Connect with us

देश

आसिफ़ा की हत्या और बलात्कार पर चुप्पी का नेता कौन है

Published

on

 

क्या आप अंग्रेज़ी में छपने वाली OPEN पत्रिका में राहुल पंडिता और ndtv.com पर नज़ीर मसूदी का लेख पढ़िएगा? मैं आपकी चुप्पी को समझता हूं, जानवर बन जाने के बाद आपका बोलना भी बेकार है। इससे पहले कि आप अक्षरों को भी हिन्दू मुसलमान की तरह पहचानने लगे, क्या उम्मीद की जा सकती है कि नीचे लिखे गए विवरण को आप पढ़ेंगे? कोशिश कीजिए। मैंने राहुल पंडिता और नज़ीर मसूदी की रिपोर्ट का सार आप हिन्दी वालों के लिए पेश करने की कोशिश की है।

2010 में मोहम्मद यूसुफ़ ने अपनी बहन की बेटी आसिफ़ा को गोद ले लिया था। बकरवाल घुमंतू समुदाय के यूसुफ़ ने जम्मू को अपना ठिकाना बना लिया था जहां पांच साल से इस समुदाय को लेकर डोगरा हिन्दुओं के मन में आबादी का भय खड़ा किया जा रहा था। रोहिंग्या मुसलमानों के यहां बसाए जाने से भी इसे हवा मिली कि आबादी का संतुलन बदल रहा है। आप जानते हैं कि आबादी का भय कौन खड़ा करता है। इनके भीतर ज़हर का फेन ऊपर आने लगा कि कहीं जम्मू में भी मुसलमान न भर जाएं। जैसे देश के भीतर मुसलमानों के लिए कोई देश ही नहीं है। राहुल पंडिता ने लिखा है कि हिन्दू और बकरवाला के बीच तनाव बढ़ने लगा। शक और नफ़रत ने आठ साल की बच्ची आसिफ़ा को अपना शिकार बना लिया। आप चार्जशीट पढ़िए तो आपके भीतर बैठी उस भीड़ का ख़ौफ़नाक़ चेहरा नज़र आने लगेगा।

चार्जशीट में लिखा है कि इस हत्या में मंदिर का पुजारी 60 साल का सांझी राम और पुलिस अफ़सर दीपक खजुरिया शामिल है। इलाक़े से बकरवाल को भगाने की प्लानिंग कर रहे सांझी राम की नज़र कई दिनों से इस बच्ची पर थी। आसिफ़ा अक्सर टट्टूओं को चराने ले जाती थी। सांझी राम ने यह प्लान दीपक खजुरिया, अपने बेटे और भतीजे से साझा किया। यह भतीजा 18 साल से कम है, इसलिए यहां भतीजा ही कहूंगा, नाम नहीं लूंगा। तीन महीने पहले ही भतीजे को एक लड़की के साथ ग़लत व्यवहार के लिए स्कूल से निकाला गया था।

पुलिस अफ़सर दीपक खजुरिया दवा की दुकान पर जाता है और बेहोशी की दवा ख़रीद लाता है। उसके बाद भतीजे से कहता है कि वह आसिफ़ा को अगवा कर लाएगा तो चोरी से इम्तहान पास करने में उसकी मदद कर देगा। भतीजा अपने दोस्त परवेश कुमार को बताता है। 9 जनवरी को भतीजा और परवेश जाते हैं और नशे के चार डोज़ ख़रीदते हैं। मैंने बार बार कहा है कि नफ़रत की यह राजनीति आपको या आपके बच्चे का इस्तमाल करेगी और हत्यारा बना देगी। देखिए कैसे दो बच्चों का इस्तमाल होता है।

10 जनवरी को भतीजा को सुनाई देता है कि आसिफ़ा किसी औरत से अपने टट्टुओं के बारे में पूछ रही है। वह आसिफ़ा को बताता है कि उसने जंगलों में घोड़ों को देखा है। परवेश और भतीजा उसके साथ हो लेते हैं। पुलिस के अनुसार आसिफ़ा को कुछ शक होता है और वह भागने लगती है। भतीजा उसे पकड़ लेता है और धक्का देकर ज़मीन पर गिरा देता है। उसे ज़बरन ड्रग दे देता है। आसिफ़ा बेहोश हो जाती है। भतीजा उसका बलात्कार करता है। उसके बाद परवेश भी बलात्कार करने की कोशिश करता है मगर नहीं कर पाता है।

आसिफ़ा को उठा कर एक छोटे मंदिर में ले जाया जाता है, जिसका पुजारी सांझी राम है। अगले दिन दीपक खजुरिया और राम का भतीजा उसे देखने आते हैं। खजुरिया उसके मुंह में बेहोशी का दो टेबलेट ठेल देता है। शाम को भतीजा सांझी राम के बेटे को फोन करता है. जो मेरठ में कृषि स्नातक की पढ़ाई पढ़ रहा था। उसे कहता है कि अपनी प्यास बुझाना चाहते हो तो जल्द आओ। अगली सुबह विशाल जम्मू पहुंच जाता है और दो घंटे बाद आसिफ़ा को तीन टेबलेट दिए जाते हैं। उसे अब तक कुछ भी खाने को नहीं दिया गया है।
अब सांझी राम एक और पुलिस वाला तिलक राम को विश्वास में लेता है। 12 जनवरी की दोपहर आसिफ़ा के पिता मोहम्मद यूनूस पुलिस में केस दर्ज करते हैं। पुलिस तलाश पर निकलती है, उस टीम में दीपक खजुरिया और तिलक राम दोनों हैं। इन्हें बचाने के लिए बीजेपी के दो मंत्री और पार्टी के नेता सीबीआई की जांच की मांग का ढोंग रचते है और वहां हिन्दू एकता मंच का निर्माण होता है जिसके साथ ये लोग खड़े होते हैं।

सांझी राम अपनी बहन के यहां जाता है और कहता है कि उसके बेटे ने किसी लड़की अगवा किया है। बचाने के लिए पुलिस को रिश्वत देनी है। बहन से डेढ़ लाख लेकर आता है और तिलक राम को देता है। इसके ज़रिए पांच लाख देने की बात होती है जिसमें सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता को भी हिस्सेदार बनाया जाता है। आनंद दत्ता भी एक आरोपी है।

13 जनवरी को लोहड़ी के दिन सांझी राम, उसका बेटा और भतीजा मंदिर जाते हैं और पूजा करते हैं। सांझी राम के जाने के बाद उसका बेटा आसिफा का बलात्कार करता है। फिर उसका छोटा भाई बलात्कार करता है। बलात्कार करने के बाद आसिफ़ा को तीन टेबलेट दिए जाते हैं। पुलिस ने बाकी टेबलेट बरामद कर लिए हैं।

लोहड़ी की शाम को सांझी राम सबको बताता है कि लड़की को मारने का वक्त आ गया है। उस रात आसिफ़ा को एक पुलिया के नीचे ले जाते हैं। तभी खजुरिया पहुंचता है और कहता है कि मारने से पहले एक और बार बलात्कार करना चाहता है। वह बलात्कार करता है। उसके बाद अपनी बायीं जांघ के नीचे आसिफ़ा का गर्दन दबाने की कोशिश करता है। नहीं कर पाता है। सांझी राम का भतीजा आता है और चुन्नी से उसकी गर्दन कस देता है। उसके पांव पीछे से मोड़ कर तोड़ देता है। आसिफ़ा मर गई है, यह पुख़्ता करने के लिए दो बार पत्थर से उसके सर पर मारता है।

लाश फिर से मंदिर में ले जाई जाती है। 15 जनवरी की सुबह जंगल में फेक दी जाती है। नज़ीर मसूदी ने लिखा है कि कोर्ट में वकीलों ने इतना हंगामा किया कि छह घंटे लग गए पुलिस को चार्जशीट दायर करने में। आसिफ़ा के ख़ून से सने कपड़े ग़ायब कर दिए जाते हैं। जिस डाक्टर ने पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट तैयार की, उसका तबादला हो जाता है। एस एस पी रमेश जल्ला ने बताया है कि वे हर हफ्ते हाई कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट दे रहे थे।

अब यहां से स्थानीय समाज अपनी मृत्यु का प्रमाण देता है। बाप यूसुफ़ अपनी ज़मीन में बेटी को दफ़नाना चाहता है मगर लोग दफ़नाने नहीं देते हैं। आसिफ़ा को अल्लाह ने आख़िरत के लिए दो ग़ज़ ज़मीन न दी और मंदिर में खड़े भगवान ने उसकी लाज नहीं बचाई। हम धर्म के नाम पर हैवान बने जा रहे हैं। यूसुफ़ 8 मील दूर गांव में आसिफ़ा की लाश को लेकर जाते हैं और दफ़न करते हैं। वहीं पर हमारी और आपकी अंतरात्मा भी दफ़न है।

क़ायदे से अभी तक जांच पर सवाल उठाने वाले बीजेपी के दो मंत्रियों को मंत्रिमंडल से निकाल देना चाहिए था। सीबीआई जांच की मांग का ढोंग खेला गया। यह खेल बीजेपी के उपाध्यक्ष अविनाश खन्ना ने भी खेला और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी। मगर समाज क्यों चुप है, आप आगे पढ़ेंगे तो पता चलेगा। आप चुप्पी का कारण प्रधानमंत्री से नहीं, ख़ुद से पूछिए। वैसे प्रधानमंत्री से क्यों नहीं पूछा जाए कि आप क्यों नहीं बोलते हैं। देश में तब भी हज़ारों बलात्कार होते थे मगर आपने निर्भया पर बोला था कि नहीं बोला था। तो आप आसिफ़ा पर क्यों नहीं बोल पा रहे हैं।वैसे भी प्रधानमंत्री क्या बोल देंगे? वे या तो उपवास करते हैं या बकवास करते हैं।

ये लोग आपको तिरंगे की चादर में लपेट कर हिन्दुत्व का मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण दे रहे थे, इसलिए नहीं कि आप सात्विक और आध्यात्मिक बन जाएं, इसलिए कि किसी की हत्या के वक्त हिन्दुत्व के नाम पर आप चुप रहना सीख लें। आपकी चुप्पी ने साबित कर दिया कि ये सफल हो चुके हैं। इस हिन्दुत्व से न आपको रोज़गार मिला, न मिलेगा, न अस्पताल मिला, न मिलेगा, न ही ईमानदार पुलिस मिलेगी, न मिली और न ही निर्भिक और बेहतर न्याय व्यवस्था मिली, न मिलेगी। बस एक भीड़ मिली जो हर हफ्ते देश के किसी कस्बे में हाथों में तलवार लिए दौड़ती नज़र आती है।

यही है विचारधारा जो आपको हर तरह से ठीक नज़र आए, इसके लिए सेना का इस्तमाल किया गया। पूर्व सैनिकों को टीवी पर बिठा कर पाकिस्तान को सामने लाया गया ताकि आप पाकिस्तान पाकिस्तान करते हुए अपने पड़ोस के मुसलमान से नफ़रत करने लगे। आप उन मुद्दों की तरफ लौट कर देखिए तो उन रास्तों पर आपकी संवेदनाओं के क़त्ल के निशान मिलेंगे। गौ रक्षा के नाम पर भीड़ ने हत्याएं की, आप चुप रहे। कहते रहे कि यह सब आपकी आस्था का सवाल है। गौ हत्या नहीं चलेगी। मानव हत्या चलेगी? मंदिर भी तो आपकी आस्था का सवाल है, तो क्या उसके भीतर बलात्कार चलेगा? आपका ईमान नहीं डोला क्योंकि आप हत्यारे बन चुके हैं।

अब आप उस भीड़ के बिना नहीं रह सकते। इसलिए आप इस भीड़ के बग़ैर सत्ता की कल्पना करने से डरते हैं। कश्मीरी पंडितों के नाम पर आपके मन में मुसलमानों के प्रति ज़हर भरा गया। रमेश कुमार जल्ला जाबांज़ और शानदार अफ़सर के नेतृत्व में आसिफ़ा की हत्या और बलात्कार के मामले में चार्जशीट बनी है, आपको रमेश कुमार जल्ला से भी नफ़रत हो गई। आसिफ़ा के परिवार को वक़ील नहीं मिला तो दीपिका आईं जो ख़ुद एक कश्मीरी पंडित हैं। जिस समाज ने नाइंसाफियां झेली हैं, उसे पता है नफ़रत के नाम पर हत्याओं के इस अंतहीन सिलसेला का दर्द। उसके नाम पर राजनीति करने वालों ने चार साल में एक बार भी कश्मीरी पंडितों का नाम नहीं लिया, बोले भी तो एक कश्मीरी पंडित की निष्ठा पर सवाल उठाने के लिए। कमाल की राजनीति है।

रायसीना हिल्स गूगल में डाल कर देखिए, वो आपकी कारों को वहां तक पहुंचा देगा,जहां आप 2012 में गए थे। उससे पहले आप ख़ुद को नफ़रत की इस राजनीति में सर्च कीजिए, आपकी लाश नज़र आएगी, कुछ लोग नज़र आएंगे जो कह रहे होंगे कि अभी तुम नहीं मरे हो क्योंकि सवाल करने वाले बंगाल पर नहीं बोले, केरल पर नहीं बोले। अधमरे से पड़े हुए तुम चुप रहो क्योंकि तुम्हारी चुप्पी एक आदमी के राज करने के शौक को पूरा करने के लिए ज़रूरी है। उसका राज ही तुम्हारा राज है।

देश

वाराणसी में किया गया हनुमान जी के जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन

Published

on

अब इस से बड़ा उदाहरण क्या होगा इस बात का की राजनीति में सब कुछ जायज है. अपने फ़ायदे के लिये किसी भी चीज को मुद्दा बनाकर राजनीति की जाती है, फिर चाहे भगवान ही क्यों न हों. ताज़ा मामला भगवान राम के बाद हनुमान को दलित बताने के बाद मचे सियासी घमासान का है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों एक चुनावी रैली में हनुमान को दलित समुदाय का बताया था, जिस पर राजनीति शुरू हो गई है. उत्तर प्रदेश के ही एक जिले में जहां दलित समुदाय द्वारा बजरंगबली के एक मंदिर पर कब्जे की खबर सामने आई, तो अब पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हनुमान जी का जाति प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है. इसके लिए बाकायदा आवेदन किया गया है.

जिला मुख्यालय पर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के युवजन सभा के लोग इकट्ठा हुए और उन्होंनेबजरंगबली के जाति प्रमाण पत्र की मांग की. इसके लिये कार्यकर्ताओं ने बाकायदा जाति प्रमाण पत्र प्राप्त का आवेदन फॉर्म भरा. रोचक बात यह है कि कार्यकर्ताओं ने आवेदन फॉर्म में वांछित जानकारी भी भरी है. जैसे, बजरंगबली के पिता का नाम महाराज केशरी, जाति में वनवासी आदि भरा हुआ है. कार्यकर्ता फॉर्म लेकर कार्यालय में गए और जाति प्रमाणपत्र की मांग की. प्रगतिशील युवजन सभा के लोग हनुमान जी के दलित होने पर उनके आरक्षण की भी मांग कर रहे है. सभा के जिला अध्यक्ष हरीश मिश्रा कहते हैं कि पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ ने हनुमान जी को दलित बताया था. उसी क्रम में आज यहां उनके जाती प्रमाण के लिए आवेदन दिया गया.

हरीश मिश्रा ने कहा कि जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगातार भगवान को राजनीति में घसीटा जा रहा है, उसके विरोधस्वरूप हमने ये कदम उठाया. पहले राम जी को घसीटा, अब हनुमान को. अगर वह दलित हैं तो जाति प्रमाण पत्र दें और हम उनके आरक्षण की भी मांग करेंगे. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों राजस्थान के अलवर में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि ‘बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं, जो स्वयं वनवासी हैं, निर्वासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं. भारतीय समुदाय को उत्तर से लेकर दक्षिण तक पुरब से पश्चिम तक सबको जोड़ने का काम बजरंगबली करते हैं.’

Continue Reading

Uncategorized

मंत्री भी तलने लगे पकौड़ा- सरकार को भी मिला रोज़गार:- रवीश कुमार

Published

on

प्रधान सेवक के सच्चे सेवक। पकौड़ा तलते हुए मंत्री जी। स्व-रोज़गार जनता का है या सरकार का? सरकार रोज़गार दे नहीं सकती( कोई भी सरकार) तो वह आपके रोज़गार को अपना तो बता ही सकती है। प्रधानमंत्री के पकौड़ा तलने की बात की आलोचना हुई, लतीफ़े बने और लोग भूल गए। मंत्री जी उनकी बात को सैद्धांतिक जामा पहनाते हुए। अपने फ़िटनेस का प्रदर्शन काम से ज्यादा करते हैं।तस्वीरों के ज़रिए लोगों के मन में कई परतें बनानी होती हैं। नेता सामान्य है यह सबसे बड़ी तस्वीर है। यह समोसा खाकर या पकौड़ा तल कर हासिल की जा सकती है। जनता अपने चश्मे का नंबर बदले या शीशा साफ़ करे, उलझन में है। चुनाव नेता का मनोरंजन है और जनता का रसरंजन। नौजवान पकौड़ा तलें। परीक्षा की तैयारी न करें। हिन्दू- मुस्लिम कीजिए। नेता यही चाहते हैं। रोज़गार की चिन्ता न करें। पकौड़ा कभी भी तला जा सकता है। दरअसल यहाँ पकौड़ा नहीं जनता के अरमानों को तला जा रहा है।

तस्वीर – राजस्थान पत्रिका से साभार

नोट- कई लोग कमेंट में लिख रहे हैं कि जकार्ता एशियाड में मंत्री जी खिलाड़ियों को नाश्ता पेश कर रहे थे। 26 अगस्त को उनकी ट्रे लेकर जाते हुए तस्वीर ट्वीट होती है जिसमें इस बारे में कुछ नहीं लिखा होता है। सिर्फ तस्वीर होत है। सबने अतिउत्साह में यह खबर चला दी कि मंत्री नाश्ता पेश कर रहे हैं जो कि सही नहीं था। Alt news ने उस पर विस्तार से लिखा था, आप देख सकते हैं। मगर आल्ट न्यूज़ से ज्यादा लोगों तक तस्वीर के बहाने झूठी कहानी पहुंची और दिमाग़ में रह गई। अब आप चेक नहीं करेंगे, खुद को सतर्क नहीं रखेंगे तो ऐसी छवियों के जाल में फंसेंगे।

Continue Reading

देश

मध्यप्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव 2019, योगी होंगे भाजपा में हिंदुत्व का मुख्य चेहरा

Published

on

चुनावी बयार शुरू होने को है और भाजपा ने हिंदुत्व के नाम पर वोट मांगने के लिए हिंदुत्वा का खेहरा भी सामने खड़ा कर दिया है है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा की प्रदेश इकाई चाहती है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधानसभा चुनावों में प्रचार करें। पार्टी का मानना है कि योगी आदित्यनाथ के सहारे हिंदू वोट पाने में सफलता मिलेगी।

अमर उजाला के सौजन्य से मिली खबर के अनुसार , बता दें कि योगी आदित्यनाथ ने मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। वह गोरखनाथ पीठ के महंत भी हैं। इससे पहले उन्होंने 2017 में गुजरात और हिमाचल प्रदेश और 2018 में कर्नाटक  में चुनावों के दौरान पार्टी का प्रचार किया था। मध्यप्रदेश भाजपा के नेता राजेश अग्रवाल ने बताया, “पार्टी हाईकमान योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के आधार पर फैसला लेगी। हम चाहते हैं कि वह प्रदेश में चुनाव प्रचार करें क्योंकि वह यहां लोकप्रिय है और उनका प्रभाव पड़ेगा।”

राजस्थान भाजपा के प्रवक्ता मुकेश पारिख ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की छवि के कारण प्रदेश में उनकी मांग है। वह एक उम्दा वक्त के साथ-साथ धार्मिक नेता हैं और उनकी छवि लोगों को आकर्षित करती है।

वरिष्ठ नेता ओंकार सिंह लाखवत ने कहा कि योगी आदित्यनाथ, नाथ संप्रदाय के मुखिया हैं और इस संप्रदाय का राजस्थान में बहुत प्रभाव है। नवीं शताब्दी में मारवाड़ और अलवर का इलाका नाथ संप्रदाय के केंद्रों में से एक था लिहाजा इन क्षेत्रों में उनके प्रचार से असर पड़ेगा। पार्टी सूत्रों की मानें तो नवंबर के पहले सप्ताह में योगी आदित्यनाथ राज्य में प्रचार कर सकते हैं।

बता दें कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ छत्तीसगढ़ में पहले से ही चुनाव प्रचार कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने मुख्यमंत्री रमन सिंह के नामांकन के बाद एक भाषण भी दिया। योगी ने रामायण का संदर्भ देते हुए मतदाताओं से रमन सिंह को लगातार चौथी बार जीताने की अपील की। नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने खुद से 20 साल छोटे योगी के पांव भी छुए।

चुनावी सर्वे मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर होने जबकि राजस्थान में कांग्रेस की सत्ता में वापसी का अनुमान लगा रहे हैं। मध्यप्रदेश में एक ही चरण में 28 नवंबर और राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान होंगे।

Continue Reading

Trending