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समाज

घटती नौकरियों के बीच परेशान हैं रेलवे के परीक्षार्थी: रविश कुमार

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अप्रैल से जून 2017 के बीच संगठित क्षेत्रों में रोज़गार सृजन में गिरावट आई है। नए रोज़गार का सृजन 65 प्रतिशत कम हुआ है। मार्च 2017 में 1 लाख 85 हज़ार रोज़गार सृजित हुए थे जो अप्रैल से जून के बीच घट कर 65,000 पर आ गए। भारत सरकार के लेबर ब्यूरो के आंकड़े हैं। 2016 के अप्रैल जून में 77,000 रोज़गार सृजित हुए थे।

रेलवे में इस बार अलग अलग श्रेणियों की 90,000 भर्तियां आईं हैं। नौकरियों में नई नई शर्तें जोड़े जाने से छात्रों में बंटवारा हो गया है। जहां आई टी आई की पात्रता नहीं थी वहां यह पात्रता लगाकर बाकी छात्रों को रेस से बाहर कर दिया गया है। ग्रुप डी और सहायक लोको पायलट की नौकरियां अब आई टी आई वालों के लिए रिज़र्व हो गईं हैं। बहुत कम सीट ग़ैर आई टी आई वालों के लिए छोड़ी गई है।

इस कारण अब रेलवे के बेरोज़गार आई टी आई बनाम ग़ैर आई टी आई की डिग्री में बंट गए हैं। दूसरी तरफ़ उम्र सीमा घटाकर बड़ी संख्या में छात्रों को बाहर कर दिया गया है जो तीन चार साल से तैयारी कर रहे थे। उम्र के हिसाब से भी छात्र बंट गए हैं। कोई चुप है तो कोई सड़क पर आंदोलन कर रहा है। इस झगड़े में यह सवाल ग़ायब हो गया है कि पिछले चार साल से जो बहालियां बंद थीं, उसका आई टी आई, ग़ैर आई टी आई, 28 साल वाले और 30 साल वालों पर क्या असर पड़ा है।

आई टी आई के छात्र इसमें बिजी हो गए हैं कि उन्होंने तकनीकि शिक्षा हासिल की है तो उन्हें ये सीट मिलनी चाहिए। वे आपस में लड़ते रहें मगर इस गेम के बाद इस पर नज़र रखनी चाहिए कि भर्ती की प्रक्रिया कितने दिनों में पूरी होती है। कई बार दो दो साल लग जाते हैं। कहीं ऐसा न हो कि भर्ती निकालकर नौजवानों को 2019 तक के लिए उलझा दिया गया हो। उसके बाद परीक्षा लटकाने और अटकाने के सौ बहाने तो पहले से ही हैं।

इस दांव से दो काम हो गया। अगर सभी प्रकार के छात्र फार्म भरते तो इस बार फार्म भरने वालों की संख्या 3 करोड़ तक पहुंच जाती जिससे हंगामा होता। बेरोज़गारों की संख्या दिखती और मुद्दा बनता। साथ ही 3 करोड़ छात्रों का इम्तहान लेने की क्षमता भी नहीं है। ग़लतियां होतीं और नकल होने के आरोप में हंगामा होता सो अलग। किसी ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर ये ज्ञान दिया है। 2014 में ग्रुप डी की भर्ती आई थी तब 1 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने फार्म भरे थे। इसलिए इस बार ऐसी शर्तें हर जगह जोड़ दी गईं ताकि बेरोज़गारों की संख्या कम दिखे। अब जब छात्र कई राज्यों में सड़कों पर उतर आए हैं तो उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार उम्र की सीमा में छूट देगी। बात सही है कि अगर कमी करनी थी तो पहले ही बता देते। छात्रों से चार साल तैयारी करवा कर अचानक कहेंगे कि 30 साल वाले नहीं, 28 साल वाले ही देंगे तो यह सरासर नाइंसाफी है।

भारत में इस साल सड़क निर्माण की रफ़्तार धीमी हुई है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में कहा था कि इस साल 9000 किमी सड़क बनने का अनुमान है। इस हिसाब से इसका ग्रोथ रेट 10 प्रतिशत ही रहा जबकि 2015-16, 2016-17 में ग्रोथ रेट 37 और 36 प्रतिशत रहा है।

2015-16 में 6,061 किमी सड़कें बनी थीं। 2016-17 में 8,231 किमी सड़कें बनी थीं। 2017-18 में अभी तक 5,680 किमी सड़कें बनी हैं। चार साल पहले की तुलना में यह लंबाई भी दुगनी है। उम्मीद है कि 9000 किमी का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। यह धीमापन इसलिए आया है क्योंकि ठेके देने में काफी देरी हुई है। पिछले दो साल में कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं बना है। एक और जानकार ने कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की सुस्ती के कारण धीमापन आया है। यह रिपोर्ट बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी है। मेघा मनचंदा ने लिखी है।

लाइव मिंट की अपर्णा अय्यर ने लिखा है कि पंजाब नेशनल बैंक के घोटाले के कारण सभी बैंकों की चौथी तिमाही की रिपोर्ट में घाटा ही दिखेगा। अकेले गीतांजली जेम्स लिमिटेड पर 7,800 करोड़ से अधिक का लोन है। बाकी तीन कंपनियों पर कितना लोन है, इसका पब्लिक में कोई रिकार्ड नहीं है।

साभार : रविश कुमार

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार के फेसबुक वाल पर प्रकाशित हुई है)

समाज

महिला पत्रकार को रेप-मर्डर की धमकी, यूएन बोला- पत्रकार राणा अय्यूब की रक्षा करे मोदी सरकार

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने वरिष्ठ पत्रकार राणा अय्यूब को जान से मारने की मिलीं धमकियों का संज्ञान लिया है। यूएन ने नरेंद्र मोदी सरकार से अविलंब महिला पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। यूएन ने इसको लेकर गंभीर चिंता जताई है।

दरअसल, 20 अप्रैल को राणा अय्यूब के नाम से एक फर्जी ट्वीट सामने आया था, जिसमें उनके द्वारा कथित तौर पर नाबालिग दुष्कर्मियों का समर्थन करने की बात कही गई थी। इस ट्वीट में इस बात का भी उल्लेख था कि भारत में अब मुस्लिम समुदाय सुरक्षित नहीं रहा। इसके बाद वरिष्ठ पत्रकार को धमकी मिलने का सिलसिला शुरू हो गया था। उन्हें टि्वटर पर हमला करने के साथ ही सामूहिक दुष्कर्म करने जैसी धमकियां मिलने लगी थीं। इतना ही नहीं, राणा अय्यूब का मोबाइल नंबर और घर का पता भी सोशल साइट पर पोस्ट कर दिया गया था। उनके खिलाफ घृणा भरे मैसेज किए जाने लगे। राणा अय्यूब ने कहा कि वह काफी लंबे समय से ट्रोलर्स के निशाने पर हैं।

जताई गंभीर चिंता: यूएन के मानवाधिकार मामलों के विशेषज्ञों ने राणा अय्यूब को जान से मारने और गैंगरेप की मिल रही धमकियों पर गंभीर चिंता जताई है। संस्था ने इस बाबत एक बयान भी जारी किया। इसके अलावा पिछले साल वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की घटना का भी जिक्र किया गया है।

यूएन मानवाधिकार परिषद ने विशेष प्रक्रिया (स्पेशप प्रासीजर्स) के तहत यह बयान जारी किया है। बता दें कि यह स्वतंत्र मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का सबसे बड़ा पैनल है। यह संस्था विशेष मामलों पर नजर रखने के अलावा खास देशों में मानवाधिकार की स्थिति की भी निगरानी करती है। यूएन के विशेषज्ञों ने राणा अय्यूब द्वारा इस बाबत पुलिस में शिकायत देने के बावजूद पूरी सुरक्षा मुहैया न कराए जाने पर भी चिंता जताई है।

विशेषज्ञों ने कहा कि वे भारत से अनुरोध करते हैं कि वह इस दिशा में त्वरित कदम उठाए और मामले की उचित तरीके से जांच कराई जाए। जान से मारने की धमकी मिलने वालों की जान की रक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। बता दें कि पिछले साल गौरी लंकेश की हत्या के बाद पत्रकारों की रक्षा सुनश्चित करने की मांग जोरों से उठी थी।

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DPS रोहिणी स्कूल के प्रिंसिपल को अपनी पर्पल ब्रा भेजना चाहती है ये लङकी

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DPS रोहिणी स्कूल के प्रिंसिपल के लिए मैं अपनी पर्पल कलर की ब्रा भेजना चाहती हूं.
आप भी अपनी कलर्ड ब्रा उनको भेजिए.
DPS स्कूल की लड़कियों को कहा गया है कि वो सिर्फ स्किन कलर की ब्रा ही पहने. लड़के सफेद ही बनियान पहने.
पहली बात तो ब्रा पहनना ही अनिवार्य क्यों हो?
दूसरा,
ब्रा का कलर स्कूल कैसे डिसाइड कर सकता है.
तीसरा,
लड़की के शरीर की सरंचना और कपड़ो को कब तक पितृसत्ता/पुरुषसत्ता टारगेट करेगी.

(कितने पीछे लेकर जाओगे देश को?)

#Shame_DPS

(यह लेख गीता यथार्थ की फेसबुक पोस्ट से ली गयी है)

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गुजरात में दलित की बेरहमी पीटकर हत्या, जिग्नेश ने शेयर किया वीडियो

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गुजरात के राजकोट में दलित व्यक्ति को पीट कर मार डालने का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार की सुबह राजकोट जिले के शापर गांव में एक फैक्ट्री में कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने कचड़ा उठाने वाले दलित व्यक्ति को इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। लोगों और दलित व्यक्ति के बीच कचड़ा उठाने को लेकर ही विवाद शुरू हुआ था, जो आखिर में इतना बढ़ गया कि लोगों ने दलित व्यक्ति को ही पीट डाला। पुलिस ने आईपीसी की धारा और एससी-एसटी एक्ट के तहत पांच अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले की शिकायत मृतक की पत्नी ने कराई है।

मृतक की पहचान मुकेश वानिया के तौर पर की गई है। वह मूल रूप से सुरेंद्रनगर जिले के परनाला गांव का निवासी था। अधिकारियों के मुताबिक यह घटना सुबह 6 से 9.30 बजे के बीच की है। पुलिस ने जानकारी दी कि मुकेश अपनी पत्नी जया और एक अन्य महिला सविता के साथ रडाडिया फैक्ट्री के पास कचड़ा बिन रहा था। उस वक्त फैक्ट्री से निकलकर पांच लोग आए और तीनों कचड़ा बिनने वालों से किसी मुद्दे को लेकर बहस करने लगे। बहस बढ़ते हुए हाथापाई पर पहुंच गई। पांचों ने मिलकर तीनों की जमकर पिटाई की। बाद में दोनों महिलाओं को बाहर निकाल दिया गया और मुकेश को पकड़कर उसे इस कदर पीटा गया कि उसकी मौत हो गई।

सब इंस्पेक्टर आरजी सिंधू का कहना है, ‘लड़ाई की असली वजह क्या थी इस पर अभी कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता, लेकिन शिकायत के मुताबिक कचड़ा उठाने से संबंधित ही मामला था। मुकेश की पत्नी और अन्य महिला उस वक्त घर चली गई थीं, जब मुकेश को अज्ञात लोगों ने पकड़ लिया था। कुछ समय बाद दोनों महिलाएं कुछ अन्य पुरुषों को लेकर फैक्ट्री पर पहुंचीं, जहां उन्हें मुकेश जमीन पर पड़ा मिला। वे लोग मुकेश को सिविल अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हमने कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और हम पोस्टमार्टम की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। शव को देखकर कहा जा सकता है कि मुकेश को मोटी लकड़ी से पीटा गया होगा।’ इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। दलित नेता और गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी ने ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर किया है और लिखा है, ‘मिस्टर मुकेश वानिया अनुसूचित जाति से आते थे, उन्हें और उनकी पत्नी को फैक्ट्री के मालिकों द्वारा बुरी तरह से पीटा गया, जिसकी वजह से मुकेश की मौत हो गई।’

https://support.twitter.com/articles/20175256?ref_src=twsrc%5Etfw&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.jansatta.com%2Frajya%2Fdalit-leader-jignesh-mevani-shares-a-video-in-which-dalit-ragpicker-was-beaten-up-by-factory-owners-in-rajkot%2F664281%2F

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