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बीट विशेष

जो ऊपर हैं वो मग़रूर हैं, जो नीचे हैं वो मजबूर हैं

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Pic Credit: Cartoonstock.com
 हमारी पस्ती का सिर्फ़ एक ही कारण है कि, “जो ऊपर हैं वो मग़रूर हैं, जो नीचे वो मजबूर! ऊपर के लोग अपने से नीचे के लोगों की राय लेना आपनी तौहीन समझते हैं! कोई व्यक्ति अपनी ख़ूबी दिखा ही नहीं सकता अगर आप उसकी अवहेलना ही करते रहेंगे!
उसूल और पाबन्दी, पाबन्दी और सख़्ती, सख्ती और ज़ुल्म के बीच की लाईन बड़ी महीन है जिसकी पहचान होना हुक्मरानों के लिए बहुत ज़रूरी है! एक अच्छे हुक्मरान के लिए यह ज़रूरी है कि उठाए गए सवालों की गहराई में जाएं, ना कि सवाल करने वालों को ही बदनाम करने की कोशिश में लग जाएं!
सीधे पहाड़ की चोटी पर उतरने से पहाड़ पर चढ़ने का तज़र्बा नहीं मिलता! ज़िन्दगी की सीख पहाड़ की चढ़ानो पर मिलती है चोटी पर नहीं! चढानों पर ही तज़ुर्बे मिलते हैं और ज़िन्दगी मँझती है! आप किसी भी सख्स को चोटी पर तो चढ़ा सकते हैं लेकिन अगर उसे चढ़ाई का तज़र्बा नहीं तो यह उसके और आपके मिशन, दोनों के लिए ख़तरनाक होगा!
कोई भी शख़्स अपनी ज़िम्मेवारी में तभी क़ामयाब हो सकता है, अगर वो विश्वासी तथा उत्तरदायी हो और अपने फ़ैसलों के लिए उसे सही हद तक आज़ादी हो! आज़ादी हासिल करने के लिए भी उसी हद तक शिक्षित हो! शिक्षा एक बहुत ही महत्वपूर्ण हथियार है, शिक्षा जितनी ज़्यादा होगा उतनी ही आज़ादी मिल पाना संभव होगा!
लोकतंत्र में आज़ादी पाने के लिए सच्चे रहनुमाओं की ज़रूरत है!और सच्चे रहनुमा वही हो सकते हैं जिनकी जानकारी मुक़म्मल हो! जानकारी तभी मुक़म्मल होगी जब आप शिक्षण तथा प्रशिक्षण को बढ़ावा देंगे! अपने काम को अपना फ़ख्र समझेंगे, जिस काम में यक़ीन हो वही करें वरना दूसरों के विश्वासघात का शिकार बनते रहेंगे!
लेकिन, हमारी सच्चाई यही है कि हम अपने प्रशिक्षित, ईमानदार तथा उपयोगी लोगों को हद दर्जे तक निचोड़ कर छोड़ देते हैं, जिससे वो नाकाम और निकम्मे लोगों से चिढ़ने लगते हैं! अलग-अलग हुक्मरानों से वफ़ा करते-करते हमने अपनी हैसियत खो दी है! मौजूदा हालात ऐसे हो गए हैं कि हमे अपने ही समाज से चिढ़ होने लगी है और हम तकलीफ़ में रहने लगे हैं, लेकिन फिरसे उठ खड़े होने को जी चाहता है जब बेंजामिन फ्रेंक्लिन की यह बात नज़र पे आती है!
“जिन बातों से तकलीफ़ होती है, उनसे ही तालीम भी मिलती है”!
लेखक:शाहनवाज़ भारतीय, शोधकर्ता, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली!
नोट:ऊपर लिखी गई बातों में अधिकांश बातें डॉ. ए. पी. जे अबुल कलाम की हैं जो आज के नेताओं को भी आईना दिखाती हैं अगर वो देखना चाहें तो!

देश

CAA, NRC, NPR जैसे मुद्दों पर AIMIM के Lok Sabha सांसद SYED IMTIYAZ JALEEL के साथ खास बातचीत People’s BEAT Facebook Live पर आज रात 08:30 से 10:00 बजे ।

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र के औरंगाबाद लोकसभा सीट से AIMIM के सांसद जनाब इम्तियाज जलील से People’s BEAT के दर्शक देश में गर्मा रहे सभी राजनीतिक मुद्दों पर सीधा सवाल People’s BEAT के Facebook Live पर कर सकते हैं। जिसका जवाब माननीय सांसद इम्तियाज जलील जरूर देंगे।

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बीट विशेष

कई इमारतें गिरने के बाद भी भजनपुरा के सुभाष मोहल्ले में बिल्डर माफिया धड़ल्ले से कर रहे अवैध फ्लैट निर्माण!

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“सुभाष मोहल्ले की गली नंबर 13 में बिल्डर माफिया द्वारा बनाई जा रही हैं तीन अवैध इमारतें”

चौधरी हैदर अली
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में आए दिन इमारतें गिरने की खबर तो आप सुनते रहते होंगे आज हम आपको बताने जा रहे हैं आखिर इतनी इमारतें गिरने की क्या वजह है! जिसकी वजह से सैकड़ों लोग मलबे के ढेर में दब कर अपनी जान से हाथ धो बैठे!

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर और सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछले 5 सालों मे बिल्डर माफिया 500 से ज्यादा अवैध फ्लैट निर्माण करा चुके हैं जिनकी हालत अब जर्जर हो रही हैं और दर्जनभर इमारत तो मलबे के ढेर में तब्दील हो गई! इमारतें गिरने और जर्जर होने की वजह है बेकार मैटेरियल का इस्तमाल, बिल्डर माफिया चंद पैसों के खातिर लोगों की कीमती जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं, जिसे पूर्वी-दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार नज़र-अंदाज़ कर आंखें मूंदे तमाशा देख रही है!

स्थानीय लोगों का कहना है इस वक़्त बिल्डर माफिया बाबरपुर विधानसभा के वार्ड 48/E में काफी तेजी के साथ फ्लैट निर्माण कर रहे हैं, पिछले 2 साल में 100 से ज्यादा अवैध फ्लैट नुमा इमारतें बिल्डर माफिया बना चुके जिनमें से काफी इमारतें तो जर्जर भी हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं!सुभाष मोहल्ला वार्ड 48 ई की गली नंबर 13 में अब्दुल सलाम मस्जिद के आसपास रहने वाले लोगों ने कहां कि हमने गली में हो रहे तीनों अवैध निर्माणों की शिकायत नगर निगम को दी लेकिन बिल्डर माफियाओं की पहुंच काफी ऊपर तक होने की वजह से नगर निगम अधिकारियों ने सभी शिकायत कर्ताओं के नाम बिल्डर माफिया को बता दिए जिसके बाद बिल्डर माफियाओं ने शिकायत कर्ताओं को दोबारा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी!

People’s Beat ने जनता के आग्रह पर बिल्डर माफिया, स्थानीय पुलिस एवं नगर निगम के कर्मचारियों की शिकायत माननीय प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री जी को दे दी है!

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बीट विशेष

एक हारा हुआ सांसद, जिसने हजारों लोगों को अपने बल पर राहत पहुँचाया।

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बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं , इसका असर आम जन जीवन पर बहुत बुरा पड़ा है यातायात,स्वास्थ्य और खाने से लेकर पीने के पानी की समस्या से आम आदमी को जूझना पड़ रहा है, कुछ ही दिन हुए जब मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चे काल के गाल में समा रहे थे।
यह महज कुछ घटनाएं नहीं है यह पोल खोलती है हमारे तथाकथित विकास की क्या हम इतने गए गुजरे हो गए हैं कि कभी एक राज्य के कुछ जिले आपदा ग्रस्त हुए और सरकारी महकमा हाथ खड़े कर देता है,जिस तरह से सडा हुआ आलू और खाद्य सामग्री बिहार सरकार के द्वारा वितरित की जा रही है वह और ज्यादा रोगी बनायगी लोगों को।

मुख्य सवाल यही है कि लगे हाथ हम डोनेट का रोना रोने लगते है,और इसे उसे कोसने लगते हैं हम इस बात पर विचार करना क्यों जरूरी नहीं समझते कि यह सब आपदा प्रबंधन के लिए बड़े बड़े सरकारी महकमे बने हुए है जो मोटी तनख्वाहों से ऐशो आराम करते हैं..उनका काम इसी समय आता है।

इस बाढ़ का प्रकोप हो या चमकी बुखार का एक पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव खुले हाथों से लोगों की मदद करने को आगे रहे है, वह आज भी जेसीबी और टैक्टर पर बैठकर चलकर राहत सामग्री बांट रहे हैं।

जब यह मधेपुरा सांसद थे उस समय काफी बार इनसे मिलना होता था मंडी हाउस वाले आवास पर उस समय का एक वाकया याद आता है मैं छात्रसंघ का चुनाव लड़ रहा था और मेरी हर सम्भव मदद करने का आश्वासन इन्होंने दिया था, उसी समय कॉलेज में से फोन आता है कि कुछ लोग अपने प्रत्याशी से झगड़ा कर रहे हैं,जब स्तिथि से अवगत कराया तो सांसद जी ने तुरंत ही dsp को फोन कर स्तिथि सम्हालने की हिदायत दी थी।

वैसे मैं किसी का गुणगान करने से बचता हूँ लेकिन मेरे सहयोगियों द्वारा एक बार ही कहने पर यह पूरे जोश के साथ मेरा प्रचार करने भी आये थे कॉलेज में ,वह दौर गुजर गया कुछ यादें रह गयी लेकिन आज फिर एक अनुभव ताजा हो गया।

39 सांसदों में एक हारा हुआ सांसद मोर्चा संभाल रहा है………..और जनता अपना नेता चुनने में अक्सर भूल कर देती है कभी कभी।

अजीत आर्य

 

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