Connect with us

स्वास्थ्य

मनीष सिसोदिया समेत 3 और विधायक कोरोना पॉजिटिव पाए गए

Published

on

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की सोमवार को कोरोना सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। देर शाम सिसोदिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि हल्का बुखार होने के बाद आज कोरोना टेस्ट कराया था, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटव आई है। मैंने स्वयं को एकांतवास में रख लिया है। फिलहाल बुखार या अन्य कोई परेशानी नहीं है। मैं पूरी तरह ठीक हूं।

आप सब की दुआओं से जल्द ही पूर्ण स्वस्थ होकर काम पर लौटूंगा। बता दें रविवार को उप-मुख्यमत्री को बुखार होने के बाद उन्होंने खुद को आईसोलेट कर दिया था। सिसोदिया को 2018-19 के लिए दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पर एक रिपोर्ट समेत कई दस्तावेज सदन के पटल पर रखने थे, लेकिन बुखार हो जाने के बाद वह विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हो सके।

उनकी गैर मौजूदगी में स्वास्थ्य एवं लोक निर्माण मंत्री सत्येन्द्र जैन ने उन दस्तावेजों को सदन पटल पर रखा। वहीं, विधानसभा के सत्र से पहले विधानसभा परिसर में गुरुवार, शुक्रवार और सोमवार को सदस्यों, स्टॉफ, अधिकारियों और मीडिया कर्मियों के लिए कोरोना सैंपल जांच की सुविधा की गई थी। इसमें करीब 400 लोगो के कोरोना सैंपल की जांच की गई।

इसमें तीन विधायक समेत 18 लोग पॉजिटिव आए है। विधायकों में करोल बाग से विधायक विशेष रवि, आरकेपुरम से विधायक प्रमिला टोकस, मादीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक गिरीश सोनी शामिल है। इनमें वजीरपुर से विधायक राजेश गुप्ता, घोंडा से विधायक अजय महावर, दिल्ली कैंट से विधायक विरेंदर कादियान और चांदनी चौक से विधायक प्रह्लाद साहनी चार विधायक संक्रमण के लक्षण के चलते सत्र में शामिल नहीं हुए।

स्वास्थ्य

मानसून सत्र के पहले दिन ही 30 सांसद पाए गए कोरोना पॉजिटिव

Published

on

संसद के सोमवार से शुरू हुए मानसून सत्र में शामिल होने के लिए की गई कोविड-19 जांच में करीब 30 सांसद और संसद के 50 से अधिक कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। सूत्रो ने सोमवार को यह जानकारी दी। मानसून सत्र की शुरुआत होने से पहले सभी सांसदों ओर लोकसभा तथा राज्यसभा के सचिवालयों के कर्मचारियों की आवश्यक कोविड-19 की जांच की गई।

सूत्रों ने बताया कि इन जांचों की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 30 सांसद और सचिवालयों के 50 से अधिक कर्मचारी कोविड-19 से संक्रमित पाए गए। उन्होंने बताया कि संक्रमित पाए गए सभी सांसदों और कर्मचारियों से संसद न आने और पृथक-वास में जाने के लिए कहा गया है। सोमवार से शुरू हुआ मानसून सत्र एक अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान कोविड-19 महामारी को देखते हुए बैठकें दो पालियों में होंगी।

नाम नहीं छपने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 17 सांसद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हैं और तीन कांग्रेस के हैं। इस सूची में रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी और दिल्ली के दो भाजपा सांसद, मीनाक्षी लेखी और प्रवेश वर्मा शामिल हैं।

सोमवार से मानसून सत्र लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग बदलावों के साथ शुरू हुआ। इसमें बैठने की व्यवस्था और महामारी के मद्देनजर सख्त स्वास्थ्य नियम थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को राज्यसभा के पहले दिन साढ़े तीन सौ सांसदों ने भाग लिया। मंत्रियों को उनकी उपस्थिति को चिह्नित करने की आवश्यकता नहीं है।

मोबाइल ऐप से लगी हाजिरी

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इसी के मद्देनजर सांसदों के हाजिरी लगाने की भी अलग व्यवस्था की गई थी। हाजिरी के लिए मोबाइल ऐप का सहारा लिया गया। हालांकि इस क्रम में कई सांसदों को दिक्कतें भई आईं। सदन परिसर में एक सांसद दूसरे को हाजिरी लगाने में मदद करते हुए दिखे।

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को विश्वास जताया कि संसद एक स्वर में यह संदेश देगी कि वह हमारी सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों के साथ एकजुटता से खड़ी है।संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले मीडिया को दिये आने बयान में मोदी ने लद्दाख में चीन के साथ चल रहे सीमा गतिरोध के स्पष्ट संदर्भ में कहा कि भातीय सैनिक कठिन पहाड़ी इलाकों में बहादुरी के साथ अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जितनी चर्चा होगी, उतना ही अच्छा है। उन्होंने कहा, ”मुझे विश्वास है कि सभी सांसद सामूहिक रूप से कई विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।” कोविड महामारी का जिक्र करते हुए उन्होंनें कहा कि संसद सत्र विशेष परिस्थितियों में आयोजित किया जा रहा है और सांसदों ने कोविड काल में अपनी ड्यूटी करने का फैसला किया।उन्होंने कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिए सभी उपाय अपनाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि वायरस का टीका मिलने तक कोई ढिलाई नहीं बरती जा सकती है।

Continue Reading

स्वास्थ्य

दिल्ली में कंटेनमेंट जोन के बाहर जिम और योग सेंटर खोलने की अनुमति

Published

on

दिल्ली डिजास्टर मैनजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए) ने रविवार को दिल्ली में कंटेनमेंट जोन के बाहर जिम और योग सेंटर को खोलने की अनुमति दे दी दी। इसके अलावा ट्रायल बेसिस पर साप्ताहिक बाजार लगाने की समयसीमा 30 सितंबर तक बढ़ा दी है। दिल्ली के मुख्य सचिव विजय देव ने जिम और योग सेंटर की अनुमति देने संबंधी आदेश जारी किए। आदेश में जिला अधिकारियों को केन्द्र सरकार की तरफ से जारी एसओपी का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए।

बता दें दिल्ली में साढ़े पांच महीने से जिम और योग सेंटर बंद थे। दिल्ली में करीब 5500 रजिस्ट्रर जिम संचालक है। जिनकी तरफ से जिम और योग सेंटर को केन्द्र सरकार की तरफ से छूट देने के बाद से ही खोलने की मांग की जा रही थी। केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार जिम/योग सेंटर में सभी को 6 फीट की दूरी रखने संबंधी इंतजाम करने होगे। जहां कही पर आउटडोर स्पेश उपलब्ध होने पर मशीनों को रिलोकेट करने की सलाह दी गई है। जिम में प्रवेश और बाहर निकलने के लिए अलग-अलग पाथ वे बनाने को कहा गया है।

सोशल डिस्टेसिंग का पालन कराने के लिए बाहर 6 फीट की दूरी पर मार्किंग बनाने को कहा गया है। कार्ड और ऑनलाइन भुगतान को प्रेरित करने के लिए कहा गया है। वातानुकूलित/वेंटिलेशन के लिए सीपीडब्ल्यूडी के दिशा निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। जिम/योग के लिए फ्लोर एरिया 4 वर्गमीटर प्रति व्यक्ति के अनुसार होगा चाहिए। इसके अनुसार ही स्टॉफ और मेंबर को सोशल डिस्टेंसिंग के अनुसार अनुमति होगी। प्रवेश द्वार पर थर्मल स्क्रीनंग और हेड सेंनिटाइजर रखना होगा। स्पा, स्टीम बॉथ, स्विमिंग पूल पर पाबंदी जारी रहेगी।

देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 48 लाख के पार हो गया। रविवार को 95,371 मरीज मिले। इन्हें मिलाकर 48,36,188 लोग संक्रमित हो चुके हैं। 1,153 और मौतों के साथ मृतक 79,644 हो चुके हैं। अब मृत्युदर 1.64% है। चिंता इस बात की है कि दुनिया में रोज होने वाली कुल मौतों में से अब एक चौथाई अकेले भारत में हो रही हैं।

हालांकि राहत की बात यह है कि 74,460 लोग रविवार को ठीक भी हुए। इन्हें मिलाकर अब तक 37,63,442 लोग ठीक हुए और रिकवरी रेट 77.81% हो गया है। देश में कोरोना वायरस के जीनोम में 5.39 फीसदी म्यूटेशन(रूप में बदलाव) है। इतना ही बदलाव दुनिया के अन्य 72 देशाें में भी है।

यह खुलासा कोरोना में बदलाव का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों ने कही है। वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि कोराेना के रूप में बदलाव का इंसान पर क्या असर होता है, ताकि कोरोना से लड़ाई को कारगर बनाया जा सके। वैज्ञानिकों के मुताबिक ब्रिटेन, अमेरिका और भारत में कोरोना का ज्याेमेट्रिक माध्य क्रमश: 3.59%, 3.27% और 5.39% है।

दिल्ली में कोरोना को संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। रविवार को दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार एक दिन में 56,656 लोगों की जांच की गई। इसमें 4235 नए मामले सामने आए और 29 लोगों की कोरोना के कारण मौत हुई। वहीं, 3403 मरीज ठीक/डिस्चार्ज/माइग्रेट हुए है।

रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में अब तक 2 लाख 18 हजार 304 लोग कोरोना संक्रमित हो चुके है। इनमें से 1 लाख 84 हजार 748 ठीक/माइग्रेट/डिस्चार्ज हो चुके है। कोरोना के कारण अब तक 4744 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी दिल्ली में 28,812 एक्टिव मरीज है। इनमें से 15,946 होम आइसोलेशन में है। दिल्ली में अब तक 21 लाख 39 हजार 432 लोगों की कोरोना सैंपल की जांच की गई। वहीं पिछले 24 घंटे में 56,656 लोगों की जांच की गई।

Continue Reading

स्वास्थ्य

सुप्रीम कोर्ट का आदेश कोरोना मरीजों से मनमाना पैसा नहीं वसूल सकते एम्बुलेंस वाले, सरकार तय करे शुल्क

Published

on

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 संदिग्ध या पुष्टि वाले मामलों को एक जगह से दूसरे स्थान पहुंचाने सहित इसके विभिन्न पहलुओं के बारे में केन्द्र द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना राज्यों के लिये जरूरी है। शीर्ष अदालत ने गैर सरकारी संगठन ‘अर्थ’ की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी करते हुये स्पष्ट किया कि ऐसे मरीजों को एम्बुलेंस में लाने ले जाने का शुल्क राज्यों को निर्धारित करना चाहिए।

इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि कोरोना वायरस से संक्रमित अथवा इससे संक्रमित होने के संदेह वाले मरीजों को ले जाने के लिये एम्बुलेंस मनमाना पैसा वसूल रही हैं। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने केन्द्र की ओर से पेश सालिसीटर जनरल तुषार मेहता के इस कथन का संज्ञान लिया कि केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय पहले ही इस बारे में अपनाये जाने वाले मानक जारी कर चुका है और सभी राज्यों को इन पर अमल करना होगा।

वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से याचिका की सुनवाई करते हुये पीठ ने कहा, ‘‘सभी राज्यों के लिये इस प्रक्रिया का पालन करना और एम्बुलेंस सेवा की क्षमता में वृद्धि करने के लिये आवश्यक कदम उठाना जरूरी है।’’ इस संगठन ने कहा कि केन्द्र द्वारा निर्धारित मानक प्रक्रिया के दायरे मे एम्बुलेंस सेवा द्वारा वसूल किये जाने वाला शुल्क शामिल नहीं है और यह निर्धारित किया जाना चाहिए क्योंकि अस्पताल मनमाना पैसा वसूल कर रहे हैं। पीठ ने कहा, ‘‘राज्य तर्कसंगत शुल्क निर्धारित करेंगे और सभी एम्बुलेंस वाहनों को इसी दर से दिया जायेगा।’’ पीठ ने इसके साथ ही इस याचिका का निस्तारण कर दिया।

सुनवाई के दौरान पीठ ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि कुछ राज्य केन्द्र द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे हैं और मरीज दूसरों की दया पर निर्भर हैं और उनसे एम्बुलेंस के लिये सात हजार रूपए तक और कुछ मामलों में तो 50,000 रूपए तक वसूले गये हैं। इससे पहले, 29 मार्च को केन्द्र सरकार ने विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये थे।

इनमें कोविड-19 के संदिग्ध या संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले मेंडिकल स्टाफ तथा मरीजों को लाने ले जाने जैसे बिन्दु शामिल थे। इस प्रक्रिया का मकसद कोविड-19 के मरीजों को ले जाने वाले एम्बुलेंस के चालकों और तकनीशियनों को आवश्यक निर्देश देना तथा उन्हें समुचित प्रशिक्षित करना भी था।

Continue Reading

Trending