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मुन्ना माइकल : फिल्म समीक्षा

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मुन्ना माइकल : फिल्म समीक्षा

इस वीकेंड सिनेमाघरों में टाइगर श्रॉफ स्टार्रर मुन्ना माइकल रिलीज़ होने जा रही है। निधि अग्रवाल को टाइगर के अपोजिट कास्ट किया गया है तथा नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी खलनायक की भूमिका में नज़र आएंगे। एरोस इंटरनेशनल के बैनर तले बनी यह फिल्म एक्शन कॉमेडी और डांस से लबरेज़ है। फिल्म का निर्देशन सब्बीर खान ने किया है जो टाइगर को दो हिट फिल्मों हीरोपंती तथा बागी में डायरेक्ट कर चुके हैं और यह आने वाली इस फिल्म के लिए एक अच्छा संकेत है। टाइगर श्रॉफ ने हिन्दी सिनेमा में सफलता पूर्वक आगाज़ किया है। उनकी पहली फिल्म हीरोपंती ने बॉक्सऑफिस पर काफी अच्छा बिज़नेस किया था तथा एक्शन इमेज ने उन्हें मासेज़ में लोकप्रिय बनाया।
फिल्म की कहानी एक स्ट्रीट बॉय मुन्ना (टाइगर श्रॉफ ) की है जो माइकल जैक्सन का प्रशंशक है। फिल्म के खलनायक नवाज़ुद्दीन एक गैंगस्टर हैं और फिल्म की हीरोइन  को इम्प्रेस करने के लिए डांस सीखना चाहते हैं जिसके लिए वे मुन्ना को बुलाते हैं। यहां से फिल्म की कहानी का अनुमान लगाना कोई ज्यादा मुश्किल नही है, कह सकते हैं कि कहानी काफी साधारण है किंतु फिल्म में एक्शन , कॉमेडी तथा डांस दर्शकों को काफी मनोरंजित करेगा।
फिल्म का ट्रेलर एक्शन और डांस पर केंद्रित है तथा टाइगर श्रॉफ का एक्शन प्रभावित करता है, हालाँकि उनके चेहरे के हाव भाव, डायलाग डिलीवरी तथा बॉडी लैंग्वेज उन्हें हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्शन अभिनेताओं से अलग रखता है। नवाज़ुद्दीन एक अलग भूमिका में नज़र आएंगे तथा उन्हें डांस करते हुए देखना रोचक सिद्ध होगा।
बॉक्सऑफिस:
अगर डांस फिल्मों का इतिहास उठाकर देखा जाए तो मुम्बई एक ऐसा शहर है जहाँ मुन्ना माइकल बेहतरीन प्रदर्शन की क्षमता रखती है। इसके अलावा दक्षिण भारत में भी यह फिल्म ठीक ठाक बिज़नेस कर सकती है। लेकिन हिट फिल्म के लिए उत्तर भारत का बिजनेस काफी मत्त्वपूर्ण रहेगा। हालाँकि अगर फिल्म एक्शन से भरपूर निकली तो यह फिल्म अच्छा कलेक्शन करने में कामयाब हो जायेगी। टाइगर श्रॉफ अभी भी एक स्थापित स्टार नही है जो फ्लाइंग जाट की खराब ओपनिंग ने साबित कर दिया था लेकिन यह फिल्म उनके स्टारडम के लिए काफी महत्वपूर्ण है। पीपल्स बीट आशा करता है कि मुन्ना  माइकल पहले दिन लगभग 8 करोड़ तक का आंकड़ा छुं सकती है। पहले हफ्ते के बाद मुन्ना माइकल के सामने हर हफ्ते एक नई फिल्म की प्रतिस्पर्धा होगी जो इसे एक बड़ी सफलता बनने से रोक सकती है इसलिए फिल्म को पहले हफ्ते में बहुत अच्छा बिज़नेस करना होगा जिसके लिए फिल्म का मनोरंजक होना आवश्यक है।
पीपल्स बीट वीकेंड कलेक्शन की रिपोर्ट आने वाले दिनों में साझा करेगी।

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रंजीत आंबेडकरवादी हैं और अपनी पहचान छिपाते नहीं , उनकी नयी फिल्म “काला” देख आइये

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Pa Ranjith की फिल्म “काला” आज रिलीज हो रही है.

तमिल, तेलुगु और हिंदी में. रंजीत दक्षिण के सबसे सफल फिल्मकार हैं. इनकी फिल्म कबाली ने 700 करोड़ का कारोबार किया था. रंजीत आंबेडकरवादी हैं और अपनी यह पहचान वे छिपाते नहीं है. फिल्म बनाने में उनके साथ की टीम भी आम तौर पर बहुजन समुदाय की होती है. हालांकि वे मौका हर किसी को देते हैं.

उनकी फिल्मों में बाबा साहेब कई जगह, कई रूपों में नजर आते हैं.

मिसाल के तौर पर इस जीप को देखिए, जिस पर रजनीकांत बैठे हैं. इसमें BR है और बाबा साहब के परिनिर्वाण का साल 1956 भी. महाराष्ट्र तो है ही. फिल्म कबाली में भी आप बाबा साहेब के पोस्टर देख सकते हैं. जन्म के आधार पर भेदभाव का कबाली में निषेध है.

कबाली का वह डायलॉग तो आपको याद ही होगा. – मेरी यह शानदार ड्रेस मेरी राजनीति है.

कबाली फिल्म के पहले ही दृश्य में रजनीकांत जेल में एक दलित आत्मकथा पढ़ते दिखाए गए हैं. किताब का नाम है – माई फादर बालैया.

कबाली से पहले अपनी फिल्म “मद्रास” में भी रंजीत जाति का सवाल उठाते हैं. उसमें उनके पात्र बाबा साहेब को पढ़ते दिखाए गए हैं.

रंजीत का असर इतना है कि लोग उनके नाम से फिल्म देखने जाते हैं. वे भारत के पहले फिल्म डायरेक्टर हैं, जिनकी फोटो के पोस्टर लगते हैं. यह और भी बड़ी बात है, जब फिल्म के हीरो रजनीकांत हों.

ये पीए रंजीत के ये पोस्टर मुंबई समेत कई शहरों में देखे जा सकते है.

ब्रदर रंजीत को ऑल द बेस्ट.

देख आइए रंजीत की फिल्म काला.

(श्रोत-दिलीप मंडल की फेसबुक वाल)

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मनोरंजन

बॉलीवुड की हवा हवाई श्रीदेवी का दुबई में निधन

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फाइल फोटो

जी हां बॉलीवुड का एक और बेशकीमती नगीना इस दुनिया को अलविदा कह के चली गयी जिसका नाम है श्रीदेवी|  एक ऐसा नाम जिससे हर कोई वाकिफ होगा, बेहतरीन अदाकारी के जानी जाने वाली श्रीदेवी का आज रात दुबई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया|

श्री देवी एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए दुबई गयी थी और वहीँ उन्हें दिल का दौरा पर गया, दौरा इतना ज्यादा खतरनाक था की उन्हें बचाया भी नहीं जा सका|

फ़िल्मी सफ़र:

13 अगस्त 1963 को शिवकाशी(तमिलनाडू) में पैदा हुई श्रीदेवी 1990 के दशक की सबसे बेहतरीन अदाकारा रही हैं| श्रीदेवी के फ़िल्मी सफ़र की शुरुवात महज 4 साल की उम्र से ही हो गयी थी, उसके बाद उन्होंने बाल कलाकार के रूप में कई तमिल, तेलगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में काम किया|

बॉलीवुड में इन्होने सबसे पहले बाल कलाकार के रूप में फिल्म जूली में काम किया| श्रीदेवी की मुख्य अदाकारा के रूप में पहली फिल्म सोलवा सावन था जिसमे इनके काम को खूब सराहा गया|

इसके बाद इन्होने कभी पीछे पलट कर नहीं देखा औए फिल्म जगत के लिए मवाली,तोहफा,मिस्टर इंडिया,चांदनी,चालबाज जैसी कई हिट फ़िल्में दी|

श्रीदेवी के पिता का नाम अय्यपन था और माता का नाम राजेश्वरी था, उनके पिताजी पेशे से एक वकील थे| श्रीदेवी की शादी सन 1996 में अभिनेता अनिल कपूर के बड़े भाई और मशहूर निर्माता बोनी कपूर से हुई, इनकी दो बेटियां जाह्नवी और खुसी हैं|

5 से भी ज्यादा भाषाओँ में फिल्म करने वाली अदाकारा श्रीदेवी यूँ तो विवादों से बहुत दूर रही लेकिन एक विवाद जो बहुत सुर्ख़ियों में रहा वो है उनके और अभिनेता मिथुन चक्रबर्ती के रिश्ते का| कहा जाता है की राकेश रोशन की फिल्म जाग उठा इंसान के सेट पर मिथुन और श्रीदेवी को एक दुसरे से प्यार हो गया था|

मिथुन चक्रबर्ती की मानें तो उनकी और श्रीदेवी की गुपचुप तरीके से शादी भी हो चुकी थी ये बाद खुद मिथुन चक्रबर्ती ने खुद प्रेस को बताया|

बोनी कपूर से शादी के बाद श्रीदेवी फिल्मों से दूर चली गयी, बॉलीवुड में उन्होंने 15 साल बाद दोबारा तब धमाल मचा दिया जब उनकी फिल्म इंग्लिश विग्लिश ने लोगों का दिल जीत लिया|

श्रीदेवी के निधन से भारतीय फिल्म जगत ने बहुत बड़ा नगीना खो दिया जिसकी भरपाई कभी नहीं हो पायेगी|

बॉलीवुड की इस बेहतरीन अदाकारा को पीपल्स बीट भावभीनी श्रधांजलि देता है|

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मनोरंजन

पहाड़ी क्षेत्रों में भी नही है प्रतिभा की कमी, रास्क क्रू निकालने वाला है अपनी एलबम सीरीज

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उत्तराखंड चमोली:- जहां एक ओर हर क्षेत्र में देश तरक्की कर रहा है वहीं हमारे पहाड़ों की प्रतिभा कहीं खोती सी जा रही है। चाहे यहां की पारम्पतिक संस्कृति ढोल दमाऊ हो या फिर जागर। जहां एक ओर इन सब की कुछ सीमायें है और इन सीमाओं से बाहर इन का महत्व खत्म सा हो गया है। लेकिन डांस एक ऐसी विधा है जिस का ना कोई आदि है एयर ना ही कोई अंत है। डांस को आप किसी भी तरीके से कर लो वह मनमोहक ही लगता है।

हमारे खूबसूरत पहाड़ों की गोद मे बसा एक छोटा सा शहर है गोपेश्वर और इस गोपेश्वर में इतने प्रकार की प्रतिभाएं छुपी हुई है कि अगर कोई प्रतिभाखोजी इन प्रतिभाओं को खोजने निकले तो वह यहीं का हो कर रह जाए और हमारे गोपेश्वर को एक नई पहचान मिल जाये।

गोपेश्वर किबेक नाट्य संस्था जो कि प्रतिभाओं को निखारने का वक्त दे रही है उस का नाम है अक्षत नाट्य संस्था और इस संस्था के अध्यक्ष श्री विजय वशिष्ठ जी हर संभव कोशिश में लगे है कि गोपेश्वर की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।

वशिष्ठ जी की मेहनत का एक खूबसूरत सा नमूना है रास्क क्रू डांस ग्रुप। या डांस ग्रुप अपनी एक एलबम सीरीज लांच करने जा रहा है बहुत जल्दी आप सब के सामने रास्क क्रू के बहुत सारे बहुत खूबसूरत से डांस स्टेप होंगे जिन्हें आप चाह कर भी बिना देखे नही रह पाएंगे।

डांस कर रहे ये लड़के कॉलेज में पढ़ने वाले है और डांस में ही अपना भविष्य तलाश रहे है। सुदूर पहाड़ों के इन छात्रों के लिए जरूरत है तो बस एक मौके की। बाकी तो अपनी प्रतिभा की बदौलत ये अपना भविष्य खुद ही तय कर लेंगे।

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