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राजनीति

मेघालय:- कांग्रेस उभरी बड़ी पार्टी बन कर लेकिन मात्र 2 सीट मिलने के बावजूद भाजपा बनाएगी सरकार

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दिल्ली:- पहले गोआ और अब मेघालय आखिर भाजपा ऐसा कौन सा खेल खेल रही है कि वह अगर पूर्ण बहुमत में नही भी है तो भी सरकार बना दे रही है। मेघालय में अगर साफ तौर पर देखा जाए तो भाजपा को मात्र दो ही सीट मिली है लेकि सत्र के लालच ने भाजपा को इतना अंधा कर दिया है कि वह किसी के साथ भी खड़े हो कर के सत्ता में काबिज होना चाहते है। ठीक वैसे ही जैसे जम्मू कश्मीर मव पीडीपी के साथ खड़े हो कर के सरकार बना ली।

पूर्वोत्तर का स्कॉटलैंड कहलाने वाले मेघालय में भाजपा ने रविवार को महज तीन घंटे में बाजी पलटते हुए कांग्रेस के हाथों से सत्ता छीन ली। दस साल से सरकार चला रही कांग्रेस 21 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी लेकिन सत्ता से बाहर हो गई। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के अध्यक्ष और तूरा के सांसद कोनराड संगमा को भाजपा और अन्य दलों के समर्थन से छह मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

कोनराड पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा के बेटे हैं।  दो विधायकों वाली पार्टी ने सबसे बड़े दल कांग्रेस को दी पटखनी शनिवार को घोषित चुनाव परिणाम में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आने के बाद कांग्रेस ने रात में ही राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। इस बीच भाजपा के कई दिग्गज नेता भी रात में शिलांग पहुंच गए।

रविवार सुबह से बैठकों का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसके तीन घंटे के अंदर ही तमाम क्षेत्रीय दलों ने कोनराड संगमा के नाम पर सहमति जता दी।  छह मार्च को एनपीपी के कोनराड संगमा लेंगे सीएम पद की शपथ पूर्वोत्तर के भाजपा नेता व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू और असम के भाजपा नेता हिमंत बिस्व सरमा ने सुबह से ही गोटियां बिछाने की कवायद शुरू कर दी थी। रिजिजू ने यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के नेता डोनकूपर राय से मुलाकात की। राज्य के मौजूदा सियासी समीकरणों में छह सीटों वाले यूडीपी का समर्थन अहम था। डोनकूपर ने बाद में एलान किया कि वह राज्य में स्थिर सरकार के गठन के लिए एनपीपी को समर्थन देंगे।

उन्होंने समर्थन के लिए एक ही शर्त रखी थी कि मुख्यमंत्री एनपीपी अध्यक्ष कोनराड संगमा को चुना जाएगा। इस बीच, रिजिजू और हिमंत ने दूसरे क्षेत्रीय दलों के साथ भी बात की। कुल मिला कर तीन घंटे में ही 34 विधायकों का समर्थन जुटाकर दो विधायकों वाली भाजपा ने बाजी पलट दी। रविवार शाम को कोनराड संगमा ने राज्यपाल के सामने अपने समर्थक 34 विधायकों की परेड करा दी। इसके बाद राज्यपाल गंगा प्रसाद ने उनको सरकार बनाने का न्योता दिया। वैसे, कांग्रेस ने भी यूडीपी से समर्थन के लिए संपर्क किया था लेकिन बात नहीं बनी। कांग्रेस के हाथों से बाजी निकलते देखकर पार्टी के तीन वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, कमलनाथ और मुकुल वासनिक दोपहर को ही शिलांग से निकल गए।

बीट विशेष

मैं अभिनंदन,चमार…आरक्षण छोड़ना चाहता हूं, सीएम को लिखी चिट्ठी वायरल

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“सेवा में, नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार.

मैं अभिनंदन कुमार, मैं चमार जाति से हूं। मैं आरक्षण छोड़ना चाहता हूं, क्योंकि हमसे ‘बड़े-बड़े’ जाति के लोग अब आरक्षण पाने को दलित बनने के लिए तैयार हैं तो मैं सवर्ण बनने के लिए तैयार हूं। क्योंकि मैं सदियों से हरिजन, चमरवा का प्रताड़ना झेलते आ रहा हूं। इन सभी से निजात पाने के लिए मैं सवर्ण बनना चाहता हूं। जब आप किसी भी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने में सक्षम हैं तो मुझे ब्राह्मण जाति बनाइए, ताकि मैं भी ब्राह्मणों की तरह शान से लोगों पर राज कर सकूं।”

ये अभिनंदन कुमार की ओर से जारी पत्र का सारांश है।

अंदाजा लगा सकिए तो लगाइए कि ब्राह्मणवाद के खिलाफ दलित प्रतिरोध की इमारत की बुनियाद कितनी ठोस बन रही है। दो-चार नेताओं के बिकने का हवाला नहीं दीजिए। अभिनंदन कुमार की चिट्ठी एक प्रतिनिधि उदाहरण है। जमीन पर उतर कर देखिए कि कैसे एक साधारण दिखने वाला दलित भी अब अपनी सामाजिक त्रासदी की सबसे मुख्य वजह को कैसे पहचान रहा है और कैसे उसके खिलाफ एक चुनौती बन कर खड़ा है।

अभिनंदन कुमार की चुनौती केवल नीतीश कुमार या मोदी के लिए नहीं है। यह इस ब्राह्मणवादी समाज और सत्ता-तंत्र के हर पहरुए के लिए है। इस चिट्ठी से जिस शानदार जमीन और ताकत का अहसास होता है, आरएसएस-भाजपा और इस देश की सारी पंडावादी ताकतें उसी से डरी हुई है। इसीलिए सबसे ज्यादा तोड़ने की कोशिश इसी तबके की हो रही है। आर्थिक तौर पर और फिर सामाजिक तौर पर!

(अरविंद शेष की फेसबुक वाल से)

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देश

दलित की तुलना सूअर से करने वाले विधायक के नाम एक दलित हीरा डोम का ख़त

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प्रस्तुति – डॉ ओम सुधा

पिछले दिनों महाराष्ट्र से बीजेपी विधायक रविंद्र चव्हाण ने दलितों की तुलना सूअर से की थी . बिहार के भागलपुर जिले में बरारी घाट पर रहता है हीरा डोम..हीरा सूअर पालता है , बरारी घाट पर लाश जलाता है .हीरा अपने बच्चों को सरकारी स्कुल में भेजता है , कभी जाता है, कभी नहीं जाता . हीरा के बच्चों के साथ स्कुल में सब भेदभाव करते हैं, मास्टर साहब भी और दूसरे विद्यार्थी भी . हीरा का आठ साल का बेटा बहुत छोटा है इस भेदभाव को समझने के लिए . पर इतना समझने लगा है की सब उससे दूर भागते हैं, सब उसके छुए जाने से बचते हैं. हालांकि उसको स्कुल में मुफ्त का खाना मिलता है , पर हीरा डोम के बेटे को मुफ्त की खिचड़ी के साथ अपमान का घूंट बर्दाश्त नहीं होता . इसलिए अब वह घर पर ही रहता है और सुप बीनने में माँ की मदद करता है.हीरा हर सुबह चौक पर जाकर चाय पीता है . उसके लिए दुकानदार ने अलग कप रखा हुआ है. दूकान में अखबार भी आता है . अखबार में दलित की तुलना सूअर से किये जाने की खबर भी छपी है.
हीरा डोम अखबार में इस खबर को पढ़कर खुश है . उसे यह जानकार ख़ुशी हो रही है की अब उसके पालतू सूअर भी राष्ट्रिय बहस के केंद्र में हैं. वो इस सोच सोचकर रोमांचित हो रहा है की जिन सूअरों की वजह से सदियों से उसके परिवार का पेट भरता रहा है , उसे अब जाकर यथोचित सम्मान मिला है..
दलित और सूअर को बहस के केंद्र में लाने के लिए वह हाराष्ट्र से बीजेपी विधायक रविंद्र चव्हाण को धन्यवाद करना चाहता है. वो खत लिखता है रविंद्र चौहान को..

इस चिट्ठी में शब्द तो मेरे हैं पर भावनाएं हीरा डोम की है…

आदरणीय रविन्द्र चौहान जी …

जबसे मैंने चाय की दूकान पर यह खबर पढ़ी है की आपने दलितों की तुलना सूअर से की है, हमारा मन बाग़ बाग़ हुआ जाता है . आपने कहा है की “अब्राहम लिंकन ने एक सूअर को नाले से निकालकर उसे साफ किया था. उसी तरह पीएम नरेंद्र मोदी और राज्य के सीएम देवेंद्र फड़नवीस दलितों के उत्थान के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं.’

बहुत लोग इस बात के लिए आपकी आलोचना भी करेंगे की आपने दलितों की तुलना सूअर से कर दी है. पर, आपने अनजाने में बहुत महान कर्म कर दिया है मैं और मेरे सूअर आपका ये एहसान कभी नहीं भूलेंगे. वैसे भी आपने गलत क्या कह दिया है ? सूअर ही तो हैं हमलोग. क्या ये सच नहीं की आज भी इस देश में मेरे जैसे करोड़ों दलित सूअर की तरह जीने को मज़बूर हैं. सूअर सी ज़िंदगी जी रहे हैं. कभी आइएगा हमारे यहाँ तो देखिये की जहाँ पर हम रहते हैं वही पर सूअरबाड़ा भी है . कभी वो हमारे बैडरूम में आकर सो जाते हैं कभी हमारे बच्चे उनके बाड़े में जाकर खेलते-खाते हैं. आपको घिन आ रही होगी . पर हमारी ज़िंदगी का सच यही है. अब देखिये हमारे और सूअर की ज़िंदगी में कितनी समानता है . हम भी स्कुल नहीं गए , हमारे सूअर भी स्कुल नहीं जाते . हम अपना इलाज बढ़िया अस्पताल में नहीं करा पाते और हमारे सूअर भी. बदबू हमारे शारीर से भी आती है और हमारे सूअर की शरीर से भी. हम भी बाड़े में रहते हैं और हमारे सूअर भी.. आपको हमारे सूअर से भी घिन आती है और हमसे भी . जिनको हमारी तुलना सूअर से किये जाने पर आपत्ति है वो घोर दलित विरोधी हैं. उनको बताना होगा की दलित और सूअर एक दूसरे से अलग कैसे हुए. खाली चिल पोँ करने से काम नहीं चलेगा .
मैं आपकी इस बात से भी इत्तेफाक रखता हूँ रविंद्र चौहान जी की नरेंद्र मोदी हमारे लिए मसीहा बनकर आये . बिलकुल सही कह रहे हैं आप जिनको लागता है की मोदी जी दलित विरोधी है उनको याद रखना चाहिए की मोदी जी ने आंबेडकर जयंती के दिन नीले रंग का कुरता पहना था और जय भीम भी बोला था . फिर नरेंद्र मोदी दलित विरोधी कैसे हुए? ये सब विपक्ष की चाल है. कुछ लोग कहते हैं की आपकी सरकार ने दलितों के कल्याण बजट में बड़ी कटौती की है. पर इनके कहने पर मत जाइएगा ये सब विकास विरोधी हैं. राष्ट्र विरोधी है. अब इनको कौन समझाए की आप पैसे कटौती करके अडानी अम्बानी को दे रहे हैं. ये मूर्ख नहीं समझते की अडानी -अम्बानी का विकास ही तो राष्ट्र का विकास है. देशद्रोही कहीं के.
जो लोग भाजपा को दलित विरोधी पार्टी कहते हैं उनको मैं डंके की चोट पर याद दिलाना चाहता हूँ की पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह जी ने एक दलित के यहां कहना खाया खाया था. दलित के यहां कैमरे के सामने खाना खाने वाला और जय भीम का नारा लगाने वाला कहीं दलित विरोधी होता है क्या? मैं तो कहता हूँ रविंद्र चौहान जी आप गिरिराज सिंह जी से कहकर इन सब को पाकिस्तान भेज दीजिये.

मुझे तो यह भी याद नहीं पड़ता की आपकी भाजपा के सत्ता में आने से पहले दलित कभी राष्ट्रीय बहस के केंद्र में थे या नहीं. भले ही आपके विरोधी इसकी वजह रोहित वेमुला को आत्महत्या के लिए उकसाना , भाजपा शासित राज्यों में दलित उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं , फेलोशिप पर रोक , दलित कल्याण के बजट में बड़ी कटौती , मनरेगा राशि में कटौती {इस योजना के अधिकाँश लाभार्थी दलित पिछड़े हैं} या समय समय पर आपके नेताओं द्वारा दलित विरोशि बयानों को मानते हों. पर , मैं आपके विरोधियों से इत्तेफाक नहीं रखता . मेरा तो यह मानना है रविंद्र चौहान जी की पहली बार देश में दलित हितैषी सरकार बानी है . क्या इसके लिए हम एक रोहित वेमुला कुर्बान नहीं कर सकते ?

हमारे लिए तो यही बहुत है की आपने हमें बहस के केंद्र में ला दिया. इस बार मेरे सूअर भी बहुत खुश है. पिछली बार बार आपकी सरकार के मंत्री आदरणीय वी के सिंह ने हम दलितों की तुलना कुत्ते से की थी तो ये नाराज़ हो गए थे. पर देखिये आपकी वजह से इनका नंबर भी आ ही गया.

खैर, थोड़ा लिखा है , ज्यादा समझिएगा…

मेरे और मेरे सूअरों की तरफ से आपको एक बार फिर से सादर प्रणाम …

सिर्फ आपका …मने सिर्फ भाजपा का ..

हीरा डोम ..

प्रस्तुति – डॉ ओम सुधा

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बीट विशेष

EXCLUSIVE : मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन का इस्तीफा, लोग बोले-डूब रही नैया

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देश के मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफा देने के लिए निजी वजहों का हवाला दिया गया है. इस्तीफे के बाद वह अमेरिका जाने वाले हैं. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसकी जानकारी दी.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फेसबुक पर लिखे अपने ब्लॉग में इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अरविंद सुब्रमण्यन अमेरिका जा रहे हैं. वह यहां से अक्टूबर में वापस लौटेंगे.

जेटली ने अपने ब्लॉग में लिखा, ” कुछ दिन पहले मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार मुझे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मिले. उन्होंने मुझे जानकारी दी कि वह अपनी पार‍िवारिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वापस अमेरिका जाना चाहते हैं.”

जेटली ने लिखा कि उनके इस्तीफा देने की वजहें निजी हैं, जो उनके लिए काफी अहम हैं. उन्होंने मेरे पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा और मुझे उनके इस्तीफे को स्वीकार करना ही पड़ा.”

अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग में लिखा कि अरविंद ने 16 अक्टूबर, 2014 को यह पद संभाला था. उनका कार्यकाल खत्म होने पर मैं चाहता था कि वह आगे भी इस पद पर बने रहें. उन्होंने लिखा कि इस दौरान उन्होंने बताया कि मैं पारिवारिक जिम्मेदारियों और मौजूदा पद को लेकर पसोपेश में हूं.

जेटली ने अपने ब्लॉग में अरविंद की तारीफ करते हुए बताया कि वित्त मंत्रालय, पीएमओ और सरकार के अन्य विभागों के साथ उनका संवाद काफी अहम था. यह औपचारिक होने के साथ ही अनौपचारिक स्तर पर भी होता था.

अरविंद सुब्रमण्यन ने अक्टूबर, 2014 में मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार का पद संभाला था. उन्होंने रघुराम राजन की जगह ली थी. इस दौरान रघुराम राजन आरबीआई गवर्नर बने थे.

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