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अहमदाबाद ज़िला सहकारी बैंक की पब्लिक स्क्रूटनी हो – रवीश कुमार

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नोटबंदी के दौरान पूरे देश में अहमदाबाद ज़िला सहकारी बैंक में ही सबसे अधिक पैसा जमा होता है। पाँच दिनों में 750 करोड़। जितने भी कैशियर से बात किया सबने कहा कि पाँच दिनों में पुराने नोटों की गिनती मुमकिन नहीं है। नोटबंदी के दौरान किसी के पास सबूत नहीं था मगर जब हल्ला हुआ कि ज़मीन खाते में पैसे जमा हो रहे हैं तब काफ़ी चेतावनी जारी होती थी। जाँच की बात होने लगी जिसका कोई नतीजा आज तक सामने नहीं आया। अहमदाबाद ज़िला सहकारिता बैंक मामले की भी जाँच हो सकती थी। वैसे जाँच में मिलना ही क्या है, लीपापोती के अलावा। फिर भी रस्म तो निभा सकते थे।

शर्मनाक और चिन्ता की बात है कि इस ख़बर को कई अख़बारों ने नहीं छापा। जिन्होंने छापा उन्होंने छापने के बाद हटा लिया। क्या आप इतना कमज़ोर भारत चाहते हैं और क्या आप सिर्फ अमित शाह के लिए उस भारत को कमज़ोर बना देना चाहते हैं जो इस बैंक के चेयरमैन हैं? अगर अमित शाह के नाम से इतना ही डर लगता है तो वो जहाँ भी रहते हैं उसके आस पास के इलाक़े को साइलेंस ज़ोन घोषित कर देना चाहिए। न कोई हॉर्न बजाएगा न बोलेगा।

ये तो अभी कहीं आया भी नहीं है कि वे पैसे अमित शाह के थे, फिर उनके नाम का डर कैसा। बैंक में तो कोई भी जमा कर सकता है। प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकार इसे लेकर रूटीन सवाल नहीं कर पाए। इस देश में हो क्या रहा है? क्या हम दूसरों को और ख़ुद को डराने के लिए किसी नेता के पीछे मदांध हो चुके हैं? जज लोया के केस का हाल देखा। जय शाह के मामले में आपने देखा और अब अहमदाबाद ज़िला सहकारी बैंक के मामले में आप देख रहे हैं।

क्या हमने 2014 में बुज़दिल भारत का चुनाव किया था? यह सब चुपचाप देखते हुए भारतीय नागरिकों की नागरिकता मिट रही है। आपकी चुप्पी आपको ही मिटा रही है। इतना भी क्या डरना कि बात बात में जाँच हो जाने वाले इस देश में अमित शाह का नाम आते ही जाँच की बात ज़ुबान पर नहीं आती। यही मामला किसी विरोधी दल के नेता से संबंधित होता तो दिन भर सोशल मीडिया में उत्पात मचा रहता।

नाबार्ड ने भी कैसी लीपापोती की है। बयान जारी किया कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। एक लाख साठ हज़ार खाता धारक हैं। एक खाते में औसत 46000 से कुछ अधिक जमा हुए। क्या नाबार्ड के लोग देश को उल्लू समझते हैं? अगर किसी ने दस खाते में बीस करोड़ जमा किए तो उसका हिसाब वे सभी एक लाख साठ हज़ार खाते के औसत से देंगे या उन दस खातों की जाँच के बाद देंगे?

क्या पाँच दिनों में सभी एक लाख साठ हज़ार खाताधारकों ने अपने पुराने नोट जमा कर दिए? कमाल है। तब तो पाँच दिनों में सौ फ़ीसदी खाताधारकों के पुराने नोट जमा करने वाला अहमदाबाद ज़िला सहकारिता बैंक भारत का एकमात्र बैंक होगा। क्या ऐसा ही हुआ ? अगर नहीं हुआ तो नाबार्ड ने किस आधार पर यह हिसाब दिया कि 750 करोड़ कोई बड़ी रक़म नहीं है। क्या एक लाख साठ हज़ार खाताधारकों में 750 करोड़ का समान वितरण इसलिए किया ताकि राशि छोटी लगे? नाबार्ड को अब यह भी बताना चाहिए कि कितने खाताधारक अपने पैसे नहीं लौटा सके ? कितने खातों में पैसे लौटे?

नाबार्ड की सफ़ाई से साफ़ है कि इस संस्था पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसलिए इस मामले की जनसमीक्षा होनी चाहिए। जब सरकारी संस्था और मीडिया डर जाए तब लोक को ही तंत्र बचाने के लिए आगे आना होगा। नोटबंदी का क़दम एक राष्ट्रीय अपराध था। भारत की आर्थिक संप्रभुता पर भीतर से किया गया हमला था। इसलिए इसकी सच्चाई पर इतना पर्दा डाला जाता है।

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दिल्ली दंगे:- सलमान खुर्शीद ने कहा “पुलिस ने दंगा भड़काने का इल्जाम नहीं लगाया है, बल्कि किसी आरोपी के बयान के आधार पर नाम जोड़ा है.”

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नई दिल्ली. नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली (Northeast Delhi Riots) के कई इलाकों में इस साल फरवरी में हुए दंगों के सिलसिले में पुलिस ने जो नई चार्जशीट दायर की है, उसमें माकपा नेता बृंदा करात (Brinda Karat) और पूर्व सांसद उदित राज के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) का भी नाम शामिल हैं. इन सभी पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है. इसको लेकर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि पुलिस ने दंगा भड़काने का इल्जाम नहीं लगाया है, बल्कि किसी आरोपी के बयान के आधार पर नाम जोड़ा है.

सलमान खुर्शीद ने कही ये बात

इसके अलावा सलमान खुर्शीद कहा कि सीएए और एनआरसी (CAA-NRC) के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में जाते थे और उन लोगो की बातों का समर्थन करते थे. इसी मुद्दे पर किताब भी लिखी है. उन्‍होंने दिल्ली पुलिस का बिना नाम लिए जाहिल और कूड़ा जमा करने वाला तक कह दिया. सलमान खुर्शीद ने सवाल करते कहा कि क्या कानून भड़काने वाले भाषण देने से रोकता है. देश में हर राजनीतिक व्यक्ति भड़काने वाला भाषण देता है. जबकि चुनाव आयोग सिर्फ चुनाव के दौरान भड़काने वाले भाषण देने से रोकता है, लेकिन कानून ऐसा नहीं करता है.

दिल्‍ली पुलिस को दिया ये चैलेंज

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस बताए क्या भाषण दिया और रिकॉर्डिंग है तो दिखाए. भड़काने वाला भाषण दिया तो मेरे खिलाफ कर्रवाई क्यों नहीं की, मुझे आरोपी क्यों नहीं बनाया. दिल्ली पुलिस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जब मुझे आरोपी नहीं बनाया तो मुझे बदनाम क्यों कर रहे हैं. जिस आरोपी के बयान पर पुलिस नाम ले रही है उसे जेल से छोड़ दे, उसकी जगह मुझे जेल में डाल दे. क्‍या केंद्र सरकार को निशाना बनाने पर पुलिस कार्रवाई कर रही है. इस पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह जहालत, कूड़ा, बेवकूफी है, इससे ज्यादा और क्या भड़का सकता हूं. पुलिस ने कूड़ा जमा किया है, इसे साफ कौन करेगा.

आपको बता दें कि चार्जशीट में कहा गया है कि सुरक्षा प्राप्त गवाह ने बयान में कहा है कि कई जाने माने लोग मसलन नेता उदित राज, पूर्व केंद्रीय मंत्री खुर्शीद, बृंदा करात खुरेजी स्थित प्रदर्शन स्थल पर आए थे. उन्होंने ‘भड़काऊ भाषण’ दिए. गवाह ने कहा है कि उदित राज, सलमान खुर्शीद, बृंदा करात, उमर खालिद जैसे कई लोग CAA, NPR और NRC के खिलाफ भाषण देने प्रदर्शन स्थल पर आया करते थे. दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में इशरत जहां के बयान का हवाला देते हुए कहा है कि CAA विरोधी प्रदर्शनों को जारी रखने के लिए खुर्शीद, फिल्मकार राहुल रॉय और भीम आर्मी के सदस्य हिमांशु जैसे लोगों को उन्होंने और कार्यकर्ता खालिद सैफी ने जामिया समन्वय समिति (जेसीसी) के निर्देशों पर बुलाया था.

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कपिल मिश्रा की शिकायत, कुछ लोग मुझे दिल्ली दंगों में फंसाना चाहते है

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भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में शिकायत दर्ज कराई। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुझे दंगों में फंसाना चाहते हैं और मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं।
भाजपा नेता ने ट्वीट कर कहा, ”मेरे खिलाफ हेट कैम्पेन चलाने वाले, मीडिया में झूठी खबरें और शिकायतें बनाने वाले, असली दंगाइयों और आतंकवादियों को बचाने वाले और मेरे तथा मेरे परिवार की सुरक्षा पर खतरा पैदा करने वालो के खिलाफ आज मैंने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।”


शिकायत दर्ज कराने के बाद कपिल मिश्रा ने कहा कि स्पेशल सेल ने मुझे नहीं बुलाया था। आज मैं यहां डीसीपी सेल में शिकायत दर्ज कराने आया हूं जो असली अपराधियों के पकड़े जाने के बावजूद मेरे खिलाफ एक नफरत का अभियान चला रहे हैं। मुझे टारगेट करना चाहते हैं, नफरत का अभियान चलाकर मुझ पर हमला कराना चाहते हैं।
बता दें कि, भाजपा नेताओं- कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा पर नागरिकता कानून के समर्थन में भड़काऊ भाषण देकर नफरत फैलाने के आरोप हैं, जिनके बाद दिल्ली में साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे। हालांकि, कपिल मिश्रा ने नफरत फैलाने वाले भाषण देने से इनकार किया और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा से खुद को दूर कर लिया है।
गौरतलब है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़कने के बाद सांप्रदायिक झड़पें शुरू हो गई थीं। इस दौरान कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।

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कांग्रेस 2 अक्टूबर को जनता के सामने पेश करेगी गहलोत सरकार का रिपोर्ट कार्ड

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कांग्रेस 2 अक्टूबर को जनघोषणा-पत्र के क्रियान्वयन पर अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने पेश करेगी. रिपोर्ट कार्ड की तैयारियों को लेकर कांग्रेस (Congress) जनघोषणा-पत्र क्रियान्वयन समिति की पहली बैठक शुक्रवार को होगी. जनघोषणा-पत्र समिति के अध्यक्ष ताम्रध्वज साहू बैठक लेने के लिए जयपुर पहुंचेंगे. उनके साथ समिति सदस्य और पंजाब से सांसद अमर सिंह भी रहेंगे. बैठक में जनघोषणा-पत्र के वादों पर अब तक हुए क्रियान्वयन की समीक्षा होगी. बैठक में सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot), कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और सभी मंत्री मौजूद रहेंगे. प्रदेश प्रभारी अजय माकन VC के जरिए इस बैठक से जुड़ेंगे.

समिति की बैठक से पहले जनघोषणा-पत्र के रिपोर्ट कार्ड को लेकर सीएम अशोक गहलोत और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच सीएम निवास पर मंत्रणा हो चुकी है. बताया जाता है कि दोनों नेताओं ने 2 अक्टूबर को रिपोर्ट कार्ड जारी करने के तरीके को लेकर मंथन किया है, क्योंकि कोराना को देखते हुए आयोजन में सावधानियां रखी जानी है.

सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा दिया जायेगा

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने जयुपर में फीडबैक कार्यक्रम के पहले ही दिन जनघोषण-पत्र पर हुए काम का रिपोर्ट कार्ड 2 अक्टूबर को जनता के सामने पेश करने की घोषणा की थी. माकन की घोषणा के बाद कैबिनेट सब कमेटी ने कई दौर की बैठकें कर रिपोर्ट कार्ड तैयार करने पर मंथन किया है. रिपोर्ट कार्ड में जनघोषणा-पत्र के अलावा भी गहलोत सरकार की बड़ी उपलब्धियों का लेखा जोखा पेश किये जाने के संभावना है. कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डेटासरा ने कहा कि जनघोषणा-पत्र पर हुए काम का रिपोर्ट कार्ड 2 अक्टूबर को जनता के सामने पेश किया जाएगा. रिपोर्ट कार्ड लगभग तैयार है.

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