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बीट विशेष

आलेख: जब बिहार जलता रहा और सुशासन बाबू देखते रहे

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फाइल फोटो

नक़्शा ले कर हाथ में बच्चा है हैरान
कैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्तान
(निदा फ़ाज़ली)

आगामी चुनाव की तैयारी में साम्प्रदायिक दंगे शुरू हो चुके हैं, सत्ता के भूखे भेड़ियों ने इंसानियत का कत्ल करना शुरू कर दिया है| विकास का ढोंग रचा कर विनाश की राजनीति का आरंभ हो चुका है। अब फिर इस बार के चुनाव में लगता है शोषितों, पिछड़ों, दलितों तथा अल्पसंख्यकों का बलि दिया जाएगा और राजनीति का घिनौना खेल खेला जाएगा।

क्षेत्रीय,धार्मिक, सांस्कृतिक एवं भाषाओं के विविधताओं से भरी हमारी सोने की चिड़िया जैसी धरती पे अब खूँखार शिकारियों ने हर प्रकार से अपना बर्चस्व बना लिया है और धीरे-धीरे सोने की हर चिड़िया का एक-एक कर शिकार करते जा रहे है।

इसी कड़ी में दरिन्दे शिकारियों ने दिनांक 27 मार्च 2018 को बेगूसराय और समस्तीपुर के बीच स्थित रोसड़ा को निशाना बनाया है। किसी ने उनपर चप्पल फेंका है ऐसा बहाना बनाकर दंगाईयों ने धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया है।

मुझ जैसा इक आदमी मेरा ही हमनाम
उल्टा सीधा वो चले मुझे करे बद-नाम (निदा फ़ाज़ली)

एक जगह तो धार्मिक स्थल के दीवार से सटा दीवार थाना का है । लोग इतने उग्र थे कि पुलिस भी कुछ नहीं कर पाई, कुछ लोग तो यहाँ तक कह रहे हैं कि पुलिस पे कुछ नहीं करने का दवाब था उन्हें पटना से फोन आया था।

धर्म के नाम पर इसी तरह के दंगे की खबर बिहार के अन्य ज़िलों से भी आ रही है। अगर धर्म के नाम पर इसी तरह का हुड़दंग होता रहे तो समाज टुकड़ों में विखंडित हो जायेगा।

अगर इसे सामान्य नागरिक के दृष्टिकोण से देखा जाय तो इसके पीछे की राजनीति स्पस्ट दिखाई देती है। जब इसके पीछे राजनीति है तो तमाम राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को चाहिए कि एक साथ आकर समाज को विखण्डित होने से बचाएं। अगर आज हमने अपनी आंख और ज़ुबान बन्द कर ली तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ़ नहीं करेगी।

जो लोग अपनी राजनीतिक रोटी पुलिस तथा सुसंगठित भीड़ को सामने रख कर सेंक रहें हैं उन्हें याद रखना चाहिए कि वो देश की एकता और अखंडता तो धूमिल कर रहे हैं।

इसी सब को ध्यान में रख कर आज से 90 वर्ष पूर्व जून 1928 में ही भगत सिंह ने कहा था कि वर्तमान में, भारत एक दु:खद स्थिति में है। (कुछ) एक धर्म के अनुयायी दूसरे धर्म के अनुयायियों को अपना कट्टर शत्रु मानते हैं!(अतः) हमारी साँझी विरासत और रास्ट्रीय एकता को नष्ट करने के उद्देश्य से संकीर्ण विचारधारा और सांप्रदायिकता को फैलाने वालों का बहिष्कार करें।

हम सब यह भलीभांति जानते हैं कि धर्म के नाम पे दंगा भड़काने का काम हमेशा से हुआ है कभी सत्ता के लिए, तो कभी धर्म की रक्षा की आड़ में, सत्ता के दम पे समाज का विभाजन करने के पीछे शोषितों और वंचितों को उनके अधिकार और असल सवाल से दूर रखने का षडयंत्र हैं।

असल में नाकाम और निकम्मी सरकारों ने अपनी असफलता छुपाने के लिए हमेशा से ही समाज को दूसरे मुद्दों के दल-दल में धकेला है। उन्हें याद रखना चाहिए कि तमाम षड्यंत्रों के बावज़ूद आज भी हमारे देश की एकता और अखंडता बरकरार है, और प्रलय के दिन तक रहेगा।

अन्त में हम यह कामना करते हैं कि पूरे भारत और पूरे बिहार के लोग आपसी रंजिशों और लेफ्ट, राइट, तथा सेन्टर के डिबेट से ऊपर उठकर समाज बचाने के लिए सामने आएंगे। अगर क्षमता हो तो ज़ुल्म को हाथ से रोकिए, अगर ये ना हो पाए तो ज़ुबान से ज़ालिमों की मुख़ालिफत कीजिए, अगर इतना भी ना हो सके तो कम से दिल में ही ज़ालिमों को ज़ालिम मानिए और उससे अपने आप को अलग कर लीजिए।

शाहनवाज़ भारतीय
बेगूसराय, बिहार

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कई इमारतें गिरने के बाद भी भजनपुरा के सुभाष मोहल्ले में बिल्डर माफिया धड़ल्ले से कर रहे अवैध फ्लैट निर्माण!

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“सुभाष मोहल्ले की गली नंबर 13 में बिल्डर माफिया द्वारा बनाई जा रही हैं तीन अवैध इमारतें”

चौधरी हैदर अली
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में आए दिन इमारतें गिरने की खबर तो आप सुनते रहते होंगे आज हम आपको बताने जा रहे हैं आखिर इतनी इमारतें गिरने की क्या वजह है! जिसकी वजह से सैकड़ों लोग मलबे के ढेर में दब कर अपनी जान से हाथ धो बैठे!

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर और सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछले 5 सालों मे बिल्डर माफिया 500 से ज्यादा अवैध फ्लैट निर्माण करा चुके हैं जिनकी हालत अब जर्जर हो रही हैं और दर्जनभर इमारत तो मलबे के ढेर में तब्दील हो गई! इमारतें गिरने और जर्जर होने की वजह है बेकार मैटेरियल का इस्तमाल, बिल्डर माफिया चंद पैसों के खातिर लोगों की कीमती जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं, जिसे पूर्वी-दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार नज़र-अंदाज़ कर आंखें मूंदे तमाशा देख रही है!

स्थानीय लोगों का कहना है इस वक़्त बिल्डर माफिया बाबरपुर विधानसभा के वार्ड 48/E में काफी तेजी के साथ फ्लैट निर्माण कर रहे हैं, पिछले 2 साल में 100 से ज्यादा अवैध फ्लैट नुमा इमारतें बिल्डर माफिया बना चुके जिनमें से काफी इमारतें तो जर्जर भी हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं!सुभाष मोहल्ला वार्ड 48 ई की गली नंबर 13 में अब्दुल सलाम मस्जिद के आसपास रहने वाले लोगों ने कहां कि हमने गली में हो रहे तीनों अवैध निर्माणों की शिकायत नगर निगम को दी लेकिन बिल्डर माफियाओं की पहुंच काफी ऊपर तक होने की वजह से नगर निगम अधिकारियों ने सभी शिकायत कर्ताओं के नाम बिल्डर माफिया को बता दिए जिसके बाद बिल्डर माफियाओं ने शिकायत कर्ताओं को दोबारा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी!

People’s Beat ने जनता के आग्रह पर बिल्डर माफिया, स्थानीय पुलिस एवं नगर निगम के कर्मचारियों की शिकायत माननीय प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री जी को दे दी है!

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एक हारा हुआ सांसद, जिसने हजारों लोगों को अपने बल पर राहत पहुँचाया।

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बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं , इसका असर आम जन जीवन पर बहुत बुरा पड़ा है यातायात,स्वास्थ्य और खाने से लेकर पीने के पानी की समस्या से आम आदमी को जूझना पड़ रहा है, कुछ ही दिन हुए जब मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चे काल के गाल में समा रहे थे।
यह महज कुछ घटनाएं नहीं है यह पोल खोलती है हमारे तथाकथित विकास की क्या हम इतने गए गुजरे हो गए हैं कि कभी एक राज्य के कुछ जिले आपदा ग्रस्त हुए और सरकारी महकमा हाथ खड़े कर देता है,जिस तरह से सडा हुआ आलू और खाद्य सामग्री बिहार सरकार के द्वारा वितरित की जा रही है वह और ज्यादा रोगी बनायगी लोगों को।

मुख्य सवाल यही है कि लगे हाथ हम डोनेट का रोना रोने लगते है,और इसे उसे कोसने लगते हैं हम इस बात पर विचार करना क्यों जरूरी नहीं समझते कि यह सब आपदा प्रबंधन के लिए बड़े बड़े सरकारी महकमे बने हुए है जो मोटी तनख्वाहों से ऐशो आराम करते हैं..उनका काम इसी समय आता है।

इस बाढ़ का प्रकोप हो या चमकी बुखार का एक पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव खुले हाथों से लोगों की मदद करने को आगे रहे है, वह आज भी जेसीबी और टैक्टर पर बैठकर चलकर राहत सामग्री बांट रहे हैं।

जब यह मधेपुरा सांसद थे उस समय काफी बार इनसे मिलना होता था मंडी हाउस वाले आवास पर उस समय का एक वाकया याद आता है मैं छात्रसंघ का चुनाव लड़ रहा था और मेरी हर सम्भव मदद करने का आश्वासन इन्होंने दिया था, उसी समय कॉलेज में से फोन आता है कि कुछ लोग अपने प्रत्याशी से झगड़ा कर रहे हैं,जब स्तिथि से अवगत कराया तो सांसद जी ने तुरंत ही dsp को फोन कर स्तिथि सम्हालने की हिदायत दी थी।

वैसे मैं किसी का गुणगान करने से बचता हूँ लेकिन मेरे सहयोगियों द्वारा एक बार ही कहने पर यह पूरे जोश के साथ मेरा प्रचार करने भी आये थे कॉलेज में ,वह दौर गुजर गया कुछ यादें रह गयी लेकिन आज फिर एक अनुभव ताजा हो गया।

39 सांसदों में एक हारा हुआ सांसद मोर्चा संभाल रहा है………..और जनता अपना नेता चुनने में अक्सर भूल कर देती है कभी कभी।

अजीत आर्य

 

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पूर्व गृह मंत्री व् अनुभवी सीपीआई के नेता इन्द्रजीत गुप्ता का जन्म शताब्दी समारोह दिल्ली में मनाया गया

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इन्द्रजीत गुप्ता 1919-2001.

भारत के वो नेता जो सबसे अधिक 11 बार जीते लोकसभा चुनाव,  

CPI और AITUC के महासचिव रह चुके.

इंद्रजीत गुप्ता भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (CPI) के कुशल व् प्रखर राजनेता रहे हैं. उन्होंने 1960 में पहली बार हुए उपचुनावों से भारतीय राजनीति में कदम रखा और जीतकर लोकसभा में पहुंचे. साल 1919 में जन्मे इन्द्रजीत गुप्ता का 2001 में जब निधन हुआ तब भी वे लोकसभा के सदस्य थे. आज 21 जुलाई 2019 को इनका जन्मशताब्दी समारोह constitution club दिल्ली में मनाया गया जिसमे CPI(M) के महासचिव सीताराम येचुरी व् पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने शिरकत की. इन्द्रजीत गुप्ता को याद करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा “आज का यह अवसर लोकतंत्र को समृद्ध करने में इन्द्रजीत गुप्ता के योगदान को प्रतिबिंबित करता है. सीपीआई के ये पूर्व महासचिव जीवन भर मजदूर आन्दोलन के लिए समर्पित रहे.”

ये अनुभवी नेता बीच के 3 साल(1977 से 1980) को छोड़ कर ताउम्र सांसद रहे. उन्होंने शुरुआती चुनाव (1962 से 1967) कलकत्ता साउ‌थ वेस्ट इसके बाद (1967 से 1977) अलीपुर, (1980 से 1989) बशीरहाट और (1989-2001) मिदनापुर से चुनाव जीते. वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और All India Trade Union (AITUC) के महासचिव भी रह चुके हैं.

इन्द्रजीत गुप्ता एचडी देवगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल के शासनकाल में देश के गृहमंत्री रहे.  सादगी की मिशाल माने जाने वाले सांसद इन्द्रजीत गुप्ता गृह मंत्री बनने के बाद भी दिल्ली की वेस्टर्न कोर्ट में आवंटित आवास में रहते थे जहाँ आम तौर पर रसूख वाले सांसद रहने से कतराते हैं. कभी उनके निवास के ठीक बगल में रहने वाले वरिष्ठ राजनेता क्रांति प्रकाश बताते हैं, “देश के गृहमंत्री होने के बावजूद उन्होंने वेस्टर्न कोर्ट को नहीं छोड़ा. वे अपने दो-रूम के क्वॉर्टर से अपनी गतिविधियों को अंजाम देते थे. वे असल में सादगी के मिसाल थे.”

भारतीय जनता पार्टी के प्रखर नेता हुकुमदेव नारायण यादव ने संसद में बोलते हुए एक बार कहा था, ”वे एक कम्यूनिस्ट नेता थे. लेकिन इससे बड़ी बात यह थी कि वे एक महान सांसद थे.”

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