांसद शत्रुघ्न सिन्हा इन दिनों बागी तेवर अपनाए हुए हैं. ऐसे में पार्टी अगर उन्हें भी निलंबित कर देती है, तो लोकसभा में भाजपा के सांसदों की संख्या 269 पर सिमट जाएगी.

सीटें घटने के बड़े मायने

यह सब जानकर अगर आप कहीं इस नतीजे पर न पहुंच जायें कि पीएम मोदी की सरकार अल्पमत में आ गयी है, अपको बता दें कि अब भी एनडीए के पास बहुमत से कहीं ज्यादा सीटें हैं, लेकिन अब भाजपा अकेले दम पर सरकार में बने रहने की स्थिति में नहीं है. चार सालों में पार्टी की सीटें घटने के बड़े मायने हैं. इससे एनडीए के सहयोगी दलों पर पार्टी की निर्भरता बढ़ गयी है. भाजपा की सीटें कम होने की वजह पिछले कुछ दिनों में हुए लोकसभा उपचुनावों में उसकी हार और उसके कुछ सांसदों का इस्तीफा रहा है.

उपचुनावों में हार बनी वजह

मालूम हो कि पिछले दिनों भाजपा को कई उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ा है. इनमें उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर सीट, पंजाब में गुरुदासपुर, राजस्थान में अलवर और अजमेर सीट, मध्यप्रदेश में भिंड सीट का नाम शामिल है. यह बात दीगर है कि कुछ उपचुनावों में भाजपा ने अपनी सीटें बरकरार भी रखी. उसे गुजरात के वडोदरा, मध्यप्रदेश के शाहडोल और असम के लखीमपुर सीट पर जीत हासिल हुईं.

अब भी है मौका

खेल अब भी बिगड़ा नहीं है, भाजपा के पास अकेले दम पर बहुमत तक पहुंचने का एक और मौका है. आगामी 28 मई को चार लोकसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं. इसमें महाराष्ट्र की भंडारा-गोंदिया सीट और पालघर सीट, उत्तर प्रदेश में कैराना की सीट और नगालैंड में एक सीट शामिल है. लेकिन इन जगहों पर जीत हासिल करना भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा, क्योंकि यहां इस राष्ट्रीय पार्टी को क्षेत्रीय दलों से कड़ा मुकाबला करना होगा.

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देश

भाजपा सरकार का अलबेला फैसला,मोदी के भाषणों वाली किताब पढ़ेंगे राजस्थान के अधिकारी

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राजस्थान में आईएएस अधिकारियों को निकट भविष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों पर आधारित किताबों का अध्ययन करना पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किताबों में मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के दौरान गुड गवर्नेंस (सुशासन) पर दिए भाषणों को समाहित किया गया है। राजस्थान सरकार में राज्य कार्मिक सचिव भास्कर ए सावंत ने बुधवार (23 मई) को माीडिया को बताया कि किताबों का टाइटल ‘चिंतन शिविर’ रखा गया है, जिन्हें गुजरात सरकार को भेज दिया गया है और सरकार की औपचारिक स्वीकृति के बाद आईएएस अधिकारियों में उन्हें बांट दिया जाएगा। कार्मिक सचिव ने बताया कि इस बाबत अनुमति लेने के लिए एक फाइल आगे बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि किताबें राजस्थान के प्रमुख सचिव को उनके गुजरात समकक्ष के द्वारा भेजा गया है। भास्कर ए सावंत ने बताया कि किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन भाषणों का संकलन किया गया है जो उन्होंने 2001 से 2014 के दौरान गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए दिए थे, जिनमें उन्होंने सुशासन, निर्णय लेने, समय प्रबंधन आदि मुद्दों पर बात की थी।

बता दें कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री की छात्रों के लिए लिखी किताब ‘एग्जाम वॉरियर्स’ जीवनचरित पर आधारित किताब ‘ज्योतिपुंज’ खासी चर्चाओं में रहीं। प्रधानमंत्री की भाषणशैली को लेकर आम जनता में भी उनकी तारीफ सुनी जाती है। हालांकि विरोधी उन्हें जुमलाबाज तक कहकर आलोचना करते देखे जाते हैं। फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रुट को लेकर चर्चा गर्म है। रुट के गुरुवार को दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंच रहे हैं। रुट मोदी के पिछले वर्ष जून में हुए नीदरलैंड दौरे के एक वर्ष से कम समय में यहां आ रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार 130 कंपनियों के 230 व्यापारिक प्रतिनिधि भी रुट के साथ यहां ट्रेड मिशन में भाग लेने के लिए आएंगे। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया- “ट्रेड मिशन में शामिल होने वाली कंपनियां एग्रीफूड, बागवानी, लॉजिस्टिक्स, स्मार्ट सिटिज, जल, स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान, आईटी, समुद्री क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी। इसके साथ ही भारत-नीदरलैंड सीईओ फोरम भी नई दिल्ली में आयोजित होगा।” नई दिल्ली के बाद रुट बेंगलुरू का दौरा करेंगे, जहां वह अन्य गतिविधियों के साथ इसरो के परिसर जाएंगे।

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