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बीट विशेष

तथाकथित सेकुलर और सामाजिक न्याय की बात करने वाले नेताओं के नाम दिलीप मंडल का खुला पत्र

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दिलीप मंडल का खुला पत्र
(देश के सभी तथाकथित सेकुलर और सामाजिक न्याय की बात करने वाले नेताओं के नाम)

महोदया/महोदय,
मुझे मालूम है कि आप सब आने वाले विधानसभा चुनावों और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त होंगे. आप राज्यस्तरीय, जिलास्तरीय और चुनाव क्षेत्र स्तरीय सभाएं कर रहे होंगे.

सदस्यता अभियान चला रहे होंगे, कैंडिडेट चुन रहे होंगे, गठबंधन बना रहे होंगे, चुनावी नारे और घोषणापत्र लिखने का काम चल रहा होगा. सबसे बड़ी बात कि आप लोगों के पास बीजेपी की तरह कॉरपोरेट समर्थन नहीं है, इसलिए पैसा जुटाना आप लोगों के लिए मुश्किल का काम बन गया है. आप में से कई लोग मेरे निजी मित्र भी हैं, इसलिए अंदाजा है कि आप कितने सारे कामों में लगे हैं.

ऐसे व्यस्त समय में आपको परेशान करने की कोशिश कर रहा हूं, तो यह मान लीजिए कि मामला कितना गंभीर है. बेहतर होता कि यह पत्र लिखने की नौबत न आती. लेकिन आप लोगों की स्थिति को देखते हुए यह पत्र लिखना पड़ रहा है.

महोदया/महोदय,
आपको मालूम है कि हाल के दिनों में खासकर मुसलमानों और दलितों पर गाय के नाम पर या किसी भी बहाने से हमले बढ़ गए हैं. आदिवासी तो हमेशा से हमलों का शिकार हो रहे हैं. ये तीन समुदाय मिलकर देश की लगभग 40% आबादी हैं. ओबीसी का हक मारा जा रहा है, लेकिन शारीरिक हमले उन पर कम होते हैं. इसलिए उनकी बात फिलहाल छोड़ देते हैं.

मैं आपका ध्यान हाल में खासकर मुसलमानों पर हो रहे हमलों की ओर दिलाना चाहूंगा. मुसलमानों की बात खास तौर पर इसलिए क्योंकि दलितों और आदिवासियों पर होने वाले हमलों पर आप लोग कुछ न कुछ प्रतिक्रिया जरूर देते हैं. जैसे हमने देखा कि ऊना कांड पर लगभग सारा विपक्ष एकजुट हुआ. एससी-एसटी एक्ट पर भी पूरा विपक्ष एकजुट हुआ.

लेकिन मुसलमानों पर हो रहे हमलों को लेकर आप लोगों में एक अजीब सी चुप्पी है. मैं समझ सकता हूं कि बीजेपी और आरएसएस मुसलमानों को जानबूझकर निशाना बना रहे हैं, ताकि उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया हो और वे हिंदू के नाम पर ध्रुवीकरण कर लें. आपको हिंदू ध्रुवीकरण का डर सता रहा है. आप लोगों के बीच रहता हूं. समझ सकता हूं आपका डर.

लेकिन मेरा एक सवाल है. आपको परेशान करेगा.

विपक्षी नेता क्या इसलिए खामोश रहेंगे कि मुसलमानों के लिए न्याय की बात करने से कोई काल्पनिक हिंदू ध्रुवीकरण हो जाएगा? अगर हिंदू ध्रुवीकरण इतना आसान है और अगर जनता पर विपक्षी दलों की कोई पकड़ नहीं है तो फिर हिंदू ध्रुवीकरण तो होकर रहेगा. आपके रोकने से वह रुकेगा नहीं.

मैं चाहता था कि पिलखुआ या अलवर या दादरी या झारखंड में मुसलमानों पर जुल्म होने पर विपक्षी दलों का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल वहां जाता और समाज के तमाम तबकों को लेकर शांति कमेटी बनाता. मोहल्ला स्तर पर बैठकें करता.

मिसाल के तौर पर, पिलखुआ में अगर सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद के नेता यानी अखिलेश यादव, बहनजी, राहुल गांधी और अजित सिंह जाकर अमन चैन की अपील करते और अपने समर्थकों से कहते कि मुसलमानों के साथ मिलकर रहो तो क्या संघियों की हिम्मत होती कि कोई हिंसा कर दें. पिलखुआ के जाट, दलित, पिछड़े साथ खड़े हो जाएं, तो किसकी हिम्मत है कि हिंसा कर दे. इनको साथ देखने भर से संघियों की हाफपेंट गीली हो जाएगी.

लेकिन आप यह कर क्यों नहीं पा रहे हैं? किस बात का डर है? मत डरिए. न्याय का साथ देने से कोई हिंदू ध्रुवीकरण नहीं होगा. आपके पक्ष में इंसानियत का ध्रुवीकरण बेशक हो जाएगा.

झारखंड में अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा, आरजेडी, कांग्रेस और वामपंथी दलों के कार्यकर्ता एकजुट होकर कह दें कि हमें हिंसा नहीं चाहिए तो हिंसा करने की हिम्मत किसे होगी?
विपक्ष अगर एकजुट होकर हिंसा के खिलाफ खड़ा हो जाए, तो देश के किसी भी हिस्से में हिंसा नहीं हो पाएगी. संघी कुछ उत्पात करेंगे लेकिन उनका खास असर नहीं होगा.

मेरा मानना है कि ऐसे नाजुक मौके पर, विपक्ष को हिंदू ध्रुवीकरण के काल्पनिक डर को त्याग देना चाहिए. न्याय के पक्ष में खड़े होने से अगर आप एक चुनाव हार भी जाते हैं तो क्या बिगड़ जाएगा. और आप चुनाव हार क्यों जाएंगे. आपकी चट्टानी एकता किसी भी संघी साजिश का मुकाबला करने के लिए काफी हैं.
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कायदे से आपको पूरे देश में जिला, शहर और गांव के स्तर पर तमाम समुदायों को लेकर अमन कमेटियां बनानी चाहिए. सिर्फ नारेबाजी से, और गठबंधन के साथियों के साथ फोटो खिंचाने से सांप्रदायिकता का मुकाबला नहीं हो पाएगा.

देखिए, गांधी से मेरा लाख विरोध है. वह वर्ण व्यवस्था के समर्थक थे. दलित विरोधी थे. पूंजीपतियों की दलाली करते थे. लेकिन उनमें इंसानियत थी. दंगा होने पर सीना खोलकर दंगाइयों के सामने खड़े होने का बंदे मे दम था.

यह दम आज के विपक्षी नेताओं में क्यों नहीं है. वे यह क्यों सोच रहे हैं कि मुसलमान तो हमें वोट देगा ही. बेशक देगा. लेकिन आपका भी तो कोई दायित्व बनता है.

आप मुसलमानों के प्रति कोई दायित्व मत निभाइए. इंसानियत का फर्ज अदा कीजिए.

क्या आपसे इतनी सी उम्मीद की जा सकती है? और अगर आप इतना भी नहीं कर सकते, तो मुझे खाक फर्क नहीं पड़ता कि आप चुनाव हारते हैं कि जीतते हैं. इंसानियत ही नहीं बची, तो आपकी सरकार बनने या न बनने की चिंता मैं क्यों करूं.

सधन्यवाद,
इंसानियत की मुहिम में आपका दोस्त
दिलीप मंडल
नई दिल्ली, 21 जून, 2018

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कांग्रेस नेता शब्बीर अली के दामाद और पूर्व कमिश्नर ऑफ़ पुलिस के बेटे पर एक एन आर आई से लाखों की ठगी का कथित आरोप

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बता दें की एक एन आर आई जिनका नाम अब्दुल वहाब है कांग्रेस नेता शब्बीर अली के दामाद और पूर्व कमिश्नर ऑफ़ पुलिस हैदरावाद के बेटे मोहसिन खान पर कथित रूप से लाखों की ठगी का आरोप लगाया है, उन्होंने मीडिया को मेल भेज कर मामले से अवगत कराया और अपनी आपबीती सुनाई, उन्होंने यहाँ तक कहा की अगर इस बात का कोई निदान नहीं निकलता है तो वो मीडिया के सामने आत्महत्या कर लेंगे।

  आगे पीड़ित द्वारा भेजे गए मेल आपके सामने जस के तस रख रहा हूँ।

मैं एक एन आर आई और मोहसिन खान का शिकार हूँ, जो कांग्रेस नेता शब्बीर अली के दामाद और पूर्व कमिश्नर ऑफ़ पुलिस हैदरावाद ( वर्तमान में तेलंगाना राज्य के लिए अल्पसंख्यकों के कानूनी सलाहकार) के बेटे हैं, मैंने नवंबर 2015 और जनवरी 2016 में तेलंगाना राज्य में रेत निष्कर्षण व्यवसाय के लिए 6 महीने की सहमत शर्तों के साथ अपने एक्सिस बैंक एनआरई खाते के माध्यम से 99 लाख रुपये उनको दिया।

मेरे द्वारा कई मेल भेजने के बाद भी मोहसिन खान और रिश्तेदारों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इसके बाद मेरे पास स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मीडिया के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। मैं अब्दुल वहाब हमारे वकील मोहसिन खान के सभी दस्तावेजों और एक टेलीफोन पर बातचीत (कॉल रिकॉर्डिंग) और एके खान के ईमेल उत्तर के साथ हैदराबाद प्रेस क्लब में मोहसिन खान, एके खान और शब्बीर अली के खिलाफ एक संवाददाता सम्मेलन के लिए जाएंगे।

Photo Credit: Tollywoodfans.in

4 साल से अधिक हो गए जब मैंने ये निवेश किया और मुझे अपनी पूंजी और उसके लाभ अब तक नहीं मिले हैं| मैंने उनसे अनुरोध किया है कि वे उनके द्वारा की गई व्यावसायिक नैतिकता और प्रतिबद्धताओं को समझने के लिए असीमित समय का प्रयास करें और अपनी पूंजी और उसके लाभ को वापस कर दें पर उन्होंने मुझे धमकी दी है और मुझे मुख्यमंत्री और न्यायपालिका के पास जाने का सुझाव दिया है।

मोहसिन खान अपने पिता के पद का अनुचित लाभ उठा रहे हैं और उनके पिता ए के खान भी आपराधिक गतिविधियों में उनका उत्साहजनक समर्थन दे रहे हैं। जहां हमारे माननीय मुख्यमंत्री के रूप में श्री के.सी.आर. अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं वहीँ एके खान और उनका बेटा सत्ता के दुरुपयोग के साथ निर्दोष लोगों का खून चूस रहे हैं।

मैं बेरोजगार हूँ और और आज कल पूरी रात जाग कर और दिल में दर्द के साथ गुजार रहा हूँ, मेरे डॉक्टर ने मुझे सलाह दी है कि मेरे पहले से ही कमजोर दिल को और तनाव न दूँ, कृपया ध्यान दें कि मेरी पत्नी और बच्चों को इन गंभीर तनाव के कारण मेरे निधन की स्थिति में कोई अन्य रोटी देने वाला भी नहीं है, अतः मैं आपसे पुनः अनुरोध करता हूँ की मुझे वापस अपने निवेश और उसके द्वारा वादा किया वित्तीय लाभ प्राप्त करने में मदद करें। कृपया इस ईमेल का जवाब नहीं देकर मुझे मौत के लिए कोने मत करो।

कृपया ध्यान दें कि 99 लाख रुपये हमारे अनिवासी भारतीयों के लिए कोई छोटी राशि नहीं है, कड़ी मेहनत से अर्जित जीवन बचत है और मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप मुझे जितनी जल्दी हो सके इस दुख से बाहर निकाल दें।

मैं दृढ़ता से विश्वास है कि आप एक बहुत ही गंभीर मानवीय तरीके से मेरी अपील पर विचार करेंगे और शब्बीर अली (एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता और एके खान) को लाभ के साथ मेरी राशि वापस करने के लिए सूचित करेंगे, नहीं तो मेरे पास मीडिया के सामने आत्महत्या करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।

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कई इमारतें गिरने के बाद भी भजनपुरा के सुभाष मोहल्ले में बिल्डर माफिया धड़ल्ले से कर रहे अवैध फ्लैट निर्माण!

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“सुभाष मोहल्ले की गली नंबर 13 में बिल्डर माफिया द्वारा बनाई जा रही हैं तीन अवैध इमारतें”

चौधरी हैदर अली
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में आए दिन इमारतें गिरने की खबर तो आप सुनते रहते होंगे आज हम आपको बताने जा रहे हैं आखिर इतनी इमारतें गिरने की क्या वजह है! जिसकी वजह से सैकड़ों लोग मलबे के ढेर में दब कर अपनी जान से हाथ धो बैठे!

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर और सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछले 5 सालों मे बिल्डर माफिया 500 से ज्यादा अवैध फ्लैट निर्माण करा चुके हैं जिनकी हालत अब जर्जर हो रही हैं और दर्जनभर इमारत तो मलबे के ढेर में तब्दील हो गई! इमारतें गिरने और जर्जर होने की वजह है बेकार मैटेरियल का इस्तमाल, बिल्डर माफिया चंद पैसों के खातिर लोगों की कीमती जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं, जिसे पूर्वी-दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार नज़र-अंदाज़ कर आंखें मूंदे तमाशा देख रही है!

स्थानीय लोगों का कहना है इस वक़्त बिल्डर माफिया बाबरपुर विधानसभा के वार्ड 48/E में काफी तेजी के साथ फ्लैट निर्माण कर रहे हैं, पिछले 2 साल में 100 से ज्यादा अवैध फ्लैट नुमा इमारतें बिल्डर माफिया बना चुके जिनमें से काफी इमारतें तो जर्जर भी हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं!सुभाष मोहल्ला वार्ड 48 ई की गली नंबर 13 में अब्दुल सलाम मस्जिद के आसपास रहने वाले लोगों ने कहां कि हमने गली में हो रहे तीनों अवैध निर्माणों की शिकायत नगर निगम को दी लेकिन बिल्डर माफियाओं की पहुंच काफी ऊपर तक होने की वजह से नगर निगम अधिकारियों ने सभी शिकायत कर्ताओं के नाम बिल्डर माफिया को बता दिए जिसके बाद बिल्डर माफियाओं ने शिकायत कर्ताओं को दोबारा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी!

People’s Beat ने जनता के आग्रह पर बिल्डर माफिया, स्थानीय पुलिस एवं नगर निगम के कर्मचारियों की शिकायत माननीय प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री जी को दे दी है!

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एक हारा हुआ सांसद, जिसने हजारों लोगों को अपने बल पर राहत पहुँचाया।

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बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं , इसका असर आम जन जीवन पर बहुत बुरा पड़ा है यातायात,स्वास्थ्य और खाने से लेकर पीने के पानी की समस्या से आम आदमी को जूझना पड़ रहा है, कुछ ही दिन हुए जब मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चे काल के गाल में समा रहे थे।
यह महज कुछ घटनाएं नहीं है यह पोल खोलती है हमारे तथाकथित विकास की क्या हम इतने गए गुजरे हो गए हैं कि कभी एक राज्य के कुछ जिले आपदा ग्रस्त हुए और सरकारी महकमा हाथ खड़े कर देता है,जिस तरह से सडा हुआ आलू और खाद्य सामग्री बिहार सरकार के द्वारा वितरित की जा रही है वह और ज्यादा रोगी बनायगी लोगों को।

मुख्य सवाल यही है कि लगे हाथ हम डोनेट का रोना रोने लगते है,और इसे उसे कोसने लगते हैं हम इस बात पर विचार करना क्यों जरूरी नहीं समझते कि यह सब आपदा प्रबंधन के लिए बड़े बड़े सरकारी महकमे बने हुए है जो मोटी तनख्वाहों से ऐशो आराम करते हैं..उनका काम इसी समय आता है।

इस बाढ़ का प्रकोप हो या चमकी बुखार का एक पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव खुले हाथों से लोगों की मदद करने को आगे रहे है, वह आज भी जेसीबी और टैक्टर पर बैठकर चलकर राहत सामग्री बांट रहे हैं।

जब यह मधेपुरा सांसद थे उस समय काफी बार इनसे मिलना होता था मंडी हाउस वाले आवास पर उस समय का एक वाकया याद आता है मैं छात्रसंघ का चुनाव लड़ रहा था और मेरी हर सम्भव मदद करने का आश्वासन इन्होंने दिया था, उसी समय कॉलेज में से फोन आता है कि कुछ लोग अपने प्रत्याशी से झगड़ा कर रहे हैं,जब स्तिथि से अवगत कराया तो सांसद जी ने तुरंत ही dsp को फोन कर स्तिथि सम्हालने की हिदायत दी थी।

वैसे मैं किसी का गुणगान करने से बचता हूँ लेकिन मेरे सहयोगियों द्वारा एक बार ही कहने पर यह पूरे जोश के साथ मेरा प्रचार करने भी आये थे कॉलेज में ,वह दौर गुजर गया कुछ यादें रह गयी लेकिन आज फिर एक अनुभव ताजा हो गया।

39 सांसदों में एक हारा हुआ सांसद मोर्चा संभाल रहा है………..और जनता अपना नेता चुनने में अक्सर भूल कर देती है कभी कभी।

अजीत आर्य

 

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