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राजनीति

तेजस्वी ने फिर दोहराई बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग, कहा- बैन हो ईवीएम

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आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में उनकी पार्टी बिहार में ईवीएम द्वारा कराए गए लगातार 3 उपचुनाव जीत चुकी है. मगर इसके बावजूद भी उनकी मांग है कि भविष्य में होने वाले कोई भी चुनाव ईवीएम के जरिए ना हो बैलेट पेपर के जरिए कराए जाएं.

पिछले दिनों आरजेडी ने अररिया लोकसभा चुनाव के साथ-साथ जहानाबाद और जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव में जीत हासिल की है. सवाल उठता है कि लगातार ईवीएम के द्वारा कराए जा रहे चुनाव जीतने के बावजूद भी आखिर तेजस्वी यादव क्यों चाहते हैं कि चुनाव बैलेट पेपर के जरिए हो?

इसका जवाब यह है कि विपक्षी दलों के साथ-साथ अब सत्ता पक्ष वालों ने भी ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना शुरू कर दिया है. तेजस्वी यादव ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का हवाला देते हुए एक ट्वीट किया है और कहा है कि उन्होंने भी ईवीएम के द्वारा कराए जाने वाले चुनाव को लेकर संदेह जताया है.

तेजस्वी यादव ने सवाल पूछा है कि जब सत्तारूढ़ और विपक्षी दल, दोनों ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं तो आखिर चुनाव आयोग इस पूरे मामले का संज्ञान क्यों नहीं ले रहा है? भाजपा पर तंज कसते हुए तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया है कि जब भी कभी ईवीएम में तकनीकी गड़बड़ी आती है तो वोट भाजपा को ही क्यों जाता है?

2019 लोकसभा चुनाव से पहले तेजस्वी यादव ने कहा है कि ईवीएम को भाजपा के शासन में सर्दी, खांसी, जुकाम, डेंगू और लू लगने की बीमारी शुरू हो गई है. तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह इस पूरे मामले को लेकर स्पष्टीकरण दें या फिर चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लगाएं.

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वाह री सरकार आसान कर दिया अत्याचार:- प्रियंका गांधी

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विपक्ष के विरोध के बीच श्रम सुधार से जुड़े तीन विधेयकों को संसद की मंजूरी मिल चुकी है। इन विधेयकों को लेकर गुरुवार को कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। प्रियंका ने कहा कि भाजपा सरकार ने अत्‍याचार करना आसान कर दिया है। उन्‍होंने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा-‘इस कठिन समय की मांग है कि किसी की नौकरी न जाए। सबकी आजीविका सुरक्षित रहे। भाजपा सरकार की प्राथमिकता देखिए- भाजपा सरकार अब ऐसा कानून लाई है जिसमें कर्मचारियों को नौकरी से निकालना आसान हो गया है। वाह री सरकार आसान कर दिया अत्याचार।’

प्रियंका ने इसके साथ ही किसान बिल को लेकर भी एक बार फिर सरकार पर हमला बोला। एक अन्‍‍‍य ट्वीट में उन्‍होंने लिखा-‘भाजपा के कृषि बिल के पहले MSP = किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और बिल पास हो जाने के बाद- MSP = पूंजीपतियों के लिए मैक्सिमम सपोर्ट इन प्रॉफिट किसान कहां जाएगा?’

गौरतलब है कि बुधवार को राज्‍यसभा में श्रम सुधार से जुड़े तीन बिल ध्‍वनि मत से पारित हुए थे। अब इन्‍हें राष्‍ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। ये बिल हैं- ‘उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कार्यदशा संहिता 2020’, ‘औद्योगिक संबंध संहिता 2020’ और ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020’ हैं। इनमें किसी प्रतिष्ठान में आजीविका सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा को विनियमित करने, औद्योगिक विवादों की जांच एवं निर्धारण और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा संबंधी प्रावधान किए गए हैं।

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शरद पवार को दिए आय कर के नोटिस पर EC ने कहा हमने नही दिए कोई निर्देश

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आयकर विभाग (Income Tax)द्वारा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar), उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे विधायक आदित्य ठाकरे को चुनावी हलफनामे में आय की डिटेल्स के संबंध में नोटिस भेजा गया है। इस पर कल यानी मंगलवार को शरद पवार ने कहा था कि आयकर विभाग ने उन्हें चुनाव आयोग (Election Commission) को जमा किए चुनावी हलफनामों के सिलसिले में नोटिस भेजा है। इस पर चुनाव आयोग ने कहा है कि उनके द्वार कोई निर्देश नहीं दिए गये हैं।
मंगलवार को पवार ने मुंबई में मीडिया से कहा कि आयकर विभाग ने उनसे उनके द्वारा दिये गये कुछ चुनावी हलफनामों के संबंध में स्पष्टीकरण एवं सफाई मांगी है। उन्होंने कहा, कल मुझे नोटिस मिला है और हम खुश हैं कि वह (केंद्र) सभी सदस्यों में से हमें प्यार करता है। आयकर विभाग ने तब नोटिस जारी किया जब उससे चुनाव आयोग ने ऐसा करने को कहा और हम नोटिस का जवाब देंगे।
पवार ने कहा था कि विवादास्पद कृषि बिलों को लेकर राज्यसभा के आठ निलंबित सदस्यों का समर्थन करता हूं। केंद्र सरकार विरोधियों को टैक्स नोटिस के जरिए डराने धमकाने की कोशिश कर रही है। पवार ने प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगाने को लेकर भी केंद्र की आलोचना की है।
शरद पवार ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने के प्रश्न पर कहा कि क्या राष्ट्रपति शासन लगाने की कोई वजह है, क्या राष्ट्रपति शासन कोई मजाक है। महाराष्ट्र विकास अघाड़ी को विधानसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त है इसलिए ऐसा कुछ नहीं होगा।

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बिहार:- डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे हो सकते है एनडीए के उम्मीदवार वीआरएस हुआ मंजूर

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बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडेय की स्वैच्छिक सेवानिवृति (वीआरएस) को बिहार सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें विधानसभा चुनाव में बक्सर या भोजपुर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

पिछले कई दिनों से ये कयास लगाए जा रहे थे कि डीजीपी पांडेय पुलिस की नौकरी छोड़कर राजनीति में नई पारी की शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन इससे पहले ही बिहार सरकार ने उनका वीआरएस मंजूर कर लिया। पांडेय के वीआरएस लेने और चुनाव लड़ने की संभावना को लेकर जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। सूत्रों का दावा है कि वे हर हाल में विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

संजीव कुमार सिंघल को मिला अतिरिक्त प्रभार

गुप्तेश्वर पांडेय को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने के बाद बिहार होमगार्ड और अग्निशाम सेवाएं के महानिदेशक संजीव कुमार सिंघल को बिहार के डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सिंघल 1988 बैच के आईपीएस हैं। चर्चा है कि पांडेय एनडीए में शामिल होकर चुनाव लड़ सकते हैं। पांडेय नीतीश सरकार की शराबबंदी की नीतियों को लेकर भी काफी मुखर रहे हैं।

कहा जाता है कि भाजपा और जदयू दोनों ही पार्टियों से गुप्तेश्वर पांडेय के बेहतर संबंध रहे हैं। पांडेय एक बार भाजपा के टिकट से लोकसभा का चुनाव लड़ने का भी प्रयास कर चुके हैं। हालांकि तब वे चुनाव नहीं लड़ पाए थे। आईपीएस ऑफिसर रहते हुए भी गुप्तेश्वर पांडेय खासी सुर्खियों में रहे हैं।

सिर्फ 5 महीने का बचा था कार्यकाल

गुप्तेश्वर पांडेय 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। 31 जनवरी 2019 को उन्हें बिहार का डीजीपी बनाया गया था। उनका कार्यकाल करीब 5 महीने का ही बचा था। राज्य के पुलिस महानिदेशक के रूप में गुप्तेश्वर पांडेय का कार्यकाल 28 फरवरी 2021 को पूरा होने वाला था। उनके इस कदम से साफ लग रहा है कि गुप्तेश्वर पांडेय ने चुनावी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर ली है।

बेगूसराय और जहानाबाद में अपराधियों का किया था खात्मा

बतौर आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय 33 साल की सर्विस पूरी कर चुके हैं। एसपी से लेकर डीआईजी, आईजी और एडीजी बनने तक के सफर में गुप्तेश्वर पांडेय 26 जिलों में काम कर चुके हैं। 1993-94 में वे बेगूसराय और 1995-96 में जहानाबाद के एसपी रह चुके हैं। दोनों जिलों में अपने कार्यकाल के दौरान अपराधियों का खात्मा कर दिया था। इन्हें कम्यूनिटी पुलिसिंग के लिए भी जाना जाता है।

सुशांत मामले में बेबाक तरीके से रखी थी अपनी बात

मुंबई में हुए एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमय मौत के मामले में पटना में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद डीजीपी के निर्देश पर ही बिहार पुलिस की टीम को जांच के लिए वहां भेजा गया था। इस मामले में गुप्तेश्वर पांडेय ने अपनी बातों को बेबाक तरीके से सबके सामने रखा था। कई बार वो खुलकर मीडिया के सामने आए थे। बिहार के युवाओं के बीच इनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है।

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