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शिक्षा

भाजपा परीक्षा फ़ॉर्म पर जीएसटी लगाती है और पीएम हमें हँसने को कहते हैं: कन्हैया कुमार

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दिल्ली:-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परीक्षा में सफलता के टिप्स दिए जाने पर कन्हैया कुमार ने तंज करते हुए मोदी जी को लपेटे में लिया है और कहा है कि एक तरफ मोदी सरकार शिक्षा पर गई एस डी लगाती है और दूसरी ओर हंसते हुए परीक्षा देने की बात करती है। भाजपा तो सरकारी स्कूलों को खत्म कर देना चाहती है जिस से की आने वाले वक्त में भारत का आम नागरिक पढ़ ना सके।

जो पढ़ेगा वो सोचने की क्षमता रखेगा और सवाल पूछेगा लेकिन भाजपा को पूरे देश मे ऐसे लोगों की तादात की आवश्यकता है जो कि सवाल ना पूछती हो बल्कि जैसा वो कहे उस के हिसाब से चलती रहे। कन्हैया कुमार अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते है कि:-

कन्हैया कुमार लिखते है, मोदीजी ने अपनी किताब में परीक्षा में सफलता के लिए क्या सलाह दी है! हँसते हुए परीक्षा केंद्र जाओ और हँसते हुए लौटो। मैं भी एक सलाह देता हूँ। सभी विद्यार्थी अपने माता-पिता से भाजपा को वोट देने को कहें। फिर भाजपा स्कूल बंद कराएगी।भाजपा ने राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में हजारों सरकारी स्कूल बंद करा दिए हैं। न परीक्षा होगी न तनाव होगा। न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।

कन्हैया आगे लिखते है, भाजपा परीक्षा फ़ॉर्म पर जीएसटी लगाती है और पीएम हमें हँसने को कहते हैं। फ़ेलोशिप बंद करते हैं और कहते हैं हँसो! शिक्षा के बजट में कटौती करते हैं और कहते हैं खुलकर हँसो।

ऐसी सलाहों और नीतियों पर तो दुनिया हँसेगी। ऐसे तमाशों से सरकारी नीतियों की हिंसा छिपाना संभव नहीं है। शिक्षा को बाज़ार का माल बनाकर न जाने कितने मासूमों को जीते जी मरने पर मजबूर किया जा रहा है। न जाने कितनों ने बढ़ती फ़ीस के कारण आत्महत्या कर ली। डिप्रेशन ने महामारी का रूप ले लिया है। सरकार अपने झुनझुने लेकर कहीं और जाए।

देश

जेएनयू मामला:- दिल्ली पुलिस को कोर्ट की फटकार, चार्जशीट दाखिल करने के लिए दिल्ली पुलिस के पास नही है लीगल डिपार्टमेंट की मंजूरी

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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित 10 छात्रों के खिलाफ कथित देशद्रोह के मामले में दिल्ली की अदालत ने पुलिस को फटकार लगाई है. कोर्ट ने पुलिस से दिल्ली सरकार से मंजूरी लिए बिना चार्जशीट दायर करने पर सवाल खड़े किए.इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, ‘आपके पास लीगल डिपार्टमेंट की मंजूरी नहीं है. आपने सरकार की अनुमति के बिना चार्जशीट कैसे दाखिल कर दी.’ इस पर दिल्ली पुलिस ने बताया कि 10 दिन के अंदर दिल्ली सरकार से चार्जशीट के लिए ज़रूरी मंजूरी मिल जाएगी.दरअसल देशद्रोह के मामले में CRPC के सेक्शन 196 के तहत जब तक सरकार मंजूरी नहीं दे देती, तब तक कोर्ट चार्जशीट पर संज्ञान नहीं ले सकता.दरअसल दिल्ली पुलिस ने यहां पटियाला हाउस कोर्ट में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ 1200 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल करते हुए कहा कि वह परिसर में एक कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे थे और उन पर फरवरी 2016 में यूनिवर्सिटी कैंपस में देश विरोधी नारों का समर्थन करने का आरोप है.
पुलिस ने कोर्ट के सामने दावा किया था कि जेएनयू छात्र संघ के पूर्व नेता कन्हैया कुमार ने सरकार के खिलाफ नफरत और असंतोष भड़काने के लिए 2016 में भारत विरोधी नारे लगाए थे. पुलिस ने आरोपपत्र में कई गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा है कि नौ फरवरी 2016 को यूनिवर्सिटी कैंपस में कन्हैया प्रदर्शनकारियों के साथ चल रहे थे और काफी संख्या में अज्ञात लोग नारेबाजी कर रहे थे.ये भी पढ़ें- ‘देशविरोधी नारे लगाने के आरोपी कश्मीरियों के संपर्क में था उमर खालिद’गौरतलब है कि संसद हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरू को दी गई फांसी की बरसी पर कैंपस में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. आरोपपत्र के मुताबिक गवाहों ने यह भी कहा कि कन्हैया घटनास्थल पर मौजूद था, जहां प्रदर्शनकारियों के हाथों में अफजल के पोस्टर थे. ‘अंतिम रिपोर्ट में कहा गया है कि कन्हैया ने सरकार के खिलाफ नफरत और असंतोष भड़काने के लिए खुद ही भारत विरोधी नारे लगाए थे.’इसमें कहा गया है कि एजेंसी ने जिन साक्ष्यों को शामिल किया है, उनमें जेएनयू की उच्चस्तरीय कमेटी, जेएनयू के कुलसचिव भूपिंदर जुत्सी का बयान और मोबाइल फोन रिकार्डिंग (जिसमें कुमार को कार्यक्रम के रद्द होने को लेकर बहस करते सुना गया) शामिल है. इसमें कहा गया है, ‘कन्हैया ने उनसे (जुत्सी) से यह भी कहा कि इजाजत के बगैर भी कार्यक्रम करेंगे.’आंकड़ों से समझिए मुल्क में कितने देशद्रोही हैंपुलिस ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के बारे में कहा कि उन्होंने भारत विरोधी नारे लगाए थे.
आरोपपत्र में कहा गया है कि कई वीडियो में उमर खालिद को नारे लगाते देखा गया है, जिससे उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है. उसके मोबाइल फोन की लोकेशन का भी बतौर साक्ष्य इस्तेमाल किया गया. वहीं रामा नागा के बारे में आरोपपत्र में कहा गया है कि उसने आरएसएस के खिलाफ भाषण दिए थे.इस मामले में करीब तीन साल बाद आरोपपत्र दाखिल करने को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही दिल्ली पुलिस ने कहा है कि इस तरह के मामलों में आमतौर पर इतना वक्त लग जाता है क्योंकि इसके तहत देश भर में जांच की गई और इसमें ढेर सारे रिकार्ड तथा सबूत शामिल थे

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राजनीति

जेएनयू फरवरी 2016:- इन नारों की वजह से फंसाया गया है कन्हैया कुमार को।

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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में फरवरी 2016 में लगे नारों के मामले में दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, छात्र नेता उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को मुख्य आरोपी बनाया गया है. इन तीनों को इस मामले में जेल भी जाना पड़ा था.

दिल्ली पुलिस की 1200 पन्नों की चार्जशीट पर क्या संज्ञान लेना है, इसपर अदालत मंगलवार को फैसला करेगी. इस चार्जशीट में सात कश्मीरी छात्रों को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है. इनके अलावा 36 अन्य को कॉलम नंबर 12 में आरोपी बनाया गया है, जो कि कथित तौर पर घटनास्थल पर मौजूद थे.

चार्जशीट में मुख्य आरोपी कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य हैं. इनके अलावा सात अन्य मुख्य आरोपियों में सात कश्मीरी छात्र हैं, जिनमें- मुजीर (जेएनयू), मुनीर (एएमयू), उमर गुल (जामिया), बशरत अली (जामिया), रईस रसूल (बाहरी), आकिब (बाहरी) और खालिद भट (जेएनयू) का नाम है.

इनके अलावा, नारेबाजी वाली जगह पर मौजूद 36 आरोपियों में शेहला राशिद, अपराजिता राजा, रामा नागा, बनज्योत्सना, आशुतोष, ईशान आदि हैं. केस के सबूत के तौर पर वीडियो फुटेज और 100 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही है.

चार्जशीट के मुताबिक ये नारे लगे थे जेएनयू में

हम क्या चाहते आजादी

हम लेके रहेंगे आजादी

गो इंडिया, गो बैक

संगबाजी वाली आजादी (पत्थर फेंकने के लिए आजादी)

भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह

कश्मीर की आजादी तक जंग रहेगी

भारत की बर्बादी तक आजादी

भारत के मुल्क को एक झटका और दो

भारत को एक रगड़ा और दो

हम छीन के लेंगे आजादी, लड़के लेंगे आजादी

तुम कितने मकबूल मारोगे, हर घर से मकबूल निकलेगा

इंडियान आर्मी को दो रगड़ा

इंडियन आर्मी पे हल्ला बोल

उमर और अनिर्बान ने कहा- झूठी सरकार के झूठे आरोप

उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य ने कहा है कि ये सारे आरोप झूठे हैं और वे इनका कानूनी तौर पर मुकाबला करेंगे. दोनों ने संयुक्त बयान में कहा है कि सरकार झूठ बोलने और जुमलेबाजी में माहिर है और चुनाव नजदीक आते ही मंदिर, मूर्ति, 10 फीसदी आरक्षण और एंटी-नेशनल जैसे मुद्दे सामने आ रहे हैं.

इनके अलावा कन्हैया कुमार ने भी इस मामले पर ट्वीट कर अपनी बात रखी है

“मोदी जी से हमने 15 लाख, रोज़गार और अच्छे दिन माँगे थे, देश के अच्छे दिन आए न आए कम से कम चुनाव से पहले हमारे ख़िलाफ़ चार्जशीट तो आई है। अगर यह ख़बर सही है तो मोदी जी और उनकी पुलिस को बहुत-बहुत धन्यवाद”।

जेएनयूएसयू ने कहा है कि मौजूदा केंद्र सरकार अपने काम में असफल रही है, इसलिए लोक सभा चुनावों से ठीक पहले तीन साल पुराने केस में चार्जशीट दाखिल की है. छात्र संघ ने कहा है कि वह इन बोगस चार्जों के अलावा अपने हर विद्यार्थी के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा.

इस मामले में शिकायत करने वाले छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कहा है कि यह निर्णय एबीवीपी की जीत है. यह उन तथ्यों की जीत है जो एबीवीपी ने उसी समय सबके सामने रखे थे. यह कांग्रेस और उन सभी राजनीतिक लोगों पर तमाचा है जो उनका समर्थन कर रहे थे. राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल अब शांत क्यों हैं? उनको देश से माफी मागनी चाहिए.

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शिक्षा

जेएनयू एक बार फिर हुआ लाले लाल:- सेंट्रल पैनल की चारों शीटों पर लेफ्ट यूनिटी का कब्जा

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जे एन यू:- जेएनयू की लाल मिट्टी में एक बार फिर लाल पतका फहरा है। काउंटिंग के दौरान शनिवार को हुई हिंसा के बाद रविवार दोपहर छात्र संघ चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए। सेंट्रल पैनल के चारों सीटों पर यूनाईटेड लेफ्ट ने कब्जा जमा लिया है। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का इस चुनाव में एक काउंसलर तक नहीं जीत सका। इस चुनाव में आइसा, एआईएसएफ, एसएफआई व डीएसएफ ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था।

चुनाव परिणाम के मुताबित एन साई बालाजी(आइसा) छात्र संघ के नए अध्यक्ष चुने गए। इन्हें 2161 मत प्राप्त हुए।वहीं इनके प्रतिद्वंदी विद्यार्थी परिसर के ललित पांडेय को मात्र 982 वोट मिले। इस तरह से बाला जी 1179 मतों से विजय घोषित किए गए। उपाध्यक्ष पर यूनाईटेड लेफ्ट की सारिका चैधरी ने अपना कब्जा जमाया। सारिका को कुल 2692 वोट मिले। वहीं प्रतिद्वंदी विद्यार्थी परिषद के गीता बरुआ को मात्र 1012 वोट मिले। इस तरह से सारिका ने 1680 मतों से गीता को पराजीत किया। वहीं महासचिव के पद पर यूनाईटेड लेफ्ट एजाज अहमद राथेर विजयी हुए। इन्हें 2423 मत मिले। वहीं प्रतिद्वंदी विद्यार्थी परिषद के गणेश गुर्जर को 1123 वोट मिले। इस तरह से एजाज 1300 मतों से विजयी घोषित किए गए। संयुक्त सचिव पर यूनाईटेड लेफ्ट की अमुथा जयदीप(एआईएसएफ) विजयी घोषित हुई।

अमुथा को 2047 वोट मिले। वहीं प्रतिद्वंदी विद्यार्थी परिषद के वेंकट चैबे को 1247 मत मिले। इस तरह से 800 मतों से अमुथा विजयी घोषित की गईं।जीत के बाद पूरा कैम्पस लाल सलाम के नारों से गूंज रहा है। यूनाईटेड लेफ्ट की ओर से विजयी जुलूस निकाला गया है। डफली की थाप पर समर्थक डांस कर रहे हैं। पूरे जेएनयू में जश्न का माहौल है। जेएनयू में जीत पर एआईएसएफ के राष्ट्रीय महासचिव विश्वजीत कुमार व राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद वली उल्लाह कादरी ने जेएनयू के छात्रों को बधाई दी है।

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