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मात्र 10 साल में दिल्ली के जाफराबाद इलाके का साधारण लड़का अब्दुल नासिर कैसे बना दिल्ली अंडरवर्ल्ड का डॉन ?

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चौधरी हैदर अली
नई दिल्ली : मे पिछले 5 साल के लंबे समय से Crime Correspondent होने के नाते अपराध और अपराधियों के खिलाफ लिखता आ रहा हूं।अपने इस पत्रकारिता जीवन के चलते मेरी सैंकड़ों गैंगस्टर, माफिया, बाहुबलियों जैसे काफी बड़े-बड़े अपराधियों से विस्तार से मुलाकातें होती हैं!लेकिन जो मुझे नासिर में दिखा वह और किसी बाहुबली या गैंगस्टर में नहीं दिखा!जिस नजरिए से मैं नासिर को देखता हूं हो सकता है कोई और इंसान नासिर को उस नजरिए से ना देखता हो क्योंकि इस दुनिया में हर इंसान कि अपनी सोच है! जितना मैंने नासिर को जानने की कोशिश की वह सोच मैं आपके सामने पेश कर रहा हूं! नासिर के एक विरोधी ने हमसे कहा आप ने सुना होगा किस्मत हमेशा बहादुरो का साथ देती है नासिर भी उन बहादुरों मै से एक है! नासिर जैसा प्यार करने वाला जिंदा दिल इंसान मैंने आज तक नहीं देखा क्योंकि नासिर हर शख्स पर भरोसा कर लेता है!नासिर के एक साथी ने बताया नासिर को सिर्फ एक चीज से नफरत है और वह है धोका नासिर को धोका देने का मतलब है नासिर के गुस्से को जगाना मेरा जहां तक खयाल है नासिर जितनी जल्दी लोगों पर भरोसा करता है उतनी ही जल्दी धोकेबाजों सजा देने मैं करता है!

अब्दुल नासिर की जिंदगी पर एक नजर!
अब्दुल नासिर का जन्म 12 मार्च 1987 को मकान नं 1363, गली नं 48, ज़ाफराबाद में मरहूम जनाब सदाकत हुसैन साहब के घर हुआ उनके 4 बेटों में सबसे बड़े बेटे का नाम आदिल हयात, नादिर हयात, अब्दुल नासिर, और बदर हयात है अब्दुल नासिर अपने चारों भाईयों में तीसरे नम्बर पर है! सदाकत हुसैन साहब का शुमार ज़ाफराबाद इलाके के Upper Middle Class लोगों में होता था!अब्दुल नासिर ने ज़ाफराबाद के Gandhi Harijan Memorial School से सिर्फ 7वी जमात तक ही तालीम हासिल की क्युंकी नासिर बहुत छोटी उम्र से अपना Business करना चाहता था! स्कूल छोड़ते ही नासिर ने Jean’s बनाने की Factory लगा अपना काम पूरे दम-खम के साथ शुरू कर दिया!लेकिन कहते हैं ना किस्मत के लिखे को कोई नहीं मिटा सकता अब्दुल नासिर के साथ भी ऐसा ही हुआ नासिर जिस लगन और मेहनत से अपने कारोबार को बढ़ाने में लगा था उस मेहनत और लगन पर किस्मत गालिब आई! सन 2009 में नासिर पर भारतीय दंड संहिता की धारा – 147/148/149 /440/34 के तहत थाना सीलमपुर में मुकदमा दर्ज हुआ जिसका F.I.R No -304/09 था!

आखिर क्या थी F.I.R No – 304/09 की हकीकत?
अब्दुल नासिर के कुछ दोस्तों का छोटा-मोटा झगड़ा सीलमपुर के घोषित अपराधी आकिल मलिक उर्फ़ मामा के भाई जाहिद से हुआ था!आकिल मामा का दिल्ली पुलिस के कई विभागों में काफी अच्छा रसूख था!दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों ने मुझे बताया था की आकिल मामा मुंबई,जयपुर,बेंगलुरु,चेन्नई मैं अपने जिन गुर्गो से चोरी की वारदातों को अंजाम दिलवाता था कुछ समय बाद उन्हीं को दिल्ली पुलिस से गिरफ्तार करवा देता था!इस वजह से दिल्ली पुलिस उसकी बातों को नजर-अंदाज नहीं करती थी!यही वजह थी जो मामा अपने भाई जाहिद के साथ हुए इस छोटे-मोटे झगड़े को अपने अहम पर ले गया और जाफराबाद में अपना दबदबा कायम रखने के लिए ही आकिल मामा ने अब्दुल नासिर के घर गोलियां चला दी और दर्जन भर बेगुनाह लड़कों पर झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया उन लड़कों में अब्दुल नासिर का नाम भी शामिल था!

People’s BEAT को स्टोरी के दौरान काफी लोगों ने बताया 2009 में आकिल मामा ने नासिर पर बलवे का झूठा मुकदमा सीलमपुर थाने में जब दर्ज कराया तभी नासिर अपने घर से फरार हो गया फरारी के दौरान नासिर की मुलाकात अपने गांव के आसपास रहने वाले कुछ बदमाशों से हुई दो या तीन मुलाकातों के बाद नासिर उनके साथ रहने लगा जिन बदमाशों के साथ नासिर रह रहा था उन्होंने दिल्ली में 55 लाख की लूट को अंजाम दे रखा था जिसकी वजह से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल लुटेरों को पकड़ने के लिए दिन रात एक कर रही थी कुछ महीनों की मशक्कत के बाद टेक्निकल सर्विलांस की मदद से स्पेशल सेल ने बदमाशों के ठिकाने का पता लगा सभी बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया! जिस वक़्त स्पेशल सेल की टीम लुटेरों को गिरफ्तार करने उनके ठिकाने पर पहुंची उस वक़्त लुटेरों के साथ अब्दुल नासिर और एक अन्य युवक भी वहां मौजूद था स्पेशल सेल की टीम ने सभी लुटेरों के साथ नासिर और अन्य युवक को भी गिरफ्तार कर लिया! गिरफ्तारी के बाद स्पेशल सेल ने लुटेरों से पूछताछ की जिसमें लूट को अंजाम देने वाले बदमाशों ने बताया वारदात को अंजाम देने में नासिर और अन्य युवक शामिल नहीं थे और ना ही हमने इन दोनों को 55 लाख की लूट किए जाने के बारे में कुछ बताया था स्पेशल सेल ने किसी की एक न सुनी और नासिर पर लूट की प्लानिंग रचे जाने का इल्जाम लगा सलाखों के पीछे भेज दिया!

अब्दुल नासिर और छैनू पहलवान क्यों बने एक दूसरे के खून के प्यासे!
इन दोनों के बीच दुश्मनी का अंदाजा 23 दिसंबर 2015 के दिन कड़कड़डूमा कोर्ट में हुए शूटआउट से लगाया जा सकता है जिसमें दिल्ली पुलिस का एक जवान शहीद हुआ और सेशन जज संजय गुप्ता बाल बाल बचे यह शूटआउट भारत के इतिहास में दर्ज पहला इसलिए है क्योंकि इस शूटआउट को कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान अंजाम दिया गया था!

इस बात को लेकर विवाद था अब्दुल नासिर और छैनू पहलवान के बीच!
2010 में जब अब्दुल नासिर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लूट की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा उस दौरान आकिल मामा ने पहले से जेल में बंद अपने शार्प शूटर छैनू पहलवान को अब्दुल नासिर पर ब्लेड से हमला कराने के लिए पैसे दिए और हमला ठीक से कराने की हिदायत भी दी! छैनू पहलवान ने अब्दुल नासिर पर ब्लेड से हमला कराने का काम तिहार जेल में ही बंद त्रिलोकपुरी के 4 नशेड़ीयो (Drug Addict’s) को सौंपा अगले दिन अब्दुल नासिर को तिहार जेल से पेशी के लिए पुलिस वैन कड़कड़डूमा कोर्ट ला रही थी जिसमें और भी कैदी सवार थे अचानक पुलिस वैन में बैठे चार नशेड़ीयो ने सर्जरी ब्लेड से अब्दुल नासिर पर हमला कर दिया जिस से नासिर काफी जख्मी हो गया जेल प्रशासन ने ब्लेड से हमला करने वाले चारों लड़कों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की जांच में पता चला नासिर पर हमला आकिल मामा और छैनू पहलवान ने कराया था!खुद पर हुए जानलेवा हमले के बाद नासिर ने जेल से अपने बड़े भाई और अपने करीबी दोस्त आतिफ को सूचना भेजी के आकिल मामा हमारी हत्या की साजिश रच रहा है इससे पहले वह हमारी हत्या को अंजाम दे तुम आकिल मामा की हत्या कर दो यह खबर आतिफ और नादिर से पहले आकिल मामा तक पहुंच गई खबर सुनते ही आकिल मामा ने तुरंत आतिफ के ससुर हाजी मतीन से मुलाकात की जो पहले से ही अपनी बेटी और आतिफ के बीच हुई शादी से नाखुश था और आतिफ को अपने रास्ते से हटाना चाहता था ताकि अपनी बेटी की शादी अपनी मर्जी के लड़के से कर सके हाजी मतीन और आकिल मामा के बीच हुई इस मुलाकात में दोनों के बीच हत्याकांड को अंजाम देने में किसकी क्या भूमिका रहेगी जैसी सभी अन्य बातों को तय कर लिया!और 15 मई 2011 के दिन आकिल मामा ने अपने साथी वसीम बलुचा के साथ मिलकर आतिफ की हत्या कर दी!

(आगे की कहानी जल्द ही आपके बीच लाई जाएगी)

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क्या तिहाड़ की 8 एवं 9 नं जेल में उन अपराधियों को VIP ट्रीटमेंट दिया जा रहा है, जिनके नाम सुनकर आपके होश फाख्ता हो जाएंगे…???

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“दिल्ली पुलिस ने भजनपुरा में एक ही परिवार के 5 लोगों के हत्याकांड का 24 घंटों मे किया खुलासा!

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By :- Haidar Baaghi

नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एक ही परिवार के पांच लोगों ही बेरहमी से हत्या कर दी गई। बुधवार सुबह तेज दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने सूचना पुलिस को दी। पुलिस भीतर पहुंची तो दंपती और उनके तीन बच्चों के 6-7 दिन पुराने बुरी तरह सड़े-गले शव मिले। इनकी शिनाख्त शंभूनाथ चौधरी (43), पत्नी सुनीता (37), बेटे शिवम कुमार (17), सचिन (14) और बेटी कोमल (12) के रूप में हुई। दंपती का शव एक कमरे से मिला, जबकि तीनों बच्चों के शव दूसरे कमरेभजनपुरा इलाके में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या की गुत्थी को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझा लिया है। पुलिस की मानें तो मृतक शंभू के फुफेरे भाई प्रभुनाथ चौधरी ने महज 30 हजार रुपये के लिए शंभू और उसके पूरे परिवार की हत्या कर दी। शंभू से उसने 30 हजार रुपये ले रखे थे, लेकिन वह रुपये वापस नहीं कर पा रहा था। पुलिस ने हत्याकांड का राज खोलते हुए आरोपी प्रभुनाथ (26) को गिरफ्तार कर लिया है।

तीन फरवरी को प्रभुनाथ ने शंभू के घर पहुंचकर पहले उसकी पत्नी सुनीता का नोकझोंक के बाद गला घोटा, बाद में उसके सिर पर रॉड से वार कर दिया। इसके बाद बेटी कोमल, बेटे शिवम और सचिन को मौत के घाट उतार दिया। चार घंटे घर में बिताने के बाद उसने शंभू को फोन कर गामड़ी गांव बुलाया। वहां दोनों ने शराब पी और रात 11 बजे उसे भी घर लेकर पहुंचा, वहां उसकी भी हत्या कर दी। बाद में आरोपी घर पर ताला लगाकर फरार हो गया। पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से हत्याकांड से पर्दा उठाया।संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार ने बताया कि बुधवार सुबह भजनपुरा की गली नंबर-11 में पुलिस को शंभू, पत्नी सुनीता, तीन बच्चे शिवम, सचिन व कोमल के शव बरामद हुए थे। शव इतनी सड़ी-गली हालत में थे कि उनकी मौत की वजह पता नहीं चल पा रही थी। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। स्थानीय पुलिस के अलावा स्पेशल स्टाफ की टीम को जांच का जिम्मा सौंपा गया। इंस्पेक्टर विनय यादव की टीम ने भी पड़ताल शुरू की। टीम ने शंभू के मोबाइल का कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवाया, तो उस पर आखिरी कॉल शंभू के फुफेरे भाई प्रभुनाथ की थी। इसके अलावा गली में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, तो तीन फरवरी को दोपहर 3.30 बजे प्रभुनाथ को घर में घुसते हुए और शाम 7 बजे निकलते देखा गया। बाद में रात को दोबारा 11 बजे शंभू के साथ आता फुटेज में देखा गया। पुलिस ने शक के आधार पर प्रभुनाथ को बुलाया। शुरुआत में वह पुलिस को गुमराह करने लगा लगा, लेकिन बाद में उसने हत्या की बात कुबूल कर ली। 

भजनपुरा में ही परिवार के साथ रहने वाला प्रभुनाथ लक्ष्मी नगर स्थित एक इंस्टीट्यूट में नौकरी करता था। उसने कुछ समय पहले शंभू से 30 हजार रुपये ब्याज पर लगवाने के नाम पर लिए थे, लेकिन रुपये वह वापस नहीं करा रहा था। वारदात वाले दिन प्रभुनाथ ने शंभू को लक्ष्मी नगर आने के लिए कहा और खुद 3.30 बजे उसके घर पहुंच गया। वहां सुनीता ने उससे नोकझोंक शुरू की तो करीब 3.45 बजे उसका गला घोट दिया। इसके बाद उसके सिर पर रॉड से वार कर दिया। बाद में शव को घसीटकर अंदर वाले कमरे में ले गया।

शाम करीब 5 बजे कोमल ट्यूशन पढ़कर लौटी तो आरोपी ने कमरे में अंधेरा कर उसे अंदर बुलाया। पीछे से वार कर उसे भी मौत के घाट उतार दिया। शिवम भी किसी दोस्त से मिलकर शाम 5.45 बजे घर लौटा, तो प्रभुनाथ ने अंदर बुलाकर उसके भी सिर पर रॉड से हमला कर मार दिया। बाद में सचिन 6.45 बजे पहुंचा तो उसकी भी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने शंभू को फोन किया। वह उसे बाइक से लेकर गामड़ी गांव पहुंचा। वहां शंभू को उसने शराब पिलाई और उसने खुद बियर पी। देर रात 11 बजे वह शंभू को नशे की हालत में लेकर घर पहुंचा और सिर पर वार कर 11.30 बजे उसे भी मार दिया। बाद में वह घर पर ताला लगाकर फरार हो गया। से मिले। शवों के पास ही एक हथौड़ा और आरी बरामद हुई है।

आशंका है कि वारदात में इनका इस्तेमाल किया गया। शंभूनाथ के मकान का ताला बाहर से बंद था। वारदात की सूचना पर संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार समेत तमाम आला अधिकारियों, क्राइम टीम व एफएसएल की टीम ने मौके का मुआयना किया।

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पूर्वी दिल्ली के पूर्व गैंगस्टर मोहम्मद हसन उर्फ़ सूफी कलवा पर दिनदहाड़े चली गोलियां!

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उत्तर पूर्वी दिल्ली में गैंगवार की वारदातें थमने का नाम ही नहीं ले रहीं ऐसा ही मामला कल शाम 05:55 बजे थाना उस्मानपुर क्षेत्र के ब्रह्मपुरी इलाके मे घटा जिसे दो बदमाशों ने उत्तर पूर्वी दिल्ली के पूर्व गैंगस्टर मोहम्मद हसन उर्फ सूफी कलवा पर कई राउंड गोलियां चलाकर अंजाम दिया मोहम्मद हसन उर्फ सूफी कलवा के एक गोली कमर में लगी उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया सूफी कलवा के परिजनों ने बताया कि उनकी हालत नाजुक बनी हुई है!

पुलिस सूत्रों के अनुसार सूफी कलवा पर गोली चलाने वाले का नाम राजू उर्फ बेचैन है जो थाना उस्मानपुर इलाके का घोषित अपराधी है उस पर कई अपराधिक मामले चल रहे हैं! सूत्रों के अनुसार मोहम्मद हसन उर्फ सूफी कलवा उत्तर पूर्वी दिल्ली में चल रहे सट्टे का सबसे बड़ा ऑपरेटर है!

ब्रहमपुरी एवं जाफराबाद के लोगों का कहना है मोहम्मद हसन उर्फ सूफी कलवा एवं राजू उर्फ बेचैन के बीच सट्टे के कारोबार को लेकर काफी वक़्त से खींचतान चल रही है! आपको बता दें उत्तर पूर्वी दिल्ली में सट्टे का नेटवर्क अपनी जड़े जमा चुका है जिसे उत्तर पूर्वी दिल्ली पुलिस आंखें मूंद बढ़ावा दे रही है!

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