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जानकर आप भी रह जाएंगे भौचक: स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ वाजपेयी की गवाही

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दीपक कुमार@peoplesbeat

राम जेठमलानी ने एक पत्रकारवार्ता में लीलाधर वाजपेयी को ला खड़ा किया जिनका दावा है कि अटल बिहारी वाजपेयी की गवाही पर चार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सज़ा सुनाई गई थी.
लीलाधर वाजपेयी आगरा के पास बटेश्वर गाँव के ही रहने वाले हैं जो प्रधानमंत्री वाजपेयी का भी गाँव है.

उनका कहना है कि 27 अगस्त 1942 को कोई डेढ़ दो सौ लोग जंगल विभाग की एक बिल्डिंग पर तिरंगा झंडा फहरा रहे थे. उस समय अटल बिहारी वाजपेयी और उनके भाई प्रेम बिहारी वाजपेयी भीड़ से दूर खड़े हुए थे.
उन्होंने पत्रकारवार्ता में बताया कि पुलिस ने उसी समय बहुत से लोगों को गिरफ़्तार कर लिया. उनमें अटल बिहारी वाजपेयी और उनके भाई भी थे.

उनका कहना है, ”वाजपेयी जी के पिता ने अंग्रेज़ अफ़सरों से कहकर दोनों भाइयों को छुड़वा लिया और इन दोनों भाइयों ने बाद में स्वतंत्रता सेनानियों के ख़िलाफ़ अदालत में गवाही दी थी.”
अदालत के कागज़ात बाँटते हुए लीलाधर वाजपेयी ने कहा कि दोनों भाइयों की गवाही से चार स्वतंत्रता सेनानियों को जेल भी जाना पड़ा.
उनका आरोप है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने बाद में अपने भाई को ताम्रपत्र भी दिलवा दिया.
उन्होंने कहा कि अदालत में आरोप लगाया गया था कि सरकारी इमारत को जलाया गया और गिरा दिया गया लेकिन सच यह है कि वहाँ सिर्फ़ झंडा फहराया गया था.

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सबसे दिलचस्प यह है कि ये वही अटल बिहारी वाजपेयी हैं जिन्होंने स्वयं इस बात को कबूला है कि उन्होंने वर्ष 1942 में अंग्रेजों की मुखबिरी की। मुखबिरी यानी देश की आजादी की लड़ाई लड़ रहे देशभक्तों के साथ गद्दारी।

वाजपेयी के गद्दार होने की बात वर्ष 1998 में एक अंग्रेजी पत्रिका “फ़्रंटलाइन” ने प्रमाण के साथ प्रकाशित किया था। इस पत्रिका के मुताबिक 1 सितंबर 1942 को वाजपेयी ने एक दंडाधिकारी के समक्ष एक बयान दिया था। इस बयान में वाजपेयी का बयान उर्दू और हस्ताक्षर अंग्रेजी में था। इसके अलावा मजिस्ट्रेट ने अपनी टिप्प्णी अंग्रेजी में लिखा था। उस समय वाजपेयी 16 साल के थे और आरएसएस के सक्रिय सदस्य थे। यह उल्लेखनीय है कि आरएसएस का स्वतंत्रता संग्राम से कोई लेना देना नहीं था। वह केवल देश में हिन्दूओं को प्रधानता मिले, इसका पक्षधर थी। यहां तक कि वाजपेयी ने भी स्वयं स्वीकार किया है कि उन्होंने आजादी की लड़ाई में भाग नहीं लिया। फ़्रंटलाइन के संपादक को दिये साक्षात्कार में वाजपेयी ने स्वीकार किया कि 27 अगस्त 1942 को आगरा मे अपने गांव बटेश्वर में एक प्रदर्शन के दौरान वे एक दर्शक की भूमिका में थे।
1 सितंबर 1942 को अटल बिहारी वाजपेयी ने क्लास-2 मजिस्ट्रेट एस हसन के समक्ष अपना बयान दिया था। उनके इसी बयान पर उनके मित्र लीलाधर वाजपेयी को सजा मिली थी। वाजपेयी के जैसे उनके बड़े भाई प्रेम बिहारी वाजपेयी ने भी देश के साथ गद्दारी की थी। उन्होंने भी समान बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया था। मजिस्ट्रेट ने अटल बिहारी वाजपेयी से पूछा था कि क्या तुमने किसी हिंसक गतिविधि में भाग लिया है? अपने बयान में तब वाजपेयी ने कहा था कि

मेरा नाम : अटल बिहारी, पित का नाम : गौरी शंकर, मेरी जाति : ब्राह्म्ण, उम्र : 20 वर्ष, पेशा : छात्र, ग्वालियर कालेज, मेरा पता : बटेश्वर, थाना : बाह, जिला , आगरा है।

27 अगस्त 1942 को प्रदर्शनकारी बटेश्वर बाजार में एकजुट हुए थे। तब 2 बजे के करीब ककुआ ऊर्फ़ लीलाधर और महुआन वहां आये और भाषण दिया। भाषण देने के क्रम में इन दोनों ने लोगों को कानून तोड़ने को प्रेरित किया। करीब 200 लोगों ने बटेश्वर में वन विभाग के कार्यालय को घेर लिया। मैं और मेरे भाई दोनों अलग थे। सभी लोग कार्यालय का दरवाजा तोड़कर अंदर घुस गये। मैं केवल ककुआ और महुआन दो लोगों का नाम जानता हूं और किसी का नहीं। मुझे लगा कि ईंटें गिरने लगी हैं। मैं नहीं जानता कि ईंटें कौन फ़ेंक रहा था लेकिन ईंटें जरुर गिर रही थीं।

यह देखकर मैं और मेरे भाई वहां से निकल मयपुरा की ओर जाने लगे। हमारे पीछे भीड़ थी। उस समय फ़ारेस्ट आफ़िसर के कार्यालय को लोग तोड़ रहे थे। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं थी। मैं 100 गज दूर खड़ा था।

अटल बिहारी वाजपेयी के इस बयान को मजिस्ट्रेट एस हसन के समक्ष रिकार्ड किया था। मजिस्ट्रेट ने उनके बयान में अपनी ओर से यह टिप्पणी अंग्रेजी में दर्ज की।
I have explained to Atal Behari son of Gauri Shankar that he is not bound to make a confession and that if he does so, any confession he may make may be used as evidence against him. I believe that this confession was voluntarily made. It was taken in my presence and hearing and was read over to Atal Behari who made it; it was admitted by him to be correct and it contains a full and true account of the statement made by him.
Signed: S. Hassan

Magistrate II Class

1.9.1942.

(लेखक इंजीनियर है और समाज से जुड़े मुद्दों पर लिखते रहते है)

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भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं पर लगे आजीवन प्रतिबंध: अखिलेश यादव

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Story By/- Haidar Baaghi

समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा नेताओं के बयानों की भाषा को लेकर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें जमकर निशाने पर लिया है! उनकी मांग है कि ऐसे नेताओं पर कार्रवाई करके उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया जाना चाहिए! यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि ‘भाजपा के जनप्रतिनिधियों का हिंसक वाचन एक भयावह स्थिति है! निम्नस्तरीय भाषा का इस्तेमाल न केवल छुटभइये नेता कर रहे हैं, बल्कि भाजपा के मंत्री भी वही भाषा बोल रहे हैं! ‘डंके की चोट पर’… ‘बोली के बदले गोली’ और ‘गोली मारो……..’ के साथ ही अब भाजपाई धुरंधर आजादी की लड़ाई के इतिहास को भी बिगाड़ने में लग गए हैं!


अखिलेश यादव ने भाजपा नेता अनंत हेगड़े के महात्मा गांधी पर दिए बयान पर क्षोभ जताते हुए कहा कि ‘गांधी जी के नेतृत्व में जिस आजादी के लिए लाखों लोगों ने कुर्बानी दी उसे भाजपा के एक सांसद को अंग्रेजों की सहमति से नाटक बताते शर्म नहीं आई, अखिलेश ने भाजपा पर यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं की नफरत भरी बयानबाजी के चलते कुछ युवा गुमराह होकर उन्मादी हो रहे हैं! अखिलेश यादव ने कहा, आज के सत्ताधारी जिस प्रकार समाज को नफरत से भर रहे हैं उसी का ये दुष्परिणाम है कि कुछ नौजवान असलहों के साथ साम्प्रदायिक उन्माद का प्रदर्शन करने लग गए हैं! राजनीति द्वारा पोषित इस घृणा से युवाओं में जो भटकाव आ रहा है, वह समाज और राष्ट्र की चिंता का विषय है! भाजपा-आरएसएस को इसके दुष्परिणामों से अभी से सबक लेना चाहिए!

अखिलेश यादव ने दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जिस तरह से सियासी पार्टियों ने अलग-अलग तरीके से बयान जारी किए हैं उस पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि, दिल्ली के चुनावों में भाजपाई बदजुबानी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है! इससे साबित होता है कि भाजपा अपनी साख और जमीन दोनों खोती जा रही है! भाषा के स्तर में गिरावट राजनीति में घटिया सोच और संकीर्ण मानसिकता को उजागर करती है! माननीय उच्च न्यायालय और चुनाव आयोग को बिगड़े बोलों का संज्ञान लेकर तुरन्त दंण्डात्मक कार्यवाही करनी चाहिए!

अखिलेश यादव ने मांग की है कि जरूरी तो यह है कि जानबूझकर भड़काऊ बयान देने वाले ऐसे असामाजिक तत्वों की संसद या विधानमंडल की सदस्यता रद्द करके इन पर सदैव के लिए प्रतिबंध लगाना चाहिए! साथ ही आगामी चुनावों में उन विषयों की सूची चुनाव आयोग को पहले से ही जारी करनी चाहिए जिन पर बोलने से दोषी की उम्मीदवारी रद्द हो जाए!

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भारत के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को लेकर शाहीनबाग के प्रदर्शनकारी दो गुटो में बटे।

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Story By/- Haidar Baaghi

भारत के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को लेकर शाहीनबाग के प्रदर्शनकारी दो गुटो में बंट गए हैं! याद रहे गृहमंत्री अमित शाह ने प्रदर्शनकारियों को एक चैनल के माध्यम से मुलाकात का न्योता दिया था। शाहीनबाग के कुछ प्रदर्शनकारी गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के पक्ष में आगे आए हैं, इन प्रदर्शनकारियो का कहना है कि वे आज दोपहर दो बजे मार्च करते हुए गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर उनसे मिलने के लिए जाएंगे!

दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार अमित शाह से मुलाकात और मार्च को लेकर अब तक किसी ने पुलिस से संपर्क नहीं किया है, मार्च की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि प्रदर्शनकारी मिलना चाहते हैं, तो वे गृह मंत्रालय से प्रतिनिधिमंडल मंडल की मुलाकात के लिए संपर्क करें! लेकिन शाहीनबाग से मार्च करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी!

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दिल्ली में बीजेपी की करारी हार का मतलब जनता धर्म पर नहीं कर्म पर वोट देगी। Prakash Raj

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Story By/- Haidar Baaghi

आम आदमी पार्टी की 62 सीट पर हुई इस प्रचंड जीत और बीजेपी की 08 पर हुई करारी शिकस्त पर नेता, अभिनेता एवं देश के सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रियाओं का भी दौर शुरु हो गया है। People’s BEAT के Associate Editor, Haidar Baaghi ने दिल्ली विधानसभा चुनाव नतीजे पर बॉलीवुड एक्टर Prakash Raj से टेलीफोन पर बातचीत कर उनकी प्रतिक्रिया जानना चाही। चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए Prakash Raj ने BJP पर ज़ोरदार कटाक्ष करते हुए कहा “राजधानी की जनता ने गोली मारने वालों को झाड़ू से मार साबित कर दिया” भाजपा हमें धर्म का नाम लेकर एक बार बेवकूफ बना सकती है बार-बार नहीं।

क्या दिल्ली विधानसभा चुनाव में BJP की हार के जिम्मेदार इनके बकैत नेताओं की बकैती है?

बीजेपी ने दिल्ली चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई बना लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के तमाम दिग्गज नेताओं ने इस चुनाव में अपना पूरा ज़ोर आज़माया। बीजेपी की ओर से चुनाव को हिन्दुस्तान बनाम पाकिस्तान की जंग बताया गया। बीजेपी के कई नेताओं ने तो चुनाव जीतने के लिए दिल्ली की जनता को डराना एवं उकसाना तक शुरु कर दिया था।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने विपक्षियों को घेरते हुए ‘देश के गद्दारों को गोली मारो सालों को’ का नारा लगवाया था। इतना ही नहीं बीजेपी के एक और नेता एवं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आतंकवादी तक बता डाला था।

बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने तो यहां तक कह दिया था अगर बीजेपी हार गई तो दिल्ली की बहन बेटियां सुरक्षित नहीं रहेंगी। लेकिन बीजेपी की डराने की राजनीति को दिल्ली की जनता ने दरकिनार कर दिया और विकास के नाम पर वोट मांगने वाले अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर दिल्ली का सीएम चुन लिया।

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