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बाढ़ बिहार में आई और आर्थिक मदद नेपाल को दी जाएगी

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बिहार बाढ़ से त्रस्त है और हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी को नेपाल की चिंता सता रही है। बिहार में आई बाढ़ को तो राहत सामग्री पहुचाई नही जा रही है और नेपाल के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते हुए वहां आई बाढ़ के लिए राहत सामग्री भेजने का प्रबंध किया जा रहा है।

Pmo india के ट्विटर से मिली जानकारी के अनुसार “भारत को नेपाल के विकास और आर्थिक प्रगति के प्रयासों में साझीदार होने का सौभाग्य प्राप्त है: PM @narendramodi”

Watch: https://t.co/vbG9VFN31Q

अन्य ट्वीट में लिखा गया है कि “आज प्रधानमंत्री देउबा और मैंने, दोनों देशों की साझेदारी की असीम संभावनाओं पर बहुत विस्तार से और बहुत सकारात्मक बातचीत की है:PM @narendramodi”

नेपाल को मध्यनजर रखते हुए अन्य ट्वीट में लिखा गया है कि “नेपाल की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए, नेपाल के विकास में अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए, भारत पूरी तरह प्रतिबद्ध है: PM @narendramodi”

Pmo india द्वारा एक अन्य ट्वीट में लिखा गया कि “नेपाल में आई बाढ़ के संदर्भ में बात करें, तो मैंने भारत की तरफ से हर संभव सहायता का प्रस्ताव फिर दोहराया है: PM @narendramodi”

आगे लिखा गया “हम अपनी आर्थिक साझेदारी के विभिन्न आयामों, जैसे energy, water resources, connectivity projects के कार्यों में साथ मिलकर काम कर रहे हैं: PM”

Pmo india में आगे लिखा गया “मुझे विश्वास है कि हमारी आज की चर्चा और जिन समझौतों पर हमने सहमति जताई है, वो हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक नई ऊर्जा का संचालन करेंगे: PM”

 

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मंत्री भी तलने लगे पकौड़ा- सरकार को भी मिला रोज़गार:- रवीश कुमार

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प्रधान सेवक के सच्चे सेवक। पकौड़ा तलते हुए मंत्री जी। स्व-रोज़गार जनता का है या सरकार का? सरकार रोज़गार दे नहीं सकती( कोई भी सरकार) तो वह आपके रोज़गार को अपना तो बता ही सकती है। प्रधानमंत्री के पकौड़ा तलने की बात की आलोचना हुई, लतीफ़े बने और लोग भूल गए। मंत्री जी उनकी बात को सैद्धांतिक जामा पहनाते हुए। अपने फ़िटनेस का प्रदर्शन काम से ज्यादा करते हैं।तस्वीरों के ज़रिए लोगों के मन में कई परतें बनानी होती हैं। नेता सामान्य है यह सबसे बड़ी तस्वीर है। यह समोसा खाकर या पकौड़ा तल कर हासिल की जा सकती है। जनता अपने चश्मे का नंबर बदले या शीशा साफ़ करे, उलझन में है। चुनाव नेता का मनोरंजन है और जनता का रसरंजन। नौजवान पकौड़ा तलें। परीक्षा की तैयारी न करें। हिन्दू- मुस्लिम कीजिए। नेता यही चाहते हैं। रोज़गार की चिन्ता न करें। पकौड़ा कभी भी तला जा सकता है। दरअसल यहाँ पकौड़ा नहीं जनता के अरमानों को तला जा रहा है।

तस्वीर – राजस्थान पत्रिका से साभार

नोट- कई लोग कमेंट में लिख रहे हैं कि जकार्ता एशियाड में मंत्री जी खिलाड़ियों को नाश्ता पेश कर रहे थे। 26 अगस्त को उनकी ट्रे लेकर जाते हुए तस्वीर ट्वीट होती है जिसमें इस बारे में कुछ नहीं लिखा होता है। सिर्फ तस्वीर होत है। सबने अतिउत्साह में यह खबर चला दी कि मंत्री नाश्ता पेश कर रहे हैं जो कि सही नहीं था। Alt news ने उस पर विस्तार से लिखा था, आप देख सकते हैं। मगर आल्ट न्यूज़ से ज्यादा लोगों तक तस्वीर के बहाने झूठी कहानी पहुंची और दिमाग़ में रह गई। अब आप चेक नहीं करेंगे, खुद को सतर्क नहीं रखेंगे तो ऐसी छवियों के जाल में फंसेंगे।

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संघ – भाजपा में खलबली, भाजपा नेता ने आपातकाल जैसे हालात बताकर दिया इस्तीफ़ा

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राजस्थान में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी सत्तारूढ़ भाजपा को अपने वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवारी के इस्तीफे से झटका लगा है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सरपरस्ती में पोषित और पल्लवित तिवारी ने ये कहते हुए भाजपा से अपना वर्षों पुराना नाता तोड़ लिया कि देश और प्रदेश अघोषित आपातकाल में जी रहा है.

सत्तारूढ़ भाजपा ने तिवारी के इस्तीफ़े की ये कहकर महत्ता कम करने की कोशिश की है कि इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.

राज्य में छह बार विधायक और दो बार मंत्री रहे तिवारी ने राजस्थान में भाजपा के पितृ पुरुष रहे भैरोंसिंह शेखावत के सानिध्य में सियासत की सीढ़ियां चढ़ीं और फिर सत्तारूढ़ भाजपा में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मुखर विरोधी होकर उभरे.

देश में आपातकाल लगा तो तिवारी ये नारा बुलंद करते रहे- ‘संघ पर प्रतिबंध लगाया है, सोता शेर जगाया है.’

भारत में हालात आपातकाल से कम नहीं

वह इमरजेंसी में जेल में रहे लेकिन अब संघ के ये स्वंयसेवक ये कहकर भाजपा से अलग हो गए कि भारत में हालात आपातकाल से कम नहीं हैं.

वह कहते हैं, “आपातकाल घोषित था, अब एक अघोषित इमर्जेंसी है. मीडिया की ज़बान बंद है और न्यायपालिका पर भी दबाव है.”

कभी पूर्व मंत्री तिवारी ने भाजपा का ब्राह्मण चेहरा बनने की कोशिश की और सवर्ण वर्ग के ग़रीब समुदाय के लिए आरक्षण की पैरवी की. अब वे भारत वाहिनी पार्टी नाम से नया दल बनाकर सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस को चुनौती दे रहे हैं.

इस लंबे सियासी सफर में उनके सहयात्री रहे गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने मीडिया से कहा, “तिवारी के जाने से पार्टी में कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.”

बीजेपी सरकार में मंत्री अनीता भदेल ने कहा, “तिवारी एहसान फ़रामोश हैं.”

लेकिन तिवारी कहते हैं, “मुख्य मंत्री राजे के सम्मुख बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने घुटने टेक दिए. राजस्थान को बहुत लूटा गया है और विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस विफल साबित हुई है. ऐसे में मैं राज्य के सामने एक सार्थक विकल्प लेकर आया हूं.”

भाजपा से अलग होने पर दुख भी जताया

राजस्थान में भाजपा सरकार गठित होने के साथ ही तिवारी की गिनती उन गिने-चुने नेताओं में होने लगी जो मुख्यमंत्री राजे के विरुद्ध मोर्चा खोले हुए मिले.

हाल में जब अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से बंगले खाली कराने का आदेश जारी किया तो तिवारी ने इसे मुद्दा बनाया और मुख्यमंत्री राजे को निशाने पर लिया. उनका कहना था कि राजे को मुख्यमंत्री के लिए नामित आवास में जाना चाहिए.

तिवारी से पूछा गया कि वे बीजेपी हाई कमांड से क्यों बात नहीं करते?

इसपर वे कहने लगे, “हाई कमांड ने सुना और माना कि राजस्थान में भारी भ्रष्टाचार है, मगर आखिर में पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान के मामले में निर्बल और बेबस साबित हुआ.”

तिवारी कहते हैं कि उनकी नई पार्टी राज्य के सभी 200 विधान सभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ेगी.

राज्य की राजनीति के जानकार एक प्रेक्षक कहते हैं, “तिवारी की ये पहल ब्राह्मण वोटों पर असर डाल सकती है. यह कांग्रेस के लिए भी नुकसान कर सकता है और भाजपा के लिए भी. लेकिन इतना तय है कि इससे भाजपा की फ़िज़ा खराब हुई है.”

भाजपा से वर्षों पुराना नाता तोड़ते हुए तिवारी ने पार्टी प्रमुख अमित शाह को एक भावपूर्ण चिट्ठी लिखी और कहा, “छह-सात साल की उम्र में मैं संघ से जुड़ा और फिर तृतीय वर्ष तक दीक्षित हुआ. मैं विद्यार्थी परिषद से लेकर अनेक अनुसांगिक संगठनों के साथ रहा. इतना लंबा वक्त साथ गुज़ारने के बाद अब अलग होने का मुझे गहरा दुख है.”

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INTERNATIONAL YOGA DAY SPECIAL : योगा ब्राह्मणों का मनरेगा है

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योगा ब्राह्मणों का मनरेगा है,
जिसमें कुछ काम गैर-ब्राह्मणों के हिस्से भी आएगा.
लेकिन यह रहेगा ब्राह्मणों का ही मनरेगा.

भारत सरकार जिस योग को फैलाना चाहती है, उसका किसी धर्म से कोई लेनादेना नहीं है, ऐसा कहने वाले सरासर झूठ बोल रहे हैं। आश्चर्य है कि योग ने उन्हें सच बोलने की तमीज़ नहीं सिखाई।

देखिए भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में योगा कैसे पढ़ाया जाता है और उसका टीचर कैसे बनते हैं-

योग का UGC यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन का सिलेबस देखिए। 100 नंबर का इसमें एक पेपर है। इसमें चार टॉपिक पढ़ना है। सांख्य योग, गीता, उपनिषद और ईश्वर और मनुष्य का संबंध।

योगा का सरकारी टीचर बनने के लिए संस्कृत पढ़ना जरूरी है. यह सिलेबस में है.

इसलिए धोखे में न रहें। योग मतलब सिर्फ कसरत करना नहीं है। सिलेबस के मुताबिक, यह भी पढ़ना है कि रिश्तेदारों के साथ युद्ध करना क्यों जरूरी है। सिलेबस देखिए। पूरे सिलेबस का लिंक कमेंट में है।

इस सौ नंबर के अलावा 35 नंबर संस्कृत का है। बाकी पेपर में भी ढेर सारा धर्म है।

लेकिन यह अच्छा है कि किसी धर्म के लोगों ने योग का विरोध नहीं किया। वरना दादरी और कैराना के साथ RSS इसे भी चुनावी मुद्दा बना लेगा।

वैसे मुझे लगता है कि योग एक खास बिरादरी के लिए मनरेगा है। योगा ट्रेनर की काफी नौकरियाँ निकलेंगी। कोर्स में संस्कृत को शामिल करके सरकार ने खेल कर दिया है।

दिलिप मंडल की फेसबुक दीवार से

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