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शिक्षा

एक और ऐतिहासिक लड़ाई का गवाह बनता जेएनयू का फ्रीडम स्क्वायर

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जवाहर लाल यूनिवर्सिटी यूँ तो हमेशा से ही देश में प्रबुद्ध और विवेकशील लोगों को पैदा करने के लिए जाना जाता है पर क्या आप जानते है की जेएनयू के अन्दर एक जगह है फ्रीडम स्क्वायर जो अपने आप में पीढ़ियों से कई लड़ाई एवं आन्दोलनों का गवाह बनता आ रहा है| चुपचाप, बेवाक, निडर और प्रशासन की आँखों से आँखे मिलाता यह फ्रीडम स्क्वायर हमेशा से ही क्रांतिकारी नारों के गूंज के लिए जाना जाता रहा है |

9 फरबरी की घटना के बाद वहाँ के उप कुलपति का फरमान आया की जेएनयू के फ्रीडम स्क्वायर के आस पास भी कोई धरना प्रदर्शन नहीं हो सकता है, इतना ही नहीं उन्होंने वहां कई सारे गमले रखवा दिए ताकि छात्र यहाँ इकट्ठा ही न हो सकें| कुछ हद तक उप कुलपति इस इरादे में सफल भी होते नजर आये, लोगों का जमावड़ा वहां कम होने लगा, धरना प्रदर्शन के लिए छात्र छात्राएं वहां कम इकट्ठा होने लगे|

फ्रीडम स्क्वायर पर कन्हैया कुमार का यादगार भाषण

 

इसी बीच महामहिम उपकुलपति ने एक और तुगलकी फरमान जारी कर दिया की सभी छात्राओं को अपनी हाजरी लगानी अनिवार्य है, फिर क्या था वहां के छात्र संगठन सहित शिक्षक संघ ने भी इस फरमान का पुरजोर विरोध  किया पर महामहिम अपने फैसले ने डिगे नहीं|

छात्र शांति पूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे इस उम्मीद में की शायद महामहिम को बात समझ आ जाएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं और  धीरे धीरे ये विरोध की चिंगारी आग में बदल गयी और बीते  9 और 10 फरबरी की रात फ्रीडम स्क्वायर अपने पुराने रूप में लौट आया| रात के ठंढी हवाओं और दिल्ली की ठिठुरती ठंढ के बीच तक़रीबन 5000 लोग जेएनयू के दिल फ्रीडम स्क्वायर पर इकट्ठे हुए और उप कुलपति के खिलाफ जम कर नारे बाजी की|

बेहद खुबसूरत नजारा था इस लिए नहीं की लोग प्रशास्सन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे बल्कि इस लिए की फ्रीडम स्क्वायर फिर से लहलहा उठा था उसमे फिर से जान आ गयी थी जिसे प्रशासन अपने तुगलकी फरमान से,गमलों और फूलों की खूबसूरती से ढक कर वहां से निकलने वाली चिंगारी को दबाने की कोशिश कर रहे थे|

प्रशासन द्वारा रखवाए गए गमले

बता दें की इस फैसले के बाद लगातार छात्र संगठन प्रशासन के विरोध में प्रदर्शन कर रहे है और अपने इस बेतुके फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे है| इतना ही नहीं जेएनयू के शिक्षक भी छात्रों के इस मांग में उनके साथ खड़े नजर आते है आज कुछ जगहों से तस्वीरें आयी की शिक्षक लॉन में छात्रों का क्लास ले रहे है|

ऐसे नज़ारे देख कर ये बहुत आसानी से समझा जा सकता है की शिक्षक एक सफल छात्र को बनाने में किस कदर काम आते  है चाहे उसकी राजनितिक और सामाजिक सोच बढाने  की बात हो चाहे किताबों का ज्ञान|

शिक्षा

जेएनयू एक बार फिर हुआ लाले लाल:- सेंट्रल पैनल की चारों शीटों पर लेफ्ट यूनिटी का कब्जा

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जे एन यू:- जेएनयू की लाल मिट्टी में एक बार फिर लाल पतका फहरा है। काउंटिंग के दौरान शनिवार को हुई हिंसा के बाद रविवार दोपहर छात्र संघ चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए। सेंट्रल पैनल के चारों सीटों पर यूनाईटेड लेफ्ट ने कब्जा जमा लिया है। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का इस चुनाव में एक काउंसलर तक नहीं जीत सका। इस चुनाव में आइसा, एआईएसएफ, एसएफआई व डीएसएफ ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था।

चुनाव परिणाम के मुताबित एन साई बालाजी(आइसा) छात्र संघ के नए अध्यक्ष चुने गए। इन्हें 2161 मत प्राप्त हुए।वहीं इनके प्रतिद्वंदी विद्यार्थी परिसर के ललित पांडेय को मात्र 982 वोट मिले। इस तरह से बाला जी 1179 मतों से विजय घोषित किए गए। उपाध्यक्ष पर यूनाईटेड लेफ्ट की सारिका चैधरी ने अपना कब्जा जमाया। सारिका को कुल 2692 वोट मिले। वहीं प्रतिद्वंदी विद्यार्थी परिषद के गीता बरुआ को मात्र 1012 वोट मिले। इस तरह से सारिका ने 1680 मतों से गीता को पराजीत किया। वहीं महासचिव के पद पर यूनाईटेड लेफ्ट एजाज अहमद राथेर विजयी हुए। इन्हें 2423 मत मिले। वहीं प्रतिद्वंदी विद्यार्थी परिषद के गणेश गुर्जर को 1123 वोट मिले। इस तरह से एजाज 1300 मतों से विजयी घोषित किए गए। संयुक्त सचिव पर यूनाईटेड लेफ्ट की अमुथा जयदीप(एआईएसएफ) विजयी घोषित हुई।

अमुथा को 2047 वोट मिले। वहीं प्रतिद्वंदी विद्यार्थी परिषद के वेंकट चैबे को 1247 मत मिले। इस तरह से 800 मतों से अमुथा विजयी घोषित की गईं।जीत के बाद पूरा कैम्पस लाल सलाम के नारों से गूंज रहा है। यूनाईटेड लेफ्ट की ओर से विजयी जुलूस निकाला गया है। डफली की थाप पर समर्थक डांस कर रहे हैं। पूरे जेएनयू में जश्न का माहौल है। जेएनयू में जीत पर एआईएसएफ के राष्ट्रीय महासचिव विश्वजीत कुमार व राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद वली उल्लाह कादरी ने जेएनयू के छात्रों को बधाई दी है।

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बीट विशेष

बीजेपी-आरएसएस से एक पत्रकार का 20 सवाल

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दिलीप मंडल

बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र में भारत की जनता से कुछ वादे किए थे, जिन्हें पांच साल में पूरा किया जाना था। मोदी ने यह भी कहा था कि जो कहते हैं, वह करते हैं। ये सारे सवाल बीजेपी के 2014 लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र से निकले हैं।

1. देश में 100 नए शहर कब तक बसाए जाएंगे?

2. देश के सबसे पिछड़े 100 जिलों को विकसित जिलों में शामिल होना था, वह काम कब शुरू होगा.

3. राष्ट्रीय वाइ-फाई नेटवर्क बनना था. वह काम कब शुरू होगा?

4. बुलेट ट्रेन की हीरक चतुर्भुज योजना का काम कहां तक आगे बढ़ा है?

5. कृषि उत्पाद के लिए अलग रेल नेटवर्क कब तक बनेगा?

6. हर घर को नल द्वारा पानी की सप्लाई कब तक शुरू होगी?

7. जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए विशेष न्यायालयों का गठन कब होगा?

8. बलात्कार पीड़ितों और एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं के लिए विशेष कोष कब तक बनेगा?

9. वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक सहायता देने के वादे का क्या हुआ?

10. किसानों को उनकी लागत का कम से कम 50% लाभ देने की व्यवस्था होने वाली थी. उसका क्या हुआ?

11. 50 टूरिस्ट सर्किट बनने वाले थे. कब बनेंगे?

12. अदालतों की संख्या दोगुनी करने के लक्ष्य का क्या हुआ?

13. न्यायपालिका में महिलाओं की संख्या बढ़ाने की दिशा में पहला कदम कब उठाया जाएगा?

14. जजों की संख्या दोगुनी करने की दिशा में कितनी प्रगति हुई है?

15. फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को तीन हिस्सों में बांटने की योजना का क्या हुआ?

16. महिला आईटीआई की स्थापना कब होगी?

17. महिलाओं द्वारा संचालित बैंकों की स्थापना होनी थी. ऐसे कितने बैंक बने?

18. हर राज्य में एम्स जैसे संस्थानों की स्थापना होनी थी. कितने राज्यों में इनका काम शुरू हुआ है? बाकी राज्यों में कब काम शुरू होगा?

19. बैंकों के खराब कर्ज यानी एनपीए को कम करने की सरकार के पास क्या योजना है?

20. नदियों को साफ करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के काम में कितनी प्रगति हुई है?

बीऐसे वादों की लिस्ट बहुत लंबी है, और फिर ये तो लिखित वादे हैं। नरेंद्र मोदी ने चुनावी सभाओं में जो वादे किए थे, उनकी तो फिलहाल बात भी नहीं हो रही है।

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शिक्षा

रास्क क्रू:- पहाड़ों पर थिरकते पैर।

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पहाड़ों की जिंदगी जितनी मुश्किल है उतना ही मुश्किल है रोजमर्रा की जिंदगी से हट कर के करियर चुनना। लेकिन रास्क क्रू के इन टेलेंटेड और जिंदादिल बच्चो ने अपने लिए एक अलग ही केरियर चुना है इन्होंने डांस को अपनी जिंदगी बना लिया है।

रोज 8 से 10 घने प्रेक्टिस करने वाले रास्क क्रू के ये बच्चे डांस में अपना करियर तलाश रहे है।

पहाड़ों में डांस फिर इस तरह के किस भी विधा को बहुत तबज्जो नही दी जाती है। और ये सब बातें जानते हूए भी रास्क फैमली अगर डांस में अपना कैरियर बनाने का सपना देख रही है तो ये अपने आप मे बहुत बड़ी बात है।

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