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इसी तरह मीडिया को ध्वस्त होने देंगे तो फिर आपके लिए क्या बचेगा? आपकी आवाज़ को कौन पूछेगा।

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बीजेपी के नेता पत्रकारों ( एंकरों) के घर भी जा रहे हैं। पैम्फलेट देते हैं और फ़ोटो खींचाते हैं। पत्रकारों के अलावा कुछ मशहूर हस्तियों के घर जा रहे हैं जैसे पूर्व सेनाध्यक्ष, डॉक्टर, प्रोफ़ेसर। वैसे इन एंकरों को प्रेस कांफ्रेंस में पैम्फलेट मिला ही होगा। नहीं मालूम कि इन्होंने या किसी गणमान्य ने अपने सवाल पूछे या नहीं। पूछने की हिम्मत भी हुई या नहीं।

प्रचार के लिए मेहनत करने और अपनी बात को लोगों तक ले जाने में भाजपा का जवाब नहीं। हार जीत के अलावा विपक्ष इस मामले में भाजपा की रणनीति को मैच नहीं कर सकता। इन तस्वीरों से एक मेसेज तो जाता ही है कि शहर या समाज के कथित रूप से ये बड़े लोग भाजपा के कार्य से प्रभावित हैं या भाजपा इनसे संपर्क में हैं। अमित शाह तथाकथित संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के घर गए थे। कश्यप जी को बताना चाहिए कि उत्तराखंड और अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन को लागू करने के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया।क्या आपने इस फ़ैसले का समर्थन किया था? या मोदी सरकार के क़दम का समर्थन किया था? इस दौरान आपने संवैधानिक प्रश्नों पर कितनी आलोचना की? क्या आपने तब मोदी सरकार से सवाल किए थे या संविधान की समझ पर राजनीतिक चालाकी का पर्दा डाल कर समर्थन कर रहे थे?
पत्रकारों ने सुभाष कश्यप से नहीं पूछा होगा। बहरहाल जो नहीं हुआ सो नहीं हुआ। इन लोगों से पूछने का एक नया दौर शुरू हो सकता है अगर जनता भी इनके घर अपने सवालों का पैम्फलेट लेकर जाने लगे।

जिन युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है, आयोग परीक्षा लेकर रिज़ल्ट नहीं निकाल रहे हैं, पास करके नियुक्ति पत्र नहीं दिया जा रहा है, नौकरी में लेकर निकाल दिया जा रहा है, कालेज में प्रोफ़ेसर नहीं हैं, क्लास ठप्प हैं, परीक्षाएँ या तो होती नहीं या फिर मज़ाक़ हो चुकी हैं, किसान से लेकर ठेके पर काम करने वाले लोग सब इन एक लाख लोगों के घर जाएँ जिनकी सूची भाजपा के पास है।सबको बारी बारी से इनके घर जाना चाहिए यह बताने के लिए कि आपको जो पैम्फलेट दिया गया है, ज़रा देखिए उसमें हमारी समस्या है या नहीं, हमारे लिए कोई बात है या नहीं।

युवा पूछें कि जो पैम्फलेट अमित शाह देकर गए हैं उसमें म प्र के व्यापम घोटाले का ज़िक्र है जिसकी जाँच या गवाही से जुड़े क़रीब पचास लोगों की संयोगवश दुर्घटना में या असामयिक मौत हो चुकी है? यह कैसा संयोग है कि एक केस से जुड़े पचास लोगों की मौत हो जाती है? मीडिया में छप भी रहा है मगर सन्नाटा पसरा है। बिहार के कई हज़ार करोड़ के सृजन घोटाले के मुख्य आरोपियों की गिरफ़्तारी का वारंट आज तक नहीं आया,उसका ज़िक्र है कि नहीं। नोटबंदी के दौरान तमिलनाडू में पचास हज़ार मंझोले उद्योग बंद हो गए उसका ज़िक्र है या नहीं। बैंक कैशियरों ने अपनी जेब से नोटबंदी के दौरान जुर्माना दिया, उसका ज़िक्र है या नहीं।

आपको पता होगा कि नोटबंदी के दौरान कैशियरों पर अचानक कई करोड़ नोट गिनने का दबाव डाला गया, उनसे चूक होनी ही थी। जिसकी भरपाई कैशियरों ने कई करोड़ रुपये अपनी जेब से देकर की। कैशियरों ने जाली नोट के बदले अपनी जेब से जुर्माना भरा। नोटबंदी के झूठ का नशा इतना हावी था कि कैशियरों ने भी सरकार से अपना पैसा नहीं माँगा। बैंक सिस्टम के भीतर सबसे कम कमाने वाला लूट लिया गया मगर उसने और उनके साथियों ने उफ़्फ़ तक नहीं की।

बैंक सेक्टर भीतर से ढह गया और रेल व्यवस्था चरमरा चुकी है, उसका ज़िक्र पैम्फलेट में है या नहीं। छह एम्स में सत्तर फ़ीसदी पढ़ाने वाले डाक्टर नहीं हैं, अस्सी फ़ीसदी सपोर्ट स्टाफ़ नहीं है। हमारे देश में डाक्टर कैसे बन रहे हैं और मरीज़ों का उपचार कैसे हो रहा है इसका ज़िक्र है या नहीं। हर राज्य में पुलिस बल ज़रूरी संख्या से कई हज़ार कम हैं, वहाँ भर्ती हो रही है या नहीं। न्याय व्यवस्था का भी बुरा हाल है। अगर ये सब नहीं है तो उस पैम्फलेट में क्या है जो बीजेपी के नेता पत्रकारों और सेनाध्यक्षों के घर लेकर जा रहे हैं। कई महीने से दलितों के घर खाना खा रहे थे, वहाँ तो ये वाला पैम्फलेट लेकर नहीं गए! किसानों को भी ये पैम्फलेट दे आना चाहिए।

यह दृश्य ही अपने आप में शर्मनाक है कि एंकर अपने घर में किसी सत्तारूढ़ दल का पैम्फलेट चुपचाप और दांत चियारते हुए स्वीकार कर रहा है। पर दौर बदल गया है। अब जो बेशर्म है उसी की ज़्यादा ज़रूरत है पत्रकारिता में। क्या आपने देखा है कि पैम्फलेट स्वीकार करने वाले एंकरों ने उस पर सवाल करते हुए कुछ लिखा या बोला हो। अगर आप इसीतरह मीडिया को ध्वस्त होने देंगे तो फिर आपके लिए क्या बचेगा? आपकी आवाज़ को कौन पूछेगा।

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BPCL कर्मचारियों को सरकार का आदेश, नही पसंद निजीकरण तो ले सकते हैं VRS

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निजीकरण से पहले सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपारेशन लिमिटेड (BPCL) अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) लेकर आई है. इसके तहत कंपनी की ओर से कर्मचारियों को कई तरफ के ऑफर दिए हैं.

दरअसल, सरकार देश की तीसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी और दूसरी सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी BPCL का निजीकरण करने जा रही है. निजीकरण से पहले कंपनी ने अपने कर्मचारियों को वीआरएस देने की पेशकश की है.

File Photo

पीटीआई के मुताबिक बीपीसीएल ने अपने कर्मचारियों को भेजे आंतरिक नोट में कहा कि कंपनी ने वीआरएस की पेशकश करने का फैसला किया है. यह योजना उन कर्मचारियों के लिए है जो किसी भी निजी कारणों से कंपनी में सेवाएं जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं, वे कर्मचारी वीआरएस के लिए आवेदन कर सकते हैं.

भारत पेट्रोलियम वीआरएस योजना-2020 (बीपीवीआरएस-2020) 23 जुलाई को खुली है और 13 अगस्त को बंद होगी. कंपनी के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक वीआरएस उन कर्मचारियों को बाहर निकलने का विकल्प देने लिए लाया गया है, जो निजी प्रबंधन के तहत काम नहीं करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि कुछ कर्मचारियों को लगता है कि बीपीसीएल के निजीकरण के बाद उनकी भूमिका, स्थिति या स्थान में बदलाव हो सकता है. यह योजना उन्हें बाहर निकलने का विकल्प देती है.

गौरतलब है कि बीपीसीएल में सरकार अपनी समूची 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है. कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 20,000 है. रिपोर्ट के मुताबिक पांच से 10 फीसदी कर्मचारी वीआरएस का विकल्प चुन सकते हैं.

योजना का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों को प्रत्येक पूरे हुए सेवा वर्ष के लिए दो माह का वेतन या वीआरएस के समय तक का मासिक वेतन मिलेगा. सेवाकाल के शेष बचे महीनों को इसमें गुणा किया जाएगा. इसके अलावा उन्हें सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाला कंपनी छोड़ने का खर्च भी मिलेगा.

वीआरएस लेने वाले कर्मचारियों को रिटायर्ड बाद भी चिकित्सा लाभ योजना के तहत चिकित्सा लाभ मिलेगा. इसके अलावा कर्मचारी अपने बचे अवकाश सीएल, ईएल और पीएल के बदले नकदी में भुगतान भी ले सकेंगे. नोटिस में कहा गया है कि जिस कर्मचारी के खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है, वह इस योजना का लाभ नहीं ले सकेगा.

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एक दिन में 3 डॉक्टर की कोरोना से मौत बिहार में कोरोना की भयावह तस्वीर दर्शाती है

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बिहार में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस बड़ी तेजी से अपने पांव पसार रही है। शुक्रवार को सूबे में 1820 नए संक्रमितों की पहचान की गई। राज्य में अब कुल संक्रमितों का आंकड़ा 33, 511 तक पहुंच गया। वहीं शुक्रवार को बिहार के तीन डॉक्टरों की कोरोना से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार कोरोना संक्रमित मरने वाले तीन डाक्टरों में मसौढ़ी के डॉ अवधेश कुमार सिंह, सुपौल के डॉ महेंद्र चौधरी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के पूर्व विभागध्यक्ष डॉ मिथिलेश कुमार सिंह शामिल हैं।

पटना में सबसे अधिक 561 नए संक्रमित मिले
पिछले दो दिनों में पटना में सबसे अधिक 561 नए संक्रमित मिले। वहीं, गया में 147, सारण में 121, रोहतास में 101, मुजफ्फरपुर में 99, भागलपुर में 81 नए संक्रमितों की पहचान की गई।

पटना में 439 और नालंदा में 189 लोग एक दिन में स्वस्थ
पटना प्रमंडल में कोरोना संक्रमितों के ठीक होने की संख्या में इजाफा हुआ है। एक दिन में 763 लोग स्वस्थ हुए हैं। इनमें से कुछ लोग अस्पताल में भर्ती थे, जबकि कुछ होम आइसोलेशन में थे। प्रमंडलीय आयुक्त  संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि इससे सावधानी बरतने और सचेत रहने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति काफी संख्या में ठीक हो रहे हैं। पटना प्रमंडल के जिलों में 24 जुलाई को कुल 763 कोरोना संक्रमित ठीक हुए हैं। इनमें पटना के 439, बक्सर के 45, भोजपुर के 24, कैमूर के 7, नालन्दा के 189 और रोहतास जिले के 59 मरीज हैं। बताया कि मरीजों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। साथ ही उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग के पालन की अपील की है।

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कोरोना वायरस को रोकने में N-95 मास्क फेल, सरकार ने ज़ारी की गाइडलाइन

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नई दिल्ली:  केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर लोगों के एन-95 मास्क पहनने के खिलाफ चेतावनी जारी कर कहा है कि इससे वायरस का प्रसार नहीं रुकता और यह कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के ‘‘विपरीत” है.

स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक राजीव गर्ग ने राज्यों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मामलों के प्रधान सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि सामने आया है कि प्राधिकृत स्वास्थ्य कर्मियों की जगह लोग एन-95 मास्क का ‘‘अनुचित इस्तेमाल” कर रहे हैं, खासकर उनका जिनमें छिद्रयुक्त श्वसनयंत्र लगा है.

उन्होंने कहा, ‘‘आपके संज्ञान में लाया जाता है कि एन-95 मास्क कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अपनाए गए कदमों के विपरीत है क्योंकि यह वायरस को मास्क के बाहर आने से नहीं रोकता। इसके मद्देनजर मैं आपसे आग्रह करता हूं कि सभी संबंधित लोगों को निर्देश दें कि वे फेस/माउथ कवर के इस्तेमाल का पालन करें और एन-95 मास्क के अनुचित इस्तेमाल को रोकें.”

बता दें की WHO ने भी तीन लेयर वाले मास्क को कोरोना वायरस की खिलाफ सबसे असरदार माना है, इतना ही नहीं हिदायत दी जाती रही है की घर में बने मास्क का प्रयोग सबसे उचित है जिसे उपयोग के बाद ससून से धोया जा सके.

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