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शिक्षा

करेंगे पॉलिटिक्स करेंगे प्यार, संघ परिवार खबरदार : कन्हैया कुमार

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दिल्ली:- करेंगे पॉलिटिक्स, करेंगे प्यार”। इस नारे से घबराने वाले संघी ही डीयू में कँवलप्रीत कौर पर हमला करने की कोशिश करने जैसा शर्मनाक और कायराना काम कर सकते हैं। आज सत्यवती कॉलेज में जब कँवलप्रीत डिजिटल दुनिया में महिलाओं की सुरक्षा के मसले पर अपनी बात रखने के लिए गईं तब संघी गुंडों ने उन पर हमला करने की कोशिश की। अगर वहाँ प्रोफ़ेसर और दूसरे लोग अच्छी संख्या में नहीं मौजूद होते तो पता नहीं क्या हो जाता।

जब-जब ऐसे हमले किए जाएँगे, तब-तब पिंजरा तोड़ और तमाम दूसरे प्रगतिशील संगठन नारी मुक्ति के नारों के साथ सड़कों पर मिलेंगे। मोहन भागवत का मानना है कि शिक्षित जोड़ों में तलाक ज़्यादा होता है। पत्नी अपने पति की सेवा करे और पति उसका खर्च उठाए, यही सोच है आरएसएस के ‘महान’ चिंतक मोहन भागवत की। जब एबीवीपी यानी आरएसएस का बच्चा संगठन कँवलप्रीत जैसी लड़कियों पर हमला करता है तो वह असल में अपना वैचारिक खोखलापन ही दिखाता है। कल जेएनयू में नजीब से जुड़े पोस्टर साटने वालों को इसी संगठन के लोगों ने धमकाया। पटना यूनिवर्सिटी में यही संगठन बैलट पेपर की धाँधली करता है और यही संगठन रोहित वेमुला जैसे साथियों को कैंपस से झूठ बोलकर बाहर करवाता है। एबीवीपी को सबसे ज़्यादा घबराहट लड़कियों की आज़ादी से होती है। लेकिन अब उनके घबराने का समय आ गया है। न लड़कियाँ पति की सेवा को ज़िंदगी का एकमात्र लक्ष्य मानने वाली हैं न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुप बैठने वाली हैं। वे बार-बार नारे लगाएँगी। इतनी ज़ोर से नारे लगाएँगी कि मानवता के तमाम दुश्मन अपने बिल में घुस जाएँगे।

कँवलप्रीत पर हुए हमले की सिर्फ़ निंदा करने से काम नहीं चलेगा। हमें ऐसे तमाम मोर्चों पर एकजुटता बनानी होगी जहाँ संघी हमलावर होने की कोशिश करते हैं।

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बीट विशेष

बीजेपी-आरएसएस से एक पत्रकार का 20 सवाल

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दिलीप मंडल

बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र में भारत की जनता से कुछ वादे किए थे, जिन्हें पांच साल में पूरा किया जाना था। मोदी ने यह भी कहा था कि जो कहते हैं, वह करते हैं। ये सारे सवाल बीजेपी के 2014 लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र से निकले हैं।

1. देश में 100 नए शहर कब तक बसाए जाएंगे?

2. देश के सबसे पिछड़े 100 जिलों को विकसित जिलों में शामिल होना था, वह काम कब शुरू होगा.

3. राष्ट्रीय वाइ-फाई नेटवर्क बनना था. वह काम कब शुरू होगा?

4. बुलेट ट्रेन की हीरक चतुर्भुज योजना का काम कहां तक आगे बढ़ा है?

5. कृषि उत्पाद के लिए अलग रेल नेटवर्क कब तक बनेगा?

6. हर घर को नल द्वारा पानी की सप्लाई कब तक शुरू होगी?

7. जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए विशेष न्यायालयों का गठन कब होगा?

8. बलात्कार पीड़ितों और एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं के लिए विशेष कोष कब तक बनेगा?

9. वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक सहायता देने के वादे का क्या हुआ?

10. किसानों को उनकी लागत का कम से कम 50% लाभ देने की व्यवस्था होने वाली थी. उसका क्या हुआ?

11. 50 टूरिस्ट सर्किट बनने वाले थे. कब बनेंगे?

12. अदालतों की संख्या दोगुनी करने के लक्ष्य का क्या हुआ?

13. न्यायपालिका में महिलाओं की संख्या बढ़ाने की दिशा में पहला कदम कब उठाया जाएगा?

14. जजों की संख्या दोगुनी करने की दिशा में कितनी प्रगति हुई है?

15. फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को तीन हिस्सों में बांटने की योजना का क्या हुआ?

16. महिला आईटीआई की स्थापना कब होगी?

17. महिलाओं द्वारा संचालित बैंकों की स्थापना होनी थी. ऐसे कितने बैंक बने?

18. हर राज्य में एम्स जैसे संस्थानों की स्थापना होनी थी. कितने राज्यों में इनका काम शुरू हुआ है? बाकी राज्यों में कब काम शुरू होगा?

19. बैंकों के खराब कर्ज यानी एनपीए को कम करने की सरकार के पास क्या योजना है?

20. नदियों को साफ करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के काम में कितनी प्रगति हुई है?

बीऐसे वादों की लिस्ट बहुत लंबी है, और फिर ये तो लिखित वादे हैं। नरेंद्र मोदी ने चुनावी सभाओं में जो वादे किए थे, उनकी तो फिलहाल बात भी नहीं हो रही है।

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शिक्षा

रास्क क्रू:- पहाड़ों पर थिरकते पैर।

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पहाड़ों की जिंदगी जितनी मुश्किल है उतना ही मुश्किल है रोजमर्रा की जिंदगी से हट कर के करियर चुनना। लेकिन रास्क क्रू के इन टेलेंटेड और जिंदादिल बच्चो ने अपने लिए एक अलग ही केरियर चुना है इन्होंने डांस को अपनी जिंदगी बना लिया है।

रोज 8 से 10 घने प्रेक्टिस करने वाले रास्क क्रू के ये बच्चे डांस में अपना करियर तलाश रहे है।

पहाड़ों में डांस फिर इस तरह के किस भी विधा को बहुत तबज्जो नही दी जाती है। और ये सब बातें जानते हूए भी रास्क फैमली अगर डांस में अपना कैरियर बनाने का सपना देख रही है तो ये अपने आप मे बहुत बड़ी बात है।

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शिक्षा

यूपीएससी के बहुजन विरोधी फ़रमान पर भङकी डीयू की प्रोफेसर कौशल पँवार

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एक ओर फ़रमान। पहले ScSt Act को पंगु बनाया और अब फ़रमान दे दिया कि UPSC उतीर्ण अभ्यर्थियों को UPSC द्वारा निर्धारित मेरिट लिस्ट के आधार पर आईएएस,आईपीएस का निर्धारण नहीं होकर प्रशिक्षण मे प्राप्त कृपा के अंक से आईएएस और आईपीएस अधिकारी का अब निर्धारण होगा।यह तो तय ही था क्योंकि दलितों बहुजन समाज उनकी मेरिट में भी बोलती बंद करने लग गए थे इसलिए मजबूरन ये रास्ता अपनाना पड़ा। आपको क्या लगता है कि अगर आपके साथ ट्रेनिंग में दिए गए अंकों में भेदभाव या अन्याय होता है तो आप SCST कमीशन में जाकर न्याय पा सकेंगे। वहाँ भी वही जातिवादी मानसिकता होगी। यह भेदभाव और अन्याय के रास्ते मेरिट को कुचलने की साजिश है । संविधानिका संस्थाओं को इतना कमज़ोर कर दो कि जनता ख़ुद माँग करने लगे कि इन कमीशनों में केवल पैसे की बर्बादी होती है।

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