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देश भर के ATM में कैश की किल्लत, लोगों को याद आई नोटबंदी:

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देश में एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात नजर आ रहे हैं. कुछ राज्यों और कई शहरों में एटीएम से कैश नहीं निकल रहा है. दिल्ली में भी कुछ एटीएम में ऐसी ही स्थिति बनी हुई है. कई स्थानों पर तो ऐसा हो रहा है कि मोबाइल पर निकासी का मैसेज तक आ रहा है और पैसे निकल नहीं रहे हैं. इतना ही नहीं ईमेल के जरिए भी संदेश जा रहा है लेकिन पैसे नहीं निकले हैं. कुछ जगह एटीएम में निकासी पर कैश निकासी की सीमा तय कर दी गई है.

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि देश में कैश के हालात का जायज़ा लिया. कुल मिलाकर पर्याप्त से ज़्यादा कैश चलन में है और बैंकों के पास भी है. कुछ इलाक़ों में अचानक और बढ़ी हुई मांग से पैदा हुई क़िल्लत से जल्द ही निबटा जा रहा है. इधर वित्त राज्यमंत्री का कहना है कि कैश की कोई किल्लत नही हैं, ये अलग बात है कि कहीं कम है तो कहीं ज़्यादा है। उन्होंने कहा कि 2-3 दिन में सब ठीक हो जाएगा.

शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि फिलहाल रिजर्व बैंक के पास 1,25,000 करोड़ रुपये की नकदी है. समस्या बस कुछ असमानता की हालत बन जाने की वजह से हुई है. कुछ राज्यों में कम करेंसी है तो कुछ में ज्यादा. सरकार ने राज्यवार समितियां बनाई हैं और रिजर्व बैंक ने भी अपनी एक कमिटी बनाई है ताकि एक से दूसरे राज्य तक नकदी का ट्रांसफर हो सके.

उन्होंने कहा, ‘रिजर्व बैंक पैसों की राज्यों में असमानता को खत्म कर रहा है. एक राज्य से दूसरे राज्य में पैसे पहुंच रहे हैं. बिना रिजर्व बैंक के आदेश के ही प्रांतों में स्थ‍िति कैसे ठीक की जा सकती है, इसका अध्ययन कर रहे हैं. पैसे की कोई कमी नहीं है. नोटबंदी की तरह कमी नहीं होने देंगे. हालात ठीक हो जाएंगे.’

असमानता के बारे में बताते हुए शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि कुछ राज्य में पैसा ज्यादा चला गया है, कुछ में कम रह गया, लेकिन रिजर्व बैंक से इस बारे में बात हो गई है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश से लेकर गुजरात तक के कई शहरों में एटीएम से नकदी नहीं मिल रही है. बताया जा रहा है कि कई बैंकों की शाखाओं से भी लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है. कहा जा रहा है कि बैंकों में बढ़ते एनपीए ने बैंकिंग प्रणाली को हिला कर रख दिया है. बैंकों की साख पर सवाल खड़ा हो गया है. इन्हें उबारने के लिए खातों में जमा रकम के इस्तेमाल की अटकलों ने ग्राहकों को डरा दिया है. ऐसे में पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है और एटीएम पर दबाव चार गुना तक बढ़ गया है.

उत्तर बिहार के ज्यादातर बैंकों में नकदी नहीं होने से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम व बैंक शाखाओं में रुपये के लिए हाहाकार मचा है. बिहार के मुजफ्फरपुर के बैंकों के करेंसी चेस्टों से समस्तीपुर, दरभंगा, गोपालगंज, सारण, सीवान, पूर्वी व पशिचमी चंपारण को नकदी दी जाती है. पिछले डेढ़ माह से इन जिलों में कैश की आपूर्ति नहीं हो रही है. इस कारण यहां भी कैश संकट गहरा गया है.

गुजरात में बैंकों और एटीएम में नकदी की किल्लत के कारण लोगों की मुश्किले थमने का नाम नहीं ले रही हैं. कुछ दिन पहले उत्तर गुजरात में पैदा हुए इस संकट ने अब लगभग पूरे राज्य में अपना पैर पसार लिया है. लोगों एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है. बैंकों ने नकदी निकालने की सीमा तय कर दी है, जबकि अधिकतर एटीएम में पैसा हीं नहीं है. गुजरात के महेसाणा, पाटन, साबरकांठा, बनासकांठा, मोडासा के अलावा अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत जैसे बड़े शहरों में भी नकदी संकट बना हुआ है.

बता दें कि पिछले साल मई में दो हजार के नोटों को छापना बंद कर दिया गया था. इसकी जगह पांच सौ और दो सौ रुपये के नोटों को लाया गया. इससे एटीएम में डाले जा रहे नोटों की वैल्यू कम हो रही है. गौर करने की बात है कि अगर दो हजार के नोटों से एटीएम को भरा जाए तो 60 लाख रुपये तक आ जाते हैं. पांच सौ और सौ के नोटों से ये क्षमता महज 15 से 20 लाख रुपये रह गई है.

इसके अलावा समस्या का एक कारण यह भी है कि 200 के नोट के लिए एटीएम तैयार नहीं हैं. अभी तक महज 30 फीसदी एटीएम ही 200 रुपये को लेकर कैलीब्रेट हो सके हैं. यानी 70 फीसदी एटीएम 200 का नोट देने में सक्षम ही नहीं हैं. इतना ही नहीं आरबीआई की रैंडम जांच में पाया गया है कि करीब 30 फीसदी एटीएम औसतन हर समय खराब रहते हैं.

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सामाजिक कार्यकर्ता अग्निवेश पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया जानलेवा हमला

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सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश की कथित तौर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने पिटाई कर दी है। उन्होंने अग्निवेश के कपड़े भी फाड़ दिए। स्वामी अग्निवेश मंगलवार को लिट्टीपारा में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए झारखंड के पाकुड़ पहुंचे थे।

अग्निवेश ने बताया कि कार्यक्रम स्थल से बाहर आते ही युवा मोर्चा और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। उन्होंने अग्निवेश पर हिंदुओं के खिलाफ बोलने का आरोप लगाया। अग्निवेश ने कहा, ‘मुझे लगता था कि झारखंड शांतिपूर्ण राज्य है, लेकिन इस घटना के बाद मेरे विचार बदल गए हैं।’

घटना के सामने आए वीडियो में भीड़ अग्निवेश और उनके समर्थकों को पीटते हुए दिख रही है। पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र प्रसाद बरनवाल ने कहा कि जिले में अग्निवेश के कार्यक्रम की पहले से कोई जानकारी नहीं थी। पाकुड़ के उपमंडलीय पुलिस अधिकारी अशोक कुमार सिंह ने कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कुछ समय पहले सनातन धर्म को लेकर दिए अग्निवेश के बयान से कुछ संगठन नाराज हो गए थे। इसके बाद अग्निवेश के रांची दौरे को लेकर भाजयुमो कार्यकर्ता विरोध कर रहे थे। यह घटना तब हुई है जब सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ही देश भर में हो रही भीड़ की हिंसा की निंदा की है।
सीएम रघुबर दास ने दिए जांच के आदेश

झारखंड के पाकुर में भाजपा युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं द्वारा कथित रूप से स्वामी अग्निवेश की पिटाई के मामले में मुख्यमंत्री रघुबर दास ने जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने गृह सचिव को पाकुड़ में स्वामी अग्निवेश के साथ हुई मारपीट की जांच के आदेश दिए हैं। जानकारी के अनुसार संथालपरगना के आयुक्त और डीआईजी मामले की जांच करेंगे।    Swami Agnivesh thrashed, allegedly by BJP Yuva Morcha workers in Jharkhand’s Pakur: CM Raghubar Das has ordered a probe into the matter. — ANI (@ANI) July 17, 2018

 

गौरतलब है कि इससे पहले मई, 2011 में गुजरात के अहमदाबाद में एक जनसभा के दौरान स्वामी अग्निवेश के साथ एक संत ने अभद्रता की। जनसभा के दौरान संत ने स्वामी अग्निवेश को थप्पड़ मारा। संत की पहचान महंत नित्यानंद दास के रूप में हुई थी।

अमरनाथ में शिवलिंग के बारे में अग्निवेश द्वारा हाल ही में दिए गए बयान से संत नाराज था। उसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। संत अमरनाथ शिवलिंग के बारे में अग्निवेश द्वारा दिए गए बयान से नाराज था।

अग्निवेश ने कहा था कि अमरनाथ शिवलिंग का निर्माण कृत्रिम बर्फ से किया गया है। इसके बाद संत ने अग्निवेश पर जूता चलाने वाले को 51,000 रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की थी। नित्यानंद नादिआद के पास एक मंदिर में महंत है। अग्निवेश सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के साथ एक जनसभा में भाग लेने के लिए यहां आए थे। इस सभा में नित्यानंद भी पहुंचा था।

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फ्रांस से आगे निकला भारत मगर प्रति व्यक्ति जीडीपी फ्रांस से 20 गुना कम

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विश्व बैंक की नई रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। भारत के पहले फ्रांस छठे स्थान पर हुआ करता था। जून 2017 के अंत तक भारत की जीडीपी 2.597 ट्रिलियन की हो गई है, फ्रांस की जीडीपी 2.582 ट्रिलियन है। पांचवे नंबर पर ब्रिटेन है जिसकी जीडीपी 2.622 ट्रिलियन डॉलर की है। ट्रिलियन का अरब ख़रब आप ख़ुद कर लें, मैं करता हूं तो कभी कभी ग़लती हो जाती है। पांच, छह और सात रैंक के देशों की जीडीपी में ख़ास अंतर नहीं है। फिर भी लिस्ट में भारत फ्रांस से आगे है।

भारत की आबादी एक अरब 37 करोड़ है और फ्रांस की साढ़े छह करोड़। इससे भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है। इसका मतलब भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी फ्रांस की प्रति व्यक्ति जीडीपी का मामूली हिस्सा भर है। फ्रांस की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से 20 गुना ज़्यादा है। ये आपको अरुण जेटली नहीं बताएंगे क्योंकि इससे हेडलाइन की चमक फीकी हो जाती है। टाइम्स आफ इंडिया की एक ख़बर में यह विश्लेषण मिला है।

अमरीकी की जीडीपी है 19.39 ट्रिलियन डॉलर, चीन की जीडीपी 12.24 ट्रिलियन डॉलर, जापाना की जीडीपी 4.87 ट्रिलियन, जर्मनी की जीडीपी 3.68 ट्रिलियन डॉलर, ब्रिटेन 2.62 ट्रिलयन, भारत 2.597 ट्रिलियन है।

11 जुलाई के इकोनोमिक टाइम्स की अनुभूति विश्नोई ने लिखा है कि मुकेश अंबानी ख़ुद जियो इंस्टिट्यूट का प्रस्ताव लेकर कमेटी के सामने पेश हुए थे। उनके साथ विनय शील ओबरॉय शिक्षा सलाहकार बन कर गए थे। इस ख़बर के मुताबिक मुकेश अंबानी ने ही सारे सवालों के जवाब दिए और उनका यह सपना पिछली सरकार के समय भी मंत्रालय के सामने रखा गया था।
मुकेश अंबानी के शिक्षा सलाहकार विनय शील ओबरॉय मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव थे जब 2016 के बजट में institute of eminence की घोषणा हुई थी। 2016 के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय और मानव संसाधन मंत्रालय के बीच इसकी रूपरेखा को लेकर कई बार चर्चाएं होती रही हैं। फरवरी 2017 में विनय शील रिटायर हो जाते हैं। सितंबर 2017 में institute of eminence की नियमावलियों की घोषणा होती है। institute of eminence के लिए कमेटी की घोषणा फरवरी में ही होती है। IAS के लिए नियम है कि रिटायर होने के एक साल बाद ही कोई कमर्शियल नौकरी का प्रस्ताव स्वीकार कर सकते हैं। ऐसा लगता है कि उन्होंने एक साल के बाद ही अंबानी के समूह को ज्वाइन किया है।

पत्रकार अनुभूति विश्नोई ने रिलायंस और विनय शील ओबेरॉय को सवाल भेजे थे मगर जवाब नहीं मिला। अनुभूति ने लिखा है कि उसने रिलायंस के प्रस्ताव देखे हैं जिसमें कहा गया है कि पांच साल में वह 6000 करोड़ रिसर्च पर ख़र्च करेगी और दुनिया की शीर्ष 50 यूनिवर्सिटी से करार करेगी। शिक्षा को लेकर अपने अनुभवों में रिलायंस ने यही लिखा है कि उसके कई स्कूल चलते हैं जिसमें 13000 छात्र पढ़ते हैं। खुद भी मुकेश अंबानी IIM बंगलुरु से जुड़े रहे हैं।

11 जुलाई के ही बिजनेस स्टैंडर्ड में जियो इंस्टिट्यूट के बारे में नितिन सेठी और अदिती फड़नीस की रिपोर्ट छपी है। इसमें लिखा है कि institute of eminence के नियम कायदे बनने के दो सप्ताह के भीतर RFIER( Reliance Foundation Institution of Education Research) रिलायंस समूह का हिस्सा हो गया। यह कंपनी महाराष्ट्र में जियो इंस्टिट्यूट बनाएगी। institute of eminence के लिए दो नियमों ने खासतौर से रिलायंस की बहुत मदद की। एक था कि जो व्यक्ति यूनिवर्सिटी का प्रस्ताव लेकर आएगा उसकी अपनी आर्थिक हैसियत 50 अरब रुपये से अधिक की होनी चाहिए ।दूसरा प्रावधान था कि उस समूह का किसी भी क्षेत्र में योजना को ज़मीन पर उतारने के मामले में शानदार रिकार्ड होना चाहिए।

20 अगस्त 2017 को नए प्रावधानों की अधिसूचना जारी हुई थी। 12 सितंबर 2017 को कंपनी बनी जिसके सदस्य बने नीता धीरुभाई अंबानी और मुकेश धीरूभाई अंबानी। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नए नियमों ने रिलायंस के लिए रास्ता खोल दिया। अप्लाई करने की तीन श्रेणियां थीं, सरकारी, प्राइवेट और ग्रीनफील्ड। रिलायंस ने ग्रीनफील्ड की श्रेणी में अप्लाई किया था। इस श्रेणी में ज़मीन के बारे में बताना ज़रूरी नहीं था। इसी श्रेणी के आवेदनकर्ताओं से पूछा ज़रूर गया कि ज़मीन है या नहीं। बिजनेस स्टैंडर्ड ने लिखा है कि वह यह पता नहीं लगा सका कि रिलायंस ने इस सवाल का क्या जवाब दिया है। वैसे इस योजना के तहत प्राइवेट संस्थान को सरकार एक पैसा नहीं देगी।

बिजनेस स्टैंडर्ड की वीणा मणी की इस रिपोर्ट को पढ़िए। नोटबंदी के तुरंत बाद ख़बर आई थी कि सवा दो लाख शेल कंपनियां हैं, जिनमें 3 लाख निदेशक हैं।उन ख़बरों में इन सभी शेल कंपनियों को ऐसे पेश किया गया जैसे ये काला धन को सफेद करने का ज़रिया हों। बीच बीच में इससे संबंधित कई ख़बरें आती रहीं मगर मैं ख़ुद भी ट्रैक नहीं रख सका और इससे संबंधित बातें समझ में भी नहीं आती थी। वीणा की रिपोर्ट में इससे संबंधित भी कुछ जानकारियां हैं।

वीणा मनी ने लिखा है कि 13,993 शेल कंपनियां फिर से रजिस्ट्रार आफ कंपनी के यहां पंजीकृत हो गईं हैं। नोटबंदी के बाद इनका पंजीकरण रद्द कर दिया गया था। यही नहीं करीब 30,000 लोग फिर से निदेशक बनने के योग्य करार दे दिए गए हैं। इनके नाम भी शेल कंपनियों के ख़िलाफ़ चल रही कार्रवाई के दौरान हटा दिए गए थे। इस ख़बर में यह भी लिखा है कि मंत्री शेल कंपनियों की बेहतर परिभाषा तय करने पर भी काम कर रही है।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने लिखा है कि ऐसी कंपनियों की पहली सूची में पाया गया कि ये कंपनियां सालाना रिपोर्ट और आयकर रिटर्न नहीं भरती हैं। इनकी जांच का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। इनमें से कई हज़ार कंपनियों के पास पैन नंबर तक नहीं हैं। अभी तक सरकार के पास सिर्फ 73,000 कंपनियों के ही लेन-देन के रिकार्ड आ सके हैं। नोटबंदी के समय इन कंपनियों में 240 अरब रुपये जमा थे। आय़कर विभाग जांच कर रहा है कि कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई है। पिछले साल नवंबर में शेल कंपनियों पर बने टास्क फोर्स की बैठक के दौरान कारपोरेट मामलों के महानिदेशक ने सुधाव दिया था कि विभाग को रजिस्ट्रा आफ कंपनी से बात करनी चाहिए ताकि इनमें राजस्व की कमाई के लिए इन कंपनियों को फिर से जीवित किया जा सके।

भारत में 11 लाख कंपनियां पंजीकृत हैं। इनमें से 5 लाख ही पूरी तरह संचालित हैं, शेलकंपनियों के अलावा गायब होने वाली कंपनियां भी हैं। 400 ऐसी कंपनियों का कुछ पता नहीं चल रहा है। किसी को पता नहीं कि ढाई लाख शेल कंपनियों से कितना काला धन मिला मगर इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई भर को ऐसे पेश किया जाता है जैसे काला धन मिल गया है। बार बार 15 लाख के लिए अपने खाते को देखने की ज़रूरत नहीं है, इधर उधर से ख़बरों की खोजबीन भी करते रहिए।

बिजनेस स्टैंडर्ड में ही एक कालम आता है STATSGURU, इसमें आर्थिक आंकड़े होते हैं। इसकी पहली लाइन है कि हाल के आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक वातारण काफी कमज़ोर हो गया है। औद्योगिक गतिविधियां सात महीने में सबसे कम पर हैं। भारत का व्यापार घाटा पांच साल में सबसे अधिक हो गया है। मई 2018 में भारत के नियार्त की वृद्धि दर 20.2 प्रतिशत थी जो जून में घट कर 17.6 प्रतिशत पर आ गई। दूसरी तरफ जून में तेल का आयात बढ़कर 21.3 प्रतिशत हो गया। इस हिसाब से भारत जितना निर्यात कर रहा है उससे अधिक आयात कर रहा है। मई में व्यापार घाटा 14.62 अरब डॉलर था जो जून में बढ़कर 16.61 अरब डॉलर ह गया।

हिन्दी के अख़बारों और चैनलों में ये सारी जानकारी नहीं होती है। हिन्दी के चैनलों और अख़बारों के पास ऐसी ख़बरों को पकड़ने के लिए जिस निरंतरता और अनुभवी रिपोर्टर की ज़रूरत होती है, वो अब उनके पास नहीं हैं। टीवी
चैनलों के पास तो बिल्कुल नहीं होते हैं। इसिलए आपके लिए दोनों अख़बारों में छपी ख़बरों का अनुवाद किया है। ख़ुद के लिए भी और हिन्दी के तमाम पाठकों के लिए मुफ्त में यह जनसेवा करता रहता हूं ताकि हमें कुछ अलग संदर्भ और परिप्रेक्ष्य मिले।

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हम मोदी की तरह श्मशान ,कब्रस्तान और बांटने की राजनीति नहीं करते।:-वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी

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दिल्ली, 14 जुलाई :- कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आज के हमले पर पलटवार करते हुए कहा कि वह उनकी तरह ‘श्मशान-कब्रस्तान और बांटने की राजनीति’ नहीं करती, बल्कि सभी धर्मों और जातियों का सम्मान करती है।

दरअसल, मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे परियोजना के शिलान्यास के मौके पर एक उर्दू दैनिक की खबर का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से सवाल किया कि कांग्रेस क्या मुस्लिम पुरूषों की पार्टी है या मुस्लिम महिलाओं की भी है?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम गर्व से कह सकते थे कि अगर कोई देश के हर धर्म, जाति और वर्ग को साथ लेकर चला है तो वह सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस है। हम सभी का आदर करते हैं। हम मोदी की तरह श्मशान ,कब्रस्तान और बांटने की राजनीति नहीं करते।’’

तीन तलाक विरोधी कानून के बारे में तिवारी ने कहा, ‘‘हम तीन तलाक पर कानून के पक्ष में हैं। लेकिन जो इस विधेयक का जो मौजूदा स्वरूप है कि उससे महिलाओं का भला नहीं होने वाला है। इस विधेयक को ऐसे बनाना होगा जिससे महिलाओं का भला हो सके।’’

तिवारी ने कहा, ‘‘पूर्वांचल के लोगों को मोदी जी से उम्मीद थी कि किसानों के जो 12 हजार करोड़ रुपये बकाया है उसको दिए जाने की घोषणा करेंगे। आशा थी कि बंद मिलों एवं कारखानों के फिर से खोलने की तारीख की घोषणा करेंगे। आशा थी कि उत्तर प्रदेश में महिला विरोधी अपराधों के बढ़ते मामलों पर कुछ बोलेंगे। लेकिन उन्होंने इन पर कुछ नहीं बोला।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री पूर्वांचल में बोल रहे थे, लेकिन आजमगढ़ के महान साहित्यकार राहुल सांस्कृत्यायन का उल्लेख करना भूल गए, वीर अब्दुल हमीद का नाम लेना भूल गए। गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से मरने वाले मासूम बच्चों के बारे में कुछ कहना भूल गए। उन्नाव के बलात्कार के आरोपी अपने विधायक को पार्टी से बाहर निकालने की हिम्मत नहीं कर पाए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री अपने भाषण में जिन उपलब्धियों का जिक्र कर रहे थे वो सबकुछ उधार का था। मनमोहन सिंह सरकार की योजनाओं का नाम बदलकर पेश किया।’’

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि ‘मोदी जी का तेवर एक हारे हुए सेनापति का था जिसकी सेना का अंधकारमय भविष्य नजर आ रहा है।’

उन्होंने सवाल किया, ‘‘प्रधानमंत्री जी जवाब दीजिए कि रोजगार कहां है, महंगाई क्यों बढ़ी, रुपये की कीमत आपकी उम्र से ज्याद कैसे हो गई, पेट्रोल-डीजल के दाम कब कम होंगे?’’

तिवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार संसद नहीं चलाना चाहती। अपने सहयोगी दलों से कार्यवाही बाधित करवाती है ताकि असल मुद्दों पर जवाब देने से बचे।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के राम मंदिर से जुड़े एक कथित बयान का हवाला देते हुए तिवारी ने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा को भगवान राम में आस्था नहीं है, बल्कि वह उनके नाम इस्तेमाल चुनाव के मोहरे के रूप में करती है।

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