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बीट विशेष

प्रकृति बचाने पदयात्रा पर निकले पथिक की क़िस्सागोई

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श्रीराम डालटन पेशे से फिल्मकार हैं । जल, जंगल और जमीन बचाने के लिये पदयात्रा कर रहे हैं।

पढिये उनका फेसबुक पोस्ट।

विकास या स्थायित्व
Devlopment vs Sustainability

साथियों..
गति मेरा उद्देश्य नहीं है।
पहले मेरे मन में भी था कि पानी-पानी करता हुआ नाक के सिधे लपककर जल्द पहूंच जाउंगा और उठाया हुआ बीडा पूरा भी कर लुंगा पर, बात रोजाना बदल जा रही है।
अब सिर्फ मैं नहीं यात्रा कर रहा, मेरे साथ रोज मिलने वालों की उम्मीदें यात्रा कर रही हैं।
अब बात आगे बढ़ गई है।
बहुत लोगों की उम्मीदें जुड गई हैं।
बहुत लोगों का कन्सर्न बन गया है कि मैं सचमे बात समझूँ और उन रास्तों से होकर आगे बढूं जहाँ समस्या है। मुझे तो खुद भी नहीं पता कि जिस दिशा में बढता हूं वहां क्या देखने को मिलेगा!, पर आगे बढ़ने पर समझ में आता है कि पीछले लिंक ने मुझे क्यूँ इस रास्ते पर भेजा है!

लोकल लोगों के निर्देश को फॉलो कर रहा हूँ। समस्याओं का यही रूट है। नहीं तो हाईवे से अपना रथ धकेलना आसान होता। सिनेमा को माध्यम चुना है ताकि विचार बो पाउं। और मेरे जीवन का विषय है। #जलजंगलज़मीन।
ज़मीन की लडाई, जंगल की कटाई और पानी की हालत देश मे क्या है ये समझने के लिए एक ही उपाय है, देश घुमना। गति ज़मीन के हकीकत से काट देती है।
अभी पत्थर उठा कर चल रहा हूं और इसको भी सिनेमा में तब्दील कर रहा हूँ। नाम है मेगालिथ मतलब पत्थलगड़ी। ये भी जलजंगलज़मीन की कहानी है।

जल ही हमारे जीवन का आधार है, ये मैं समझ चुका हूं।
ज़मीन समझना चाहता हूं। बार्डर का बटवारा है तो फिलहाल दायरे में ज़मीन से जुडे मामले समझना चाहता हूं।
जंगल महाराष्ट्र में अभी तक नहीं मिला। अभी आगे सतपुड़ा का जंगल मिलेगा। झारखंड का जंगल समझता हूँ। जिसके नष्ट होने का खतरा देख रहा हूँ।
और पानी..!?
ये समझने के लिए सिर्फ इतना बता दूं कि हजार किलोमीटर की यात्रा में एक भी ऐसी नदी नहीं मिली जिसमें पानी हो। रेत गायब है। घास उग आए हैं।
अब नदियों को लोग नाला बोलने लगे हैं। हर गांव में पानी बिकता है। आकर देख लें।

सिनेमा और मेरा जीवन अलग नहीं है। जीवन से सिनेमा उठाता हूं। मतलब बात उठाता हूं।, पांच साल सिर्फ़ एक सिनेमा को मतलब जलजंगलज़मीन को दिया है। मतलब जीवन दिया है। और ये जीवन कम पडेगा। इस विषय पर समाज का ध्यान दिलाने का कॉन्सस एफर्ट है। पहले तीन राज्य पार कर के झारखंड आने की योजना थी। अभी आठ राज्य की प्लानिंग है। रोज मन करता है कि पूरे देश में यात्रा करना तय करूं।
देखेंगे।.. बहुत कुछ दांव पर है। कितने दोस्त-यार, घर-परिवार।
अपने दोस्तों को सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि आप जीवन के जिस हिस्से से जुडे रहे हैं वो सहयोग, काल मे दर्ज है और मैं आपका आभार प्रकट करता हूं। पर बीता हुआ कल पकड़ कर मैं बैठने वाला व्यक्ति नहीं।

देश की सामाजिक और भौगोलिक स्थिति को टेबल के ग्लोब पर नहीं समझना चाहता न ही गुगल पर। हर एक किलोमीटर कदमों से नापते आगे बढ रहा हूं। और जिस रास्ते बढ रहा हूँ उसका ठोस कारण है। आप जहां से इस प्रक्रिया को समझने की कोशिश कर रहे होंगे उसके लिए आपके पास अपने कारण होंगे,
मेरे पास एक ही कारण है.. हमारा मूलभूत अधिकार।
जिसको लोग तोते की तरह रट तो रखे हैं पर, समझते नहीं हैं। सबको समझा दिया गया है कि पिछले जन्म का हिसाब किताब है!

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बीट विशेष

कांग्रेस नेता शब्बीर अली के दामाद और पूर्व कमिश्नर ऑफ़ पुलिस के बेटे पर एक एन आर आई से लाखों की ठगी का कथित आरोप

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बता दें की एक एन आर आई जिनका नाम अब्दुल वहाब है कांग्रेस नेता शब्बीर अली के दामाद और पूर्व कमिश्नर ऑफ़ पुलिस हैदरावाद के बेटे मोहसिन खान पर कथित रूप से लाखों की ठगी का आरोप लगाया है, उन्होंने मीडिया को मेल भेज कर मामले से अवगत कराया और अपनी आपबीती सुनाई, उन्होंने यहाँ तक कहा की अगर इस बात का कोई निदान नहीं निकलता है तो वो मीडिया के सामने आत्महत्या कर लेंगे।

  आगे पीड़ित द्वारा भेजे गए मेल आपके सामने जस के तस रख रहा हूँ।

मैं एक एन आर आई और मोहसिन खान का शिकार हूँ, जो कांग्रेस नेता शब्बीर अली के दामाद और पूर्व कमिश्नर ऑफ़ पुलिस हैदरावाद ( वर्तमान में तेलंगाना राज्य के लिए अल्पसंख्यकों के कानूनी सलाहकार) के बेटे हैं, मैंने नवंबर 2015 और जनवरी 2016 में तेलंगाना राज्य में रेत निष्कर्षण व्यवसाय के लिए 6 महीने की सहमत शर्तों के साथ अपने एक्सिस बैंक एनआरई खाते के माध्यम से 99 लाख रुपये उनको दिया।

मेरे द्वारा कई मेल भेजने के बाद भी मोहसिन खान और रिश्तेदारों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इसके बाद मेरे पास स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मीडिया के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। मैं अब्दुल वहाब हमारे वकील मोहसिन खान के सभी दस्तावेजों और एक टेलीफोन पर बातचीत (कॉल रिकॉर्डिंग) और एके खान के ईमेल उत्तर के साथ हैदराबाद प्रेस क्लब में मोहसिन खान, एके खान और शब्बीर अली के खिलाफ एक संवाददाता सम्मेलन के लिए जाएंगे।

Photo Credit: Tollywoodfans.in

4 साल से अधिक हो गए जब मैंने ये निवेश किया और मुझे अपनी पूंजी और उसके लाभ अब तक नहीं मिले हैं| मैंने उनसे अनुरोध किया है कि वे उनके द्वारा की गई व्यावसायिक नैतिकता और प्रतिबद्धताओं को समझने के लिए असीमित समय का प्रयास करें और अपनी पूंजी और उसके लाभ को वापस कर दें पर उन्होंने मुझे धमकी दी है और मुझे मुख्यमंत्री और न्यायपालिका के पास जाने का सुझाव दिया है।

मोहसिन खान अपने पिता के पद का अनुचित लाभ उठा रहे हैं और उनके पिता ए के खान भी आपराधिक गतिविधियों में उनका उत्साहजनक समर्थन दे रहे हैं। जहां हमारे माननीय मुख्यमंत्री के रूप में श्री के.सी.आर. अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं वहीँ एके खान और उनका बेटा सत्ता के दुरुपयोग के साथ निर्दोष लोगों का खून चूस रहे हैं।

मैं बेरोजगार हूँ और और आज कल पूरी रात जाग कर और दिल में दर्द के साथ गुजार रहा हूँ, मेरे डॉक्टर ने मुझे सलाह दी है कि मेरे पहले से ही कमजोर दिल को और तनाव न दूँ, कृपया ध्यान दें कि मेरी पत्नी और बच्चों को इन गंभीर तनाव के कारण मेरे निधन की स्थिति में कोई अन्य रोटी देने वाला भी नहीं है, अतः मैं आपसे पुनः अनुरोध करता हूँ की मुझे वापस अपने निवेश और उसके द्वारा वादा किया वित्तीय लाभ प्राप्त करने में मदद करें। कृपया इस ईमेल का जवाब नहीं देकर मुझे मौत के लिए कोने मत करो।

कृपया ध्यान दें कि 99 लाख रुपये हमारे अनिवासी भारतीयों के लिए कोई छोटी राशि नहीं है, कड़ी मेहनत से अर्जित जीवन बचत है और मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप मुझे जितनी जल्दी हो सके इस दुख से बाहर निकाल दें।

मैं दृढ़ता से विश्वास है कि आप एक बहुत ही गंभीर मानवीय तरीके से मेरी अपील पर विचार करेंगे और शब्बीर अली (एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता और एके खान) को लाभ के साथ मेरी राशि वापस करने के लिए सूचित करेंगे, नहीं तो मेरे पास मीडिया के सामने आत्महत्या करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।

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बीट विशेष

कई इमारतें गिरने के बाद भी भजनपुरा के सुभाष मोहल्ले में बिल्डर माफिया धड़ल्ले से कर रहे अवैध फ्लैट निर्माण!

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“सुभाष मोहल्ले की गली नंबर 13 में बिल्डर माफिया द्वारा बनाई जा रही हैं तीन अवैध इमारतें”

चौधरी हैदर अली
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में आए दिन इमारतें गिरने की खबर तो आप सुनते रहते होंगे आज हम आपको बताने जा रहे हैं आखिर इतनी इमारतें गिरने की क्या वजह है! जिसकी वजह से सैकड़ों लोग मलबे के ढेर में दब कर अपनी जान से हाथ धो बैठे!

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर और सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछले 5 सालों मे बिल्डर माफिया 500 से ज्यादा अवैध फ्लैट निर्माण करा चुके हैं जिनकी हालत अब जर्जर हो रही हैं और दर्जनभर इमारत तो मलबे के ढेर में तब्दील हो गई! इमारतें गिरने और जर्जर होने की वजह है बेकार मैटेरियल का इस्तमाल, बिल्डर माफिया चंद पैसों के खातिर लोगों की कीमती जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं, जिसे पूर्वी-दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार नज़र-अंदाज़ कर आंखें मूंदे तमाशा देख रही है!

स्थानीय लोगों का कहना है इस वक़्त बिल्डर माफिया बाबरपुर विधानसभा के वार्ड 48/E में काफी तेजी के साथ फ्लैट निर्माण कर रहे हैं, पिछले 2 साल में 100 से ज्यादा अवैध फ्लैट नुमा इमारतें बिल्डर माफिया बना चुके जिनमें से काफी इमारतें तो जर्जर भी हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं!सुभाष मोहल्ला वार्ड 48 ई की गली नंबर 13 में अब्दुल सलाम मस्जिद के आसपास रहने वाले लोगों ने कहां कि हमने गली में हो रहे तीनों अवैध निर्माणों की शिकायत नगर निगम को दी लेकिन बिल्डर माफियाओं की पहुंच काफी ऊपर तक होने की वजह से नगर निगम अधिकारियों ने सभी शिकायत कर्ताओं के नाम बिल्डर माफिया को बता दिए जिसके बाद बिल्डर माफियाओं ने शिकायत कर्ताओं को दोबारा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी!

People’s Beat ने जनता के आग्रह पर बिल्डर माफिया, स्थानीय पुलिस एवं नगर निगम के कर्मचारियों की शिकायत माननीय प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री जी को दे दी है!

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बीट विशेष

एक हारा हुआ सांसद, जिसने हजारों लोगों को अपने बल पर राहत पहुँचाया।

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बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं , इसका असर आम जन जीवन पर बहुत बुरा पड़ा है यातायात,स्वास्थ्य और खाने से लेकर पीने के पानी की समस्या से आम आदमी को जूझना पड़ रहा है, कुछ ही दिन हुए जब मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चे काल के गाल में समा रहे थे।
यह महज कुछ घटनाएं नहीं है यह पोल खोलती है हमारे तथाकथित विकास की क्या हम इतने गए गुजरे हो गए हैं कि कभी एक राज्य के कुछ जिले आपदा ग्रस्त हुए और सरकारी महकमा हाथ खड़े कर देता है,जिस तरह से सडा हुआ आलू और खाद्य सामग्री बिहार सरकार के द्वारा वितरित की जा रही है वह और ज्यादा रोगी बनायगी लोगों को।

मुख्य सवाल यही है कि लगे हाथ हम डोनेट का रोना रोने लगते है,और इसे उसे कोसने लगते हैं हम इस बात पर विचार करना क्यों जरूरी नहीं समझते कि यह सब आपदा प्रबंधन के लिए बड़े बड़े सरकारी महकमे बने हुए है जो मोटी तनख्वाहों से ऐशो आराम करते हैं..उनका काम इसी समय आता है।

इस बाढ़ का प्रकोप हो या चमकी बुखार का एक पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव खुले हाथों से लोगों की मदद करने को आगे रहे है, वह आज भी जेसीबी और टैक्टर पर बैठकर चलकर राहत सामग्री बांट रहे हैं।

जब यह मधेपुरा सांसद थे उस समय काफी बार इनसे मिलना होता था मंडी हाउस वाले आवास पर उस समय का एक वाकया याद आता है मैं छात्रसंघ का चुनाव लड़ रहा था और मेरी हर सम्भव मदद करने का आश्वासन इन्होंने दिया था, उसी समय कॉलेज में से फोन आता है कि कुछ लोग अपने प्रत्याशी से झगड़ा कर रहे हैं,जब स्तिथि से अवगत कराया तो सांसद जी ने तुरंत ही dsp को फोन कर स्तिथि सम्हालने की हिदायत दी थी।

वैसे मैं किसी का गुणगान करने से बचता हूँ लेकिन मेरे सहयोगियों द्वारा एक बार ही कहने पर यह पूरे जोश के साथ मेरा प्रचार करने भी आये थे कॉलेज में ,वह दौर गुजर गया कुछ यादें रह गयी लेकिन आज फिर एक अनुभव ताजा हो गया।

39 सांसदों में एक हारा हुआ सांसद मोर्चा संभाल रहा है………..और जनता अपना नेता चुनने में अक्सर भूल कर देती है कभी कभी।

अजीत आर्य

 

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