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हाथरस के एक दिन बाद उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में युवती से गैंगरेप, अस्पताल ले जाने के क्रम में हुई मौत

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश (UP) के हाथरस (Hathras) में एक दलित युवती से गैंगरेप और उसकी निर्मम हत्या को लेकर देश में आक्रोश व्याप्त है, इसी बीच, इसी तरह का एक और मामला राज्य के बलरामपुर जिले से सामने आया है. हाथरस से करीब 500 किमी की दूरी पर 22 वर्षीय दलित युवती के साथ भी दरिंदों ने गैगरेप किया फिर उसकी बुरी तरह से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई. यह वाकया मंगलवार (29 सितंबर) की शाम का है, जब देश का ध्यान दिल्ली के सफदरजंग में हाथरस की युवती की मौत पर केंद्रित था और पुलिस उसकी लाश उसके गांव ले जाने में लगी थी.

बलरामपुर की युवती की मौत उस वक्त हो गई, जब उसे इलाज के लिए लखनऊ अस्पताल लाया जा रहा था. सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गैंगरेप की पुष्टि हुई है. सूत्रों ने ये भी बताया कि पीड़ित के शरीर पर कई जगह घाव और चोट के निशान थे. मृतक युवती के भाई ने बताया है कि पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें से एक नाबालिग है.

पीड़िता की मां ने बताया कि सुबह में वो घर से निकली थी, जब शाम तक नहीं लौटी तो पुलिस को इसकी सूचना दी गई. सूत्रों ने कहा कि वह शाम 7 बजे के आसपास लौटी, हमलावरों ने उसे ई-रिक्शा पर बिठाकर अपने घर भेज दिया था. उस वक्त युवती बेहोशी की हालत में थी. परिजन उसे अस्पताल ले गए. अस्पताल में डॉक्टर ने उसे अन्य अस्पताल में रेफर कर दिया. रास्ते में उसकी मौत हो गई.

पीड़िता की मां ने बताया, “बदमाशों ने उसे किसी नशीले पदार्थ का इंजेक्शन लगा दिया था जिसकी वजह से वह होश खो बैठी थी. फिर उनलोगों ने उसके साथ बलात्कार किया… उनलोगों ने उसके पैर भी तोड़ दिए. शरीर के पिछले हिस्से को भी तोड़ दिया. एक रिक्शा-वाला उसे लेकर आया और हमारे घर के सामने फेंक दिया. मेरी बच्ची मुश्किल से खड़ी हो सकती थी या बोल पा रही थी.” उन्होंने कहा, “मेरी बेटी ने रोते हुए कहा, मुझे किसी भी तरह बचा लो, मैं मरना नहीं चाहती.”

युवती ने मां से शिकायत की थी कि उसके पेट में बहुत जलन और दर्द है. स्थानीय डॉक्टरों ने कहा कि उसकी हालत गंभीर है. उसे लखनऊ ले जाने की सलाह दी. लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया. पुलिस ने रिश्तेदारों को उसकी लाश सौंप दी, इसके बाद बुधवार को उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया.

हालांकि, पुलिस ने कहा कि शव परीक्षण से यह पता नहीं चलता है कि उसके हाथ और पैर टूट गए थे. बलरामपुर पुलिस ने देर रात ट्वीट किया, “उक्त मामले में, पुलिस द्वारा दोनों आरोपियों के साथ त्वरित कार्रवाई की गई है. हाथ और पैर टूटे हुए हैं, ये विवरण सही नहीं है क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका उल्लेख नहीं है.”

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हाथरस: मुख्य आरोपी ने पुलिस को बताया लड़की से थी दोस्ती, परिवार वालों ने किया क़त्ल

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हाथरस. बुलगढ़ी कांड को लेकर छिड़ी बहस के बीच अब आरोपियों की बातें भी अब सामने आ रही हैं. मुख्य आरोपी संदीप ठाकुर (Accused Sandeep) ने पुलिस अधीक्षक हाथरस (Hathras) को पत्र लिखकर कहा है कि उसे झूठे केस में मृतका के परिजनों ने ही फंसाया है. पत्र में उसने लिखा है कि उसकी दोस्ती मृतका से थी और यह बात उसके परिवार को पसंद नहीं थी. इतना ही नहीं 14 सितंबर के दिन वह मृतका से खेत में मिला था और उस वक्त उसके भाई और मां भी थीं, लेकिन मृतका ने मुझे तुरंत वहां से भेज दिया. इसके बाद मां और भाई ने उसकी पिटाई की.

संदीप ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि हम दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी. वह मृतका से मुलाकात करता था और फोन पर बात भी करता था. लेकिन, यह बात उसके परिवार को पसंद नहीं थी. घटना वाले दिन भी खेत में मुलाकात हुई थी, लेकिन उसने मुझे वहां से जाने को कह दिया, इसके बाद मैं घर चला आया. बाद में मुझे गांव वाले से पता चला कि मृतका की मां और उसके भाई ने उसके साथ मारपीट की है. बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. संदीप ने अपने पत्र में खुद को और तीन अन्य लोगों को निर्दोष बताते हुए मृतका की मां और भाई पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है. साथ ही न्याय की गुहार भी लगाई है.

गौरतलब है इससे पहले भी को मृतका के भाई की कॉल डिटेल्स से पता चला है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच आरोपी संदीप के फोन पर बात हुई. यह बात करीब 104 बार की गई. इतना ही नहीं ज्यादातर कॉल आधी रात के बाद किए गए.

इस बीच, आरोपियों के परिजनों का कहना है कि उनके बच्चे जेल में सुरक्षित नहीं हैं. परिवारीजनों ने खतरे की आशंका जताई है. आरोपी रामू की भाभी ने कहा कि जेल में नेता मिलने जा रहे हैं. यह कहा जाता है कि जेल में सुरक्षा होती है, लेकिन उनके बच्चों को जेल में भी खतरा है. जब वे लोग यहां सब काम करवा रहे हैं तो जेल में भी करा देंगे.

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जब कार्यकर्ताओं को लाठी से बचाने पुलिस से भीड़ गयी प्रियंका गाँधी

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नई दिल्ली: यूपी के हाथरस (Hathras) में दलित युवती के साथ हुई दरिंदगी के मामले में पीड़ित परिवार से मिलने की मांग पर अड़े हुए कांग्रेस नेताRahul Gandhi) और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Vadra) समेत 5 लोगों को तो यूपी पुलिस ने जाने की अनुमति दे दी लेकिन इससे पहले डीएनडी पर एक हाईवोल्टेज ड्रामा हुआ. शनिवार को प्रियंका गांधी ख़ुद गाड़ी चलाकर डीएनडी पहुंची साथ में राहुल गांधी बैठे हुए थे. उनके पहुंचते ही ये हाईवोलटेज ड्रामा शुरू हो गया, काफ़ी कहासुनी के बाद यूपी पुलिस ने राहुल प्रियंका समेत पांच लोगों को हाथरस जाने की इजाज़त दे दी. लेकिन कुछ कार्यकर्ता नहीं माने तो यूपी पुलिस ने लाठियां भी भांजी. लेकिन प्रियंका गांधी ख़ुद गाड़ी से उतरकर अपने कार्यकर्ता को बचाने आ पहुंची यहां तक पुलिसवाले की लाठी भी पकड़ ली.

उस वक्त प्रियंका की गाड़ी ठीक टोल के बैरियर पर थीं. वहां पर कुछ कार्यकर्ताओं ने जिद की अपने नेताओं के साथ जाने की. इसके बाद पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठी चार्ज किया. इसे देखकर  प्रियंका गांधी वाड्रा गाड़ी से उतरीं और उन्होंने तुरंत कांग्रेस नेता को बचाया. इस दौरान उन्होंने पूर्व सांसद कमांडो कमल किशोर को पुलिस की लाठियों से बचाया.

इस बीच उन्होंने एक लाठी को भी पकड़ लिया. इसके बाद प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस नेता को पुलिस की लाठियों से बचाते हुए सड़क के बीच से थोड़ा साइड में लेकर गईं और उन्हें बैठा दिया.

इससे पहले डीएनडी पर सैंकड़ों की संख्या में जुटे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को राहुल गांधी ने समझाया कि पुलिस ने उन्हें हाथरस जाने की अनुमति दे दी है और अब आप हमें आगे आने दें और पुलिस के साथ सहयोग करें. राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि पीएल पुनिया, गुलाम नबी आजाद, प्रमोद तिवारी को भी आगे जाने दें. लेकिन कार्यकर्ता नहीं हटे तो  डीएनडी पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हटाने के लिए यूपी पुलिस ने लाठीचार्ज किया.

इस दौरान कई कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हुए हैं. प्रियंका गांधी वाड्रा खुद जमीन पर पड़े कार्यकर्ता को उठाने के लिए गईं. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने बताया कि पुलिस ने प्रियंका जी को भी लाठी मारी है.

राहुल गाधी और प्रियंका गांधी गाड़ी से बाहर है और चोटिल पूर्व सांसद को देखा. इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि वो यहां से नहीं जाएंगे. थोड़ी देर के हंगामे के बाद अब राहुल और प्रियंका डीएनडी से आगे निकल गए हैं.

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जन्मदिन स्पेशल:- महात्मा गांधी और उन पर बनी फिल्में

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2 अक्टूबर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के रूप में मनाया जाता है. इस साल ‘बापू’ की 151 वीं जयंती मनाई जा रही है. गांधीजी, जिन्होंने दलितों के उत्थान के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया, जनता का सशक्तिकरण किया और अंग्रेजों के चंगुल से भारत की आजादी के लिए संघर्ष किया, एक प्रेरणादायक जीवन जीया, जो आने वाली पीढ़ियों को जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगा.

जैसा कि कोई ‘अहिंसा’ के सिद्धांत को मानता था, गांधीजी ने हजारों लोगों को अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया. हर दिन एक बेहतर व्यक्ति बनने और दूसरों के प्रति संवेदनशील होने के उनके निरंतर प्रयास ने उन्हें एक महात्मा बना दिया. भारत की स्वतंत्रता में उनका योगदान निश्चित रूप से कुछ ऐसा है जो हमारे समृद्ध इतिहास का हिस्सा है.

लेकिन, उन लोगों के लिए जो महान नेता और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व के जीवन के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं, हम आपकों कुछ ऐसी फिल्मों के बारें में बता रहे है जिन्हें आप ओटीटी प्लेटफार्मों पर देख सकते हैं और गांधीजी के बारे में जान सकते हैं, शिक्षाएं, अभ्यास अहिंसा, और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान जिसने हमारे सारे जीवन को छुआ है.

हमने गांधी को मार दिया

नईम ए सिद्दीकी की  निर्देशित 2018 फिल्म, दो अजनबियों की कहानी बताती है – कैलाश और दिवाकर, जिनके रास्ते एक ट्रेन यात्रा के दौरान पार हो जाते हैं. फिल्म ब्रिटिश राज के अंत के बाद डिवीजन की अशांत पृष्ठभूमि के खिलाफ है. कहानी उन दो पात्रों की बातचीत का पता लगाती है जो महात्मा गांधी की हत्या के साथ यात्रा के दौरान महात्मा और उनके दर्शन के बारे में एक जैसे विरोधी विचार रखते हैं. इस फिल्म को ShemarooMe पर देखा जा सकता है.

Road to Sangam

अमित राय की निर्देशित 2009 की फिल्म में उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक कट्टर मुस्लिम हसमत की कहानी को दर्शाया गया है. एक मैकेनिक, हसमत को एक पुरानी लॉरी की मरम्मत करने के लिए कहा जाता है, इस बात से अनजान है कि यह वह वाहन था जिसने एक बार गांधी के राख से 20 श्मशान कलशों में से एक को ले जाया था. वह नौकरी करता है, लेकिन स्थिति तब जटिल हो जाती है जब वह कलश के पीछे की सच्चाई का पता लगाता है और गांधी के अंतिम अवशेषों को ले जाने का फैसला करता है. फिल्म में परेश रावल के साथ दिवंगत ओम पुरी और पवन मल्होत्रा ​​हैं. यह ShemarooMe  पर उपलब्ध है.

गांधीगिरी

स्वर्गीय ओम पुरी एनआरआई राय साहेब की भूमिका निभाते हैं, जो महात्मा गांधी के सिद्धांतों में दृढ़ता से विश्वास करते हैं.  फिल्म गांधी के उदाहरण का अनुसरण करके उन्हें सुधारने के उनके प्रयासों को पकड़ती है. 2016 की फिल्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर आधारित है.

Nannu Gandhi

एनआर नानजंडे गौड़ा की 2008 की कन्नड़ फिल्म बच्चों के एक समूह के इर्द-गिर्द घूमती है, जो गांधी के सिद्धांतों और विचारों का पालन करते हुए अपने आसपास के लोगों को प्रेरित करते हैं. यह डिज्नी + हॉटस्टार पर स्ट्रीमिंग है.

Rebooting Mahatma

2019 में रिलीज होने वाली गुजराती फिल्म महात्मा गांधी के एक मानवीय संस्करण की अवधारणा पर आधारित है. उन्हें 21 वीं सदी में लाया गया है और बापू विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हैं जो आज की दुनिया को प्रभावित करते हैं, जैसे कि राजनीतिक प्रणाली, बॉलीवुड, सोशल मीडिया और युवा. फिल्म ShemarooMe  पर देखी जा सकती है

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