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राजनीति

बिहार NDA में जेडीयू ही होगी सबसे बड़ी पार्टी – त्यागी

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पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज पटना में जेडीयू के बड़े नेताओं के साथ बैठक की. बैठक 2019 के चुनाव को लेकर थी. जेडीयू के नेताओं ने तय किया कि लोकसभा चुनाव में बिहार में जेडीयू की भूमिका बड़े भाई की होगी. बैठक के बाद पत्रकारों से हुई बातचीत में जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा, ”हम लोग एनडीए के महत्वपूर्ण पार्टनर हैं और एनडीए के बैनर के नीचे ही हम लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. जहां जहां समाजवादी आंदोलन की पहचान के केंद्र हैं, छत्तीसगढ़, राजस्थान  और मध्यप्रदेश में  हम  तीनों जगहों पर चुनाव लड़ेंगे. एनडीए को मजबूत करने का काम करेंगे.”

 

सीट बंटवारे को लेकर अभी कोई बातचीत नहीं लेकिन  JDU बड़े भाई की भूमिका में : त्यागी
केसी त्यागी ने कहा, ”हमें नहीं लगता कि सीटों के बंटवाके को लेकर मुझे नहीं लगता कोई मतभेद हैं. नीतीश कुमार बिहार में गटबंधन के सबसे बड़े नेता हैं. उनकी लोकप्रियता का लाभ एनडीए उठाएगा. मुझे विश्वास है कि सीटों के बंटवारे को लेकर कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी. सीटों को लेकर तो अभी चर्चा भी शुरू नहीं हुई है, जब होगी तब बताएंगे.”

केसी त्यागी से जब एबीपी न्यूज़ ने पूछा कि बड़े भाई होने के नाते क्या आप बीजेपी सेज्यादा सीटों पर लड़ेंगे? केसी त्यागी ने कहा, ”हमने ऐसा कोऊई क्लेम नहीं किया, हम गठबंधन की बड़ी पार्टी ये सत्य है.

नीतीश कुमार के आवास पर जेडीयू महासचिव केसी त्यागी, पवन वर्मा की स्ट्रैटजिस्ट प्रशांत किशोर से लंच पर मुलाकात हुई. मुलाकात में यह तय हुआ कि देश की राजनीति में अपनी पहचान बनाने के लिए समाजवादियों को एक करने की मुहिम को आगे बढ़ाया जाए.

 

नितीश ही होंगे पार्टी का चेहरा 
जेडीयू ने बीजेपी के सामने जो शर्त रखी है उसके मुताबिक जेडीयू बड़ी पार्टी है इस लिहाज से बड़े भाई को भूमिका में होगी. इतना ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही देशव्यापी नेता हों पर बिहार में सीएम नीतीश की छवि के सहारे उनके चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा. एनडीए में अभी ये तय नहीं हुआ है कि कितनी सीटों पर कौन पार्टी लड़ेगी? जेडीयू जब पहले बीजेपी के साथ थी तब जेडीयू 25 लोकसभा सीटों पर लड़ती थी. पटना में 7 जून को मोदी सरकार के केंद्र में चार साल होने पर एनडीए की बैठक बुलाई गई है. नीतीश का कार्यक्रम अभी तय नहीं है. बिहार में सभी की नजरें नीतीश कुमार के अलगे कदम पर टिकी हैं.

 

 

राजनीति

शरद पवार को दिए आय कर के नोटिस पर EC ने कहा हमने नही दिए कोई निर्देश

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आयकर विभाग (Income Tax)द्वारा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar), उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे विधायक आदित्य ठाकरे को चुनावी हलफनामे में आय की डिटेल्स के संबंध में नोटिस भेजा गया है। इस पर कल यानी मंगलवार को शरद पवार ने कहा था कि आयकर विभाग ने उन्हें चुनाव आयोग (Election Commission) को जमा किए चुनावी हलफनामों के सिलसिले में नोटिस भेजा है। इस पर चुनाव आयोग ने कहा है कि उनके द्वार कोई निर्देश नहीं दिए गये हैं।
मंगलवार को पवार ने मुंबई में मीडिया से कहा कि आयकर विभाग ने उनसे उनके द्वारा दिये गये कुछ चुनावी हलफनामों के संबंध में स्पष्टीकरण एवं सफाई मांगी है। उन्होंने कहा, कल मुझे नोटिस मिला है और हम खुश हैं कि वह (केंद्र) सभी सदस्यों में से हमें प्यार करता है। आयकर विभाग ने तब नोटिस जारी किया जब उससे चुनाव आयोग ने ऐसा करने को कहा और हम नोटिस का जवाब देंगे।
पवार ने कहा था कि विवादास्पद कृषि बिलों को लेकर राज्यसभा के आठ निलंबित सदस्यों का समर्थन करता हूं। केंद्र सरकार विरोधियों को टैक्स नोटिस के जरिए डराने धमकाने की कोशिश कर रही है। पवार ने प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगाने को लेकर भी केंद्र की आलोचना की है।
शरद पवार ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने के प्रश्न पर कहा कि क्या राष्ट्रपति शासन लगाने की कोई वजह है, क्या राष्ट्रपति शासन कोई मजाक है। महाराष्ट्र विकास अघाड़ी को विधानसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त है इसलिए ऐसा कुछ नहीं होगा।

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राजनीति

बिहार:- डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे हो सकते है एनडीए के उम्मीदवार वीआरएस हुआ मंजूर

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बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडेय की स्वैच्छिक सेवानिवृति (वीआरएस) को बिहार सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें विधानसभा चुनाव में बक्सर या भोजपुर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

पिछले कई दिनों से ये कयास लगाए जा रहे थे कि डीजीपी पांडेय पुलिस की नौकरी छोड़कर राजनीति में नई पारी की शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन इससे पहले ही बिहार सरकार ने उनका वीआरएस मंजूर कर लिया। पांडेय के वीआरएस लेने और चुनाव लड़ने की संभावना को लेकर जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। सूत्रों का दावा है कि वे हर हाल में विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

संजीव कुमार सिंघल को मिला अतिरिक्त प्रभार

गुप्तेश्वर पांडेय को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने के बाद बिहार होमगार्ड और अग्निशाम सेवाएं के महानिदेशक संजीव कुमार सिंघल को बिहार के डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सिंघल 1988 बैच के आईपीएस हैं। चर्चा है कि पांडेय एनडीए में शामिल होकर चुनाव लड़ सकते हैं। पांडेय नीतीश सरकार की शराबबंदी की नीतियों को लेकर भी काफी मुखर रहे हैं।

कहा जाता है कि भाजपा और जदयू दोनों ही पार्टियों से गुप्तेश्वर पांडेय के बेहतर संबंध रहे हैं। पांडेय एक बार भाजपा के टिकट से लोकसभा का चुनाव लड़ने का भी प्रयास कर चुके हैं। हालांकि तब वे चुनाव नहीं लड़ पाए थे। आईपीएस ऑफिसर रहते हुए भी गुप्तेश्वर पांडेय खासी सुर्खियों में रहे हैं।

सिर्फ 5 महीने का बचा था कार्यकाल

गुप्तेश्वर पांडेय 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। 31 जनवरी 2019 को उन्हें बिहार का डीजीपी बनाया गया था। उनका कार्यकाल करीब 5 महीने का ही बचा था। राज्य के पुलिस महानिदेशक के रूप में गुप्तेश्वर पांडेय का कार्यकाल 28 फरवरी 2021 को पूरा होने वाला था। उनके इस कदम से साफ लग रहा है कि गुप्तेश्वर पांडेय ने चुनावी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर ली है।

बेगूसराय और जहानाबाद में अपराधियों का किया था खात्मा

बतौर आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय 33 साल की सर्विस पूरी कर चुके हैं। एसपी से लेकर डीआईजी, आईजी और एडीजी बनने तक के सफर में गुप्तेश्वर पांडेय 26 जिलों में काम कर चुके हैं। 1993-94 में वे बेगूसराय और 1995-96 में जहानाबाद के एसपी रह चुके हैं। दोनों जिलों में अपने कार्यकाल के दौरान अपराधियों का खात्मा कर दिया था। इन्हें कम्यूनिटी पुलिसिंग के लिए भी जाना जाता है।

सुशांत मामले में बेबाक तरीके से रखी थी अपनी बात

मुंबई में हुए एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमय मौत के मामले में पटना में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद डीजीपी के निर्देश पर ही बिहार पुलिस की टीम को जांच के लिए वहां भेजा गया था। इस मामले में गुप्तेश्वर पांडेय ने अपनी बातों को बेबाक तरीके से सबके सामने रखा था। कई बार वो खुलकर मीडिया के सामने आए थे। बिहार के युवाओं के बीच इनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है।

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देश

मैं अपनी जगह पर खड़ा था, चिल्ला रहा था कि मत विभाजन होना चाहिए:- आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह

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कृषि बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ था। अब आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने राज्यसभा सांसद तिरुची सिवा का एक वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है। इस वीडियो में MP तिरुची सिवा न्यूज एजेंसी ‘ANI’ से बातचीत करते हुए कह रहे हैं कि ‘मैं अपनी जगह पर खड़ा था…अपने दोनों हाथ उठा रहा था और कह रहा था कि हम चाहते हैं मत विभाजन…लेकिन सुना तक नहीं गया…ध्यान भी नहीं दिया गया।’

इस वीडियो को ट्वीट करते हुए आम आदमी पार्टी के नेता ने लिखा है कि ‘मोदी सरकार के झूठ का पर्दाफ़ाश @rsprasad जी सुनिये मा.सांसद @tiruchisiva जी को कह रहे हैं मैं अपनी सीट से चिल्ला रहा था वोटिंग माँग रहा था लेकिन उप सभापति ने सुना तक नही आख़िर इतना बड़ा झूठ क्यों बोला सरकार ने?’

यहां आपको बता दें कि दरअसल रविवार को राज्यसभा में कृषि विधेयक पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा मचा था। रविवार की सुबह सदन में विधेयक पर बहस के दौरान हंगामा मच गया। कुछ विपक्षी सांसद अचानक उपसभापति के बिल्कुल करीब पहुंच गए। टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उपसभापति के सामने रुल बुक फाड़ दिया था। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह समेत कई नेता भी राज्यसभा में हंगामा करते नजर आए थे। उपसभापति की माइक भी इस दौरान टूट गई थी।

इस हल्ला-हंगामे के बाद सोमवार को सभापति वेंकैया नायडू ने 8 सांसद को अभद्रता के लिए सदन से निलंबित कर दिया। जिन सांसदों पर कार्रवाई की गई है उनमें तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन सहित आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, कांग्रेस के राजीव साटव, सैयद नासिर हुसैन, रिपुन बोरा और सीपीआई (एम) से केके रागेश और एल्मलारान करीम के नाम हैं। उपसभापति हरिवंश के सामने इन सांसदों के दुर्व्यव्हार के चलते उन पर ये कड़ी कार्रवाई की गई है।

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