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कोरोना के बाद चीन में मिले जानलेवा “बूबोनिक प्लेग” के मरीज, अलर्ट जारी

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चीन के भीतरी मंगोलिया के एक शहर में अधिकारियों ने रविवार को एक अस्पताल में संदिग्ध बुबोनिक प्लेग के मामले की सूचना के एक दिन बाद चेतावनी जारी की ।

मध्य युग में “ब्लैक डेथ” के रूप में जाना जाने वाला बुबोनिक प्लेग एक अत्यधिक संक्रामक और अक्सर घातक बीमारी है जो ज्यादातर कृंतक द्वारा फैलती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि प्लेग एक संक्रामक रोग है जो यरसिनिया पेस्टिस, एक ज़ूनोटिक बैक्टीरिया है, जो आमतौर पर छोटे स्तनधारियों और उनके fleas में पाया जाता है ।

लोग प्लेग को अनुबंधित कर सकते हैं यदि वे संक्रमित fleas द्वारा काटे जाते हैं और प्लेग के बुबोनिक रूप को विकसित करते हैं। कभी-कभी बुबोनिक प्लेग जब बैक्टीरिया फेफड़ों तक पहुंचता है तो निमोनिक प्लेग की प्रगति होती है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बुबोनिक प्लेग प्लेग का सबसे आम रूप है और संक्रमित पिस्सू के काटने के कारण होता है।

यह कहते हैं, प्लेग बैसिलस, वाई पेस्टिस, काटने पर प्रवेश करती है और लिम्फेटिक सिस्टम के माध्यम से निकटतम लिम्फ नोड में यात्रा करती है जहां यह खुद को दोहराती है। लिम्फ नोड तो सूजन, तनाव और दर्दनाक हो जाता है, और एक ‘ bubo ‘ कहा जाता है ।

संक्रमण के उन्नत चरणों में, सूजन लिम्फ नोड्स मवाद से भरे खुले घावों में बदल सकते हैं। मानव से मानव के लिए मानव प्रसारण bubonic प्लेग दुर्लभ है।

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बुबोनिक और निमोनिक प्लेग के बीच क्या अंतर है?

बुबोनिक प्लेग प्लेग का सबसे आम रूप है लेकिन आसानी से लोगों के बीच प्रेषित नहीं किया जा सकता है। बुबोनिक प्लेग वाले कुछ लोग निमोनिक प्लेग विकसित करेंगे।

निमोनिक प्लेग, या फेफड़ों आधारित प्लेग, प्लेग का सबसे उग्र रूप है और 24 घंटे के रूप में कम के रूप में एक इनक्यूबेशन अवधि है । निमोनिक प्लेग वाला व्यक्ति बूंदों के माध्यम से खांसी के माध्यम से दूसरों को बीमारी संचारित कर सकता है।

बुबोनिक प्लेग की मृत्यु दर 30% से 60% है, जबकि इलाज के अभाव में निमोनिक रूप घातक है। दोनों प्रकार के बिमारियों के ठीक होने के दर सही है अगर सही समय पर इलाज मिल जाये

क्या यह मानव से मानव में फ़ैल सकता है?

व्यक्ति-से-व्यक्ति संचरण एक ऐसे व्यक्ति की संक्रमित श्वसन बूंदों के साँस लेने के माध्यम से संभव है, जिसके पास निमोनिक प्लेग है। आम एंटीबायोटिक्स प्लेग का इलाज संभव हैं, अगर वे बहुत जल्दी पता लगा लिया जाए क्योंकि रोग आमतौर पर तेजी से फैलता है ।

इसके लक्षण क्या हैं?

प्लेग से संक्रमित लोग आमतौर पर एक से सात दिनों की इनक्यूबेशन अवधि के बाद अन्य गैर-विशिष्ट प्रणालीगत लक्षणों के साथ तीव्र ज्वर रोग विकसित करते हैं।

लक्षण आम तौर पर बुखार, ठंड लगना, सिर और शरीर में दर्द, कमजोरी, उल्टी और मतली की अचानक शुरुआत शामिल हैं । बुबोनिक प्लेग के दौरान दर्दनाक और सूजन लिम्फ नोड्स भी दिखाई दे सकते हैं।

निमोनिक रूप के लक्षण संक्रमण के बाद जल्दी दिखाई देते हैं, कभी-कभी 24 घंटे से कम, और सांस लेने और खांसी की तकलीफ जैसे गंभीर श्वसन लक्षण शामिल होते हैं, अक्सर रक्त-दागी थूक के साथ।

क्या शवों से प्लेग फैल सकता है?

प्लेग से संक्रमित होने के बाद मरने वाले किसी व्यक्ति का शरीर उन लोगों को संक्रमित कर सकता है जो निकट संपर्क में हैं, जैसे कि जो लोग शरीर को दफनाने के लिए तैयार कर रहे हैं । संक्रमण का स्रोत बैक्टीरिया है जो अभी भी शरीर के तरल पदार्थ में मौजूद हैं।

(Source: Hindustan Times & WHO)

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दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, टाइम मैगजीन के एडिटर ने कहा “बीजेपी ने मुसलमानों को खारिज कर दिया”

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अमेरिका की मशहूर पत्रिका टाइम ने दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी शामिल किया है। इस सूची में शामिल अन्‍य भारतीय लोगों में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, अभिनेता आयुष्‍मान खुराना, एचआईवी पर शोध करने वाले रविंदर गुप्‍ता और शाहीन बाग धरने में शामिल बिल्किस भी शामिल हैं। टाइम मैगजीन ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में लिखे अपने लेख में कई तल्‍ख टिप्‍पण‍ियां की हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा इस लिस्‍ट में शी जिनपिंग, ताइवान की राष्‍ट्रपति त्‍साई इंग वेन, डोनाल्‍ड ट्रंप, कमला हैरिस, जो बाइडन, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल समेत दुनियाभर के कई नेता शामिल हैं। टाइम मैगजीन ने पीएम मोदी के बारे में लिखा, ‘लोकतंत्र के लिए सबसे जरूरी स्‍वतंत्र चुनाव नहीं है। इसमें केवल यह पता चलता है कि किसे सबसे अधिक वोट मिला है। इससे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण उन लोगों का अधिकार है जिन्‍होंने विजेता के लिए वोट नहीं दिया। भारत 7 दशकों से अधिक समय से दुनिया का सबसे बड़ा लोक‍तंत्र रहा है। भारत की 1.3 अरब की आबादी में ईसाई, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, जैन और अन्‍य धर्मों के लोग शामिल हैं।’

‘BJP ने भारत के मुसलमानों को खारिज कर दिया’

टाइम मैगजीन के एडिटर कार्ल विक ने लिखा, ‘यह सब भारत में है जिसे अपने जीवन का ज्‍यादातर समय शरणार्थी के रूप में गुजारने वाले दलाई लामा ने सद्भाव और स्थिरता का उदाहरण बताया है। नरेंद्र मोदी ने इन सभी को संदेह में ला दिया है। भारत के ज्‍यादातर प्रधानमंत्री करीब 80 फीसदी आबादी वाले हिंदू समुदाय से आए हैं लेकिन केवल मोदी ही ऐसे हैं जिन्‍होंने ऐसे शासन किया जैसे उनके लिए कोई और मायने नहीं रखता है।’

कार्ल विक ने लिखा, ‘नरेंद्र मोदी सशक्तिकरण के लोकप्रिय वादे के साथ सत्‍ता में आए लेकिन उनकी हिंदू राष्‍ट्रवादी पार्टी बीजेपी ने न केवल उत्कृष्टता को बल्कि बहुलवाद खासतौर पर भारत के मुसलमानों को खारिज कर दिया। बीजेपी के लिए अत्‍यंत गंभीर महामारी असंतोष को दबाने का जरिया बन गया। और दुनिया का सबसे जीवंत लोकतंत्र अंधेरे में घिर गया है।’ बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान टाइम मैगजीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘भारत का डिवाइडर इन चीफ’ यानी ‘प्रमुख विभाजनकारी’ बताया था।

हालांकि टाइम ने नतीजों के बाद उन पर एक और आर्टिकल छापा था। दूसरे आर्टिकल का शीर्षक था- ‘मोदी हैज यूनाइटेड इंडिया लाइक नो प्राइम मिनिस्टर इन डेकेड्स’ यानी ‘मोदी ने भारत को इस तरह एकजुट किया है जितना दशकों में किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया’। इस आर्टिकल को मनोज लडवा ने लिखा है जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान ‘नरेंद्र मोदी फॉर पीएम’ अभियान चलाया था। आर्टिकल में लिखा गया है, ‘उनकी (मोदी) सामाजिक रूप से प्रगतिशील नीतियों ने तमाम भारतीयों को जिनमें हिंदू और धार्मिक अल्पसंख्यक भी शामिल हैं, को गरीबी से बाहर निकाला है। यह किसी भी पिछली पीढ़ी के मुकाबले तेज गति से हुआ है।’

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चीन की साजिश का पर्दाफाश, सेना को पीछे हटाने के बहाने LAC पर तैनात की अतिरिक्त टुकड़ी

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भारत और चीन के बीच लद्दाख स्थित एलएसी पर पिछले चार महीनों से तनाव जारी है। इस बीच चीन का दोहरा रवैया एक बार फिर उजागर हो गया है। जहां एक तरफ चीन लगातार अपने सैनिकों को पीछे हटाने की बात कहने के साथ भारत से भी परस्पर पीछे हटने की मांग कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ चीनी सेना लगातार एलएसी पर खुद को मजबूत करती जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने 29-30 अगस्त को भारत द्वारा रेजांग ला की पहाड़ियों पर चढ़ाई करने के बाद से अब तक सैनिकों की तीन बटालियन एलएसी पर तैनात कर ली हैं। चीन ने एक बटालियन रेकिन ला पर रखी है, जबकि दो बटालियन स्पांगुर लेकर पर रखी हैं। यह सभी 63 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड का हिस्सा हैं, जो शिकवान में मौजूद हैं।

जून मध्य में गलवान में हुई झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच विवाद गहरा गया है। पिछले दो महीने में चीनी सेना ने सिर्फ पूर्वी लद्दाख के हिस्से पर ही घुसपैठ की कोशिश नहीं की, बल्कि अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड से लगी सीमाओं से भी भारत में दाखिल होने की कोशिश की। कुछ इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स में इस बात का खुलासा भी किया गया है।

इससे पहले लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच ताजा टकराव के बाद बीजिंग ने पारस्परिक चर्चा के माध्यम से आने वाली भीषण ठंड के चलते सैनिकों की जल्द से जल्द वापसी की मंगलवार को उम्मीद जताई थी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान ने भारत और चीन द्वारा एक-दूसरे पर सोमवार को पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पास हवा में गोलियां चलाने का आरोप लगाए जाने के कुछ घंटे बाद सैनिकों की वापसी की यह उम्मीद जताई।

 

 

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भारत में अपना असेंबली प्लांट बंद करेगी प्रीमियम मोटरसाइकिल ब्रांड Harley Davidson

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प्रीमियम अमेरिकन मोटरसाइकिल ब्रांड Harley Davidson के चाहने वालों के लिए बुरी खबर है. दरअसल कंपनी ने भारत में कारोबार बंद करने की बात कहकर सबको चौंका दिया है. कंपनी का कहना है कि भारत में बाइक्स ( harley bikes) का कारोबार उसके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है और यही वजह है कि अब कंपनी ने भारत में अपना असेंबली प्लान बंद करने की तैयारी में है. Harley Davidson की कीमत की वजह से इसे खरीदार नहीं मिल पाते जिसकी वजह से कंपनी को घाटा उठाना पड़ रहा है. हालांकि, वो भारतीय बाजार में बाइक की बिक्री जारी रखेगी.

40 से 50 हजार रुपए बढ़ सकती है कीमत- असेंबली बंद करने का फैसला उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया प्रशांत के उन हिस्सों में लिया गया है, जहां पर कंपनी की गाड़ियों के सेल्स डाउन हुई है. कंपनी से जुड़े एक सोर्स ने बताया कि कंपनी सिर्फ अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बंद कर रही है. बाइक की मार्केटिंग और सेल्स जारी रहेगी. अब भारत में बाइक को थाइलैंड से इम्पोर्ट किया जाएगा. ऐसे में बाइक की कीमत 40 से 50 हजार रुपए बढ़ सकती है. कंपनी के सीईओ जोशन जेट्ज ने कहा है कि हार्ले केवल उन्ही देशों में कारोबार को जारी रखेगी जहां कंपनी को मुनाफा बढ़ने के आसार हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ऐसे किसी भी देश में व्यापार नहीं करेगी जहां उसे नुकसान हो रहा है.

फाइनेंशियल ईयर (2019-2020) में कंपनी ने भारत में केवल 2,500 बाइक बेचे हैं, जबकि इस साल अप्रैल से जून की अवधि के बीच कंपनी केवल 100 बाइक ही बेच पाई है. जुलाई में दूसरी तिमाही के रिजल्ट के साथ एक बयान में हार्ले- डेविडसन ने कहा था कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बाहर निकलने की योजना का मूल्यांकन कर रही है.

Harley Davidson स्ट्रीट 750, Street ROD हैं. कंपनी ने भारत में हार्ले-डेविडसन स्ट्रीट 650 जैसे किफायती मॉडलों को बाजार में उतारा है, लेकिन यह बाइक रॉयल एनफील्ड के 650 cc मॉडल से कहीं अधिक महंगी है. कम कीमत में बेहतरीन फीचर्स देने वाली अन्य कंपनियों ने भारत में हार्ले-डेविडसन की बिक्री को खासा प्रभावित किया है. हार्ले डेविडसन ने अपनी एंट्री-लेवल Street 750 मोटरसाइकिल की कीमत भी घटा दी है. भारतीय बाजार में अब इस बाइक (विविड ब्लैक कलर ऑप्शन) की एक्स-शोरूम कीमत 4.69 लाख रुपये है. यानी कंपनी ने इसकी कीमतों में 65,000 रुपये की भारी कटौती की है.

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