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बीट विशेष

आलेख:ये गिद्ध कभी विलुप्तप्राय नहीं होते: सोमनाथ आर्य

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अफसोस, अपने शहर में ही हमारी इंसानियत की अग्निपरीक्षा की घड़ी थी, हम हार गये। शुक्र है ईश्वर और अल्लाह का… कि प्रशासनिक सूझ-बूझ से अपना भागलपुर एक बार फिर जलने से बच गया। लेकिन जितना हुआ वह अमनपसंद लोगों को खल रहा है। मध्यवर्ग और अतिनिम्नआय वाले इस रेशमी शहर के जिस इलाके में पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटना घटी। जरा मन को स्थिर कर के सोचियेगा कि उस पूरे इलाके में शिक्षा का स्तर कितना है? यह बात किसी से छिपी नहीं है। बावजूद इसके पावरलूम से रेशमी बुनावट का कलात्मक परचम पूरी दुनिया में लहराता है।

अगर आप खुद को सभ्रांत समझते हैं चाहे आप किसी भी महजब के क्यों न हो, न आप कल की पत्थरबाजी और आगजनी में आप शामिल होते है और न ही घर के बच्चों और युवाओं को इस नासमझ भीड़ का हिस्सा बनने देते। और एक बात हिन्दू नववर्ष के जूलूस में भी उत्तेजक नारेबाजी करते आपके घर के बच्चे और छात्र नहीं हो सकते। यह तो तय है गुमराह छात्रों की एक फौज जिसके दोपहिये वाहनों में पेट्रोल भरवाकर उससे अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति करवाने वाले कई राजनैतिक मुखौटे जरुर हो सकते। ये वो छात्र हो सकते हैं जिन्हें अपने अभिभावक की गैरमौजूदगी का फायदा मिलता है। स्थानीय कालेज में शहर से सुदूर गांव से आये छात्रों का एक बड़ा तबका यहां लॉज में रहकर पढ़ाई करते हैं। कालेज और विश्वविद्यालय की लचर शिक्षा व्यवस्था, लेट सेशन और लगभग अराजक हो चुके वातावरण में ये पलते और बढ़ते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि में होने से इनके भोलेपन का फायदा कुछ राजनैतिक मुखौटे आसानी से उठा लेते हैं। अपने माता-पिता के सपने को पूरा करने का ख्वाब लिए कालेज के स्टूडेंट भी कुछ तथाकथित नेताओं का मनोवैज्ञानिक आहार और निवाला बन जाते हैं।

पिछले 4 सालों में देश में रोजगार की समस्या का कोई वैकल्पिक हल नहीं निकला। ठीक इसके उलट अपने प्रधानमंत्री ने जी न्यूज को दिये इंटरव्यू में पकोड़े बेचने को रोजगार से जोड़कर अपने सरकार की उपलब्धि गिना दी। पकोड़े बेचना और उसे रोजगार की श्रेणी में रखना माननीय प्रधानमंत्री की आदर्शवादी व्याख्या हो सकती है जिसके लिए राज्यसभा का कीमती वक्त भी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बर्बाद भी कर दिये। भागलपुर में एक दौर में बरारी में बहुतायत संख्या में छोटे-मंझोले इंडस्ट्री हुआ करती थी ,अब सभी पर ताले लटके हैं। अब बात पत्थरबाजी करने वाले दोनों पक्षों की। एक पक्ष की बहुतायत आबादी मैकनिक, टायर पंक्चर, सिलाई-कटाई बुनाई से जुड़ा है। दूसरे पक्ष के लोगों के पास अपेक्षाकृत रोजगार के बेहतर विकल्प है। बेहतर और मुकम्मल शिक्षा मंदिर सा वातावरण इनके घरों से कोसों दूर है। ऐसे में घनघोर निराशा , नासमझी में वेवकूफी भरे कदम उठते हैं। कुछ राजनैतिक मुखौटे बेहद शरारती और नटखट होते हैं। दरअसल वे एक तरह के विलुप्तप्राय गिद्ध की प्रजाति ही होते हैं। जिन्हें इंसानी गोश्त , खून और लोथड़े खूब पसंद होते हैं। अपनी भूख मिटाने को वे तरह-तरह के स्वांग रचते हैं और वेश भी बदलते हैं। वे कभी कभार धार्मिक उपदेश और प्रवचन भी देने लगते है। लेकिन अपने महानगरों के प्रवास में अत्याधुनिक ड्रेस पहनकर जाम टकराकर खूब पार्टियां इॅन्जवाॅय भी करते है। ऐसे गिद्ध एयरकंडीश न कमरे में रहते हैं। महंगे इत्र के शौक़ीन होते हैं, महंगे ब्रांडेड कपड़े पहनते हैं, चुकि इनके आर्थिक डैनी बहुत बड़े होते हैं अतः ये गिद्ध खूब विदेशी सरजमीं पर अपने डैने- फड़फड़ाते रहते हैं।

ये ऐेसे ग़िद्ध होते हैं जिन्हें विरासत में मांस के लोथड़े नोंचने की अनोखी कला खूब मालूम होती है। ये बड़े माहिर होते हैं। ये गिद्ध खूब मुस्कुराते हैं, दूसरे गिद्धों के खिलाफ बयानबाजी भी करते हैं। ये गिद्ध बहुत दूर तक देख सकते हैं। ये गिद्ध बहुत पारखी होते हैं। ये गिद्ध गिरगिट को अपना आदर्श मानते हैं। ये गिद्ध कभी कभी रुप भी बदलते हैं। कभी बहुत बड़े इंसान भी बन जाते हैं। और गरीब जनता को अपने पैर की जूती भी समझते हैं। ये गिद्ध कभी विलुप्तप्राय नहीं होते। इनकी मंद-मंद मुस्कुराती तस्वीरें हर चैक- चैराहे पर ईंद और दीवाली की बधाईंयां देती नजर आती है। ये गिद्ध चौथे खंभे की छतों पर भी मंडराते नजर आते हैं। चौथेखंभों में अपनी जाति मजहब और गौत्र बतलाकर गिद्ध मांस और लोथड़े की तलाश में फिर उंची उड़ान भरने निकल पड़ता है। गिद्ध अपने शहर में मंडरा रहा है … अपने घरो की खिड़की और दरवाजे की कुंडी को मजबूती से बंद रखिये … गुलेल निकालने का वक़्त आ गया है … २०१९ की तश्तरी सज गयी है .. इन्हें खूब जोर की भूख लगी है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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कई इमारतें गिरने के बाद भी भजनपुरा के सुभाष मोहल्ले में बिल्डर माफिया धड़ल्ले से कर रहे अवैध फ्लैट निर्माण!

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“सुभाष मोहल्ले की गली नंबर 13 में बिल्डर माफिया द्वारा बनाई जा रही हैं तीन अवैध इमारतें”

चौधरी हैदर अली
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में आए दिन इमारतें गिरने की खबर तो आप सुनते रहते होंगे आज हम आपको बताने जा रहे हैं आखिर इतनी इमारतें गिरने की क्या वजह है! जिसकी वजह से सैकड़ों लोग मलबे के ढेर में दब कर अपनी जान से हाथ धो बैठे!

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर और सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछले 5 सालों मे बिल्डर माफिया 500 से ज्यादा अवैध फ्लैट निर्माण करा चुके हैं जिनकी हालत अब जर्जर हो रही हैं और दर्जनभर इमारत तो मलबे के ढेर में तब्दील हो गई! इमारतें गिरने और जर्जर होने की वजह है बेकार मैटेरियल का इस्तमाल, बिल्डर माफिया चंद पैसों के खातिर लोगों की कीमती जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं, जिसे पूर्वी-दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार नज़र-अंदाज़ कर आंखें मूंदे तमाशा देख रही है!

स्थानीय लोगों का कहना है इस वक़्त बिल्डर माफिया बाबरपुर विधानसभा के वार्ड 48/E में काफी तेजी के साथ फ्लैट निर्माण कर रहे हैं, पिछले 2 साल में 100 से ज्यादा अवैध फ्लैट नुमा इमारतें बिल्डर माफिया बना चुके जिनमें से काफी इमारतें तो जर्जर भी हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं!सुभाष मोहल्ला वार्ड 48 ई की गली नंबर 13 में अब्दुल सलाम मस्जिद के आसपास रहने वाले लोगों ने कहां कि हमने गली में हो रहे तीनों अवैध निर्माणों की शिकायत नगर निगम को दी लेकिन बिल्डर माफियाओं की पहुंच काफी ऊपर तक होने की वजह से नगर निगम अधिकारियों ने सभी शिकायत कर्ताओं के नाम बिल्डर माफिया को बता दिए जिसके बाद बिल्डर माफियाओं ने शिकायत कर्ताओं को दोबारा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी!

People’s Beat ने जनता के आग्रह पर बिल्डर माफिया, स्थानीय पुलिस एवं नगर निगम के कर्मचारियों की शिकायत माननीय प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री जी को दे दी है!

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एक हारा हुआ सांसद, जिसने हजारों लोगों को अपने बल पर राहत पहुँचाया।

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बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं , इसका असर आम जन जीवन पर बहुत बुरा पड़ा है यातायात,स्वास्थ्य और खाने से लेकर पीने के पानी की समस्या से आम आदमी को जूझना पड़ रहा है, कुछ ही दिन हुए जब मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चे काल के गाल में समा रहे थे।
यह महज कुछ घटनाएं नहीं है यह पोल खोलती है हमारे तथाकथित विकास की क्या हम इतने गए गुजरे हो गए हैं कि कभी एक राज्य के कुछ जिले आपदा ग्रस्त हुए और सरकारी महकमा हाथ खड़े कर देता है,जिस तरह से सडा हुआ आलू और खाद्य सामग्री बिहार सरकार के द्वारा वितरित की जा रही है वह और ज्यादा रोगी बनायगी लोगों को।

मुख्य सवाल यही है कि लगे हाथ हम डोनेट का रोना रोने लगते है,और इसे उसे कोसने लगते हैं हम इस बात पर विचार करना क्यों जरूरी नहीं समझते कि यह सब आपदा प्रबंधन के लिए बड़े बड़े सरकारी महकमे बने हुए है जो मोटी तनख्वाहों से ऐशो आराम करते हैं..उनका काम इसी समय आता है।

इस बाढ़ का प्रकोप हो या चमकी बुखार का एक पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव खुले हाथों से लोगों की मदद करने को आगे रहे है, वह आज भी जेसीबी और टैक्टर पर बैठकर चलकर राहत सामग्री बांट रहे हैं।

जब यह मधेपुरा सांसद थे उस समय काफी बार इनसे मिलना होता था मंडी हाउस वाले आवास पर उस समय का एक वाकया याद आता है मैं छात्रसंघ का चुनाव लड़ रहा था और मेरी हर सम्भव मदद करने का आश्वासन इन्होंने दिया था, उसी समय कॉलेज में से फोन आता है कि कुछ लोग अपने प्रत्याशी से झगड़ा कर रहे हैं,जब स्तिथि से अवगत कराया तो सांसद जी ने तुरंत ही dsp को फोन कर स्तिथि सम्हालने की हिदायत दी थी।

वैसे मैं किसी का गुणगान करने से बचता हूँ लेकिन मेरे सहयोगियों द्वारा एक बार ही कहने पर यह पूरे जोश के साथ मेरा प्रचार करने भी आये थे कॉलेज में ,वह दौर गुजर गया कुछ यादें रह गयी लेकिन आज फिर एक अनुभव ताजा हो गया।

39 सांसदों में एक हारा हुआ सांसद मोर्चा संभाल रहा है………..और जनता अपना नेता चुनने में अक्सर भूल कर देती है कभी कभी।

अजीत आर्य

 

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पूर्व गृह मंत्री व् अनुभवी सीपीआई के नेता इन्द्रजीत गुप्ता का जन्म शताब्दी समारोह दिल्ली में मनाया गया

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इन्द्रजीत गुप्ता 1919-2001.

भारत के वो नेता जो सबसे अधिक 11 बार जीते लोकसभा चुनाव,  

CPI और AITUC के महासचिव रह चुके.

इंद्रजीत गुप्ता भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (CPI) के कुशल व् प्रखर राजनेता रहे हैं. उन्होंने 1960 में पहली बार हुए उपचुनावों से भारतीय राजनीति में कदम रखा और जीतकर लोकसभा में पहुंचे. साल 1919 में जन्मे इन्द्रजीत गुप्ता का 2001 में जब निधन हुआ तब भी वे लोकसभा के सदस्य थे. आज 21 जुलाई 2019 को इनका जन्मशताब्दी समारोह constitution club दिल्ली में मनाया गया जिसमे CPI(M) के महासचिव सीताराम येचुरी व् पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने शिरकत की. इन्द्रजीत गुप्ता को याद करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा “आज का यह अवसर लोकतंत्र को समृद्ध करने में इन्द्रजीत गुप्ता के योगदान को प्रतिबिंबित करता है. सीपीआई के ये पूर्व महासचिव जीवन भर मजदूर आन्दोलन के लिए समर्पित रहे.”

ये अनुभवी नेता बीच के 3 साल(1977 से 1980) को छोड़ कर ताउम्र सांसद रहे. उन्होंने शुरुआती चुनाव (1962 से 1967) कलकत्ता साउ‌थ वेस्ट इसके बाद (1967 से 1977) अलीपुर, (1980 से 1989) बशीरहाट और (1989-2001) मिदनापुर से चुनाव जीते. वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और All India Trade Union (AITUC) के महासचिव भी रह चुके हैं.

इन्द्रजीत गुप्ता एचडी देवगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल के शासनकाल में देश के गृहमंत्री रहे.  सादगी की मिशाल माने जाने वाले सांसद इन्द्रजीत गुप्ता गृह मंत्री बनने के बाद भी दिल्ली की वेस्टर्न कोर्ट में आवंटित आवास में रहते थे जहाँ आम तौर पर रसूख वाले सांसद रहने से कतराते हैं. कभी उनके निवास के ठीक बगल में रहने वाले वरिष्ठ राजनेता क्रांति प्रकाश बताते हैं, “देश के गृहमंत्री होने के बावजूद उन्होंने वेस्टर्न कोर्ट को नहीं छोड़ा. वे अपने दो-रूम के क्वॉर्टर से अपनी गतिविधियों को अंजाम देते थे. वे असल में सादगी के मिसाल थे.”

भारतीय जनता पार्टी के प्रखर नेता हुकुमदेव नारायण यादव ने संसद में बोलते हुए एक बार कहा था, ”वे एक कम्यूनिस्ट नेता थे. लेकिन इससे बड़ी बात यह थी कि वे एक महान सांसद थे.”

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