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नोटबंदी के दौरान अमित शाह के बैंक में सबसे ज्यादा पैसे हुए जमा

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कांग्रेस ने नोटबंदी को एक घोटाला बताते हुए बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह पर हमला बोला है. कांग्रेस का आरोप है कि अमित शाह जिस बैंक के निदेशक रहे हैं वह नोटबंदी के दौरान सबसे ज्यादा प्रतिबंधित 500 और 1000 रुपये के नोट जमा करने वाला जिला सहकारी बैंक है. केंद्र सरकार ने आठ नंवबर 2016 में उस समय चलन में रहे 500 और 1000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगाकर उन्हें चलन से बाहर कर दिया था.

कांग्रेस के प्रवक्‍ता रणदीप सुरजेवाला ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर आरोप लगाया कि नोटबंदी के दौरान काले धन को सफेद किया गया. गुजरात कोऑपरेटिव बैंक में हेरफेरी करके नोटबंदी के दौरान सबसे बड़ा घोटाला किया गया. कांग्रेस का आरोप है कि घोटाले से जुड़े सबूत अब सामने और गुजरात के कई कोऑपरेटिव बैंकों के चेयरमैन BJP नेता हैं. नोटबंदी घोटाले की जांच के वक़्त सबसे घोटाले के अब सबूत मिले हैं. नोटबंदी के दौरान एक बैंक में 745 करोड़ रुपये पांच दिन में जमा हुए. यह वही बैंक है जिसके निदेशक बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह रहे हैं. अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक (एडीसीबी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा करने के महज पांच दिन के भीतर 745.59 करोड़ रुपये मूल्य के प्रतिबंधित नोट प्राप्त किए थे.

गौरतलब है कि नोटबंदी की घोषणा के पांच दिन बाद 14 नवंबर 2016 को सभी जिला सहकारी बैंकों को लोगों से प्रतिबंधित नोट जमा लेने से मना कर दिया गया था क्योंकि यह आशंका जताई गई थी कि सहकारी बैंकों के जरिए काले धन को सफेद किया जा सकता है. बैंक की वेबसाइट के अनुसार, अमित शाह उस समय बैंक में निदेशक पर थे और वह कई साल से इस पद पर बने रहे. वह 2000 में बैंक के अध्यक्ष भी रहे हैं.

एडीसीबी के पास 31 मार्च 2017 को कुल 5,050 करोड़ रुपये जमा थे और वित्त वर्ष 2017-18 में बैंक का शुद्ध मुनाफा 14.31 करोड़ रहा. एडीसीबी के बाद सबसे ज्यादा प्रतिबंधित नोट जमा करने वाला सहकारी बैंक राजकोट जिला सहकारी बैंक है जिसके अध्यक्ष गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार में कैबिनेट मंत्री जयेशभाई विट्ठलभाई रडाड़िया हैं. इस बैंक ने 693.19 करोड़ रुपये मूल्य के प्रतिबंधित नोट जमा लिए थे.

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केंद्र सरकार ने किसानों को हराने वाले तीन कानून पास किये है:- रणदीप सिंह सुरजेवाला

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तीन केंद्रीय कृषि विधेयकों (Agricultural bills) के खिलाफ कांग्रेस लगातार केंद्र पर हमलवार है. कांग्रेस ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) ने कहा कि कृषि से जुड़े तीनों कानूनों लाकर बीजेपी ने हरित क्रांति को हराने वाला फैसला किया है. किसानों को हराने वाले 3 काले कानून पास किए हैं. किसान और मजदूरों के भविष्य को रौंद कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने किसान, खेती और मजदूरों की बर्बादी लिख दी है. सुरजेवाला ने कहा कि 62 करोड़ किसान इस काले कानून के खिलाफ विरोध जता रहे हैं. मोदीजी किसानों की बात को सुनना तो दूर संसद में उनके प्रतिनिधियों को बात तक नहीं रखने दी गई. देश में कोरोना, सीमा पर चीन और किसानों (Farmers) पर मोदीजी ने हमला बोल रखा है. सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आज तत्तकालीन गुजरात के सीएम मोदी की बात क्यों नहीं मान रहे हैं.

रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री रहते किसानों से जुड़ी रिपोर्ट में कहा था कि कानून के अंदर एमएसपी की शर्त लिखना अनिवार्य होना चाहिए. ऐसे में मोदीजी आज मोदी की बात क्यों नहीं मान रहे हैं. सुरजेवाला ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते मोदी ने खुद लिखा था कि एमएसपी का कानून में जिक्र अनिवार्य हो, लेकिन अब तीनों कानूनों में एमएसपी का जिक्र ही नहीं है. काश मोदीजी हल पकड़कर कभी खेती करते तो इसके बारे में पता होता. रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि देश का पीएम और कृषि मंत्री ने कभी खेती नहीं की और वे हमें खेती समझा रहे हैं.

हरित क्रांति के तीन आधार थे, तीनों को तीन विधयेकों से खत्म कर दिया

सुरजेवाला ने कहा कि देश में हरित क्रांति के 3 बड़े आधार थे. 23 फसलों को अनिवार्य रूप से खरीदने की व्यवस्था, इन 23 फसलों का एमएसपी तय करना और तीसरा है राशन. सुरजेवाला की माने तो पीएम मोदी ने अकेले खेत खलिहान ही नहीं, बल्कि गरीब के राशन पर भी हमला बोला है. अगर मंडी व्यवस्था नष्ट हो जाएगी तो कृषि उपज खरीद व्यवस्था भी नष्ट हो जाएगी. मंडी नष्ट हो जाने के बाद कृषि उपज को एमएसपी पर कौन खरीदेगा, क्या एफसीआई 15.50 करोड़ किसान के खेत में जाकर खरीद कर लेगा. फिर किसान से एमएसपी पर खरीद कौन करेगा. इन तीनों काले कानूनों में एमएसपी का कहीं जिक्र नहीं है. यदि सरकार इसका जिक्र कर दे तो किसान आंदोलन वापस ले लेंगे.

सुरजेवाला ने कहा कि हम मोदीजी आपको चुनौती देते हैं कि आप तीनों कानूनों में एमएसपी का जिक्र अनिवार्य क्यों नहीं करते, क्योंकि चंद पूंजीपतियों को फायदा देना चाहते हैं. देश में छोटा किसान बाहर जाकर फसल कैसे बेच पाएगा. दूसरे राज्य में जाकर छोटा किसान उपज कैसे बेच पाएगा.

किसानों को सही कीमत नहीं दी गई

वहीं, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि शांता कुमार कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एमएसपी खत्म की गई है. इन कानूनों में, एमएसपी खत्म होने के बाद कॉट्रेक्ट खेती के जरिए ओने पोने दामों में किसान को फसल बेचनी पड़ेगी. छत्तीसगढ़ में ऐसा हो चुका है जब कॉट्रेक्ट खेती वाले भाग खड़े हुए. किसानों को सही कीमत नहीं दी गई.

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कृषि सुधार बिल के विरोध में और किसानों के समर्थन में सुदूर पहाड़ों पर भी लोग उतरे सड़कों पर

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आज अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में विभिन्न जनवादी संगठनों ने गोपेश्वर के शहर में प्रदर्शन का आयोजन किया विभिन्न जनवादी संगठनों के कार्यकर्ता जिला डाकघर पर एकत्रित हुए जहां से जुलूस की शक्ल में मुख्य बाजार होते हुए मंदिर तक और मंदिर से बस स्टैंड गोपेश्वर में जुलूस एक जनसभा में तब्दील हो गया जहां पर किसान नेताओं ने मोदी सरकार द्वारा सभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर कृषि क्षेत्र से जुड़े किसान विरोधी जन विरोधी 3 कानूनों की प्रतियों का दहन किया उसके बाद सभा को संबोधित करने वालों में किसान सभा के जिला सचिव ज्ञानेंद्र खंतवाल जिला मंत्री पुरुषोत्तम सती किसान सभा के उप मंत्री बस्ती लाल जी कुंवर राम नौजवान सभा के कमलेश गॉड एसएफआई के ज्योति बिष्ट महिला समिति गीता बिष्ट किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष भोपाल सिंह रावत ने अपनी बात रखते हुए सभा का समापन किया सभा का संचालन सीटू जिला अध्यक्ष मदन मिश्रा ने किया। सभी वक्ताओं ने मोदी सरकार की कृषि से जुड़े इन तीनों कानून को किसान विरोधी और जनविरोधी बताया वक्ताओं का कहना था कि केंद्र सरकार ने बिना किसी विचार विमर्श के देशी-विदेशी कारपोरेट के हितों को संरक्षण देते हुए किसानों की खेती किसानी कॉर्पोरेट के हवाले गिरवी रख दिया है। इससे किसानों की फसलों की खरीद कॉर्पोरेट के रहमों करम पर रह जाएगी और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी कोई चीज और सरकार द्वारा कभी भी घोषित नहीं की जाएगी सरकारी खरीद न होने से जो सरकार के अन्न भंडार हैं वह पूरी तरह से प्रभावित होंगे और देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी इस प्रकार यह कृषि कानून जो सरकार ने बिना संसद में और राज्यसभा में चर्चा कराए बगैर धींगा मस्ती में पास कराए यह देश के कारपोरेट को अपनी मर्जी के रेट पर किसानों की फसल खरीद का अधिकार देता है और अपनी ही मर्जी पर उपभोक्ताओं को बेचने का अधिकार देता है वक्ताओं ने कहा कि आज पूरे अखिल भारतीय पैमाने के इस विरोध दिवस को आगे भी जारी रखा जाएगा जब तक सरकार इन कृषि से जुड़े किसान विरोधी तीनों कानूनों को वापस नहीं लेगी तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है वक्ताओं ने कहा सरकार ने 44 मजदूर हितेषी कानूनों को खत्म कर चार संहिता बनाने का जो निर्णय लिया था उसका भी वक्ताओं ने पुरजोर विरोध किया और सरकार को चेताया कि मजदूर किसान की एकता यह संघर्ष मोदी सरकार की कॉरपोरेट से की गई सांठगांठ को जनता के बीच बेनकाब करेगा प्रदर्शन में भाग लेने वाले मीना उषा सीमा गजेंद्र देवेंद्र खेनेड़ा भगत सिंह विजय लाल देवेंद्र लाल जयंती मटिया मोहन सिंह रावत महिंदर मलेथा रीना धीरज रीना अमन कोहली आदि थे

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कृषि सुधार विधेयक के विरोध में आज भारत बंद, पंजाब में रेल रोको आंदोलन

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पंजाब (Punjab) और हरियाणा (Haryana) के किसान संसद में पारित कृषि सुधार विधेयकों (Farm Bills) के खिलाफ आज हड़ताल करेंगे. पंजाब बंद (Punjab Bandh) के लिए 31 किसान संगठनों ने हाथ मिलाया है. हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kissan Union) समेत कई संगठनों ने कहा है कि उन्होंने विधेयकों के खिलाफ कुछ किसान संगठनों द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन किया है. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (CM Amarinder Singh) ने प्रदर्शन के दौरान किसानों से कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और कोरोना वायरस (Coronavirus) से जुड़े सभी नियमों का पालन करने की अपील की है.

एक बयान में सिंह ने कहा कि राज्य सरकार विधेयकों के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह किसानों के साथ है और धारा 144 के उल्लंघन के लिए प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल के दौरान कानून-व्यवस्था की दिक्कतें पैदा नहीं करनी चाहिए. उन्होंने किसानों से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि नागरिकों को किसी तरह की दिक्कतें नहीं हो और आंदोलन के दौरान जान-माल को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं होना चाहिए. भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) महासचिव सुखबीर सिंह ने हड़ताल के समर्थन में वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, दुकानदारों से अपनी दुकानों बंद रखने की अपील की है.

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ (Punjab Congress Chief Sunil Jakhar) ने भी लोगों से किसानों का समर्थन करने और हड़ताल को सफल बनाने का अनुरोध किया है. मुख्य विपक्षी आम आदमी पार्टी पहले ही अपना समर्थन दे चुकी है जबकि शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने सड़क बंद करने की घोषणा की है. विधेयकों के खिलाफ किसानों ने पंजाब में कई स्थानों पर गुरुवार को तीन दिवसीय रेल रोको प्रदर्शन शुरू किया और पटरियों पर धरना दिया.

किसान संगठनों ने एक अक्टूबर से अनिश्चितकालीन रेल रोको प्रदर्शन भी शुरू करने का फैसला किया है. प्रदर्शनकारियों ने आशंका व्यक्त की है कि केंद्र के कृषि सुधारों से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और कृषि क्षेत्र बड़े पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा. किसानों ने कहा है कि तीनों विधेयक वापस लिए जाने तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.

हरियाणा भाकियू के प्रमुख गुरनाम सिंह ने कहा कि उनके संगठन के अलावा कुछ अन्य किसान संगठनों ने भी राष्ट्रव्यापी हड़ताल को अपना समर्थन दिया है. सिंह ने कहा, ‘‘हमने अपील की है कि राज्य के राजमार्गों पर धरना होना चाहिए और अन्य सड़कों पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध होना चाहिए. राष्ट्रीय राजमार्गों पर धरना नहीं देना चाहिए.’’ सिंह ने कहा कि हड़ताल के दौरान सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक किसी भी प्रकार के गैरकानूनी काम में संलिप्त नहीं होना चाहिए.

भाकियू नेता ने कहा कि कमीशन एजेंट, दुकानदारों और ट्रांसपोर्टरों से भी हड़ताल का समर्थन करने का अनुरोध किया गया है.

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