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शिक्षा

क्या कन्हैया कर पायेगा विपक्ष को एक जुट?

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अपने छात्र जीवन काल को कुछ दिनों में खत्म करने जा रहे जानेमाने छात्र नेता कन्हैया कुमार यूँ तो कुशल नेतृत्व करने की प्रतिभा तो दिखा दिया छात्र आंदोलनों में, चाहे वो ऑक्युपाई यूजीसी का हो या रोहित वेमुला का लेकिन जेएनयू आंदोलन के बाद विराट छवि के साथ जेल से बाहर आये उस समय के जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार लोगों के सामने जब अपनी बात रख रहे थे तो लोग ये नही देख रहे थे कि कन्हैया किसी खास विचारधारा से ओत-प्रोत है या खास विचारधारा से संबंध रखनेवाले परिवार से सम्बंध रखते हैं, बस कन्हैया के दर्द को लोग अपनी सहानुभूति के रूप में आभास करवा रहे थे और विचार बना रहे थे, उसके गजब की नेतृत्व क्षमता से लोग कायल हो गए थे जिसके बल पर वो जय भीम और लाल सलाम को जोड़ने की बात कर रहे थे जोकि आजतक न किसी वामपंथी के दिमाग में ये बात आई और न ही अम्बेडकरवादियों के लेकिन कन्हैया ने पहले ही भाषण में ये हिम्मत कर दिखाया। आगे उसके लिए चुनौतियों भरा रास्ता था/है जब देश में एक ऐसी सरकार का कालखण्ड चल रहा है जो असमान विचारों को कुचलना जानती है, सम्मान नही। कन्हैया से आगे की रणनीति के बारे में सवाल की गयी तो उसने कहा देश एक बहुत बड़ी साजिश में फंस चूका है जिससे निकालना किसी अकेले के वश की बात नही, सबको साथ आना होगा। कन्हैया का कहना है कि दक्षिणपंथी वोटों को छोड़कर बाकी सारे वोट वामपंथ का ही है। कन्हैया के इस बात पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है लेकिन तत्क्षण बीजेपी को रोकने के लिए क्या किया जाए, इस सवाल के जवाब में कन्हैया कुमार कहते हैं कि समाज में असमानता और गैरबराबरी के खिलाफ उठते आवाज को ताकत देने की जरूरत है ताकि समाज में निचले स्तर पर व्यापक सहमति बनायीं जा सके और बीजेपी-आरएसएस के झूठ का पर्दाफास हो सके। कन्हैया इसके लिए देश के तमाम अमन पसन्द नेताओं, छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं,उनसे लोकतंत्र बचाने की अपील कर रहे हैं। ऊना आंदोलन से उभरे दलित नेता जिग्नेश मेवानी भी कन्हैया कुमार के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकार समाज के निचले पायदान के लोगों की चेतना विकास के लिए अग्रसर हैं। सहारनपुर हिंसा से चर्चा में आये चंद्रशेखर आजाद भी जिग्नेश मेवानी और कन्हैया कुमार के साथ चलने को राजी है, चर्चा का विषय बना हुआ है ये। 

 राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कन्हैया कुमार प्रथम स्तर पर अपनी सफलता की ओर हैं और दलितों के मुद्दे को छु रहे हैं। इससे दिखता है कि बदलाव सामाजिक आंदोलनों के रास्ते ही होगा। अब देखना होगा कि कन्हैया कुमार, जिग्नेश मेवानी और चंद्रशेखर आजाद साथ मिलकर कितनी दूर तक ले जाते हैं इसको !

लेख:- दीपक कुमार

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    जन्मदिन विशेष:- भगत सिंह आज के समय में कितने प्रासंगिक?

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    भारत के क्रांतिकारी आंदोलन में भगत सिंह के योगदान को डॉ.भगवान दास माहौर ने अपनी पुस्तक “यश की धरोहर” में रेखांकित किया है. डॉ.भगवान दास माहौर,उस क्रांतिकारी दल के सदस्य थे,जिसके नेता भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद थे.लाहौर बम कांड में क्रांतिकारियों के खिलाफ गवाही देने वालों को गोली मारने का काम डॉ.भगवान दास माहौर को सौंपा गया था. इस केस में उनकी गिरफ्तारी हुई थी. भारत के सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन में भगत सिंह के महत्व पर टिप्पणी करते हुए डॉ.भगवान दास माहौर लिखते हैं कि :

    “सशस्त्र क्रांति का बीज धार्मिक क्षेत्र में ही अंकुरित हुआ था परंतु उसे धार्मिक क्षेत्र से ऊपर उठ कर क्रमशः राष्ट्रीय और समाजवादी आकाश में अपनी प्रगति के रास्ते पर बढ़ना था. क्रांति प्रयास के इस विकास मार्ग में भगत सिंह एक ऐसे व्यक्ति थे,जिसे अंग्रेजी में corner stone (मोड़सूचक पाषाण चिन्ह) कहा जाता है. समय और समाज की आवश्यकताओं ने भगत सिंह को ही माध्यम बना कर उत्तर भारत के संगठित सशस्त्र गुप्त क्रांतिकारियों को समाजवाद की ओर उन्मुख कर दिया तथा क्रांतिकारी कार्यकलाप को धार्मिक मनोभूमि से ऊपर उठाया. उत्तर भारत का गुप्त क्रांति प्रयास अभी तक इटली के मैजिनी,गैरीबाल्डी और आयरलैंड के सिंफिन के मध्यमवर्गीय नेताओं के आदर्श से अनुप्रमाणित था. अब भगत सिंह के माध्यम से ही उसने रूसी क्रांति और मार्क्स-लेनिन के समाजवादी आदर्श के प्रभावों को ग्रहण किया. भगत सिंह के ही माध्यम से ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ मंत्रों के स्थान पर भारतीय गुप्त सशस्त्र क्रांति प्रयास ने ‘long live revolution’ (क्रांति चिरंजीवी हो), इंकलाब जिंदाबाद, ‘down with imperialism’ (साम्राज्यवाद का नाश हो) आदि नारे लगाए और जहां क्रांतिकारी लोग पुलिस की यंत्रणाओं और मृत्यु के भय से मुक्त होने के लिए शरीर की नश्वरता और आत्मा के नित्यत्व का निदिध्यासन,पद्मासन लगाए गीता पाठ करते हुए नजर आते थे,वहाँ वे अब मार्क्स की ‘कैपिटल’ का स्वाध्याय करते नजर आए.

    दिल्ली में लेजिसलेटिव असेम्बली में बहरे कानों को समय का गुरु गंभीर गर्जन सुनाने के लिए भगत सिंह ने जो बम फेंका या भारतीय राष्ट्रवाद के अपमान का प्रतिकार करने के लिए पंजाब-केसरी लाला लाजपत राय को लाठियों से पीटने वाले सांडर्स का जो वध किया और इसी प्रकार के साहस और आत्मबलिदान के जितने कार्य भगत सिंह ने किए उनका महत्व उनके अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए महान है तथा उनके ये कार्य सशस्त्र क्रांति प्रयास के विकास-आकाश के चमकते हुए नक्षत्र हैं. परंतु भगत सिंह की विशेष क्रांतिकारी देन यही है उनके समय से क्रांतिकारियों का आदर्श समाजवादोन्मुख हो गया तथा उनका मानसिक धरातल भी परलोकापेक्षी धार्मिक होने के स्थान पर इहलोकापेक्षी सामाजिक ही विशेषतः हो गया. काकोरी युग के श्री पं रामप्रसाद बिस्मिल, श्री शचीन्द्रनाथ सान्याल,श्री जोगेशचन्द्र  चटर्जी आदि का The Hindustan Republican Association (भारतीय प्रजातंत्र संघ) भगत सिंह और उनके साथियों के प्रभाव से The Hindustan Socialist Republican Army (हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना) के रूप में विकसित हुआ. यहां तुरंत ही यह बात स्पष्टतया कह देनी चाहिए कि कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि भगत सिंह समाजवाद के अच्छे पंडित थे. कहने का अभिप्राय इतना ही है कि भगत सिंह और उनके साथी श्री शिव वर्मा, विजय कुमार सिन्हा आदि के द्वारा हम लोगों के क्रांतिकारी दल ने समाजवाद की ओर अपना मार्ग टटोल कर बढ़ना शुरू किया था.”

    भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु को जब अंग्रेजों ने फांसी की सजा सुना दी तो उन्होंने पंजाब के गवर्नर को एक पत्र लिखा.  फांसी के तीन दिन पहले 20 मार्च 1931 को लिखे पत्र में इन क्रांतिकारियों ने लिखा कि उन्हें अंग्रेज़ सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए फांसी दी जा रही है. उन्होंने लिखा कि अंग्रेज़ सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप को वे स्वीकार करते हैं और वे मांग करते हैं कि उन्हें युद्धबंदी मानते हुए फांसी देने के बजाय गोली से उड़ा दिया जाये. इस पत्र में वे लिखते हैं “ हम यह कहना चाहते हैं युद्ध छिड़ा हुआ है और यह लड़ाई तब तक चलती रहेगी जब तक कि शक्तिशाली व्यक्तियों ने भारतीय जनता और श्रमिकों की आय के साधनों पर एकाधिकार कर रखा है – चाहे ऐसे व्यक्ति अंग्रेज़ पूंजीपति और अंग्रेज़ या सर्वथा भारतीय ही हों,उन्होंने आपस में मिलकर एक लूट जारी कर रखी है…………. हो सकता है कि यह लड़ाई भिन्न-भिन्न दशाओं में भिन्न-भिन्न स्वरूप ग्रहण करे. किसी समय यह लड़ाई प्रकट रूप ले ले, कभी गुप्त दशा में चलती रहे, कभी भयानक रूप धारण कर ले, कभी किसान के स्तर पर युद्ध जारी रहे और कभी यह घटना इतनी भयानक हो जाये कि जीवन और मृत्यु की बाज़ी लग जाये. चाहे कोई भी परिस्थिति हो, इसका प्रभाव आप पर पड़ेगा.  यह आपकी इच्छा है कि आप जिस परिस्थिति को चाहें चुन लें, परन्तु यह लड़ाई जारी रहेगी। इसमें छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं दिया जायेगा. बहुत सम्भव है कि यह युद्ध भयंकर स्वरूप ग्रहण कर ले. पर निश्चय ही यह उस समय तक समाप्त नहीं होगा जब तक कि समाज का वर्तमान ढाँचा समाप्त नहीं हो जाता, प्रत्येक वस्तु में परिवर्तन या क्रान्ति सपन्न नहीं हो जाती और मानव सृष्टि में एक नवीन युग का सूत्रापात नहीं हो जाता.”

    एक ऐसे समय में जब यह लूट नित नए रूप धर कर प्रकट हो रही है,तब फांसी की सजा सुनाये जाने के बाद, किसानों-मजदूरों की लूट के खिलाफ युद्ध  में फांसी के बजाय खुद को गोली से उड़ाने की मांग करने वाले अपने उस क्रांतिकारी पुरखे को याद करें और इस युद्ध को फैसलाकुन मुकाम तक पहुंचाएं.

    इंकलाब जिंदाबाद !

    -इन्द्रेश मैखुरी

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    DU Admissions 2020:- इस दिन से जारी होगी दिल्ली यूनिवर्स‍िटी की कट ऑफ लिस्ट जारी

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    दिल्‍ली यूनिवर्स‍िटी में एडमिशन के लिये कटऑफ लिस्‍ट की प्रतीक्षा कर रहे छात्रों का इंतजार जल्‍द समाप्‍त होने वाला है. दिल्‍ली यूनिवर्सिटी ने अंडरग्रेजुएट और पोस्‍टग्रेजुएट एडमिशन का शेड्यूल जारी कर दिया है. यूनिवर्सिटी (Delhi University) ने मेरिट के आधार पर होने वाले दाखिले और प्रवेश परीक्षा के जरिये होने वाले दाखिले, दोनों का शेड्यूल जारी किया है. शेड्यूल के मुताबिक, मेरिट के आधार पर यूजी प्रोग्राम में दाखिले के लिये पहली कटऑफ लिस्‍ट (DU First Cut off List 2020) 12 अक्‍टूबर 2020 को जारी की जाएगी. इस बार यूनिवर्सिटी कुल 5 कटऑफ लिस्‍ट जारी करेगी. छात्र, दिल्‍ली यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट du.ac.in पर कटऑफ देख पाएंगे.

    अंडर ग्रेजुएट कोर्स में मेरिट के आधार पर होने वाले दाखिले के अलावा डीयू ने उन कोर्सेज का शेड्यूल भी जारी कर दिया है, जिसमें प्रवेश परीक्षा के जरिये एडमिशन होने हैं. प्रवेश परीक्षा के आधार पर जिन कोर्सेज में दाखिले होंगे, उनके लिये मेरिट लिस्‍ट 19 अक्‍टूबर 2020 को जारी की जाएगी. पोस्‍ट ग्रेजुएशन प्रोग्राम्‍स (PG Admissions) में एडमिशन की प्रक्रिया 26 अक्‍टूबर 2020 को शुरू होगी.

    DU UG Admissions 2020: शेड्यूल

    पहली कटऑफ लिस्‍ट: 12 अक्‍टूबर 2020

    पहली कटऑफ लिस्‍ट के अनुसार एडमिशन: 12 अक्‍टूबर 2020 से 14 अक्‍टूबर 2020

    दूसरी कटऑफ लिस्‍ट के अनुसार एडमिशन: 19 से 21 अक्‍टूबर 2020

    तीसरी कटऑफ लिस्‍ट के अनुसार एडमिशन: 26 से 28 अक्‍टूबर 2020

    चौथी कटऑफ लिस्‍ट के अनुसार एडमिशन: 2 से 4 नवंबर 2020

    पांचवी कटऑफ लिस्‍ट के अनुसार एडमिशन: 9 से 11 नवंबर 2020

    DU PG admission 2020: शेड्यूल

    पहली मेरिट लिस्ट के लिए एडमिशन – 26 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक

    दूसरी मेरिट लिस्ट के लिए एडमिशन – 2 नवंबर से 4 नवंबर तक

    तीसरी मेरिट लिस्ट के लिए एडमिशन – 9 नवंबर से 11 नवंबर तक

    सत्र की शुरुआत – 18 नवंबर

    स्पॉट एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल ओपन होने की तारीख – 9 नवंबर 2020

    पहले स्पॉट एडमिशन के लिए सीट आवंटन – 10 नवंबर

    पहला स्पॉट एडमिशन – 11 नवंबर

    सत्र की शुरुआत – 18 नवंबर

    Delhi University admission schedule 2020: यहां चेक करें

    छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लगभग दो दिन और फीस भुगतान को पूरा करने के लिए अतिरिक्त 2 दिन का समय मिलेगा. आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार, कॉलेजों में एडमिशन प्रोसेस सुबह 10 बजे शुरू हो जाएगा और शाम 5 बजे तक जारी रहेगा. एडमिशन के लिये फॉर्म भरने वाले छात्रों

    को दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

    पांच कटऑफ लिस्‍ट जारी करने के बाद भी अगर सीटें खाली रह जाती हैं, तो आगे और भी कटऑफ लिस्‍ट जारी की जा सकती हैं. फर्स्‍ट ईयर के लिये 18 नवंबर से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी.

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    जो छात्र या उनके परिवार वाले कोरोना से जूझ रहे है उन्हें मिलेगी छूट, बाद में होगी परीक्षा

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    यूजी (स्नातक)-पीजी (स्नातकोत्तर) के साथ बीएड फाइनल ईयर के ऐसे छात्र जाे काेविड से जूझ रहे हैं या उनके परिवार में काेई सदस्य इस बीमारी से पीड़ित है ताे ऐसे छात्राें काे विवि परीक्षा से छूट देगा। ऐसे छात्राें की परीक्षा बाद में ली जाएगी, जब वे ठीक हाे जाएंगे। विश्वविद्यालय के इस फैसले के बाद सभी काॅलेजाें ने परीक्षा में शामिल हाेने वाले अपने छात्राें के लिए नाेटिस जारी किया है।

    इसमें कहा गया है- यदि कोई विद्यार्थी कोविड से ग्रसित है या परिवार के किसी व्यक्ति के ग्रसित रहने के कारण घर सील कर दिया गया है या होम क्वारेंटाइन की सलाह दी गई है तो विद्यार्थी कॉलेज मेल पर प्रमाण सहित जानकारी देंगे। अगर कोई विद्यार्थी बीमारी से संबंधित बात छुपा कर परीक्षा में शामिल हाेगा और यह बात बाद में सामने आयी ताे ऐसे छात्र के ऊपर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    परीक्षा में ड्यूटी करने वाले शिक्षकाें का हुआ काेविड टेस्ट

    एलबीएसएम कॉलेज में जिला सर्विलांस ऑफिस के सहयोग से शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का कोरोना टेस्ट किया गया। प्रिंसिपल डॉ. अमर सिंह ने कहा कि परीक्षा को ध्यान में रखकर सभी स्टाफ का कोरोना टेस्ट किया गया। सबकी रिपोर्ट निगेटिव रही। जिन्हाेंने टेस्ट नहीं कराया है, उन्हें यह लिखकर देना होगा कि कोरोना निगेटिव हैं।

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