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जुर्म

‘नरक’ बन गया था मुजफ्फरपुर का बालिका गृह, ‘पाप’ की कहानी पढ़कर रो पड़ेंगे आप

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11 साल की एक लड़की ने एक वहशी को ‘तोंदवाला अंकल’ तो एक दूसरी लड़की ने एक दूसरे दरिंदे को ‘मूंछ वाला अंकल’ के रूप में पहचाना। एक दूसरी लड़की ने कहा कि जब तोंदवाले अंकल या नेता जी आते थे तो किसी को आस-पास आने नहीं दिया जाता था।

ब्रजेश ठाकुर सेवा संकल्प और विकास समिति नाम के एनजीओ का संचालक है। यही एनजीओ मुजफ्फरपुर में बालिका गृह का संचालन करती है। पीड़ित लड़कियां इस शख्स से इतनी नफरत करती थी कि एक लड़की ने तो ब्रजेश ठाकुर के तस्वीर पर थूका तक। 10 साल की एक लड़की ने कहा, “जब भी हम उसकी बात नहीं मानते वो हमें छड़ी से पीटा करता था।” 14 साल की एक लड़की बताती है, “सभी लड़कियां डर से कांपने लगती थीं, जब वो हमारे कमरे में आता था, वो हंटरवाला अंकल के नाम से जाना जाता था।” 10 साल की एक बच्ची बताती है, “उसका रेप करने से पहले कई बार उसे ड्रग दिया जाता था।” लड़की कहती है कि जब वो जागती तो उसे उसके निजी अंगों में दर्द महूसस होता, प्राइवेट पार्ट में जख्म होता। लड़की ने अपनी पीड़ा बताई, “मैंने किरण मैडम को इस बारे में बताया, लेकिन वो सुनती ही नहीं।” सात साल की एक लड़की जिसका यौन शोषण किया गया था ने कोर्ट को बताया कि जो भी मालिक के खिलाफ बोलता उसे बांस की छड़ियों से पीटा जाता। पुलिस ने इस मामले में ब्रजेश ठाकुर, नेहा कुमारी, किरण कुमारी समेत दस लोगों को गिरफ्तार किया है।
बोलने से मजबूर सात साल की एक लड़की को दो दिनों तक भूखा रखा गया। 10 साल की एक दूसरी लड़की ने बताया कि उसके निजी अंगों में जख्म पड़ गये थे। इस लड़की ने कहा, “मेरे साथ एनजीओ के लोगों ने और कुछ बाहरी लोगों ने कई बार रेप किया…मैं कई दिनों तक चल नहीं पा रही थी।” पीड़ित लड़कियां बताती है कि कई बार रात को लड़कियों को शेल्टर होम से बाहर ले जाया जाता था, वो अगले दिन लौटती थीं। इन लड़कियों को कुछ पता नहीं होता था कि उन्हें कहा ले जाया जा रहा है। 11 साल की एक लड़की ने एक वहशी को ‘तोंदवाला अंकल’ तो एक दूसरी लड़की ने एक दूसरे दरिंदे को ‘मूंछ वाला अंकल’ के रूप में पहचाना। एक दूसरी लड़की ने कहा कि जब तोंदवाले अंकल या नेता जी आते थे तो किसी को आस-पास आने नहीं दिया जाता था। दैनिक हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित लड़कियों ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा को बताया कि बालिक गृह से हर चार दिन बाद उन्हें नशे की हालत में बाहर ले जाया जाता। वो कहां जाती उन्हें कुछ पता नहीं था। लड़कियां बताती हैं कि जब उनकी नींद खुलती तो वे गुस्से से भर जाती मगर कुछ कर नहीं पाती थी। बता दें कि बिहार सरकार ने इस केस के सीबीआई जांच के आदेश दे दिये हैं।
अनीता संजीव

जुर्म

पाकिस्‍तान में ही है मोस्‍ट वांटेड दाऊद इब्राहिम अमेरिका ने की पुष्टि!!!

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चौधरी हैदर अली
पाकिस्‍तान अपने यहां दाऊद इब्राहिम की मौजूदगी से लगातार इनकार करता रहा है, पर भारत अरसे से इस पर जोर देता रहा है कि 1993 मुंबई ब्‍लास्‍ट्स के बाद से ही देश से फरार दाऊद पाकिस्‍तान में ही है और वहीं से अपनी गतिविधियां चला रहा है!अब अमेरिका ने भी इसकी पुष्टि की है कि भारत का ‘मोस्‍ट वांटेड टेररिस्‍ट’ दाऊद इब्राहिम और उसकी ‘डी कंपनी’ पाकिस्‍तान में स्थित है और वह कराची से अपना अंतरराष्‍ट्रीय आपराधिक कारोबार चला रहा है!अमेरिका की ओर से दाऊद के पाकिस्‍तान में होने की पुष्टि तब की गई, जब उसके करीबी पाकिस्‍तानी सहयोगी जाबिर मोती (51) के प्रत्‍यर्पण को लेकर लंदन की एक अदालत में सुनवाई चल रही थी,इस दौरान अमेरिकी सरकार की ओर से पेश हुए वकील जॉन हार्डी ने की,मोती के प्रत्‍यर्पण को लेकर वेस्‍टमिंस्‍टर कोर्ट में सुनवाई के दौरान हार्डी ने कहा कि अमेरिकी जांच एजेंसी फेडरल ब्‍यूरो ऑफ इंवेस्‍टीगेशन (FBI) दाऊद डी-कंपनी के खिलाफ जांच कर रही है, जो पाकिस्‍तान,भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से अपनी आपराधिक गतिविधियां संचालित करती है!

‘TOI’ के अनुसार, हार्डी ने कहा, ‘डी कंपनी का प्रमुख दाऊद इब्राहिम है, जो पाकिस्‍तान में रह रहा है! वह उसका भाई अनीस इब्राहिम भारत के मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार बम हमलों के बाद से ही भारत से भागे हुए हैं और पाकिस्‍तान में रह रहे हैं! उन्‍होंने यह भी कहा कि दाऊद की डी-कंपनी ने पिछले 10 वर्षों में अमेरिका में मनी-लॉन्ड्रिंग, मादक पदार्थ की तस्करी और जबरन वसूली जैसी कई गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दिया है, जिसे लेकर प्रशासन सख्‍त है! उन्‍होंने इसमें दाऊद के करीब सहयोगी मोती की खास भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि ‘डी कंपनी में उसका खासा रसूख है और वह अपने आका दाऊद के लिए मुलाकातों का आयोजन करता था! उन्‍होंने इस संबंध में मोती की गोपनीय बैठकों, फोन और ई-मेल के जरिये की गई बातचीत को लेकर एफबीआई की कई जांचों का भी जिक्र किया!


जाबिर मोतीवाला और जाबिर सिद्दीक जैसे अलग अलग नामों से बुलाए जाने वाले दाऊद के सहयोगी मोती को ब्रिटेन की स्कॉटलैंड यार्ड ने पिछले साल गिरफ्तार किया था, जो अमेरिका में प्रत्‍यर्पण का सामना कर रहा है! सुनवाई के दौरान मोती के वकीलों ने यह कहकर प्रत्‍यर्पण का विरोध किया कि उनका मुवक्किल मानसिक अवसाद से गुजर रहा है और वह तीन बार आत्‍महत्‍या की कोशिश कर चुका है, इसलिए प्रत्‍यर्पण के लिए फिट नहीं है!

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मात्र 10 साल में दिल्ली के जाफराबाद इलाके का साधारण लड़का अब्दुल नासिर कैसे बना दिल्ली अंडरवर्ल्ड का डॉन ?

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चौधरी हैदर अली
नई दिल्ली : मे पिछले 5 साल के लंबे समय से Crime Correspondent होने के नाते अपराध और अपराधियों के खिलाफ लिखता आ रहा हूं।अपने इस पत्रकारिता जीवन के चलते मेरी सैंकड़ों गैंगस्टर, माफिया, बाहुबलियों जैसे काफी बड़े-बड़े अपराधियों से विस्तार से मुलाकातें होती हैं!लेकिन जो मुझे नासिर में दिखा वह और किसी बाहुबली या गैंगस्टर में नहीं दिखा!जिस नजरिए से मैं नासिर को देखता हूं हो सकता है कोई और इंसान नासिर को उस नजरिए से ना देखता हो क्योंकि इस दुनिया में हर इंसान कि अपनी सोच है! जितना मैंने नासिर को जानने की कोशिश की वह सोच मैं आपके सामने पेश कर रहा हूं! नासिर के एक विरोधी ने हमसे कहा आप ने सुना होगा किस्मत हमेशा बहादुरो का साथ देती है नासिर भी उन बहादुरों मै से एक है! नासिर जैसा प्यार करने वाला जिंदा दिल इंसान मैंने आज तक नहीं देखा क्योंकि नासिर हर शख्स पर भरोसा कर लेता है!नासिर के एक साथी ने बताया नासिर को सिर्फ एक चीज से नफरत है और वह है धोका नासिर को धोका देने का मतलब है नासिर के गुस्से को जगाना मेरा जहां तक खयाल है नासिर जितनी जल्दी लोगों पर भरोसा करता है उतनी ही जल्दी धोकेबाजों सजा देने मैं करता है!

अब्दुल नासिर की जिंदगी पर एक नजर!
अब्दुल नासिर का जन्म 12 मार्च 1987 को मकान नं 1363, गली नं 48, ज़ाफराबाद में मरहूम जनाब सदाकत हुसैन साहब के घर हुआ उनके 4 बेटों में सबसे बड़े बेटे का नाम आदिल हयात, नादिर हयात, अब्दुल नासिर, और बदर हयात है अब्दुल नासिर अपने चारों भाईयों में तीसरे नम्बर पर है! सदाकत हुसैन साहब का शुमार ज़ाफराबाद इलाके के Upper Middle Class लोगों में होता था!अब्दुल नासिर ने ज़ाफराबाद के Gandhi Harijan Memorial School से सिर्फ 7वी जमात तक ही तालीम हासिल की क्युंकी नासिर बहुत छोटी उम्र से अपना Business करना चाहता था! स्कूल छोड़ते ही नासिर ने Jean’s बनाने की Factory लगा अपना काम पूरे दम-खम के साथ शुरू कर दिया!लेकिन कहते हैं ना किस्मत के लिखे को कोई नहीं मिटा सकता अब्दुल नासिर के साथ भी ऐसा ही हुआ नासिर जिस लगन और मेहनत से अपने कारोबार को बढ़ाने में लगा था उस मेहनत और लगन पर किस्मत गालिब आई! सन 2009 में नासिर पर भारतीय दंड संहिता की धारा – 147/148/149 /440/34 के तहत थाना सीलमपुर में मुकदमा दर्ज हुआ जिसका F.I.R No -304/09 था!

आखिर क्या थी F.I.R No – 304/09 की हकीकत?
अब्दुल नासिर के कुछ दोस्तों का छोटा-मोटा झगड़ा सीलमपुर के घोषित अपराधी आकिल मलिक उर्फ़ मामा के भाई जाहिद से हुआ था!आकिल मामा का दिल्ली पुलिस के कई विभागों में काफी अच्छा रसूख था!दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों ने मुझे बताया था की आकिल मामा मुंबई,जयपुर,बेंगलुरु,चेन्नई मैं अपने जिन गुर्गो से चोरी की वारदातों को अंजाम दिलवाता था कुछ समय बाद उन्हीं को दिल्ली पुलिस से गिरफ्तार करवा देता था!इस वजह से दिल्ली पुलिस उसकी बातों को नजर-अंदाज नहीं करती थी!यही वजह थी जो मामा अपने भाई जाहिद के साथ हुए इस छोटे-मोटे झगड़े को अपने अहम पर ले गया और जाफराबाद में अपना दबदबा कायम रखने के लिए ही आकिल मामा ने अब्दुल नासिर के घर गोलियां चला दी और दर्जन भर बेगुनाह लड़कों पर झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया उन लड़कों में अब्दुल नासिर का नाम भी शामिल था!

People’s BEAT को स्टोरी के दौरान काफी लोगों ने बताया 2009 में आकिल मामा ने नासिर पर बलवे का झूठा मुकदमा सीलमपुर थाने में जब दर्ज कराया तभी नासिर अपने घर से फरार हो गया फरारी के दौरान नासिर की मुलाकात अपने गांव के आसपास रहने वाले कुछ बदमाशों से हुई दो या तीन मुलाकातों के बाद नासिर उनके साथ रहने लगा जिन बदमाशों के साथ नासिर रह रहा था उन्होंने दिल्ली में 55 लाख की लूट को अंजाम दे रखा था जिसकी वजह से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल लुटेरों को पकड़ने के लिए दिन रात एक कर रही थी कुछ महीनों की मशक्कत के बाद टेक्निकल सर्विलांस की मदद से स्पेशल सेल ने बदमाशों के ठिकाने का पता लगा सभी बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया! जिस वक़्त स्पेशल सेल की टीम लुटेरों को गिरफ्तार करने उनके ठिकाने पर पहुंची उस वक़्त लुटेरों के साथ अब्दुल नासिर और एक अन्य युवक भी वहां मौजूद था स्पेशल सेल की टीम ने सभी लुटेरों के साथ नासिर और अन्य युवक को भी गिरफ्तार कर लिया! गिरफ्तारी के बाद स्पेशल सेल ने लुटेरों से पूछताछ की जिसमें लूट को अंजाम देने वाले बदमाशों ने बताया वारदात को अंजाम देने में नासिर और अन्य युवक शामिल नहीं थे और ना ही हमने इन दोनों को 55 लाख की लूट किए जाने के बारे में कुछ बताया था स्पेशल सेल ने किसी की एक न सुनी और नासिर पर लूट की प्लानिंग रचे जाने का इल्जाम लगा सलाखों के पीछे भेज दिया!

अब्दुल नासिर और छैनू पहलवान क्यों बने एक दूसरे के खून के प्यासे!
इन दोनों के बीच दुश्मनी का अंदाजा 23 दिसंबर 2015 के दिन कड़कड़डूमा कोर्ट में हुए शूटआउट से लगाया जा सकता है जिसमें दिल्ली पुलिस का एक जवान शहीद हुआ और सेशन जज संजय गुप्ता बाल बाल बचे यह शूटआउट भारत के इतिहास में दर्ज पहला इसलिए है क्योंकि इस शूटआउट को कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान अंजाम दिया गया था!

इस बात को लेकर विवाद था अब्दुल नासिर और छैनू पहलवान के बीच!
2010 में जब अब्दुल नासिर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लूट की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा उस दौरान आकिल मामा ने पहले से जेल में बंद अपने शार्प शूटर छैनू पहलवान को अब्दुल नासिर पर ब्लेड से हमला कराने के लिए पैसे दिए और हमला ठीक से कराने की हिदायत भी दी! छैनू पहलवान ने अब्दुल नासिर पर ब्लेड से हमला कराने का काम तिहार जेल में ही बंद त्रिलोकपुरी के 4 नशेड़ीयो (Drug Addict’s) को सौंपा अगले दिन अब्दुल नासिर को तिहार जेल से पेशी के लिए पुलिस वैन कड़कड़डूमा कोर्ट ला रही थी जिसमें और भी कैदी सवार थे अचानक पुलिस वैन में बैठे चार नशेड़ीयो ने सर्जरी ब्लेड से अब्दुल नासिर पर हमला कर दिया जिस से नासिर काफी जख्मी हो गया जेल प्रशासन ने ब्लेड से हमला करने वाले चारों लड़कों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की जांच में पता चला नासिर पर हमला आकिल मामा और छैनू पहलवान ने कराया था!खुद पर हुए जानलेवा हमले के बाद नासिर ने जेल से अपने बड़े भाई और अपने करीबी दोस्त आतिफ को सूचना भेजी के आकिल मामा हमारी हत्या की साजिश रच रहा है इससे पहले वह हमारी हत्या को अंजाम दे तुम आकिल मामा की हत्या कर दो यह खबर आतिफ और नादिर से पहले आकिल मामा तक पहुंच गई खबर सुनते ही आकिल मामा ने तुरंत आतिफ के ससुर हाजी मतीन से मुलाकात की जो पहले से ही अपनी बेटी और आतिफ के बीच हुई शादी से नाखुश था और आतिफ को अपने रास्ते से हटाना चाहता था ताकि अपनी बेटी की शादी अपनी मर्जी के लड़के से कर सके हाजी मतीन और आकिल मामा के बीच हुई इस मुलाकात में दोनों के बीच हत्याकांड को अंजाम देने में किसकी क्या भूमिका रहेगी जैसी सभी अन्य बातों को तय कर लिया!और 15 मई 2011 के दिन आकिल मामा ने अपने साथी वसीम बलुचा के साथ मिलकर आतिफ की हत्या कर दी!

(आगे की कहानी जल्द ही आपके बीच लाई जाएगी)

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जुर्म

अमरीका में 14 लोगों को बम भेजने वाला एक ‘भक्त’ पकड़ा गया है:- रविश कुमार

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उसका सीना 56 ईंच का तो नहीं मगर उम्र 56 साल है। वह कगांल हो चुका है। कंगाल होने से पहले कपड़े उतारकर नृत्य करता था। जिम में शरीर को बलशाली बनाती रहा। वह सफल होना चाहता था, फ़ुटबॉल पसंद करता था मगर असफलता ने उसका दामन नहीं छोड़ा। असफलता ने उसके अच्छे शरीर को भीतर से खोखला कर दिया। वह राष्ट्रपति ट्रंप का समर्थक बनने लगा। उनमें पिता को देखने लगा। धीरे धीरे वह अपने लिखने बोलने के स्पेस में सामान्य से कट्टर समर्थक में बदलने लगा।

ट्रंप का समर्थन उसके लिए सफलता तब भी नहीं लाई। वह घर बेचकर वैन में रहने लगा। वैन के चारों तरफ़ कई स्ट्रीकर लगे हैं। वह ट्रंप का समर्थक है और उनके विरोधी को अपना शत्रु समझता है। इन स्ट्रिकर को देखने पर आपको भारतीय व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के मीम
की याद आ जाएगी। इन तस्वीरों पर डेमोक्रेट का मज़ाक़ उड़ाया गया है। उन्हें मार देने के प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है। वैन पर ट्रंप पर सवाल करने वाले मीडिया को बेईमान मीडिया लिखा है। CNN को निशाना बनाया है।

वैन के बाहर छपे ये स्ट्रिकर और उनकी सामग्री उसके दिमाग़ में भर गई है। वह ज़हर से भरा हुआ एक इंसान है जो अपनी ग़रीबी को भूल ट्विटर और फ़ेसबुक पर ट्रंप विरोधियों के प्रति नफ़रत की आग उगलता है। इसका नाम है सीज़र सायोक। जिसे बारह लोगों को चौदह बम भेजने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है। ट्रंप ने इसे लेकर जाँच


एजेंसी की तारीफ़ की है लेकिन सीजर के राजनीतिक पक्ष को उभारने के लिए मीडिया पर जमकर हमला बोला है।

रिपब्लिकन पार्टी की राजनीति ने समर्थक को भक्त में बदल दिया है। उसके भीतर नफ़रत की बातों से एक झूठे गौरव का भाव भर दिया है। इसलिए वह अपने हालात की बेहतरी छोड़ फिर से अमरीका को महान बनाना चाहता है जैसे भारत को विश्व गुरु बनाने वाले बातें करते हैं। भारत में कई मामलों में बनी भीड़ ऐसे ही लोगों से बनी था मगर उनके बारे में ऐसा डिटेल सामने नहीं आया। किसी ने प्रयास भी नहीं किया। CNN ने सीज़र की वैन की खिड़की पर चिपके स्ट्रिकर को लेकर गंभीर विश्लेषण किया है। हर स्ट्रिकर के डिटेल की चर्चा हुई है।

मैंने अपनी किताब में The Free Voice में एक चैप्टर ROBO-Republic के बारे में लिखा था कि कैसे ग़लत इमोशन और फैक्ट फ़ीड कर इंसान के ‘होने’( belonging) को अतीत में शिफ़्ट कर दिया गया है। उसकी कल्पना में हिन्दू राष्ट्र आ गया है और वो उसका वास्तविक नागरिक समझता है। बहुत सारे लोगों को झूठ और नफ़रत से programmed कर दिया गया जिन पर किसी भी सत्य या तथ्य का असर नहीं होता है। ये लोग कभी भी किसीबात से अपने आप ट्रिगर हो सकते हैं। और लिंच मॉब में बदल कर लोगों का मार देते हैं। मरने वालों में ज़्यादातर मुस्लिम होते हैं जिनके बारे में अनगिनत प्रकार की नफ़रत भर दी गई है। वो गाय, पाकिस्तान, कश्मीर, बांग्लादेश, आबादी का नाम सुनते हुए अपने सह-नागरिक मुस्लिम को दूसरी निगाह से देखने लगते हैं। उनके भीतर कुछ ट्रिगर हो जाता है। जब लिंच मॉब बनकर हत्या नहीं करते हैं तब वे नफ़रत की बातों को लिखकर, विरोधियों के मारने की बात कर मानसिक अभ्यास कर रहे होते हैं।

ये लोग इतने programmed हो चुके हैं कि नौकरी नहीं है या बिज़नेस डूब गया है इन बातों का कोई असर नहीं पड़ता है। इनके लिए राजनीति और सत्ता अपनी बेहतरी के लिए नहीं बल्कि दूसरों से नफ़रत करने, मार देने और उन पर विजय प्राप्त करने का साधन हो गई है। समस्या इस भीड़ की है। अमरीका में जो पकड़ा गया है वह एक रोबोट है। ऐसे कई रोबोट तैयार हो चुके हैं। भारत में ऐसे रोबोट बन चुके हैं जिनके भीतर मेरा पोस्ट देखते ही कुछ ट्रिगर होता है। बिना पढ़े और समझे वे इनबॉक्स और कमेंट बॉक्स में गाली देने चले आ जाते हैं।

ROBO-Republic का प्रोजेक्ट रोज़ बड़ा हो रहा है। अमित शाह ने कहा था कि यूपी में 32 लाख व्हाट्स एप के ग्रुप बनाए हैं। सोचिए तीन करोड़ से अधिक लोग व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी में झूठ और नफ़रत की मीम पढ़ रहे हैं। ख़ुद को programmed होने दे रहे हैं। कई राज्यों में न जाने कितने करोड़ लोग व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के इस ज़हर का नशा ले रहे हैं, इंतज़ार कीजिए अमित शाह ख़ुद ही किसी साइबर सेल की कार्यशाला में बता देंगे। भाजपा के समर्थक और कार्यकर्ता पहले भी थे मगर वे सामान्य राजनीतिक प्राणी थे। सहमति-असहमति को समझते थे लेकिन इस वक़्त व्हाट्स एप मीम से programmed लोग इन समर्थकों से काफ़ी अलग हैं। अब भी समझ नहीं आ रहा तो आप बिल्कुल उन्हीं programmed हो चुके लोगों में से हैं। आइये अब ट्रिगर हो जाइये और मुझे गाली देना या कुछ ऐसा बकना शुरू कीजिए जिसका मेरी पोस्ट से कोई लेना देना नहीं है।

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