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राजनीति

मोदी – शाह की भाजपा कांग्रेसी संस्कृति के रंग में रंगी हुई नजर आ रही है।

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दिल्ली:-हो ना हो भाजपा पर कहीं ना कहीं कांग्रेस का रकनग तो चढ़ ही गया है। जिस कांग्रेसी संस्कृति से दूर रहने और भारत से कांग्रेस को खत्म करने की बात हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी करते आ रहे है पिछले कुछ दिन से उसी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और कांग्रेसी सनाक्रति में डूबे हुए खुद ही नजर आ रहे है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की कर्मठता ने भले कांग्रेस पार्टी को राजनीति की खूंटी पर करीब-करीब टांग दिया हो, लेकिन कांग्रेसी संस्कृति की छाप अब भाजपा पर भी साफ नजर आने लगी है। त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड तीन राज्यों में मिली सफलता के बाद इसका साफ संकेत देखा जा सकता है।

यह कांग्रेस का कल्चर रहा है कि सफलता मिलने पर उसके नेता समवेत एक स्वर में अपने शीर्ष नेता को बधाई देने, गुणगान करने, फोटो खिंचवाने में लग जाते हैं। लेकिन सोमवार को भाजपा के सांसदों ने भी इसी परंपरा को निभाया।

सोमवार को प्रधानमंत्री के संसद भवन परिसर में आने का समय होते ही भाजपा के नेता एक कतार में स्वागत के लिए खड़े हो गए। स्वागत की इस रस्म का सुख पाने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी सदन में प्रवेश करने के रास्ते से जाने की बजाय अलग गेट को चुना।

थोड़ी देर बाद जब प्रधानमंत्री आए तो तीन राज्यों में मिली सफलता का श्रेय केन्द्र सरकार और भाजपा अध्यक्ष को देते हुए सांसदों ने उन दोनों का स्वागत किया।

तीन राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री पार्टी मुख्यालय गए थे। उनकी अध्यक्षता में भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक हुई थी। इस दौरान पार्टी के नेताओं, सांसदों ने प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष को मिली सफलता के लिए उनका स्वागत किया और बधाई दी थी। सोमवार पांच मार्च को बजट सत्र के दूसरा चरण शुरू होने के पहले दिन पार्टी के सांसदों ने प्रधानमंत्री और भाजपाध्यक्ष का स्वागत करते हुए उन्हें सफलता के लिए बधाई दी। मंगलवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक है। परंपरा के अनुसार संसद सत्र में हर मंगलवार को होती है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार मंगलवार को फिर संसद भवन परिसर में पार्टी के सांसद प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को तीन राज्यों में मिली सफलता के लिए एक बार फिर दोनों का स्वागत कर सकते हैं। सूत्र का कहना है कि मानकर चलिए, ऐसा होना ही है। इस बारे में भाजपा के उ.प्र. से आने वाले एक सांसद का कहना है कि आखिर इसमें बुराई क्या है? पार्टी तीन राज्यों में सफल चुनाव अभियान चलाने के बाद सरकार बनाने की स्थिति में है। ऐसे में शीर्ष नेता का स्वागत तो होना ही चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पार्टी की हर बड़ी सफलता के बाद अपने कार्यकर्ताओं, नेताओं को कांग्रेसी संस्कृति से दूर रहने के लिए ताकीद करते रहे हैं। 2014 के आम चुनाव से लेकर हर मोर्चे पर प्रधानमंत्री नेताओं को जनता का सेवक बताते हुए लालफीताशाही संस्कृति का विरोध करते रहे हैं। लेकिन पार्टी के सांसद, नेता अभी भी इससे नहीं ऊबर पा रहे हैं।

देश

युवाओं की आवाज़ जेल और गोलियों के डर से ना पहले कभी दबी थी, ना आगे कभी दबेगी:- कन्हैया कुमार

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उमर खालिद पर  हुए जानलेवा हमले के खिलाफ देशभर के युवा एक जुट होने लगे। जहां एक तरफ छात्र नेता शेहला रशीद ने उमर के पक्ष में ट्वीट करते हुए सत्ता के नशे में चूर सत्ताधारियों को लताड़ा वहीं जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने देश मे बढ़ रहे जंगलराज पर सरकार को आड़े हाथों लेटवहुये मीडिया को भी नही छोड़ा। उन्होंने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा कि:-

देश में जंगल राज का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि संसद भवन से थोड़ी दूर कभी संविधान की प्रतियाँ जला दी जाती हैं तो कभी उमर ख़ालिद पर गोली चलाने जैसे अपराध को अंजाम दिया जाता है। स्वतंत्रता दिवस से पहले संसद भवन के पास किसी नागरिक पर इस तरह हमला करना यह दर्शाता है कि इस देश में अपराधियों का मनोबल कितना बढ़ गया है। इसके लिए अपराधियों को मिलने वाला सरकारी संरक्षण और दरबारी मीडिया का प्रोत्साहन जिम्मेदार है। लेकिन युवाओं की आवाज़ जेल और गोलियों के डर से ना पहले कभी दबी थी, ना आगे कभी दबेगी।

इस शर्मनाक और कायराना हमले की सिर्फ़ आलोचना करने से काम नहीं चलेगा। हमें अभी डर का माहौल बनाकर देश को लूटने वालों के ख़िलाफ़ एक बड़ा मोर्चा बनाकर बार-बार सड़कों पर निकलना होगा। भाजपा की मीनाक्षी लेखी ने आज की इस कायराना हरकत को सनसनी फैलाने वाला तमाशा बताया है। यह बयान उस पार्टी की तरफ़ से आया है जिसने लोकतंत्र को ख़ुद तमाशा बना दिया है।

कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कहते हैं-

“भेड़िया गुर्राता है
तुम मशाल जलाओ।
उसमें और तुममें
यही बुनियादी फर्क है
भेड़िया मशाल नहीं जला सकता।

अब तुम मशाल उठा
भेड़िये के करीब जाओ
भेड़िया भागेगा।”

संघ-भाजपा की नफरतवादी विचारधारा के खिलाफ सभी प्रगतिशील ताकतों को एकजुट होकर प्रेम, सद्भावना और संघर्ष की मशाल जलानी होगी क्योंकि आज अगर खामोश रहे तो कल सन्नाटा छा जाएगा।

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राजनीति

मेरा गला दबोचा. मुझे जमीन पर गिरा दिया और एक बंदूक निकालकर मुझ पर तान रहा था:- उमर खालिद

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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र नेता उमर खालिद पर हमले की कोशिश की गई है. उमर खालिद पर दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास इस अटैक की कोशिश हुई. हालांकि, किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंची और वह पूरी तरह सुरक्षित हैं.

यह घटना दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब इलाके की है. जानकारी के मुताबिक, उमर खालिद अपने साथियो के साथ कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास बैठे हुए थे. इसी दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे और उन्होंने उमर की तरफ आने की कोशिश की. आरोप है कि इन दो में से एक शख्स के पास पिस्तौल थी. इस दौरान वहां बैठे लोगों को जब शक हुआ तो वे रुक गए और फिर वहां से फरार हो गए.

घटना के बाद उमर खालिद ने कहा कि वह जब चाय पीकर लौट रहा था तो किसी ने पीछे से हमला किया. उसका गला दबाने की कोशिश की, उसे जमीन पर गिरा दिया और बंदूक निकालकर उस पर तान दिया.

‘मैंने उसकी बंदूक गिराई’

घटना के बाद उमर खालिद ने आज तक से कहा, ‘मैं एक मुहिम से जुड़ा हूं जिसका नाम है यूनाइटेड अगेंस्ट हेट. आज उसका ढाई बजे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में प्रोग्राम था. मैं 2:10 पर ही पहुंच गया. प्रोग्राम शुरू होने में समय था तो सोचा दोस्तों के साथ चाय पी लूं, जब चाय पीकर लौट रहा था तो किसी ने पीछे से हमला किया.

उन्होंने कहा,  ‘मेरा गला दबोचा. मुझे जमीन पर गिरा दिया और एक बंदूक निकालकर मुझ पर तान रहा था, उस समय मैंने उसकी बंदूक को दूर किया. दोस्तों ने पुश किया तो वो भागा और भागते हुए गोली की आवाज आई. पता नहीं वो कौन थे. पुलिस जांच करे और हमलावरों को पकड़े.’

खालिद ने आगे कहा, ‘मैं पहले भी निशाने पर रहा हूं. मेरी जान को खतरा है और मैंने पहले भी पुलिस से सुरक्षा मांगी थी. अमित जानी ने मारने की धमकी दी थी. डॉन रवि पुजारी ने भी धमकी दी थी. 2 बार पुलिस से सुरक्षा मांगी और अब भी सुरक्षा मांग रहा हूं.’

पुलिस को कार्यक्रम की जानकारी नहीं

उमर खालिद पर हमले के बारे में जानकारी देते हुए जॉइंट सीपी अजय चौधरी ने कहा कि उमर खालिद यहां एक कार्यक्रम में आए थे. चाय पीने के लिए जब वह बाहर निकले तभी उसी समय यह घटना घटी. पुलिस को जानकारी नहीं थी कि अंदर कोई प्रोग्राम चल रहा है. उमर का कहना है तब ही एक शख्स ने हमला किया. मौके से एक पिस्टल मिली है. फायरिंग हुई या नहीं इसकी जांच की जा रही है.

दूसरी ओर, उमर खालिद को जांच के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन ले जाया गया है. उमर पर हमले को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नेता मीनाक्षी लेखी ने महज प्रोपेगैंडा करार दिया.

छात्र नेता शेहला रशीद ने ट्वीट कर इस घटना को चौंकाने वाला और निंदनीय करार दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली में उमर खालिद पर किसी ने पीछे से गोली मारने की कोशिश की. वह अभी ठीक हैं, लेकिन हम उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं.

सड़क पर मिली पिस्तौल

आरोप है कि हमला करने आए हमलावर पिस्तौल छोड़कर वहां से फरार हो गए. ये पिस्तौल सड़क पर पड़ी मिली है. फिलहाल, पुलिस मौके पर पहुंच गई और मामले की तफ्तीश की जा रही है.

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देश

कन्हैया कुमार का बेगूसराय दौरा कहीं 2019 के चुनाव का आगाज तो नही?

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आज कल जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार अपने गृह जनपद बेगूसराय में है और वहां पर घूम घूम कर जन सम्पर्क कर रहे है। छात्र छात्राओं से मिल रहे है और बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते नजर आ रहे है। हाल ही में कन्हैया कुमार ने बेतिया में एक जन सभा को संबोधित किया और मोदी सरकार पर जम कर हमला किया है। वैसे तो कन्हैया कुमार हर बार ही मोदी सरकार पर हमला बोलते नजर आते है लेकिन इस बार उन के तेवर कुछ और ही कह रहे है।
हालांकि इस बात की पुष्टि करने का हमारे पास कोई सबूत नही है और ना ही हमारी कन्हैया कुमार से किसी तरह की कोई बात हुई है की इस बात को सही ठहराया जाय कि कन्हैया कुमार ने 2019 के चुनाव का आगाज कर दिया है लेकिन जिस तरह से कन्हैया कुमार जनसंपर्क और छात्र छात्राओं, बड़े बुजुर्गों के बीच पहुँच रहे है उस हिसाब से लग रहा है कि कन्हैया कुमार 2019 के चुनाव के लिए कमर कस चुके है।
पूर्व में चल रही खबरों से यह तो स्पष्ट हो ही गया है कि कन्हैया कुमार 2019 में बेगूसराय से कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार होंगे। कन्हैया कुमार राजनीति में अपना सिक्का जमा चुके है और आज की तारीख में देश के जाने माने छात्र नेताओं में से एक है।
कन्हैया कुमार को मुख्य रूप से उन के तीखे तेवर और मोदी सरकार को आड़े हाथों लेने के लिए जाना जाता है। कुछ दिन पूर्व ही कन्हैया कुमार ने अपनी पीएचडी की थीसिस जमा कर के उन तमाम मोदी समर्थकों को करारा जवाब दिया जो कि कन्हैया के कई सालों से जेएनयू में रहने पर सवाल खड़े कर रहे थे।
अपने घर पहुचते ही अपनी पीएचडी की थीसिस अपनी मां को सौंपी है। कन्हैया की मां आज भी आंगनवाड़ी में सहयका है और उसी से अपने परिवार का पालन पोषण कर रही है।

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