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बिहार चुनाव के बीच शाहनवाज़ हुसैन और राजीव प्रताप रूडी कोरोना संक्रमित पाए गए

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पटना: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जहां सभी दलों की तरफ से प्रचार अभियान जारी है. इसी बीच बिहार बीजेपी के दो बड़े नाम राजीव प्रताप रुडी (Rajiv Pratap Rudy) और शाहनवाज़ हुसैन (Shahnawaz Hussain) कोरोना संक्रमित हो गए हैं. साथ ही उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय की तबियत भी ठीक नहीं है . हालांकि सुशील मोदी की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है लेकिन ये दोनों नेताओं ने भी फ़िलहाल अपने आपको आइसोलेट कर लिया है.

 

बताते चले कि कोरोना संकट के बीच बिहार विधानसभा का चुनाव तीन चरणों में हो रहा है. पहले चरण के लिए  28 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे. वहीं नतीजों का ऐलान 10 नवंबर 2020 को किया जाएगा.  आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जहां पहले चरण में जहां 16 जिलों की 71 सीटों पर मतदान होगा तो वहीं दूसरे चरण में 17 जिलों की 94 सीटों पर मतदान किया जाएगा. इसके अलावा तीसरे और अंतिम चरण में 15 जिलों की 78 सीटों पर मतदाता अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे.

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मौसम विभाग:- दिल्ली सहित कई राज्यों में अगले 5 दिन तक बरसेंगे बादल, उत्तराखंड में अलर्ट

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दिल्ली-एनसीआर में देरी से ही सही पर बारिश आने के बाद मौसम खुशनुमा हो गया है। मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाले 4-5 दिन दिल्ली में हल्कि तो वहीं, हिमाचल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी से बहुत बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग की मानें तो पंजाब और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है। वहीं राजस्थान के कुछ जिलों में बादल गरजने के साथ बिजली गिरने का अनुमान लगाया गया है। वहीं, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी भारी बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। मध्य महाराष्ट्र और गोवा के लिए बुधवार को रेड अलर्ट जारी किया गया था।

दिल्ली में छह दिनों तक बारिश

मानसून की पहली झमाझम बरसात में बुधवार को दिल्ली के ज्यादातर हिस्से भीग गए। इसके चलते दिल्ली के लोगों को गर्मी और उमस से खासी राहत मिली है। राजधानी के रिज मौसम केंद्र ने दिन के समय 107.4 मिलीमीटर बरसात रिकॉर्ड की, जो दिल्ली में सबसे ज्यादा रही।मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले छह दिनों कर  दिल्ली में हल्की बारिश हो सकती है। गुरुवार के कुछ इलाकों में हल्कि बारिश देखने को मिलेगी जबकि, शुक्रवार को बारिश की गतिविधि कम रहेगी। कहीं-कहीं ही हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है। शनिवार को हल्की बारिश के आसार हैं, जबकि रविवार के दिन मध्यम व भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

यूपी के कुछ इलाकों में बारिश का अनुमान

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कई इलाकों में आज बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग ने कहा है कि यहां गुरुवार से मौसम बदल सकता है। राज्य के कुछ इलाकों में बादल छाए रहेंगे तो कुछ इलाकों में हल्कि बारिश देखने को मिलेगी। लेकिन हारनपुर, मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, पीलीभीत, बलिया, लखीमपुर खीरी समेत कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट 

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, गुरुवार के लिए राज्य में कोई अलर्ट नहीं है। हालांकि, कई जगह हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 16 जुलाई को देहरादून और नैनीताल में भारी बारिश की संभावना है। 17 को उत्तरकाशी, देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ में कहीं कहीं भारी से बहुत भारी बारिश संभव है। 18 को देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ में कहीं कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का येलो अलर्ट रहेगा। पिछले 24 घंटे में राज्यभर में झमाझम बारिश हुई है।

हरियाणा, पंजाब और राजस्थान का मौसम

मौसम विभाग ने कहा है कि हरियाणा और पंजाब में हल्कि से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी। वहीं राजस्थान के कुछ जिलों में बादल छाए रहने और वज्रपात की आशंका जताई है। मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 24 घंटों के दौरान कोटा, बारां, सिरोही, सवाईमाधोपुर, टोंक, बाडमेर, पाली, जालौर जिलों में कहीं कहीं बादल गरजने के साथ-साथ वज्रपात की भी संभावना है।दिल्ली-एनसीआर में देरी से ही सही पर बारिश आने के बाद मौसम खुशनुमा हो गया है। मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाले 4-5 दिन दिल्ली में हल्कि तो वहीं, हिमाचल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी से बहुत बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग की मानें तो पंजाब और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है। वहीं राजस्थान के कुछ जिलों में बादल गरजने के साथ बिजली गिरने का अनुमान लगाया गया है। वहीं, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी भारी बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। मध्य महाराष्ट्र और गोवा के लिए बुधवार को रेड अलर्ट जारी किया गया था। 

 

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रिया के बेल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी NCB, बढ़ सकती है मुश्किलें

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बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की अत्महत्या के मामले में ड्रग कनेक्शन को लेकर गिरफ्तार अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को ज़मानत दी। रिया को कोर्ट ने 28 दिन बाद एक लाख रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत दी है। वहीं रिया के भाई शोविक चक्रवर्ती की ज़मानत याचिका खारिज कर दी है।

जमानत मिलने के बाद भी रिया की मुश्किलें अभी खत्म नहीं ही है। जांच एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने जमानत का विरोध दिया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल सिंह ने जमानत के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिया के अलावा सुशांत के स्टाफ दीपेश सावंत और सैमुअल मिरांडा को भी जमानत दी है। वहीं अब्दुल बासित की ज़मानत याचिका खारिज कर दी गई है।

न्यायमूर्ति एस.वी. कोतवाल, जिन्होंने पिछले सप्ताह जमानत अर्जी संबंधी सुनवाई पूरी की थी, उन्होंने बुधवार सुबह फैसला सुनाया। एनसीबी द्वारा 9 सितंबर को ड्रग से संबंधित मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद, रिया ने 28 दिन हिरासत में बिताए हैं। उन्हें मंगलवार को एक विशेष एनडीपीएस अदालत ने 20 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए, मानशिंदे ने कहा, “सच्चाई और न्याय की जीत हुई है।”उन्होंने कहा, रिया की गिरफ्तारी और हिरासत पूरी तरह से अनुचित थी। तीन केंद्रीय एजेंसियों – सीबीआई, ईडी और एनसीबी – रिया के पीछे पड़ गई थी और अब यह सब खत्म होना चाहिए। हम सच्चाई के लिए प्रतिबद्ध हैं। सत्य मेव जयते।

बता दें अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच के दौरान सामने आए ड्रग्स एंगल के मामले में एनसीबी द्वारा रिया, शोविक सहित 19 को अगस्त-सितंबर के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उन लोगों में चक्रवर्ती भाई-बहन, सुशांत के कर्मचारी दीपेश सावंत, सैमुएल मिरांडा, कई ड्रग पेडलर, सप्लायर और फिल्म उद्योग से जुड़े व्यक्ति शामिल हैं।

सितंबर के अंत तक गिरफ्तार किए गए अन्य लोग हैं–अब्बास लखानी, करण अरोरा, जैद विलात्रा, अब्दुल बासित परिहार, कैजान इब्राहिम, अनुज केसवानी, अंकुश अरनेजा, कमरजीत सिंह आनंद, संकेत पटेल, संदीप गुप्ता, आफताब अंसारी, दिव्या फर्नांडिस, सूर्यदीप मल्होत्रा, क्रिस कोस्टा, राहिल विश्राम और क्षितिज आर. प्रसाद। अभियुक्तों में से कुछ को जमानत मिल गई है, अन्य अलग-अलग अवधि के लिए हिरासत में हैं क्योंकि एनसीबी की जांच कई अन्य अभिनेत्रियों से पूछताछ के साथ जारी है।

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बिहार: एक पैराग्राफ की कहानी का राज्य:- रवीश कुमार

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नोट- यह लेख एक पैराग्राफ का है। लंबा है। कृपया इसे अपनी साइट पर छापें तो इसमें पैराग्राफ चेंज न करें। मेरा फिर भी अनुरोध है कि चुनाव आए तो अखबार पढ़ना ही नहीं लेना भी बंद कर दें। चैनलों के कनेक्शन कटवा दें। इस एक महीने के कवरेज से कुछ होता नहीं है। ज़्यादातर कवरेज़ में फिक्सिंग होगी। क्या फायदा। लोगों से बात करें। आपस में बात करें। फिर वोट दें। पांच साल में जो देखा है उस पर भरोसा रखें। न्यूज़ वेबसाइट, चैनल और अखबार के पास कुछ भी नया नहीं है। कुछ भी खोज कर लाई गई सामग्री नहीं है। बस वाक्य को आकर्षक बनाया जाएगा, हेडलाइन कैची होगी और आपके निगाहों को लूट लिया जाएगा। जिसे आई बॉल्स या टी आर पी कहते हैं। पढ़ भी रहे हैं तो ग़ौर से पढ़िए कि इस लेख में है क्या। केवल पंचिंग लाइन का खेला है या कुछ ठोस भी है।
पाठक हैं तो बदल जाइये। दर्शक हैं तो चैनलों को घर से निकाल दीजिए।

बिहार: एक पैराग्राफ की कहानी का राज्य

साधारण कथाओं का यह असाधारण दौर है। बिहार उन्हीं साधारण कथाओं के फ्रेम में फंसा एक जहाज़ है। बिहार की राजनीति में जाति के कई टापू हैं। बिहार की राजनीति में गठबंधनों के सात महासागर हैं। कभी जहाज़ टापू पर होता है। कभी जहाज़ महासागर में तैर रहा होता है। चुनाव दर चुनाव बिहार उन्हीं धारणाओं की दीवारों पर सीलन की तरह नज़र आता है जो दिखता तो है मगर जाता नहीं है। सीलन की परतें उतरती हैं तो नईं परतें आ जाती हैं। बिहार को पुरानी धारणाओं से निकालने के लिए एक महीना कम समय है। सर्वे और समीकरण के नाम पर न्यूज़ चैनलों से बाकी देश ग़ायब हो जाएगा। पर्दे पर दिखेगा बिहार मगर बिहार भी ग़ायब रहेगा। बिहार में कुछ लोग अनैतिकता खोज रहे हैं और कुछ लोग नैतिकता। बिहार में जहां नैतिकता मिलती है वहीं अनैतिकता भी पाई जाती है। जहां अनैतिकता नहीं पाई जाती है वहां नैतिकता नहीं होती है। बिहार में दोनों को अकेले चलने में डर लगता है इसलिए आपस में गठबंधन कर लेती हैं। अनैतिक होना अनिवार्य है। अनैतिकता ही अमृत है। नैतिकता चरणामृत है। पी लेने के बाद सर में पोंछ लेने के लिए होती है। नेता और विश्लेषक पहले चुनाव में जाति खोजते थे। जाति से बोर हो गए तो जाति का समीकरण बनाने लगे। समीकरण से बोर हो गए तो गठबंधन बनाने लगे। गठबंधन से बोर हो गए तो महागठबंधन बनाने लगे। नेता जानता है इसके अलावा हर जात के ठेकेदार को पैसे देने पड़ते हैं। दरवाज़े पर बैठे लोग पैसे मांगते हैं। चीज़ सामान मांगते हैं। यह स्वीकार्य अनैतिकता है। पहले जनता नहीं बताती थी कि किसने दिया है। अब राजनीतिक दल नहीं बताते हैं कि करोड़ों का फंड किसने दिया है। इल्केटोरल फंड पर कई महीनों से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हुई है। बहरहाल, जाति, समीकरण, गठबंधन और महागठबंधन के बाद फैक्टर का चलन आया है। किसमें ज़ेड फैक्टर है और किसमें एक्स फैक्टर है। स्विंग का भी फैक्टर है। सब कुछ खोजेंगे ताकि जीतने वाले की भविष्यवाणी कर सकें। कोशिश होगी कि जल्दी से महीना गुज़र जाए। वास्तविक अनैतिक शक्तियों तक न पहुंचा जाए वर्ना विज्ञापन बंद हो जाएगा और जोखिम बढ़ जाएगा। आम जनता जिसने पांच साल में घटिया अख़बारों और चैनलों के अलावा न कुछ देखा और पढ़ा है उस पर दबाव होगा कि उसके बनाए ढांचे से निकल कर ज़मीनी अनुभव को सुना दे। अब तो वह जनता भी उसी फ्रेम में कैद है। वह ज़मीनी अनुभवों में तड़प रही है मगर आसमानी अनुभवों में ख़ुश है। सूचनाएं जब गईं नहीं तो जनता के मुखमंडल से लौट कर कैसे आएंगी। जनता समझदार है। यह बात जनता के लिए नहीं कही जाती बल्कि राजनीतिक दलों की अनैतिकताओं को सही ठहराने के लिए कही जाती है। जनता की मांग खारिज होगी। नेता जो मांग देंगे वही जनता को अपनी मांग बनानी होगी। नेता जनता को खोजते हैं और जनता नेता को खोजते हैं। चैनल वाले दोनों को मिला देंगे। ज़्यादा मिलन न हो जाए उससे पहले महासंग्राम जैसे कार्यक्रम में खेला-भंडोल हो जाएगा। खोजा-खोजी बिहार के चुनाव का अभिन्न अंग है। आँखों के सामने रखी हुई चीज़ भी खोजी जाती है। कोई नेता गठबंधन के पीछे लुकाया होगा तो कोई नेता उचित गठबंधन पाकर दहाड़ने लगा होगा। बिहार 15 साल आगे जाता है या फिर 15 साल पीछे जाता है। अभी 15 साल पीछे है मगर खुश है कि उसके 15 साल में जितना पीछे था उससे आगे है। उसके बगल से दौड़ कर कितने धावक निकल गए उसकी परवाह नहीं। इसकी होड़ है कि जिससे वह आगे निकला था उसी को देखते हुए बाकियों से पीछे रहे। बिहार की राजधानी पटना भारत का सबसे गंदा शहर है। जिस राज्य की राजधानी भारत का सबसे गंदा शहर हो वह राज्य 15 साल आगे गया है या 15 साल पीछे गया है, बहस का भी विषय नहीं है। सबको पता है किसे कहां वोट देना है। जब पता ही है तो पता क्या करना कि कहां वोट पड़ेगा। नीतीश कहते हैं वो सबके हैं। चिराग़ कहते हैं कि मेरे नहीं हैं। चिराग कहते हैं कि मेरे तो मोदी हैं, दूजा न कोए। मोदी की बीजेपी कहती है मेरे तो नीतीश हैं,दूजा न कोए। गठबंधन से एक बंधन खोल कर विरोधी तैयार किया जाता है ताकि मैच का मैदान कहीं और शिफ्ट हो जाए। मुकाबला महागठबंधन बनाम राजग का न ले। चिराग और नीतीश का लगे। चिराग कहते हैं नीतीश भ्रष्ट हैं। बीजेपी कहती है नीतीश ही विकल्प हैं। नीतीश से नाराज़ मतदाता नोटा में न जाएँ, महागठबंधन में न जाए इसलिए चिराग़ को नोटा बैंक बना कर उतारा गया है। चिराग का काम है महागठबंधन की तरफ आती गेंद को दौड़कर लोक लेना है। राजग को आउट होने से बचाना है। बाद में तीनों कहेंगे कि हम तीनों में एक कॉमन हैं। भले नीतीश मेरे नहीं हैं मगर मोदी तो सबके हैं। मोदी नाम केवलम। हम उनकी खातिर नीतीश को समर्थन देंगे। ज़रूरत नहीं पड़ी तो मस्त रहेंगे। दिल्ली में मंत्री बन जाएंगे। ज़रूरत पड़ गई तो हरियाणा की तरह दुष्यंत चौटाला बन जाएंगे। बस इतनी सी बात है। एक पैराग्राफ की बात है। बिहार की कहानी दूसरे पैराग्राफ तक पहुंच ही नहीं पाती है।

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