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राजनीति

मैं हमेशा ही नितीश कुमार के खिलाफ रहा हूँ: चिराग पासवान

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लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) से राहें जुदा कर ली हैं. हालांकि, वह बीजेपी के साथ हैं और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से नाराज हैं. एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में चिराग पासवान ने कहा कि नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू (JDU) को हर सीट पर हराना हमारा मकसद है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार सहयोगियों की सुनते नहीं हैं. साथ ही पासवान ने यह भी कहा कि  हम JDU के साथ मजबूरी में थे. अब जनता दल यूनाइटेड (JDU) को हर सीट पर हराना ही हमारा मक़सद है.

चिराग पासवान ने रविवार को बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) का हिस्सा बने रहते हुए ही अलग चुनाव लड़ने का ऐलान किया. उन्होंने जेडीयू के खिलाफ सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने, लेकिन बीजेपी (BJP) प्रत्याशियों के खिलाफ नहीं लड़ने की बात कही थी. हालांकि, अब चिराग पासवान ने कहा कि कुछ सीटों पर बीजेपी के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारने की तैयारी है.

एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा, “मैं हमेशा नीतीश कुमार के खिलाफ रहा. नीतीश का पत्ता हम नहीं जनता काटेगी.” गठबंधन को लेकर पूछ गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि गठबंधन में रहने के लिए बीजेपी का कोई दबाव नहीं था. हम पीएम मोदी के प्रति समर्पित हैं. चुनाव नतीजों के बाद जेडीयू के साथ जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर अभी बात नहीं की जानी चाहिए.

पासवान ने दावा किया है कि बिहार चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी की डबल इंजन वाली सरकार बनेगी. उन्होंने कहा कि कुछ सीटों पर BJP के ख़िलाफ़ उम्मीदवार भी उतारने की तैयारी है

NDTV के इंटरव्यू में चिराग पासवान की 10 बड़ी बातें-
1.    नीतीश सहयोगियों की नहीं सुनते
2.    हम JDU के साथ मजबूरी में थे
3.    JDU को हर सीट पर हराना मक़सद
4.    मैं हमेशा नीतीश के ख़िलाफ़ रहा
5.    गठबंधन में रहने के लिए BJP का कोई दबाव नहीं
6.    हम पीएम मोदी के प्रति समर्पित
7.    नतीजे के बाद JDU के साथ की अभी बात नहीं
8.    BJP-LJP की डबल इंजन की सरकार बनेगी
9.    कुछ सीटों पर BJP के ख़िलाफ़ उम्मीदवार भी
10.    नीतीश का पत्ता हम नहीं जनता काटेगी.

(साभार: khabar.ndtv.com)

देश

रामविलास पासवान का हुआ दिल का आपरेशन, शनिवार को बिगड़ी तबियत

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लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के स्वास्थ्य को लेकर अपडेट सामने आया है। बेटे चिराग पासवान (Chirag paswan) ने बताया कि शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद देर रात उनके दिल का ऑपरेशन किया गया है। संभव है कि अगले कुछ हफ्तों में एक और ऑपरेशन करना पड़े। चिराग पासवान ने ट्वीट करके अपने पिता के स्वास्थ्य की जानकारी दी है।

शनिवार शाम अचानक बिगड़ गई रामविलास पासवान की तबीयत

केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान की तबीयत काफी समय से ठीक नहीं चल रही है। उनका इलाज दिल्ली के एक अस्पताल में चल रहा है। इस बीच शनिवार को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने की जानकारी सामने आई। जिसके बाद चिराग पासवान तुरंत ही अपने पिता को देखने के लिए अस्पताल पहुंचे। इस बीच बिहार चुनाव को लेकर शनिवार को एलजेपी संसदीय बोर्ड की अहम बैठक भी थी, जिसे टाल दिया गया।

 

चिराग पासवान बोले- कुछ हफ्तों में एक और सर्जरी संभव

इसके बाद एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ने रविवार सुबह करीब 5 बजे एक ट्वीट किया, इसमें उन्होंने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की तबीयत के बारे में बताया। उन्होंने लिखा, ‘पिछले कई दिनों से पापा का अस्पताल में इलाज चल रहा है। कल शाम अचानक उत्पन हुई परिस्थितियों की वजह से देर रात उनके दिल का ऑपरेशन करना पड़ा। जरूरत पड़ने पर सम्भवतः कुछ हफ्तों बाद एक और ऑपरेशन करना पड़े। संकट की इस घड़ी में मेरे और मेरे परिवार के साथ खड़े होने के लिए आप सभी का धन्यवाद।’

दिल्ली के अस्पताल में चल रहा पासवान का इलाज

रामविलास पासवान की बीमारी को लेकर बेटे चिराग ने पहले भी अपनी बात रखी थी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को एक बेहद भावपूर्ण चिट्ठी भी लिखी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि आज मेरे पिता को जब मेरी जरूरत है तो मुझे उनके साथ रहना चाहिए नहीं तो मैं अपने आपको माफ नहीं कर पाऊंगा। दूसरी ओर बिहार चुनाव को लेकर भी चिराग पासवान को कई जरूरी फैसले लेने हैं। खास तौर से एनडीए में रहने को लेकर एलजेपी का क्या रुख है इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि चिराग पासवान ने शनिवार को एक ट्वीट के जरिए अपनी आगे की रणनीति की ओर इशारा जरूर कर दिया।

बिहार चुनाव में 143 सीट पर उम्मीदवारी की तैयारी में LJP

एलजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चिराग पासवान ने शनिवार को अपने ट्वीट से ये संकेत दे दिए एलजेपी बिहार में 143 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है। चिराग पासवान ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी तस्वीर शेयर की है। जिसके साथ उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के सभी उम्मीदवार प्रधानमंत्री के हाथ मजबूत करेंगे। साथ ही ये भी साफ कर दिया कि उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पार्टी जेडीयू से शिकायत है। उन्होंने मोदी के संग अपनी एक तस्वीर के साथ ट्विटर पर एक संदेश पोस्ट किया, ‘मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि बिहार को फर्स्ट बनाने के लिए और बिहार की खोई अस्मिता को लौटाने के लिए आप सभी मुझे अपना आशीर्वाद देंगे, ताकि मेरे सभी प्रत्याशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों को मजबूत कर सकें।’

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मध्यप्रदेश उपचुनाव:- सिंधिया समर्थक होंगे आमने सामने

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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के 28 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर रण सज चुका है. कांग्रेस के 24 तो बीजेपी (BJP) के अनौपचारिक तरीके से 25 उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं. लेकिन सबसे दिलचस्प मुकाबला ग्वालियर चंबल (Gwalior Chambal) की 16 विधानसभा सीट पर होने वाला है. मुकाबला इस लिहाज से भी दिलचस्प होगा कि इस बार आठ विधानसभा सीटों पर सिंधिया समर्थक आमने-सामने होंगे. दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने ग्वालियर चंबल की जिन सीटों पर अब तक अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है, उनमें से आठ चेहरे ऐसे हैं जो कभी सिंधिया (Scindia) के कट्टर समर्थक थे. लेकिन सिंधिया के दल बदलने के बाद सिंधिया के यह समर्थक कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में नहीं गए, जिसके इनाम पर कमलनाथ ने आठ सीटों पर सिंधिया समर्थक को ही कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित कर दिया है.

कांग्रेस में जिन 8 सीटों पर सिंधिया समर्थकों को चुनाव मैदान में उतारा है, उनमें दिमनी से रविंद्र सिंह तोमर, अंबाह से सत्य प्रकाश सखवार, ग्वालियर से सुनील शर्मा, डबरा से सुरेश राजे, अशोकनगर से आशा दोहरे, जोरा से पंकज उपाध्याय, पोहरी से हरीवल्लभ शुक्ला और मुंगावली से कन्हैया राम लोधी शामिल हैं.

बीजेपी ने कसा तंज

वहीं, ग्वालियर चंबल की 8 सीटों पर सिंधिया समर्थकों को चुनाव मैदान में उतारने के कांग्रेस के ऐलान पर बीजेपी ने तंज कसा है. प्रदेश के कैबिनेट मिनिस्टर अरविंद सिंह भदोरिया ने कहा है कि कांग्रेस के पास उपचुनाव में उतारने के लिए उम्मीदवार नहीं है और यही कारण है कि इधर-उधर से तलाश कर कांग्रेस प्रत्याशी तय कर रही है. वहीं, आठ सीटों पर सिंधिया समर्थकों को चुनाव मैदान में उतारने पर कांग्रेस ने कहा है कि जिनका डीएनए कांग्रेस का है, उन्हे ही कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित किया गया है.

 

सिंधिया का साथ नहीं देने का फैसला किया

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि सिंधिया ने दल बदल कर बीजेपी का भगवा रंग ओड़ा है, लेकिन कांग्रेस की मूल विचारधारा से जुड़े लोगों ने सिंधिया का साथ नहीं देने का फैसला किया और मूल कांग्रेसियों को ही उपचुनाव में पार्टी ने टिकट देने का काम किया है. बहरहाल, इस बार का उपचुनाव बेहद दिलचस्प रहने वाला है. कभी ग्वालियर, चंबल इलाके में सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस का झंडा उठाने वाले चेहरे अब सिंधिया के खिलाफ उपचुनाव में मैदान में हैं. यानी कि ग्वालियर चंबल की 8 सीटों पर सिंधिया के पुराने कांग्रेसी समर्थक और सिंधिया के मौजूदा भाजपाई समर्थकों के बीच मुकाबला होगा.

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बिहार चुनाव:- नामांकन में बचे है मात्र तीन दिन एनडीए- महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर घमासान

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बिहार विधानसभा चुनाव का औपचारिक ऐलान हो गया है, लेकिन अभी तक एनडीए और महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन सकी है. एनडीए और महागठबंधन में सीटों को लेकर खींचतान अभी भी कायम है जबकि पहले चरण की 71 सीटों के लिए नामांकन भी एक अक्टूबर से शुरू होना है. ऐसे में टिकट के दावेदारों में काफी बेचैनी है. खासकर वैसी सीटों पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जहां एनडीए या महागठबंधन के घटक दलों के विधायक नहीं हैं.

चिराग पासवान के तेवर सख्त

नीतीश कुमार की अगुवाई वाले एनडीए में जेडीयू, बीजेपी, एलजेपी और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा शामिल हैं, लेकिन अभी तक सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं हो सका है. ऐसे में एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ने सीट बंटवारे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखा है. साथ ही उन्होंने इस संबंध में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और पीएम नरेंद्र मोदी से अब तक हुए पत्राचार की कॉपी भी भेजी है.

एनडीए में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला

एनडीए में जेडीयू बिहार में बड़े भाई की भूमिका में रहना चाहती है, जिसके तहत वो बीजेपी से ज्यादा सीटों पर दावेदारी कर रही है, लेकिन बीजेपी बराबर की भूमिका चाहती है. ऐसे में पहला फॉर्मूला ये बनाया जा रहा है कि सूबे की 243 सीटों में से बीजेपी और जेडीयू 100-100 सीटों पर चुनाव लड़े और बाकी बची 43 सीटें में से सहयोगी दल एलजेपी और जीतनराम मांझी की दी जाएं. वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव की तर्ज पर एनडीए में बीजेपी और जेडीयू के बीच सीट बंटवारे को लेकर 50:50 फॉर्मूले पर सहमति बनाए की बात हो रही है.

बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं. लोकसभा फॉर्मूले के तहत जेडीयू को 122 और बीजेपी को 121 सीट मिल सकती हैं. इसके बाद बीजेपी अपने कोटे से एलजेपी को तो जेडीयू अपने कोटे से जीतनराम मांझी को सीट देने के फॉर्मूले को अपना सकते हैं. हालांकि, इस फॉर्मूल के तहत बीजेपी की अपनी सीटें कम हो सकती हैं, क्योंकि एलजेपी को कम से कम 25 से 30 सीटें देनी ही होंगी. वहीं, माना जा रहा है कि नीतीश अपने कोटे से जीतन राम मांझी की पार्टी को 6-8 सीट दे सकते हैं. नीतीश अगर मांझी की पार्टी को इससे ज्यादा सीटें देते हैं तो इसका मतलब होगा कि जेडीयू अपने कुछ उम्मीदवारों को हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के टिकट पर चुनाव लड़ा सकती है.

महागठबंधन में भी महाभारत

वहीं, बिहार में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के महागठबंधन में भी सीट बंटवारे को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है. इसके चलते जीतनराम मांझी पहले महागठबंधन से नाता तोड़कर अलग हो चुके हैं और अब उपेंद्र कुशवाहा ने भी बगावती तेवर अख्तियार कर लिए हैं. ऐसे में महागठबंधन के दलों की निगाहें अब उपेंद्र कुशवाहा के अगले कदम पर हैं कि वो क्या कदम उठाते हैं. वहीं, इस बार महागठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस के अलावा आरएलएसपी व वामपंथी दल भी शामिल हैं. ऐसे में सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान जारी है.

महागठबंधन में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला

आरजेडी इस बार बिहार में डेढ़ सौ सीटों पर चुनाव लड़ने का दावेदारी कर रही है. वहीं, कांग्रेस ने भी करीब  65 से 70 के बीच सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना रखा है. ऐसे में सहयोगी दलों के लिए बहुत ज्यादा सीटें नहीं बच रही हैं, जिसके चलते उनकी नाराजगी बढ़ रही है. महागठबंधन में बिहार की कुल 243 सीटों में से अगर आरजेडी 150 और कांग्रेस 65 सीटें लेती हैं तो महज 28 सीटें ही सहयोगी दलों के लिए बचती हैं. ऐसे में 20 सीटें वामपंथी दलों को और उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन का हिस्सा रहते हैं तो उनके हिस्से आठ से दस के करीब सीटें आ सकती हैं, लेकिन इस पर वो राजी नहीं हैं.

ऐसे में माना जा रहा है कि आरजेडी और कांग्रेस को अपने-अपने कोटे की सीटों में समझौता करना पड़ सकता है. इसके तहत आरजेडी को 140 से 145 सीटें मिल सकती हैं तो कांग्रेस को 60 से 65 सीटों के बीच संतोष करना पड़ सकता है. इस तरह से करीब 38 सीटें सहयोगी दल को दी जा सकती हैं, जिनमें से 23 सीटें वामपंथी दलों को और करीब 15 सीटें आरएलएसपी को मिल सकती हैं. इस तरह से सीट बंटवारे को लेकर आपसी सहमति को सकती है.

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