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बिहार रेल हादसा:- जोगबनी से दिल्ली जा रही सीमांचल एक्सप्रेस पटरी से उतरी अब तक 8 लोगों के मरने की खबर।

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बिहार के वैशाली जिले में रविवार तड़के बड़ा रेल हादसा हो गया। जोगबनी से दिल्ली के आनंद विहार जा रही सीमांचल एक्सप्रेस सहदेई बुजुर्ग के पास पटरी से उतर गई। हादसे में अब तक आठ लोगों के मरने की सूचना मिली है, हालांकि रेल प्रशासन ने सात की मौत की पुष्टि की है। करीब दो दर्जन यात्री घायल बताए जा रहे हैं। दुर्घटना टूटी पटरी पर ट्रेन के गुजरने के कारण हुई। ऐसे में तोड़फोड़ की आशंका से इनकार नहीं किया सकता। ट्रेन में कुंभ स्नान के लिए जा रहे यात्रियों की भीड़ ज्‍यादा थी। दुर्घटना को लेकर रेलवे ने हेल्‍पलाइन नंबर जारी किए हैं।
दुर्घटना के बाद राहत व बचाव कार्यों को लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल लगातार रेलवे बोर्ड के संपर्क में हैं। उन्‍होंने रेल यात्रियों की मौत पर संवेदना प्रकट की है। साथ ही घायलों के शीघ स्‍वस्‍थ होने की कामना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस दुखद घटना को लेकर शोक प्रकट किया है।

मिली जानकारी के अनुसार ट्रेन तड़के 3.52 बजे मेहनर रोड से गुजरी थी। इसके बाद करीब 3.58 बजे सहदेई बुजुर्ग के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। रेलवे के अनुसार दुर्घटना का कारण पटरी का टूटा होना था।
ट्रेन के 11 डिब्बों के पटरी से उतरने की खबर है। इनमें से तीन स्लीपर (एस-8, एस-9 और एस-10) हैं। एक जनरल कोच और एक एसी कोच (बी-3) भी पटरी से उतरे हैं। हादसे में एक डिब्बा पूरी तरह से पलट गया।

हादसे के बाद सहदेई बुजुर्ग स्टेशन पर एनडीआरएफ टीम पहुंची गई। क्रेन की मदद से ट्रेन के डिब्बों को काटकर यात्रियों को निकाला गया। सूचना मिलने पर वैशाली डीएम राजीव रौशन और एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों भी पहुंचे। हालांकि, राहत व बचाव में विलंब के कारण भड़के लोगों ने पथराव भी किया। सुरक्षा बलों ने मुश्किल से स्थिति को नियंत्रित किया। ,
मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख मुआवजा की घोषणा
रेल मंत्रालय ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा कर दी गई है। गंभीर घायलों को एक लाख तथा अन्‍य घायलों को 50 हजार रुपये के मुआवजे का ऐलान कर दिया गया है।

मरने वालों के बिहार व पश्चिम बंगाल के तीन-तीन की पहचान
मरने वालों में खगड़िया के तीन तथा पश्चिम बंगाल के तीन यात्रियों की पहचान कर ली गई है। मृतक सुदर्शन दास (60), इलचा देवी (66) और इंदिरा देवी (60) बिहार के खगड़िया के रहने वाले थे, जबकि शायदा खातून (40), अंसार आलम (19) और शमशुद्दीन आलम (26) पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। एक अन्‍य शव की पहचान अभी तक नहीं की जा सकी है।

इस बीच रेलवे ने हेल्‍पलाइन नंबर जारी कर दिए हैं। राहत बचाव कार्य के लिए सोनपुर और बरौनी से ART टीम को रवाना कर दिया गया है। हादसे के बाद बछवाड़ा-हाजीपुर सिंगल लाइन पर परिचालन रद कर दिया गया है।
दुर्घटना के संबंध में जानकारी लेने के लिए पूर्व मध्य रेल ने हेल्पलाईन नंबर जारी किए हैं। इन नंबरों पर फोन कर पीड़ितों के बारे जानकारी ली जा सकती है।
पटना- 06122202290, 06122202291, 06122202292, 06122213234
सोनपुर- 06158-221645
हाजीपुर- 06224-272230
बरौनी- 06279-23222
कटिहार- 9473198026

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BPCL कर्मचारियों को सरकार का आदेश, नही पसंद निजीकरण तो ले सकते हैं VRS

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निजीकरण से पहले सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपारेशन लिमिटेड (BPCL) अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) लेकर आई है. इसके तहत कंपनी की ओर से कर्मचारियों को कई तरफ के ऑफर दिए हैं.

दरअसल, सरकार देश की तीसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी और दूसरी सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी BPCL का निजीकरण करने जा रही है. निजीकरण से पहले कंपनी ने अपने कर्मचारियों को वीआरएस देने की पेशकश की है.

File Photo

पीटीआई के मुताबिक बीपीसीएल ने अपने कर्मचारियों को भेजे आंतरिक नोट में कहा कि कंपनी ने वीआरएस की पेशकश करने का फैसला किया है. यह योजना उन कर्मचारियों के लिए है जो किसी भी निजी कारणों से कंपनी में सेवाएं जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं, वे कर्मचारी वीआरएस के लिए आवेदन कर सकते हैं.

भारत पेट्रोलियम वीआरएस योजना-2020 (बीपीवीआरएस-2020) 23 जुलाई को खुली है और 13 अगस्त को बंद होगी. कंपनी के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक वीआरएस उन कर्मचारियों को बाहर निकलने का विकल्प देने लिए लाया गया है, जो निजी प्रबंधन के तहत काम नहीं करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि कुछ कर्मचारियों को लगता है कि बीपीसीएल के निजीकरण के बाद उनकी भूमिका, स्थिति या स्थान में बदलाव हो सकता है. यह योजना उन्हें बाहर निकलने का विकल्प देती है.

गौरतलब है कि बीपीसीएल में सरकार अपनी समूची 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है. कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 20,000 है. रिपोर्ट के मुताबिक पांच से 10 फीसदी कर्मचारी वीआरएस का विकल्प चुन सकते हैं.

योजना का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों को प्रत्येक पूरे हुए सेवा वर्ष के लिए दो माह का वेतन या वीआरएस के समय तक का मासिक वेतन मिलेगा. सेवाकाल के शेष बचे महीनों को इसमें गुणा किया जाएगा. इसके अलावा उन्हें सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाला कंपनी छोड़ने का खर्च भी मिलेगा.

वीआरएस लेने वाले कर्मचारियों को रिटायर्ड बाद भी चिकित्सा लाभ योजना के तहत चिकित्सा लाभ मिलेगा. इसके अलावा कर्मचारी अपने बचे अवकाश सीएल, ईएल और पीएल के बदले नकदी में भुगतान भी ले सकेंगे. नोटिस में कहा गया है कि जिस कर्मचारी के खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है, वह इस योजना का लाभ नहीं ले सकेगा.

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एक दिन में 3 डॉक्टर की कोरोना से मौत बिहार में कोरोना की भयावह तस्वीर दर्शाती है

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बिहार में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस बड़ी तेजी से अपने पांव पसार रही है। शुक्रवार को सूबे में 1820 नए संक्रमितों की पहचान की गई। राज्य में अब कुल संक्रमितों का आंकड़ा 33, 511 तक पहुंच गया। वहीं शुक्रवार को बिहार के तीन डॉक्टरों की कोरोना से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार कोरोना संक्रमित मरने वाले तीन डाक्टरों में मसौढ़ी के डॉ अवधेश कुमार सिंह, सुपौल के डॉ महेंद्र चौधरी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के पूर्व विभागध्यक्ष डॉ मिथिलेश कुमार सिंह शामिल हैं।

पटना में सबसे अधिक 561 नए संक्रमित मिले
पिछले दो दिनों में पटना में सबसे अधिक 561 नए संक्रमित मिले। वहीं, गया में 147, सारण में 121, रोहतास में 101, मुजफ्फरपुर में 99, भागलपुर में 81 नए संक्रमितों की पहचान की गई।

पटना में 439 और नालंदा में 189 लोग एक दिन में स्वस्थ
पटना प्रमंडल में कोरोना संक्रमितों के ठीक होने की संख्या में इजाफा हुआ है। एक दिन में 763 लोग स्वस्थ हुए हैं। इनमें से कुछ लोग अस्पताल में भर्ती थे, जबकि कुछ होम आइसोलेशन में थे। प्रमंडलीय आयुक्त  संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि इससे सावधानी बरतने और सचेत रहने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति काफी संख्या में ठीक हो रहे हैं। पटना प्रमंडल के जिलों में 24 जुलाई को कुल 763 कोरोना संक्रमित ठीक हुए हैं। इनमें पटना के 439, बक्सर के 45, भोजपुर के 24, कैमूर के 7, नालन्दा के 189 और रोहतास जिले के 59 मरीज हैं। बताया कि मरीजों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। साथ ही उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग के पालन की अपील की है।

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कोरोना वायरस को रोकने में N-95 मास्क फेल, सरकार ने ज़ारी की गाइडलाइन

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नई दिल्ली:  केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर लोगों के एन-95 मास्क पहनने के खिलाफ चेतावनी जारी कर कहा है कि इससे वायरस का प्रसार नहीं रुकता और यह कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के ‘‘विपरीत” है.

स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक राजीव गर्ग ने राज्यों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मामलों के प्रधान सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि सामने आया है कि प्राधिकृत स्वास्थ्य कर्मियों की जगह लोग एन-95 मास्क का ‘‘अनुचित इस्तेमाल” कर रहे हैं, खासकर उनका जिनमें छिद्रयुक्त श्वसनयंत्र लगा है.

उन्होंने कहा, ‘‘आपके संज्ञान में लाया जाता है कि एन-95 मास्क कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अपनाए गए कदमों के विपरीत है क्योंकि यह वायरस को मास्क के बाहर आने से नहीं रोकता। इसके मद्देनजर मैं आपसे आग्रह करता हूं कि सभी संबंधित लोगों को निर्देश दें कि वे फेस/माउथ कवर के इस्तेमाल का पालन करें और एन-95 मास्क के अनुचित इस्तेमाल को रोकें.”

बता दें की WHO ने भी तीन लेयर वाले मास्क को कोरोना वायरस की खिलाफ सबसे असरदार माना है, इतना ही नहीं हिदायत दी जाती रही है की घर में बने मास्क का प्रयोग सबसे उचित है जिसे उपयोग के बाद ससून से धोया जा सके.

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