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बीट विशेष

डॉक्टर कफील की मेहनत बताती है कि अगर हम सचमुच संजीदा होते तो कई बच्चों की जान बच सकती थी।

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बिहार: मुजफ्फरनगर त्रासदी देश मे हर एक सजीव और संवेदनशील व्यक्ति के आंखों में आंसू ला सकता है। चश्मदीद की मानें तो अस्पताल का मंजर भयावह है, चारो तरफ मौत का मंजर, बेबस मा बाप की चीख पुकार और अस्पताल प्रबंधन को मोह चिढ़ाती वहां गंदगी का अम्बार किसी के मन को विचलित कर सकता है।

ऐसे माहौल जब वहां का प्रशासन बेबस और डॉक्टर लाचार नज़र आ रहे थे तभी वहाँ आत्मविश्वास से लबरेज एक इंसान फरिश्ते की तरह वहां पहुँचा और दिन रात अपने मेहनत से सैकड़ों बच्चों और उनके मा बाप को इस भयानक बीमारी से न सिर्फ बचाने के मुहीम में जुट गया बल्कि लोगों से चंद मांग कर उनके लिए दवाई और डॉक्टरों की व्यवस्था की, जिसका नाम है डॉक्टर कफील खान।

जी हां हम उसी डॉक्टर कफील की बात कर रहे हैं जिनका नाम सब से पहले गोरखपुर के ऑक्सीजन हादसे के बाद मीडिया में आया, वही डॉक्टर कफील जिसने वहां भी भगवान बन कर अपने बूते ऑक्सीजन की व्यवस्था कर कई घर के चिराग को बुझने से बचाया, वही डॉक्टर कफील जिसे राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित करने के वजाय सबके सामने जलील किया गया,वही डॉक्टर कफील जिन्हें अपने नेक काम के बजाय झुठे आरोप में फ़सा कर उन्हें जेल भेज गया।

पर कहते हैं ना जो इंसान दिल से जितना नेक होता है उसकी सच के लिए लड़ने की हिम्मत पहाड़ से ज्यादा मजबूत भी होता है और यही साबित किया डॉक्टर कफील ने, अपने हक और अधिकार के लिए वो लाडे और सर्वोच्च न्यायालय तक गए और कानून ने इनके पक्ष में फैसला दिया।

मुजफ्फरपुर त्रासदी में जिस तरह दिन रात मुफ्त कैम्प लगा कर डॉक्टर कफील बच्चों का इलाज कर रहे है ये बताता है कि जहां एक तरफ डॉक्टर के ऊपर लोगों का भरोसा काम हो रहा है वहां ऐसे भी लोग है जो दिन रात गर्मी और बारिश की परवाह किये बिना जान सेवा में लगे हुए हैं।

आज डॉक्टर कफील ने प्रेस रिलीज के जरिये एक बार फिर अपनी बात अवाम तक पहुचने की कोशिश कर रहे हैं जो इस प्रकार है।

Press release
Muzaffarpur chamki bimari encephalitis fact finding report dated 23/06/19

चमकी बीमारी से बिहार में हुईं २०० से ज़्यादा मौतों से पूरा भारत व्यथित है चमकी बीमारी के कारक का पता नहीं हो पाया है पर इसके लक्षण उत्तर प्रदेश के मस्तिष्क ज्वर जैसे ही हैं अंतर केवल इतना है की उत्तर प्रदेश में मस्तिष्क ज्वर का प्रकोप वर्षा होने पर पाया गया है और बिहार का चमकी बीमारी अत्यधिक गर्मी में घातक होती है .

बिहार का मुआयना करने के बाद कुछ बातें चमकी बीमारी के बारे में समझ आयीं
१-केवल लीची खाने से ही चमकी बीमारी नहीं हो रही और भी कारण हैं क्योंकि बहुत से माता पिता ने बताया कि उन्होंने बच्चें को लीची नहीं खिलायें थी
२- अगर जल्द से जल्द इलाज स्टार्ट करा दिया जाए तो चमकी बीमारी का इलाज संभव है
३- बीमारी से ज़्यादा सरकारी अव्यवस्था बच्चों की मृत्यु का कारण है .श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज सरकारी दुर्व्यवस्था का उदाहरण है डॉक्टर /नर्स की कमी है ,ज़रूरी दवाई की क़िल्लत है ,एक एक बेड पर ३-३ मरीज़ों का इलाज चल रहा है ,गंदगी का अंबार है .
बिहार की प्राथमिक चिकित्सा बेहद ख़राब हालत में है .
४- जागरूकता अभियान ज़ोर शॉर से चलाने की आवश्यकता है

डॉक्टर कफ़ील खान मिशन स्माइल फ़ाउंडेशंज़ तथा इंसाफ़ मंच के सौजन्य से पिछले एक हफ़्ते में मुज़फ़्फ़रपुर बिहार में ७ चमकी बीमारी जाँच शिविर में क़रीब १५०० बच्चों की जाँच कर और उन्हें दवाइयाँ मुफ़्त दी गयी
पेरेंट्स को चमकी बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीक़ों से अवगत कराया गया
यह जाँच शिविर दमोदरपुर ,चैनपुर बाँगर , चकिया पूर्वी चंपारन , नीम चौक ,नथुनी चौक सुमेरा, मेकरी मुर्रा टोला , अली नेउरा में लगाया गया

7 गाँवों में चौपाल लगा करा चमकी बीमारी के बारे में जानकारी दी गयी सभी परिवारों को बुखार नापने का डिजिटल थर्मामीटर और ORS भी निशुल्क दिया गया .
२२/०६/१९ के कैम्प मे कन्हैया कुमार जी ने उपस्थित होकर अपना योगदान देने का वादा किया |

डाक्टरो की टीम में डाक्टर कफील खान के आलावा डा एन आजम,डाo आशीष गुप्ता ,डॉक्टर अरशद अंजुम शामिल थे .इंसाफ मंच बिहार के उपाध्यक्ष जफर आज़म, कामरान रहमानी, दानिश, धरामदेव यादव ,चंदन पासवान ,ऐजाज,सोनू तिवारी तथा पिंटू गुप्ता का भी योगदान सराहनीय रहा

चमकी बुखार से बच्चो को बचाने के लिऐ बच्चो को
1- धुप से दुर रखे।
2-अधिक से अधिक पानी का सेवन कराऐ।
3-हलका साधारण खाना खिलाऐ ,बच्चो को जंक फुड से दुर रखे।
4-खाली पेट लिची ना खिलाऐ।
5-रात को खाने के बाद थोरा मिठा ज़रूर खिलाऐ।
6-घर के आसपास पानी जमा न होने दे ।किटनाशक दवाओ का छिरकाओ करे।
7-रात को सोते समय मछर दानी का ईस्तेमाल करे ।
8- पुरे बदन का कपड़ा पेहनाऐ।
9-सड़े गले फल का सेवन ना कराऐ ।ताज़ा फल ही खीलाऐ।
10- बच्चो के शरीर मे पानी की कमी ना होने दें।अधिक से अधिक बच्चो को पानी पीलाऐ ।

लक्षण :-

बच्चो को –
1-अचानक तेज बुखार आना।
2-हाथ पेर मे अकड़ आना/टाईट हो जाना ।
3-बेहोश हो जाना।
4-बच्चो के शरीर का चमकना/शरिर का कांपना ।
5-शरीर पे चकत्ता निकलना ।
6-गुलकोज़ का शरीर मे कम हो जाना ।
7-शुगर कम हो जाना। ईत्यादि

मुख्यतः तीन विन्दु उभरकर सामने आए जिसपर तत्काल पहलकदमी की आवश्यकता है.

1. *आईसीयू में बेड संख्या 200 करना:* अस्पताल में बच्चों का 14 बेड का पीआईसीयू था, जिसे अभी बढा़कर 50 किया गया है. लेकिन अभी भी अस्पतामल में 96 बच्चे भर्ती हैं. इसका मतलब यह है कि एक बेड पर दो बच्चे हैं. सुपटेंडेंट ने कहा कि यदि इसे बढ़ाकर 200 बेड कर दिया जाए तो सभी बच्चों को राहत मिल सकती है. माले राज्य सचिव ने कहा कि 200 बेड वाले आईसीयू करने में आखिर सरकार का क्या परेशानी हो रही है? इसे तत्काल किया जाना चाहिए.

2. *प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डाॅक्टर, दवा व एंबुलेस:* दूसरे सुझाव में डाॅक्टरों की टीम ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्रों की स्थिति ठीक किया जाना चाहिए और वहां बड़ी संख्या में बच्चे के डाॅक्टर बहाल किए जाने चाहिए. यदि 3 घंटे के भीतर बच्चे स्वास्थ्य केंद्र पर पहूंच जाते हैं, तो उन्हें बचाना ज्यादा आसान हो जाएगा. केंद्रों पर दवा व एंबुलेस का भी प्रबंध होना चाहिए.

3. *साफ पानी, ग्लूकोज लेवल मेंटेन रखना:*
तीसरे सुझाव में कहा कि बीमारी के स्रोत पर हमला किया जाना चाहिए. सरकार को इस बात का उपाय करना चाहिए कि दवा का लगातार छिड़काव होता रहे और साफ पानी की व्यवस्था हो. यदि बच्चों का ग्लूकोज लेवल मेंटन कर लिया जाए और इसके लिए भोजन की उचित व्यवस्था हो तो इस महामारी पर रोक लगाई जा सकती है.

कफील खान ने ने आगे कहा कि अब तक 700 इस बीमारी से ग्रसित हो चुके है और 200 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. मृत्यु की दर 25 प्रतिशत है.

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कई इमारतें गिरने के बाद भी भजनपुरा के सुभाष मोहल्ले में बिल्डर माफिया धड़ल्ले से कर रहे अवैध फ्लैट निर्माण!

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“सुभाष मोहल्ले की गली नंबर 13 में बिल्डर माफिया द्वारा बनाई जा रही हैं तीन अवैध इमारतें”

चौधरी हैदर अली
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में आए दिन इमारतें गिरने की खबर तो आप सुनते रहते होंगे आज हम आपको बताने जा रहे हैं आखिर इतनी इमारतें गिरने की क्या वजह है! जिसकी वजह से सैकड़ों लोग मलबे के ढेर में दब कर अपनी जान से हाथ धो बैठे!

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर और सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछले 5 सालों मे बिल्डर माफिया 500 से ज्यादा अवैध फ्लैट निर्माण करा चुके हैं जिनकी हालत अब जर्जर हो रही हैं और दर्जनभर इमारत तो मलबे के ढेर में तब्दील हो गई! इमारतें गिरने और जर्जर होने की वजह है बेकार मैटेरियल का इस्तमाल, बिल्डर माफिया चंद पैसों के खातिर लोगों की कीमती जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं, जिसे पूर्वी-दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार नज़र-अंदाज़ कर आंखें मूंदे तमाशा देख रही है!

स्थानीय लोगों का कहना है इस वक़्त बिल्डर माफिया बाबरपुर विधानसभा के वार्ड 48/E में काफी तेजी के साथ फ्लैट निर्माण कर रहे हैं, पिछले 2 साल में 100 से ज्यादा अवैध फ्लैट नुमा इमारतें बिल्डर माफिया बना चुके जिनमें से काफी इमारतें तो जर्जर भी हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं!सुभाष मोहल्ला वार्ड 48 ई की गली नंबर 13 में अब्दुल सलाम मस्जिद के आसपास रहने वाले लोगों ने कहां कि हमने गली में हो रहे तीनों अवैध निर्माणों की शिकायत नगर निगम को दी लेकिन बिल्डर माफियाओं की पहुंच काफी ऊपर तक होने की वजह से नगर निगम अधिकारियों ने सभी शिकायत कर्ताओं के नाम बिल्डर माफिया को बता दिए जिसके बाद बिल्डर माफियाओं ने शिकायत कर्ताओं को दोबारा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी!

People’s Beat ने जनता के आग्रह पर बिल्डर माफिया, स्थानीय पुलिस एवं नगर निगम के कर्मचारियों की शिकायत माननीय प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री जी को दे दी है!

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एक हारा हुआ सांसद, जिसने हजारों लोगों को अपने बल पर राहत पहुँचाया।

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बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं , इसका असर आम जन जीवन पर बहुत बुरा पड़ा है यातायात,स्वास्थ्य और खाने से लेकर पीने के पानी की समस्या से आम आदमी को जूझना पड़ रहा है, कुछ ही दिन हुए जब मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चे काल के गाल में समा रहे थे।
यह महज कुछ घटनाएं नहीं है यह पोल खोलती है हमारे तथाकथित विकास की क्या हम इतने गए गुजरे हो गए हैं कि कभी एक राज्य के कुछ जिले आपदा ग्रस्त हुए और सरकारी महकमा हाथ खड़े कर देता है,जिस तरह से सडा हुआ आलू और खाद्य सामग्री बिहार सरकार के द्वारा वितरित की जा रही है वह और ज्यादा रोगी बनायगी लोगों को।

मुख्य सवाल यही है कि लगे हाथ हम डोनेट का रोना रोने लगते है,और इसे उसे कोसने लगते हैं हम इस बात पर विचार करना क्यों जरूरी नहीं समझते कि यह सब आपदा प्रबंधन के लिए बड़े बड़े सरकारी महकमे बने हुए है जो मोटी तनख्वाहों से ऐशो आराम करते हैं..उनका काम इसी समय आता है।

इस बाढ़ का प्रकोप हो या चमकी बुखार का एक पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव खुले हाथों से लोगों की मदद करने को आगे रहे है, वह आज भी जेसीबी और टैक्टर पर बैठकर चलकर राहत सामग्री बांट रहे हैं।

जब यह मधेपुरा सांसद थे उस समय काफी बार इनसे मिलना होता था मंडी हाउस वाले आवास पर उस समय का एक वाकया याद आता है मैं छात्रसंघ का चुनाव लड़ रहा था और मेरी हर सम्भव मदद करने का आश्वासन इन्होंने दिया था, उसी समय कॉलेज में से फोन आता है कि कुछ लोग अपने प्रत्याशी से झगड़ा कर रहे हैं,जब स्तिथि से अवगत कराया तो सांसद जी ने तुरंत ही dsp को फोन कर स्तिथि सम्हालने की हिदायत दी थी।

वैसे मैं किसी का गुणगान करने से बचता हूँ लेकिन मेरे सहयोगियों द्वारा एक बार ही कहने पर यह पूरे जोश के साथ मेरा प्रचार करने भी आये थे कॉलेज में ,वह दौर गुजर गया कुछ यादें रह गयी लेकिन आज फिर एक अनुभव ताजा हो गया।

39 सांसदों में एक हारा हुआ सांसद मोर्चा संभाल रहा है………..और जनता अपना नेता चुनने में अक्सर भूल कर देती है कभी कभी।

अजीत आर्य

 

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पूर्व गृह मंत्री व् अनुभवी सीपीआई के नेता इन्द्रजीत गुप्ता का जन्म शताब्दी समारोह दिल्ली में मनाया गया

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इन्द्रजीत गुप्ता 1919-2001.

भारत के वो नेता जो सबसे अधिक 11 बार जीते लोकसभा चुनाव,  

CPI और AITUC के महासचिव रह चुके.

इंद्रजीत गुप्ता भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (CPI) के कुशल व् प्रखर राजनेता रहे हैं. उन्होंने 1960 में पहली बार हुए उपचुनावों से भारतीय राजनीति में कदम रखा और जीतकर लोकसभा में पहुंचे. साल 1919 में जन्मे इन्द्रजीत गुप्ता का 2001 में जब निधन हुआ तब भी वे लोकसभा के सदस्य थे. आज 21 जुलाई 2019 को इनका जन्मशताब्दी समारोह constitution club दिल्ली में मनाया गया जिसमे CPI(M) के महासचिव सीताराम येचुरी व् पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने शिरकत की. इन्द्रजीत गुप्ता को याद करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा “आज का यह अवसर लोकतंत्र को समृद्ध करने में इन्द्रजीत गुप्ता के योगदान को प्रतिबिंबित करता है. सीपीआई के ये पूर्व महासचिव जीवन भर मजदूर आन्दोलन के लिए समर्पित रहे.”

ये अनुभवी नेता बीच के 3 साल(1977 से 1980) को छोड़ कर ताउम्र सांसद रहे. उन्होंने शुरुआती चुनाव (1962 से 1967) कलकत्ता साउ‌थ वेस्ट इसके बाद (1967 से 1977) अलीपुर, (1980 से 1989) बशीरहाट और (1989-2001) मिदनापुर से चुनाव जीते. वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और All India Trade Union (AITUC) के महासचिव भी रह चुके हैं.

इन्द्रजीत गुप्ता एचडी देवगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल के शासनकाल में देश के गृहमंत्री रहे.  सादगी की मिशाल माने जाने वाले सांसद इन्द्रजीत गुप्ता गृह मंत्री बनने के बाद भी दिल्ली की वेस्टर्न कोर्ट में आवंटित आवास में रहते थे जहाँ आम तौर पर रसूख वाले सांसद रहने से कतराते हैं. कभी उनके निवास के ठीक बगल में रहने वाले वरिष्ठ राजनेता क्रांति प्रकाश बताते हैं, “देश के गृहमंत्री होने के बावजूद उन्होंने वेस्टर्न कोर्ट को नहीं छोड़ा. वे अपने दो-रूम के क्वॉर्टर से अपनी गतिविधियों को अंजाम देते थे. वे असल में सादगी के मिसाल थे.”

भारतीय जनता पार्टी के प्रखर नेता हुकुमदेव नारायण यादव ने संसद में बोलते हुए एक बार कहा था, ”वे एक कम्यूनिस्ट नेता थे. लेकिन इससे बड़ी बात यह थी कि वे एक महान सांसद थे.”

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