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5 महीने बाद दिल्ली मेट्रो फिर से चलने को तैयार, सिर्फ एक रुट से होगी शुरुवात

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नई दिल्ली: दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) 169 दिन के बाद सोमवार सात सितंबर से फिर शुरू होगी. रविवार 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के लिए बंद की गई मेट्रो अब तक के कोरोना वायरस (Coronavirus) काल में बंद रहने के बाद अब शुरू होगी. सोमवार और मंगलवार को दिल्ली मेट्रो की केवल यलो लाइन शुरू होगी जो समयपुर बादली से लेकर गुरुग्राम के हुडा सिटी सेंटर के रूट पर चलती है. शुरू में सुबह चार घंटे, यानी 7:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक और शाम को चार घंटे, यानी 4:00 बजे से लेकर 8:00 बजे तक मेट्रो चलेगी. धीरे-धीरे अन्य मेट्रो लाइनें भी शुरू की जाएंगी और 12 सितंबर से सभी लाइनों पर मेट्रो ट्रेनें सुबह 6:00 बजे से लेकर रात के 11:00 बजे तक चलनी शुरू हो जाएंगी.

 

मेट्रो ट्रेन की फ्रीक्वेंसी शुरुआत में लगभग 2:45 मिनट से लेकर 5:30 मिनट तक की रहेगी. यानी एक ट्रेन जाने के बाद दूसरी ट्रेन आने में इतना समय लगेगा. एक ट्रिप पूरा करने के बाद मेट्रो ट्रेन को सैनिटाइज किया जाएगा जिसकी वजह से समय लगना लाजमी है.

मेट्रो ट्रेन में यात्रा के लिए मास्क पहनना अनिवार्य होगा और दूरी का भी पूरा ख्याल रखना होगा. दिल्ली मेट्रो ने यात्रियों को सलाह दी है कि कम से कम सामान के साथ यात्रा करें. सुरक्षा की दृष्टि से जेब में 30 मिलीलीटर से ज्यादा सैनिटाइजर की इजाजत नहीं होगी.

यात्रा के लिए टोकन जारी नहीं किए जाएंगे. यात्री केवल स्मार्ट कार्ड के जरिए यात्रा कर पाएंगे. स्मार्ट कार्ड को अगर रिचार्ज कराना हो तो ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से करा सकते हैं. नगद भुगतान के जरिए स्मार्ट कार्ड रिचार्ज नहीं होगा. दिल्ली मेट्रो की सेवा बंद होने से पहले करीब 60 लाख यात्री रोजाना मेट्रो में सफर करते थे जिसमें से करीब 70% स्मार्ट कार्ड के जरिए यात्रा करते थे.

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कृषि सुधार बिल के विरोध में और किसानों के समर्थन में सुदूर पहाड़ों पर भी लोग उतरे सड़कों पर

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आज अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में विभिन्न जनवादी संगठनों ने गोपेश्वर के शहर में प्रदर्शन का आयोजन किया विभिन्न जनवादी संगठनों के कार्यकर्ता जिला डाकघर पर एकत्रित हुए जहां से जुलूस की शक्ल में मुख्य बाजार होते हुए मंदिर तक और मंदिर से बस स्टैंड गोपेश्वर में जुलूस एक जनसभा में तब्दील हो गया जहां पर किसान नेताओं ने मोदी सरकार द्वारा सभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर कृषि क्षेत्र से जुड़े किसान विरोधी जन विरोधी 3 कानूनों की प्रतियों का दहन किया उसके बाद सभा को संबोधित करने वालों में किसान सभा के जिला सचिव ज्ञानेंद्र खंतवाल जिला मंत्री पुरुषोत्तम सती किसान सभा के उप मंत्री बस्ती लाल जी कुंवर राम नौजवान सभा के कमलेश गॉड एसएफआई के ज्योति बिष्ट महिला समिति गीता बिष्ट किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष भोपाल सिंह रावत ने अपनी बात रखते हुए सभा का समापन किया सभा का संचालन सीटू जिला अध्यक्ष मदन मिश्रा ने किया। सभी वक्ताओं ने मोदी सरकार की कृषि से जुड़े इन तीनों कानून को किसान विरोधी और जनविरोधी बताया वक्ताओं का कहना था कि केंद्र सरकार ने बिना किसी विचार विमर्श के देशी-विदेशी कारपोरेट के हितों को संरक्षण देते हुए किसानों की खेती किसानी कॉर्पोरेट के हवाले गिरवी रख दिया है। इससे किसानों की फसलों की खरीद कॉर्पोरेट के रहमों करम पर रह जाएगी और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी कोई चीज और सरकार द्वारा कभी भी घोषित नहीं की जाएगी सरकारी खरीद न होने से जो सरकार के अन्न भंडार हैं वह पूरी तरह से प्रभावित होंगे और देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी इस प्रकार यह कृषि कानून जो सरकार ने बिना संसद में और राज्यसभा में चर्चा कराए बगैर धींगा मस्ती में पास कराए यह देश के कारपोरेट को अपनी मर्जी के रेट पर किसानों की फसल खरीद का अधिकार देता है और अपनी ही मर्जी पर उपभोक्ताओं को बेचने का अधिकार देता है वक्ताओं ने कहा कि आज पूरे अखिल भारतीय पैमाने के इस विरोध दिवस को आगे भी जारी रखा जाएगा जब तक सरकार इन कृषि से जुड़े किसान विरोधी तीनों कानूनों को वापस नहीं लेगी तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है वक्ताओं ने कहा सरकार ने 44 मजदूर हितेषी कानूनों को खत्म कर चार संहिता बनाने का जो निर्णय लिया था उसका भी वक्ताओं ने पुरजोर विरोध किया और सरकार को चेताया कि मजदूर किसान की एकता यह संघर्ष मोदी सरकार की कॉरपोरेट से की गई सांठगांठ को जनता के बीच बेनकाब करेगा प्रदर्शन में भाग लेने वाले मीना उषा सीमा गजेंद्र देवेंद्र खेनेड़ा भगत सिंह विजय लाल देवेंद्र लाल जयंती मटिया मोहन सिंह रावत महिंदर मलेथा रीना धीरज रीना अमन कोहली आदि थे

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कृषि सुधार विधेयक के विरोध में आज भारत बंद, पंजाब में रेल रोको आंदोलन

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पंजाब (Punjab) और हरियाणा (Haryana) के किसान संसद में पारित कृषि सुधार विधेयकों (Farm Bills) के खिलाफ आज हड़ताल करेंगे. पंजाब बंद (Punjab Bandh) के लिए 31 किसान संगठनों ने हाथ मिलाया है. हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kissan Union) समेत कई संगठनों ने कहा है कि उन्होंने विधेयकों के खिलाफ कुछ किसान संगठनों द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन किया है. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (CM Amarinder Singh) ने प्रदर्शन के दौरान किसानों से कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और कोरोना वायरस (Coronavirus) से जुड़े सभी नियमों का पालन करने की अपील की है.

एक बयान में सिंह ने कहा कि राज्य सरकार विधेयकों के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह किसानों के साथ है और धारा 144 के उल्लंघन के लिए प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल के दौरान कानून-व्यवस्था की दिक्कतें पैदा नहीं करनी चाहिए. उन्होंने किसानों से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि नागरिकों को किसी तरह की दिक्कतें नहीं हो और आंदोलन के दौरान जान-माल को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं होना चाहिए. भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) महासचिव सुखबीर सिंह ने हड़ताल के समर्थन में वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, दुकानदारों से अपनी दुकानों बंद रखने की अपील की है.

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ (Punjab Congress Chief Sunil Jakhar) ने भी लोगों से किसानों का समर्थन करने और हड़ताल को सफल बनाने का अनुरोध किया है. मुख्य विपक्षी आम आदमी पार्टी पहले ही अपना समर्थन दे चुकी है जबकि शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने सड़क बंद करने की घोषणा की है. विधेयकों के खिलाफ किसानों ने पंजाब में कई स्थानों पर गुरुवार को तीन दिवसीय रेल रोको प्रदर्शन शुरू किया और पटरियों पर धरना दिया.

किसान संगठनों ने एक अक्टूबर से अनिश्चितकालीन रेल रोको प्रदर्शन भी शुरू करने का फैसला किया है. प्रदर्शनकारियों ने आशंका व्यक्त की है कि केंद्र के कृषि सुधारों से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और कृषि क्षेत्र बड़े पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा. किसानों ने कहा है कि तीनों विधेयक वापस लिए जाने तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.

हरियाणा भाकियू के प्रमुख गुरनाम सिंह ने कहा कि उनके संगठन के अलावा कुछ अन्य किसान संगठनों ने भी राष्ट्रव्यापी हड़ताल को अपना समर्थन दिया है. सिंह ने कहा, ‘‘हमने अपील की है कि राज्य के राजमार्गों पर धरना होना चाहिए और अन्य सड़कों पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध होना चाहिए. राष्ट्रीय राजमार्गों पर धरना नहीं देना चाहिए.’’ सिंह ने कहा कि हड़ताल के दौरान सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक किसी भी प्रकार के गैरकानूनी काम में संलिप्त नहीं होना चाहिए.

भाकियू नेता ने कहा कि कमीशन एजेंट, दुकानदारों और ट्रांसपोर्टरों से भी हड़ताल का समर्थन करने का अनुरोध किया गया है.

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दिल्ली दंगे:- सलमान खुर्शीद ने कहा “पुलिस ने दंगा भड़काने का इल्जाम नहीं लगाया है, बल्कि किसी आरोपी के बयान के आधार पर नाम जोड़ा है.”

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नई दिल्ली. नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली (Northeast Delhi Riots) के कई इलाकों में इस साल फरवरी में हुए दंगों के सिलसिले में पुलिस ने जो नई चार्जशीट दायर की है, उसमें माकपा नेता बृंदा करात (Brinda Karat) और पूर्व सांसद उदित राज के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) का भी नाम शामिल हैं. इन सभी पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है. इसको लेकर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि पुलिस ने दंगा भड़काने का इल्जाम नहीं लगाया है, बल्कि किसी आरोपी के बयान के आधार पर नाम जोड़ा है.

सलमान खुर्शीद ने कही ये बात

इसके अलावा सलमान खुर्शीद कहा कि सीएए और एनआरसी (CAA-NRC) के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में जाते थे और उन लोगो की बातों का समर्थन करते थे. इसी मुद्दे पर किताब भी लिखी है. उन्‍होंने दिल्ली पुलिस का बिना नाम लिए जाहिल और कूड़ा जमा करने वाला तक कह दिया. सलमान खुर्शीद ने सवाल करते कहा कि क्या कानून भड़काने वाले भाषण देने से रोकता है. देश में हर राजनीतिक व्यक्ति भड़काने वाला भाषण देता है. जबकि चुनाव आयोग सिर्फ चुनाव के दौरान भड़काने वाले भाषण देने से रोकता है, लेकिन कानून ऐसा नहीं करता है.

दिल्‍ली पुलिस को दिया ये चैलेंज

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस बताए क्या भाषण दिया और रिकॉर्डिंग है तो दिखाए. भड़काने वाला भाषण दिया तो मेरे खिलाफ कर्रवाई क्यों नहीं की, मुझे आरोपी क्यों नहीं बनाया. दिल्ली पुलिस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जब मुझे आरोपी नहीं बनाया तो मुझे बदनाम क्यों कर रहे हैं. जिस आरोपी के बयान पर पुलिस नाम ले रही है उसे जेल से छोड़ दे, उसकी जगह मुझे जेल में डाल दे. क्‍या केंद्र सरकार को निशाना बनाने पर पुलिस कार्रवाई कर रही है. इस पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह जहालत, कूड़ा, बेवकूफी है, इससे ज्यादा और क्या भड़का सकता हूं. पुलिस ने कूड़ा जमा किया है, इसे साफ कौन करेगा.

आपको बता दें कि चार्जशीट में कहा गया है कि सुरक्षा प्राप्त गवाह ने बयान में कहा है कि कई जाने माने लोग मसलन नेता उदित राज, पूर्व केंद्रीय मंत्री खुर्शीद, बृंदा करात खुरेजी स्थित प्रदर्शन स्थल पर आए थे. उन्होंने ‘भड़काऊ भाषण’ दिए. गवाह ने कहा है कि उदित राज, सलमान खुर्शीद, बृंदा करात, उमर खालिद जैसे कई लोग CAA, NPR और NRC के खिलाफ भाषण देने प्रदर्शन स्थल पर आया करते थे. दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में इशरत जहां के बयान का हवाला देते हुए कहा है कि CAA विरोधी प्रदर्शनों को जारी रखने के लिए खुर्शीद, फिल्मकार राहुल रॉय और भीम आर्मी के सदस्य हिमांशु जैसे लोगों को उन्होंने और कार्यकर्ता खालिद सैफी ने जामिया समन्वय समिति (जेसीसी) के निर्देशों पर बुलाया था.

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