Connect with us

बीट विशेष

त्रिपुरा चुनाव में ना लेफ्ट हारा,ना बीजेपी जीता, यहाँ धनकुवेर जीते: कन्हैया कुमार

Published

on

त्रिपुरा के चुनाव में न मार्क्सवाद हारा है और न ही संघियों की विचारधारा की जीत हुई है। इसमें जीत हुई है उन अवसरवादियों के गठजोड़ की जो लेफ़्ट, राइट और सेंटर, यानी हर तरह की पार्टी में पाए जाते हैं।ये वो धनकुबेर हैं जो किसी भी नैतिकता को ताक पर रखकर धन जमा करते हैं और जो लोग इनकी तरह होना चाहते हैं, उनको अपने कुनबे में शामिल करके एक अवसरवादी गिरोह का निर्माण करते हैं।

त्रिपुरा की जनता को जीत की बधाई के साथ कहना चाहता हूँ कि बीजेपी ने अपनी वास्तविक विचारधारा की बुनियाद पर चुनाव लड़ा ही नहीं। बीजेपी ने इस बार गाय, गोबर, मंदिर, हिंदू और सबसे बड़ी बात, राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को चुनाव का मुद्दा नहीं बनाया। ईसाई तुष्टीकरण और मुस्लिम तुष्टीकरण भी मुद्दा नहीं था। बीजेपी का सबसे बड़ा चुनावी नारा था ‘चलो पलटाई’, यानी अबकी बार कुछ भी हो जाए, लेकिन सरकार तो बीजेपी की ही बनेगी। इस लाइन पर संघ ऐंड कंपनी ने भरपूर मेहनत की और वे सभी तरह के अवसरवादियों को इकट्ठा करके जीत गए। जहाँ सीधे चुनाव नहीं जीत पाए, वहाँ चुनाव के बाद ख़रीद-फ़रोख़्त करके सरकार बना रहे हैं।

सवाल यह है कि नॉर्थ-ईस्ट में चुनाव जीतना बीजेपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है। पहली बात तो यह कि बीजेपी अपनी इस छवि को बदलना चाहती है कि वह उत्तर भारत या काऊ बेल्ट की पार्टी है। वह हिंदुओं के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोगों को भी अपने दायरे में लाना चाहती है। मतबल संख्या की दृष्टि से नॉर्थ-ईस्ट का चुनावी महत्व भले ही ज़्यादा न हो लेकिन नेशनल पार्टी के परसेप्शन के लिए इस क्षेत्र पर कब्ज़ा ज़रूरी है।

दूसरा, यह इलाका वर्षों से अशांत रहा है। इसका फ़ायदा कभी भी तथाकथित मेनलैंड के लोगों को नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के ख़िलाफ़ एकजुट करके उठाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, कश्मीर का नाम सुनते ही बहुत से लोग अपनी रोजी-रोटी का सवाल भूल जाते हैं।

तीसरा, यह इलाका संसाधनों से भरपूर है। अशांति को जान- बूझकर कायम रखा गया है ताकि शांति-सुरक्षा के नाम पर भरपूर घपला किया जा सके और अबाध गति के साथ यहाँ के संसाधनों को लूटा जा सके।

ध्यान देने वाली बात है कि त्रिपुरा नॉर्थ-ईस्ट का एकमात्र राज्य है जहाँ आफ़्सपा नहीं था। कई वर्षों से वहां शांतिपूर्ण माहौल है। कई आतंकवादी और अलगाववादी संगठनों ने मुख्यधारा को अपना लिया था। उन्हीं में से एक आईटीपीएफ़ के साथ बीजेपी ने अलायंस किया।

कुल मिलाकर, नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी के जीतने पर उसके दोनों हाथों में लडडू है। वहाँ सरकार में शामिल इन अलगाववादी लोगों के समर्थन से अशांति होगी तो मेनलैंड इंडिया में देश की एकता व अखंडता सुनिश्चित करने के नाम पर बीजेपी की राजनीति चालू रहेगी। मतलब गड़बड़ी भी फैलाएगी बीजेपी और रोकेगी भी बीजेपी। जब ज़रूरत होगी तब आदिवासी, हिंदू और ईसाई को एक दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा कर देगी।

यदि नॉर्थ-ईस्ट के चुनाव का निष्पक्ष विश्लेषण किया जाए तो सवाल लेफ़्ट पर भी उठता है। ऐसी कौन सी बात है कि बीजेपी वहाँ लेफ़्ट और कांग्रेस के गढ़ में घुसकर जीतती है और जहाँ जीत नहीं पाती है, वहाँ विधायक ख़रीद कर सरकार बना लेती है या ईवीएम हैक कर लेती है और हम चुपचाप देखते रह जाते हैं।इसका मतलब साफ़ है कि हमारी नाक के नीचे अवसरवादी फलते-फूलते रहते हैं और हम वैचारिक मुकाबले की ज़रूरत तक नहीं समझते। विचारधारा में सेंध लगाकर अवसरवादी पनपते रहते हैं और अवसर मिलने पर एकजुट होकर लोकतंत्र का गला घोंट देते हैं।

आज का युवा ख़ुद के लिए अवसर तलाश रहा है और ये अवसरवादी सत्ताधारी लोग युवा शक्ति को गुमराह कर रहे हैं। यदि देश और लोकतंत्र को आगे बढ़ाना है तो त्रिपुरा पर आँसू बहाने के बजाय जनता के आँसू पोंछने का काम करना ज़रूरी है।

हम भले ही आरएसएस को गंभीरता से न लें पर वह अपने विरोधियों से आगे रहने के लिए कुछ भी करने को तैयार बैठा है। चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद त्रिपुरा में अब तक 250 से अधिक ऑफ़िसों को जलाया जा चुका है। हर जगह लेनिन, पेरियार, बाबा साहेब, महात्मा गांधी और अन्य महामानवों की मूर्तियाँ तोड़ी जा रही है ताकि मनुवाद और गैरबराबरी के खिलाफ लड़ रहे लोगों का हौसला तोड़ा जा सके।

हत्याओं और हमलों का यह सिलसिला अभी जारी रहेगा। यदि हम इसे रोकना चाहते हैं तो देश को तोड़ने वाली ताकतों के ख़िलाफ़ हम सबको अपनी-अपनी जगह पर अपने हिस्से की लड़ाई लड़नी होगी।

यह लड़ाई सिर्फ़ चुनाव की नहीं है, यह संविधान और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। इस लड़ाई में जीत हासिल करने के लिए तमाम प्रगतिशील लोगों को एकजुट होकर लड़ना होगा। मूर्ति टूटने पर दुखी होने के बजाय जिनकी मूर्ति तोड़ी गई है, उनके विचारों से लोगों को जोड़ना होगा। तभी समाज से असमानता और अन्नयाय को मिटाया जा सकता है।

(यह लेख कन्हैया कुमार के पेज से लिया गया है)

बीट विशेष

कॉमरेड ज्ञानेद्र खंतवाल के नेतृत्व में उत्तराखंड के सीमान्त जिले चमोली में सी पी एम् ने किया केरल आपदा पीड़ितों के लिए चन्दा

Published

on

By

केरल में आई भीषण आपदा ने केरल को तहस नहस कर दिया है. पूरा भारत केरल के लिए आपदा रहत कोष जुटाने में लगा हुआ है. इसी दौरान भारतीय कमुनिस्ट पार्टी माक्सवादी, भारत ज्ञान विज्ञानं समिति और तमाम सामाजिक संगठनो द्वारा भारत के तमाम कोनो से राहत कार्य के लिए चन्दा एकत्र कर मानवता के हित में अपना योगदान देने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में उतराखंड के सुदूर पिछड़े एवं सीमांत इलाके में स्थित चमोली जिले के घाट ब्लाक में भी सी पी आई एम् के कार्यकर्ताओं ने केरल राहत कोष के लिए चन्दा इकठ्ठा किया.

घाट में किये जा रहे चंदा कार्यक्रम का नेतृत्व ज्ञानेंद्र खंतवाल द्वारा किया गया. ज्ञानेंद्र खंतवाल से हुई बातचीत में उन्होंने कहा की केरल में आई आपदा कोई छोटी आपदा नहीं है इस आपदा के लिए पुरे देश को एक जुट होकर के सामने आना होगा. केरल प्रगतिशील राज्य है और भारत सरकार को भी चाहिए की केरल की खूबसूरती को एक बार फिर से वापस लाने में केंद्र सरकार को भी अहम् भूमिका निभानी चाहिए.

उन्होंने आगे कहा सन 2013 में आई केदारनाथ आपदा में केरल से आई भारत ज्ञान विज्ञान समिति की डाक्टरों की टीम ने कई महीनो तक दवाइयों के साथ केदारनाथ में ही  डेरा डाल कर रखा हुआ था और उन्होंने आपदा पीड़ितों के लिए मुफ्त चिकित्सीय सहायता प्रदान किया था.

जब केरल आपदा के वक्त हमारे काम आ सकता है तो हमारा भी यह फर्ज बनता है कि जब केरल आपदा से जूझ रहा है तो हमें केरल के साथ तन मन और धन के साथ जुटना चाहिए.

घाट में हुए चन्दा कार्यक्रम में कामरेड मदन मिश्रा, कमलेश गौड़, मोहन सिंह रावत, नरेंद्र रावत, कुंवर राम, कान्ति, प्रताप सिंह, विक्रम, सोहन लाल आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

(प्रेस रिलीज द्वारा प्राप्त )

Continue Reading

बीट विशेष

RSS संचालित स्कूल में मासूम बच्चों से पूछा जा रही उसकी जाति, पिता ने किया फेसबुक पोस्ट

Published

on

कागज़ के फूलों से पूछी जा रही उसकी खुशबू की जाति !

गुरूजी, आखिर क्यों पूछते हो बच्चो से उनकी जाति ?

मासूम बच्चो के कोमल मनमस्तिष्क में भरी जा रही जाति का जहर

आनंदराम ढांढनिया सरस्वती विद्या मंदिर भागलपुर में अनोखा कारनामा

भागलपुर के आनंदराम ढांढनिया सरस्वती विद्या मंदिर में छोटे छोटे बच्चो से उसकी जाति पूछी जा रही है . यह कारनामा और कोई नहीं खुद स्कूल के क्लास टीचर कर रहे है… जिसे स्कूल में बच्चे आचार्य जी कह कर सम्बोधित करते है, शनिवार को अंतिम पीरियड में क्लास में बच्चो से क्रमवार तरीके से उसकी जाति पूछी गयी …कई बच्चो ने ठीक से जबाब से दे दिया लेकिन जब पांचवी में पढ़ने वाली मेरी बिटिया तनिष्का सिंह से जब यह सवाल पूछा गया तो वह सही जबाब नहीं दे सकी ,,उसने अपना नाम बताया तनिष्का सिंह तो क्लास टीचर ने कहा भूमिहार हो ? मेरी बेटी ने कहा ये क्या होता है ,, मैं नहीं जानती , क्लास टीचर ने कहा ,,, स्कूल आईडी दिखाओ-जहा नाम लिखा था – तनिष्का सिंह गहलौत . क्लास टीचर ने कहा – बाबू साहब हो ,,,मेरी बिटिया ने कहा – नहीं जानते सर.. राजपूत हो … बिटिया ने कहा नहीं जानते सर,, मेरे पापा को pata होगा,? क्लास टीचर ने आईडी कार्ड पर मेरा नाम लिखा देखा, कहा – सोमनाथ आर्य,, जाति समझ में नहीं आया ,,, तो बोले क्या करते है पापा ? बिटिया बोली – जौर्नालिस्ट है? क्लास टीचर ने कहा सोमवार को जाति पता कर आना,…
बिटिया जब घर आयी तो बोली – पापा मैं कौन सा कास्ट हूँ .मैंने कहा क्यों ? उसने कहा क्लास टीचर ने पूछा है… मैंने सिलसिलेवार तरीके से पूरी जानकारी ली. फिर स्कूल फ़ोन लगाया ,,,मैंने सवाल किया – छोटे बच्चो से उनकी जाति क्यों पूछी जा रही है, जबाब मिला,पटना से एक फॉर्म आया है,उसके लिए जाति पूछना अनिवार्य है … मैं अपने बच्चो को उसकी जाति बता दू या स्कूल जाकर उसके क्लास टीचर से मिलू ? मार्गदर्शन करे ? …… बच्चों से उसकी जाति पूछने वाले क्लास टीचर का नाम है ,,गोपाल आचार्य जो गणित पढाते है.

Continue Reading

बीट विशेष

क्या 50 किमी दूरी कम करने के लिए इतना पैसा और प्राकृतिक संसाधन ख़त्म कर देना चाहिए?

Published

on

Continue Reading

Trending