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देश भर के ATM में कैश की किल्लत, लोगों को याद आई नोटबंदी:

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देश में एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात नजर आ रहे हैं. कुछ राज्यों और कई शहरों में एटीएम से कैश नहीं निकल रहा है. दिल्ली में भी कुछ एटीएम में ऐसी ही स्थिति बनी हुई है. कई स्थानों पर तो ऐसा हो रहा है कि मोबाइल पर निकासी का मैसेज तक आ रहा है और पैसे निकल नहीं रहे हैं. इतना ही नहीं ईमेल के जरिए भी संदेश जा रहा है लेकिन पैसे नहीं निकले हैं. कुछ जगह एटीएम में निकासी पर कैश निकासी की सीमा तय कर दी गई है.

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि देश में कैश के हालात का जायज़ा लिया. कुल मिलाकर पर्याप्त से ज़्यादा कैश चलन में है और बैंकों के पास भी है. कुछ इलाक़ों में अचानक और बढ़ी हुई मांग से पैदा हुई क़िल्लत से जल्द ही निबटा जा रहा है. इधर वित्त राज्यमंत्री का कहना है कि कैश की कोई किल्लत नही हैं, ये अलग बात है कि कहीं कम है तो कहीं ज़्यादा है। उन्होंने कहा कि 2-3 दिन में सब ठीक हो जाएगा.

शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि फिलहाल रिजर्व बैंक के पास 1,25,000 करोड़ रुपये की नकदी है. समस्या बस कुछ असमानता की हालत बन जाने की वजह से हुई है. कुछ राज्यों में कम करेंसी है तो कुछ में ज्यादा. सरकार ने राज्यवार समितियां बनाई हैं और रिजर्व बैंक ने भी अपनी एक कमिटी बनाई है ताकि एक से दूसरे राज्य तक नकदी का ट्रांसफर हो सके.

उन्होंने कहा, ‘रिजर्व बैंक पैसों की राज्यों में असमानता को खत्म कर रहा है. एक राज्य से दूसरे राज्य में पैसे पहुंच रहे हैं. बिना रिजर्व बैंक के आदेश के ही प्रांतों में स्थ‍िति कैसे ठीक की जा सकती है, इसका अध्ययन कर रहे हैं. पैसे की कोई कमी नहीं है. नोटबंदी की तरह कमी नहीं होने देंगे. हालात ठीक हो जाएंगे.’

असमानता के बारे में बताते हुए शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि कुछ राज्य में पैसा ज्यादा चला गया है, कुछ में कम रह गया, लेकिन रिजर्व बैंक से इस बारे में बात हो गई है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश से लेकर गुजरात तक के कई शहरों में एटीएम से नकदी नहीं मिल रही है. बताया जा रहा है कि कई बैंकों की शाखाओं से भी लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है. कहा जा रहा है कि बैंकों में बढ़ते एनपीए ने बैंकिंग प्रणाली को हिला कर रख दिया है. बैंकों की साख पर सवाल खड़ा हो गया है. इन्हें उबारने के लिए खातों में जमा रकम के इस्तेमाल की अटकलों ने ग्राहकों को डरा दिया है. ऐसे में पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है और एटीएम पर दबाव चार गुना तक बढ़ गया है.

उत्तर बिहार के ज्यादातर बैंकों में नकदी नहीं होने से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम व बैंक शाखाओं में रुपये के लिए हाहाकार मचा है. बिहार के मुजफ्फरपुर के बैंकों के करेंसी चेस्टों से समस्तीपुर, दरभंगा, गोपालगंज, सारण, सीवान, पूर्वी व पशिचमी चंपारण को नकदी दी जाती है. पिछले डेढ़ माह से इन जिलों में कैश की आपूर्ति नहीं हो रही है. इस कारण यहां भी कैश संकट गहरा गया है.

गुजरात में बैंकों और एटीएम में नकदी की किल्लत के कारण लोगों की मुश्किले थमने का नाम नहीं ले रही हैं. कुछ दिन पहले उत्तर गुजरात में पैदा हुए इस संकट ने अब लगभग पूरे राज्य में अपना पैर पसार लिया है. लोगों एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है. बैंकों ने नकदी निकालने की सीमा तय कर दी है, जबकि अधिकतर एटीएम में पैसा हीं नहीं है. गुजरात के महेसाणा, पाटन, साबरकांठा, बनासकांठा, मोडासा के अलावा अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत जैसे बड़े शहरों में भी नकदी संकट बना हुआ है.

बता दें कि पिछले साल मई में दो हजार के नोटों को छापना बंद कर दिया गया था. इसकी जगह पांच सौ और दो सौ रुपये के नोटों को लाया गया. इससे एटीएम में डाले जा रहे नोटों की वैल्यू कम हो रही है. गौर करने की बात है कि अगर दो हजार के नोटों से एटीएम को भरा जाए तो 60 लाख रुपये तक आ जाते हैं. पांच सौ और सौ के नोटों से ये क्षमता महज 15 से 20 लाख रुपये रह गई है.

इसके अलावा समस्या का एक कारण यह भी है कि 200 के नोट के लिए एटीएम तैयार नहीं हैं. अभी तक महज 30 फीसदी एटीएम ही 200 रुपये को लेकर कैलीब्रेट हो सके हैं. यानी 70 फीसदी एटीएम 200 का नोट देने में सक्षम ही नहीं हैं. इतना ही नहीं आरबीआई की रैंडम जांच में पाया गया है कि करीब 30 फीसदी एटीएम औसतन हर समय खराब रहते हैं.

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झारखंड,बीफ की अफवाह पर हुआ बवाल, मुस्लिम घरों पर हुई पत्थरबाजी

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गौ रक्षा और बीफ के नाम पर होने वाली जात्याओं की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। जबकि देखा जाय तो भारत का एक हिस्सा ऐसा है जहां पर बीफ उन का मुख्य भोजन है और उसे लोगों से छीना नही जा सकता है। बावजूद इस के देश के अलग अलग हिस्सों में बीफ के नाम पर लोगों की हत्याएं भीड़ द्वारा की जा रही है।

झारखंड में बीफ की अफवाह पर बवाल हो गया है। उन्मादी भीड़ शादी में घुस गई और मुस्लिमों के घर पर पत्थरबाजी भी की गई। जानकारी के मुताबिक यह घटना राज्य के कोडरमा जिले की है। बताया जाता है शादी में मेहमानों को बीफ परोसने की अफवाह के बाद बड़ी तादाद में लोग जुट गए थे। पुलिस ने बताया कि हालात को नियंत्रित करने के लिए डोमचांच ब्लॉक के नवाडीह गांव और आसपास के इलाकों में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगानी पड़ी।

भीड़ ने एक व्यक्ति की बुरी तरह पिटाई कर डाली और गांव के कई घरों में तोड़फोड़ की गई। कोडरमा की पुलिस अधीक्षक शिवानी तिवारी ने बताया कि इस मामले में सात लोगों को हिरासत में लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है। उनके मुताबिक, किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है।

मांस के नमूने की होगी फोरेंसिक जांच: एसपी शिवानी तिवारी ने बताया कि शादी समारोह में पड़ोसे गए मांस के नमूने की जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह बीफ था की नहीं। बताया जाता है कि ग्रामीणों ने एक व्यक्ति के घर के पीछे स्थित खेत में खुर और हड्डियां देखी थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि शादी के बाद रिसेप्शन में सोमवार (16 अप्रैल) रात को बीफ परोसा गया था।

पुलिस ने बताया कि इसके बाद ग्रामीणों ने एक व्यक्ति की पिटाई कर डाली थी, जिसमें उसे गंभीर चोटें आई थीं। इसके अलावा कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। घायल व्यक्ति को इलाज के लिए राज्य की राजधानी रांची भेजा गया है। बता दें कि बीफ के शक में पिछले साल भीड़ ने झारखंड के रामगढ़ में मांस व्यवसायी अलीमुद्दीन अंसारी की सरेआम हत्या कर दी थी। फोरेंसिक जांच में वह बीफ ही निकला था। इस मामले में स्थानीय अदालत ने गौरक्षक दल के 11 सदस्यों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में बीफ के संदेह में उन्मादी भीड़ कई बार हमले कर चुकी है।

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Breaking News: जज लोया की मौत की SIT जाँच नहीं होगी: सुप्रीम कोर्ट

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नयी दिल्ली: जज लोया की मौत पिछले कुछ दिनों से मीडिया और राजनैतिक अखाड़े में जोर शोर से चलाया जा रहा था जिसके ऊपर आज सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण विराम लगा दिया है|

 बता दें की जज लोया की मौत को संदिग्ध बताते हुए उनकी मौत की SIT जाँच करवाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पांच पीआईएल डाला गया था, पीआईएल डालने वालों में मुंबई लायर्स एसोसिएशन भी था  जिसकी सुनवाई करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ पीआईएल को ख़ारिज किया बल्कि पीआईएल दाखिल करने वालों को कड़े शब्दों में फटकार भी लगाई.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा की जज लोया की मौत प्राकृतिक थी जिसकी कोई स्वतंत्र जांच नहीं होगी , उन्होंने आगे सुनवाई करते हुए कहा की अर्जी में कोई दम नहीं है, पीआईएल का इस्तेमाल एजेंडा चलने के लिए किया गया है.

इसका इस्तेमाल जजों के छवि को ख़राब करने के लिए किया गया है| सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ तौर पर तो नहीं लेकिन इशारों में कहा की यह पीआईएल राजनीती ने प्रेरित है.

गौरतलब हो की जज लोया की मौत इसीलिए भी मायने रखती है की वो जिस केस की सुनवाई कर रहे थे उसमे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जैसे बड़े राजनैतिक दिगाज्जो का नाम शामिल है|

जज लोया की मौत के काफी सालों बाद एक पत्रिका “द कारवां” ने कुछ तथ्यों को इकठा करने के बाद दावा किया था की उनकी मौत प्राकृतिक नहीं थी| उन्होंने ये भी कहा था की उनके मौत के बाद कई बातें संदिग्ध थे जिसे न्यायपालिका को समझना चाहिए लेकिन उसके उलट सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा की जजों के फैसले पर सवाल खड़ा करना न्यायपालिका की तौहीन होगी|

इस फैसले को याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण न्यायपालिका में काला दिन बता रहे है, उनका कहना है की हम कोर्ट ने ज्यादा कुछ नहीं मांग रहे थे हम बस इनकी स्वतंत्र जांच ही चाहते है, उनका कहना है की जज लोया के परिवार में कुछ लोग सहित उनके गाँव के लोगों का भी मानना है की उनकी मौत संदिग्ध है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश देने चाहिए थे.

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भाजपा नेता की अर्णव गोस्वामी को चुनौती:- वो अरनब गोस्वामी, अपने आप को क्या समझता है, मेरे पास भी पूरी एक सेना है, अगर वो लड़ना चाहते हो तो आ जाओ

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बलात्कार की घटनाओं के खिलाफ जहां देश को एक जुट होने की जरूरत है वहीं कुछ ऐसे न्यूज़ चैनल भी है जो देश को जाती और धर्म के नाम पर अलग अलग तोड़ना चाहते है। एयर इस तरह के चैनलों को जब तक आम जनता मुहतोड़ जवाब नही देगी तब तक यह सरकार के इशारोंपर ही काम करते रहेंगे।

कठुआ गैंगरेप मामले में पद से बर्खास्त हुए जम्मू-कश्मीर के बीजेपी मंत्री लाल सिंह ने मंगलवार को जम्मू से कठुआ तक रैली निकाली। इस रैली में वह बार-बार यही कहते हुए देख गए कि कठुआ गैंगरेप मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए और इसमें सभी आरोपियों का नार्को टेस्ट करवाया जाए।

इस रैली में वह अंग्रेजी न्यूज चैनल रिपब्लिक टीवी के संपादक अरनब गोस्वामी को निशाना साधते भी देखे गए। रैली में लाल सिंह ने अरनब पर हमला बोलते हुए कहा कि, ‘हम लोग पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन वहीं कुछ लोग हमारे खिलाफ माहौल बनाने में लगे हुए हैं। ऐसे सभी लोग बकवास कर रहे हैं। वो अरनब गोस्वामी, मुझे नहीं पता वो अपने आप को क्या समझता है। उसे लगता है कि वह मीडिया का चैम्पियन है। मेरे पास भी पूरी एक सेना है, अगर तुम लड़ना चाहते हो तो आ जाओ।’

जम्मू से कठुआ तक निकाली गई अपनी इस रैली में लाल सिंह ने ये भी कहा कि, ‘हमारा मकसद देश में शांति बनाए रखना है। हम दूसरों से लड़ने के लिए नहीं बैठे हैं। हम नहीं चाहते कि लोगों को किसी भी तरह की दिक्कत हो। हम बिना गलती के किसी की कोई भी बात बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन हम इस देश के टुकड़े नहीं होने देंगे। ये हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम देश को बचाने के लिए अपना बलिदान दें।’

बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने कठुआ गैंगरेप मामले में सोमवार को पीड़ित परिवार और उनकी वकील दीपिका रजावत व अन्य को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करवाने का आदेश दिया है। साथ ही, शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई चंडीगढ़ स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर जम्मू एवं कश्मीर सरकार से जवाब देने को कहा। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को करने का निर्देश दिया है।

इससे पहले, सोमवार को सुनवाई शुरू होने पर कठुआ दुष्कर्म और हत्याकांड मामले में सभी आठ आरोपियों को जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के सामने पेश किया गया। जघन्य अपराध के मामले में कथित सरगना सांझी राम समेत सभी आठ आरोपियों को सख्त सुरक्षा के बीच कठुआ में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ए. एस. लांगेह के समक्ष पेश किया गया। निचली अदालत में मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।

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