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बीट विशेष

जिस वजह से भीम राव अम्बेडकर ने दे दिया मंत्री पद से इस्तीफा

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डा.अम्बेडकर को याद करते हुए…
आज डा.भीमराव अम्बेडकर का जन्मदिन है.अपने जीवन में डा.अम्बेडकर ने बहुत सारी भूमिकाएं अदा की.वे संगठक थे,प्रकाशक-सम्पादक थे,राजनीतिक नेता,सांसद,मंत्री रहे.लेकिन इन सब भूमिकाओं के मूल में एक साम्यता है कि उन्होंने जो भी काम किया,उसमें स्वयं के हित के बजाय उत्पीड़ित,दमित,दलित लोगों की आवाज को आगे बढाने के लिए किया.उन्होंने संगठन बनाये,पार्टी बनाई-बहिष्कृत हितकारिणी,इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी और फिर शिड्यूल कास्ट फेडरेशन.हर बार लक्ष्य एक ही था कि हाशिये के स्वरों को मुख्यधारा का स्वर बनाया जाए.जीवन पर्यंत भूमिकाएं बदलती रही पर लक्ष्य हमेशा एक ही रहा.

वे सिर्फ दलितों के नेता नहीं थे बल्कि समाज के हर उत्पीड़ित हिस्से की आवाज़ थे.इसीलिए बम्बई असेंबली में मजदूरों के हड़ताल के अधिकार के पक्ष में मुखर स्वर थे.उनकी पार्टी-इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी के एजेंडे में ऐसे आर्थिक तंत्र को सुधारने या उलटने की बात थी,जो लोगों के किसी वर्ग के प्रति अन्यायपूर्ण हो.जमींदारों के जुल्म से बटाईदारों को बचाने की बात भी इस कार्यक्रम में थी.महिला अधिकारों वाले हिन्दू कोड बिल को पास न कराने के मसले पर तो अम्बेडकर ने मंत्री पद से ही त्याग पत्र दे दिया था.इस प्रकार, हर तरह की गैरबराबरी के खिलाफ वे थे.लेकिन निश्चित ही जातीय भेदभाव और उत्पीड़न(जिसे वे खुद भी भुगत चुके थे),भारतीय समाज में मौजूद उत्पीड़न का सर्वाधिक मारक रूप था(है),इसलिए उसकी समाप्ति के लिए वे जीवन पर्यंत लड़ते रहे.

आज के दौर के कई सबक, अम्बेडकर के लिखे में तलाशे जा सकते हैं.आज राजनीति का ऐसा स्वरूप खड़ा कर दिया गया है,जिसमें नेता, मनुष्य नहीं अराध्य है.उस पर किसी तरह का सवाल उठाना,उसके भक्तों द्वारा पाप की श्रेणी में गिना जा रहा है.अब देखिये, अम्बेडकर का इस बारे में क्या मत है.वे कहते हैं- “धर्म में भक्ति(नायक पूजा) हो सकता है कि आत्मा के मोक्ष का मार्ग हो,लेकिन राजनीति में भक्ति निश्चित ही पतन और निर्णायक तौर पर तानाशाही की ओर ले जाने वाला रास्ता है.” अम्बेडकर के लिखे,इस वाक्य में राजनीति के इस ‘भक्तिकाल’ की मंजिल देखी जा सकती है.

कानून मंत्री के रूप में संसद से हिन्दू कोड बिल पास न करवा पाने के चलते अम्बेडकर ने इस्तीफ़ा दे दिया.इस मसले पर उन्होंने कहा “……..वर्ग और वर्ग के बीच भेद,लिंग और लिंग के बीच भेद,जो हिन्दू समाज की आत्मा है,उसे अनछुआ छोड़ दिया जाए और आर्थिक समस्याओं से जुड़े कानून पास करते जाएँ तो यह हमारे संविधान का मखौल उड़ाना और गोबर के ढेर पर महल खड़ा करना है.”आज देखें तो लगता है कि वह गोबर का ढेर,महल से भी बड़ा हो गया है और फैलता ही जा रहा है.

वह देश जिसकी परिकल्पना भारत के संविधान की प्रस्तावना में है- “संप्रभु, समाजवादी,धर्मनिरपेक्ष,जनतांत्रिक गणराज्य”,वह भी धूरी-धूसरित होती प्रतीत हो रही है.इसलिए एक आधुनिक देश की परिकल्पना को साकार करने की चुनौती, अम्बेडकर को याद करते हुए हमारे सामने हैं.
इस लक्ष्य के लिए,अम्बेडकर का दिया सूत्र हमारे पास है-educate,agitate,organise (शिक्षित बनो,संघर्ष करो,संगठित हो)
जय भीम,लाल सलाम.
-इन्द्रेश मैखुरी

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क्या 50 किमी दूरी कम करने के लिए इतना पैसा और प्राकृतिक संसाधन ख़त्म कर देना चाहिए?

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नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का मोदी पर हल्ला बोल, कहा- देश ने लगाई गलत दिशा में छलांग

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नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होने के बावजूद 2014 से गलत दिशा में लंबी छलांग लगाई है। उन्होंने कहा कि पीछे जाने के कारण भारत इस क्षेत्र में दूसरा सबसे खराब देश है।

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री सेन ने कहा, ‘चीजें बहुत बुरी तरह खराब हुई हैं, 2014 से इसने गलत दिशा में छलांग लगाई है। हम तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में पीछे की तरफ जा रहे हैं।’

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित इस अर्थशास्त्री ने अपनी किताब ‘भारत और उसके विरोधाभास’ को जारी करने के अवसर पर रविवार को यह बात कही। यह उनकी किताब ‘एन अनसर्टेन ग्लोरी: इंडिया एंड इट्स कंट्राडिक्शन’ का हिन्दी संस्करण है। यह किताब उन्होंने अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज के साथ लिखी है।

अमर्त्य सेन ने कहा कि बीस साल पहले छह देशों भारत, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान में से भारत का स्थान श्रीलंका के बाद दूसरे सबसे बेहतर देश के रूप में था। उन्होंने कहा, ‘अब यह दूसरा सबसे खराब देश है। पाकिस्तान ने हमें सबसे खराब होने से बचा रखा है।’

सेन ने कहा कि सरकार ने असमानता और जाति व्यवस्था के मुद्दों की अनदेखी कर रखी है और अनुसूचित जनजातियों को अलग रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के समूह है जो शौचालय और गंदगी हाथों से साफ करते हैं। उनकी मांग और जरूरतों की अनदेखी की जा रही है।

वहीं, बीजेपी शासित सरकार को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि स्वाधीनता संघर्ष में यह मानना मुश्किल था कि हिंदू पहचान के जरिए राजनीतिक लड़ाई जीती जा सकती है किन्तु अब तस्वीर बदल गई है। उन्होंने कहा, ‘किंतु ऐसा हुआ है, यही वजह है कि इस समय विपक्षी एकता का पूरा मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है।’

सेन ने कहा, ‘यह एक प्रतिष्ठान के खिलाफ अन्य की लड़ाई नहीं है, श्री मोदी बनाम श्री राहुल गांधी की नहीं है, यह मुद्दा है कि भारत क्या है।’

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भाजपा ने युवा पीढी को बर्बाद करने की तैयारी पूरी कर ली, सट्टेबाजी और जुआ होगा वैध

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नई दिल्ली: विधि आयोग ने सिफारिश की है कि क्रिकेट समेत अन्य खेलों पर सट्टे को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर प्रणालियों के तहत नियमित कर देय गतिविधियों के रूप में अनुमति दी जाए और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के लिए स्रोत के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाए. इस पर कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सरकार जुए-सट्टे के माध्यम से पीढ़ियों को बर्बाद करने की तैयारी में है.

गौरतलब है कि आयोग की रिपोर्ट ‘लीगल फ्रेमवर्क: गैंबलिंग एंड स्पोर्ट्स बेटिंग इनक्लूडिंग क्रिकेट इन इंडिया’ में सट्टेबाजी के नियमन के लिए और इससे कर राजस्व अर्जित करने के लिए कानून में कुछ संशोधनों की सिफारिश की गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘संसद सट्टेबाजी के नियमन के लिए एक आदर्श कानून बना सकती है और राज्य इसे अपना सकते हैं या वैकल्पिक रूप में संसद संविधान के अनुच्छेद 249 या 252 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विधेयक बना सकती है. यदि अनुच्छेद 252 के तहत विधेयक पारित किया जाता है तो सहमति वाले राज्यों के अलावा अन्य राज्य इसे अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगे.’

आयोग ने सट्टेबाजी या जुए में शामिल किसी व्यक्ति का आधार या पैन कार्ड भी लिंक करने की और काले धन का इस्तेमाल रोकने के लिए नकदी रहित लेन-देन करने की भी सिफारिश की.

वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार जुए-सट्टे के माध्यम से पीढ़ियों को बर्बाद करने की तैयारी में है.

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी दावा किया कि देश की जनता सरकार के ‘षढयंत्रकारी निर्णयों’ को देख रही है और आगामी चुनावों में सबक सिखाएगी.

उन्होंने काव्यात्मक अंदाज में तंज कसते हुए कहा, ‘गरीब की जिंदगी में जुए के जहर का घोल, टैक्स के लिए भविष्य पर सट्टे का मोल. पहले रोजगार के नाम पर थी पकौड़े बिकवाने की बारी, अब जुए-सट्टे से रोजगार दे पीढ़ियों को बर्बाद करने की तैयारी.’

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