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बीट विशेष

केवल वर्ण-व्यवस्था का समर्थक ही कर सकता है दलित रंगमंच का विरोध!

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(रंग चिन्तन– राजेश चन्द्र)

हमारे मानने या न मानने से न जातिवाद मिट गया है और न ब्राह्मणवाद। आज भी देश की बहुत विशाल आबादी सामाजिक श्रेणियों के अन्तर्गत और हिन्दू धर्म की बर्बर वर्ण-व्यवस्था के अधीन आज़ादी, सम्मान और मानवाधिकारों से वंचित पददलित स्थितियों में जी रही है और संविधान में निर्देशित बराबरी के अधिकार से कोसों दूर है। आये दिन उनकी बस्तियां जलायी जाती हैं, नंगा कर पीटा और अपमानित किया जाता है, उनकी स्त्रियों से सामूहिक बलात्कार होते हैं, उन्हें शिक्षा और रोज़गार प्राप्त करने से रोका जाता है, संविधान में मिले आरक्षण को समाप्त करने की साज़िशें लगातार चलती रहती हैं, साम्प्रदायिक दंगों में उनकी बलि ली जाती है और वोट लेकर उन्हें उनके हाल पर मरने के लिये छोड़ दिया जाता है।

जब समाज में दलित हैं और कथित मुख्यधारा का रंगमंच उनके इन संघर्षों और सवालों से दूर भागता है, तो निश्चित रूप से दलितों को ऐसे रंगमंच की बहुत अधिक आवश्यकता है, जो अमानवीय वर्ण-व्यवस्था और ब्राह्मणवाद के खि़लाफ़ तथा बराबरी के संवैधानिक हक़ के लिये उनकी लड़ाई का हथियार बने। शोषक-उत्पीड़क समुदायों और सवर्ण जातियों का रंगमंच दलितों का अपना रंगमंच नहीं हो सकता, क्योंकि एक तो वहां दलित पात्रों-चरित्रों एवं जीवन-स्थितियों को प्रमुखता का स्थान नहीं दिया जाता, और भूले-भटके कभी किसी सन्दर्भ में उनकी चर्चा होती भी है, तो उन्हें दीन-हीन, लाचार और अक्षम दिखा कर उनके प्रति दया, करुणा या सदाशयता प्रदर्शित करने का पाखंड रचा जाता है। यह पाखंड आज दलित आबादी को स्वीकार नहीं हो सकता, क्योंकि उसे मालूम है कि इससे उसके हालात में बदलाव नहीं आ सकता।

दलित रंगमंच आज़ादी के पहले से हिन्दी में मौज़ूद है। महाराष्ट्र में तो दलित रंगमंच ही सबसे सशक्त रंगमंच की धारा है। वह ब्राह्मणवादी रंगमंच से हर तरह से भिन्न है। उसी तरह जैसे दलित साहित्य ब्राह्मणवादी साहित्य से भिन्न है। दलित साहित्य को महत्व न देकर आज कोई हिन्दी साहित्य में रह नहीं सकता। वैसे ही दलित रंगमंच भी अपनी स्थिति मज़बूत कर रहा है। किसी को उससे परेशानी हो तो कोई क्या करे? दलित हैं, दलितों का शोषण है, तो दलित साहित्य भी होगा और दलित रंगमंच भी। जिन्होंने दलितों को कभी इन्सान नहीं माना, वे दलित रंगमंच को क्या मान देंगे! दलित रंगमंच के नाम पर हंसने वाले दरअसल हिन्दू धर्म की वर्णाश्रम और ऊंच-नीच की व्यवस्था को ही हर क़ीमत पर बचाने का प्रयास करते हैं।

दलित पहचान का मतलब है कि मैं दलित हूं, बर्बर हिन्दू वर्ण-व्यवस्था और ब्राह्मणवाद ने मुझे और मेरे समुदाय का सदा शोषण और अपमान किया है, इसलिये इस अपमान और शोषण से स्वयं को और अपने समुदाय को मुक्त करने के लिये मैं रंगकर्म करता हूं। दलित रंगमंच मूल रूप से वर्ण और जाति की ब्राह्मणवादी व्यवस्था के प्रति विद्रोह का रंगमंच है, यही उसकी पहचान है। इस पहचान के साथ जो रंगमंच होगा, उसी को दलित रंगमंच के नाम से पुकारा जा सकता है। उसमें दलित जीवन-स्थितियों, दलित पात्रों-चरित्रों की प्रमुखता और केन्द्रीयता होगी। उसकी विचारधारा कबीर, रैदास, फुले, पेरियार और अम्बेडकर की वैचारिक परंपरा से अभिन्न रूप से जुड़ी होगी।

निश्चित रूप से दलित ही दलित जीवन के यथार्थ को सामने लायेगा क्योंकि यह जीवन-यथार्थ उसी ने भोगा है। पर कोई रंगमंच केवल इसलिये दलित रंगमंच नहीं कहलायेगा कि उसमें दलित की कोई भूमिका है। अगर कोई दलित ब्राह्मणवाद का पोषक और उपासक बन कर जी रहा हो, अपने और अपने समुदाय के उत्पीड़क समाज का कड़ा प्रतिरोध करने के बजाय उसकी चाकरी में जुटा हुआ हो और उसी की कलात्मक परंपरा को अंगीकार कर ले, मनुवाद और ब्राह्मणवाद के खि़लाफ़ कभी कोई बात न करे, तो उसकी किसी कथित क़ामयाबी से दलित समुदाय या रंगमंच सशक्त नहीं होगा। जन्म से दलित होते हुए भी यही माना जायेगा कि उसने ब्राह्मणवादी और मनुवादी रंगकर्म किया है, और इसलिये उसका सम्पूर्ण रंगकर्म दलित विरोधी ही होगा। उसको पुरस्कार मिलने से कोई दलित रंगमंच नहीं खड़ा होगा। बल्कि वह कमज़ोर ही होगा।

(लेखक रंगकर्मी हैं।)

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कई इमारतें गिरने के बाद भी भजनपुरा के सुभाष मोहल्ले में बिल्डर माफिया धड़ल्ले से कर रहे अवैध फ्लैट निर्माण!

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“सुभाष मोहल्ले की गली नंबर 13 में बिल्डर माफिया द्वारा बनाई जा रही हैं तीन अवैध इमारतें”

चौधरी हैदर अली
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में आए दिन इमारतें गिरने की खबर तो आप सुनते रहते होंगे आज हम आपको बताने जा रहे हैं आखिर इतनी इमारतें गिरने की क्या वजह है! जिसकी वजह से सैकड़ों लोग मलबे के ढेर में दब कर अपनी जान से हाथ धो बैठे!

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर और सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछले 5 सालों मे बिल्डर माफिया 500 से ज्यादा अवैध फ्लैट निर्माण करा चुके हैं जिनकी हालत अब जर्जर हो रही हैं और दर्जनभर इमारत तो मलबे के ढेर में तब्दील हो गई! इमारतें गिरने और जर्जर होने की वजह है बेकार मैटेरियल का इस्तमाल, बिल्डर माफिया चंद पैसों के खातिर लोगों की कीमती जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं, जिसे पूर्वी-दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार नज़र-अंदाज़ कर आंखें मूंदे तमाशा देख रही है!

स्थानीय लोगों का कहना है इस वक़्त बिल्डर माफिया बाबरपुर विधानसभा के वार्ड 48/E में काफी तेजी के साथ फ्लैट निर्माण कर रहे हैं, पिछले 2 साल में 100 से ज्यादा अवैध फ्लैट नुमा इमारतें बिल्डर माफिया बना चुके जिनमें से काफी इमारतें तो जर्जर भी हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं!सुभाष मोहल्ला वार्ड 48 ई की गली नंबर 13 में अब्दुल सलाम मस्जिद के आसपास रहने वाले लोगों ने कहां कि हमने गली में हो रहे तीनों अवैध निर्माणों की शिकायत नगर निगम को दी लेकिन बिल्डर माफियाओं की पहुंच काफी ऊपर तक होने की वजह से नगर निगम अधिकारियों ने सभी शिकायत कर्ताओं के नाम बिल्डर माफिया को बता दिए जिसके बाद बिल्डर माफियाओं ने शिकायत कर्ताओं को दोबारा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी!

People’s Beat ने जनता के आग्रह पर बिल्डर माफिया, स्थानीय पुलिस एवं नगर निगम के कर्मचारियों की शिकायत माननीय प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री जी को दे दी है!

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बीट विशेष

एक हारा हुआ सांसद, जिसने हजारों लोगों को अपने बल पर राहत पहुँचाया।

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बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं , इसका असर आम जन जीवन पर बहुत बुरा पड़ा है यातायात,स्वास्थ्य और खाने से लेकर पीने के पानी की समस्या से आम आदमी को जूझना पड़ रहा है, कुछ ही दिन हुए जब मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चे काल के गाल में समा रहे थे।
यह महज कुछ घटनाएं नहीं है यह पोल खोलती है हमारे तथाकथित विकास की क्या हम इतने गए गुजरे हो गए हैं कि कभी एक राज्य के कुछ जिले आपदा ग्रस्त हुए और सरकारी महकमा हाथ खड़े कर देता है,जिस तरह से सडा हुआ आलू और खाद्य सामग्री बिहार सरकार के द्वारा वितरित की जा रही है वह और ज्यादा रोगी बनायगी लोगों को।

मुख्य सवाल यही है कि लगे हाथ हम डोनेट का रोना रोने लगते है,और इसे उसे कोसने लगते हैं हम इस बात पर विचार करना क्यों जरूरी नहीं समझते कि यह सब आपदा प्रबंधन के लिए बड़े बड़े सरकारी महकमे बने हुए है जो मोटी तनख्वाहों से ऐशो आराम करते हैं..उनका काम इसी समय आता है।

इस बाढ़ का प्रकोप हो या चमकी बुखार का एक पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव खुले हाथों से लोगों की मदद करने को आगे रहे है, वह आज भी जेसीबी और टैक्टर पर बैठकर चलकर राहत सामग्री बांट रहे हैं।

जब यह मधेपुरा सांसद थे उस समय काफी बार इनसे मिलना होता था मंडी हाउस वाले आवास पर उस समय का एक वाकया याद आता है मैं छात्रसंघ का चुनाव लड़ रहा था और मेरी हर सम्भव मदद करने का आश्वासन इन्होंने दिया था, उसी समय कॉलेज में से फोन आता है कि कुछ लोग अपने प्रत्याशी से झगड़ा कर रहे हैं,जब स्तिथि से अवगत कराया तो सांसद जी ने तुरंत ही dsp को फोन कर स्तिथि सम्हालने की हिदायत दी थी।

वैसे मैं किसी का गुणगान करने से बचता हूँ लेकिन मेरे सहयोगियों द्वारा एक बार ही कहने पर यह पूरे जोश के साथ मेरा प्रचार करने भी आये थे कॉलेज में ,वह दौर गुजर गया कुछ यादें रह गयी लेकिन आज फिर एक अनुभव ताजा हो गया।

39 सांसदों में एक हारा हुआ सांसद मोर्चा संभाल रहा है………..और जनता अपना नेता चुनने में अक्सर भूल कर देती है कभी कभी।

अजीत आर्य

 

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पूर्व गृह मंत्री व् अनुभवी सीपीआई के नेता इन्द्रजीत गुप्ता का जन्म शताब्दी समारोह दिल्ली में मनाया गया

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इन्द्रजीत गुप्ता 1919-2001.

भारत के वो नेता जो सबसे अधिक 11 बार जीते लोकसभा चुनाव,  

CPI और AITUC के महासचिव रह चुके.

इंद्रजीत गुप्ता भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (CPI) के कुशल व् प्रखर राजनेता रहे हैं. उन्होंने 1960 में पहली बार हुए उपचुनावों से भारतीय राजनीति में कदम रखा और जीतकर लोकसभा में पहुंचे. साल 1919 में जन्मे इन्द्रजीत गुप्ता का 2001 में जब निधन हुआ तब भी वे लोकसभा के सदस्य थे. आज 21 जुलाई 2019 को इनका जन्मशताब्दी समारोह constitution club दिल्ली में मनाया गया जिसमे CPI(M) के महासचिव सीताराम येचुरी व् पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने शिरकत की. इन्द्रजीत गुप्ता को याद करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा “आज का यह अवसर लोकतंत्र को समृद्ध करने में इन्द्रजीत गुप्ता के योगदान को प्रतिबिंबित करता है. सीपीआई के ये पूर्व महासचिव जीवन भर मजदूर आन्दोलन के लिए समर्पित रहे.”

ये अनुभवी नेता बीच के 3 साल(1977 से 1980) को छोड़ कर ताउम्र सांसद रहे. उन्होंने शुरुआती चुनाव (1962 से 1967) कलकत्ता साउ‌थ वेस्ट इसके बाद (1967 से 1977) अलीपुर, (1980 से 1989) बशीरहाट और (1989-2001) मिदनापुर से चुनाव जीते. वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और All India Trade Union (AITUC) के महासचिव भी रह चुके हैं.

इन्द्रजीत गुप्ता एचडी देवगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल के शासनकाल में देश के गृहमंत्री रहे.  सादगी की मिशाल माने जाने वाले सांसद इन्द्रजीत गुप्ता गृह मंत्री बनने के बाद भी दिल्ली की वेस्टर्न कोर्ट में आवंटित आवास में रहते थे जहाँ आम तौर पर रसूख वाले सांसद रहने से कतराते हैं. कभी उनके निवास के ठीक बगल में रहने वाले वरिष्ठ राजनेता क्रांति प्रकाश बताते हैं, “देश के गृहमंत्री होने के बावजूद उन्होंने वेस्टर्न कोर्ट को नहीं छोड़ा. वे अपने दो-रूम के क्वॉर्टर से अपनी गतिविधियों को अंजाम देते थे. वे असल में सादगी के मिसाल थे.”

भारतीय जनता पार्टी के प्रखर नेता हुकुमदेव नारायण यादव ने संसद में बोलते हुए एक बार कहा था, ”वे एक कम्यूनिस्ट नेता थे. लेकिन इससे बड़ी बात यह थी कि वे एक महान सांसद थे.”

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